डूब मरो-डूब मरो का नारा मोदी को याद क्यों नहीं

डूब मरो-डूब मरो का नारा मोदी को याद क्यों नहीं

मुसलमान, पाकिस्तान, मुगल, औरंगजेब, अलाउद्दीन खिलजी और मियां अहमद पटेल और निजामी का इस्तेमाल

 

”सत्तर साल के सबसे काबिल प्राइम मिनिस्टर के दावेदार मोदी राज में अगर कोई पाकिस्तानी रिटायर्ड फौजी अफसर अरशद रफीक या पूरा पाकिस्तान गुजरात एलक्शन में दखल देकर मियां अहमद पटेल या किसी दूसरे को चीफ मिनिस्टर बनाने की साजिश कर सकता है। कुछ पाकिस्तानी दिल्ली में आकर देश के खिलाफ साजिश करके वापस जा सकते हैं तो मोदी के हाथों में देश महफूज (सुरक्षित) नहीं है यह तो सरकार के लिए डूब मरने का मकाम है।“

 

”मुसलमान, पाकिस्तान, मुगल, मियां अहमद पटेल, जहांगीर, औरंगजेब और अलाउद्दीन खिलजी के साथ ही नरेन्द्र मोदी इस बार शहजाद पूनावाला और सलमान निजामी जैसे प्यादो तक उतर गए। उनकी तकरीरों से जाहिर होता है कि मुसलमानों के लिए उनके दिल व दिमाग में कितना जहर भरा है। शायद यही जहर कभी पहलू खान तो कभी अफरोजल के कत्ल की शक्ल में सामने आता है।“

 

”हामिद अंसारी हों, मनमोहन सिंह हों, जनरल दीपक कपूर, नटवर सिंह या कोई और अगर यह लोग गुजरात एलक्शन में दखल देने वाली किसी पाकिस्तानी साजिश में शामिल थे तो मोदी इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करते। देश को इस मुबय्यना (कथित) साजिश की खबर तो खुद मोदी ने दी है। यह किसी पुलिस वाले की रिपोर्ट नहीं है। अगर कार्रवाई नहीं होती तो समझा जाएगा कि नरेन्द्र मोदी ने देश के साथ फिर एक बड़ी गलतबयानी की है उन्हें माफी मांगनी चाहिए।“

 

अहमदाबाद! मडूब मरो-डूब मरो, दिल्ली की सरकार चलाने वालों। मौजूदा वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी का यह जुमला उस वक्त मुल्क के मीडिया का पसंदीदा जुमला बन गया था जब गुजरात के वजीर-ए-आला की हैसियत से नरेन्द्र मोदी ने यह कहा था  उस वक्त पाकिस्तानीं फौजियों के जरिए भारत के दो जवानों की गर्दनें काट ली गई थीं। मोदी यह जुमला एक पब्लिक मीटिंग में बोले थे फिर अपने एक पिट्ठू चैनल के अदालत में प्रोग्राम में इसे फिर दोहराया था। अब इसी छः दिसम्बर को पाकिस्तान के साबिक वजीर-ए-खारजा खुर्शीद महमूद कसूरी, दिल्ली में तैनात पाकिस्तानी हाई कमिशनर और पाकिस्तान फौज के एक रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल अरशद रफीक ने दिल्ली में राज्य सभा मेम्बर मणिशंकर अय्यर के घर पर रात के खाने के दौरान बैठकर गुजरात असम्बली के एलक्शन पर असर डालने और अहमद पटेल को गुजरात का अगला चीफ मिनिस्टर बनाने की साजिश कर गए। इस साजिशी मीटिंग के अगले दिन यानी सात दिसम्बर को मणिशंर अय्यर ने गुजरात के बेटे को मनीचफ कहा था। इस साजिशी मीटिंग के बाद सभी पाकिस्तानी वापस अपने मुल्क निकल गए और साजिश में शरीक साबिक नायब सदर जम्हूरिया (उपराष्ट्रपति) और साबिक प्राइम मिनिस्टर मनमोहन सिंह, रिटायर्ड आर्मी चीफ जनरल दीपक कपूर और अपने घर में साजिशी मीटिंग कराने वाले मणिशंकर अय्यर न सिर्फ आजाद घूम रहे हैं बल्कि गुजरात के बेटे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसलिए डूब मरो-डूब मरो का मोदी का चार साल पुराना जुमला अब उन्हीं पर फिट होता दिख रहा है। कोई या कई पाकिस्तानी हमारे मुल्क की राजधानी में आए, देश की सत्तर साल की आजादी की तारीख (इतिहास) के सबसे ज्यादा काबिल और बेमिसाल प्राइम  मिनिस्टर के अपने प्रदेश गुजरात में आरएसएस की जुबान में एक ममलिच्छफ अहमद पटेल को चीफ मिनिस्टर बनाने की साजिश करें और आसानी के साथ निकल जाएं यकीनन यह नाकामी देश चलाने वालों के लिए डूब मरने की सूरतेहाल पैदा करने वाली है। साजिश की यह खबर गलत भी नहीं हो सकती क्योंकि यह खबर तो खुद वजीर-ए-आजम मोदी ने दस दिसम्बर को गुजरात के पालनपुर समेत कई रैलियों में इस साजिश की खबर खुद ही आम गुजरातियों को देते हुए उनसे गुजरात और गुजरात के बेटे (मोदी) की इज्जत बचाने की अपीलें की थीं। उन्होने बड़ी सफाई से कहा कि मणिशंकर अय्यर के घर पर यह साजिशी मीटिंग पूरे तीन घंटे चली थी। वजीर-ए-आजम मोदी ने खुद ही जो खबर पूरे मुल्क को दी वह चूंकि गलत नहीं हो सकती इसलिए पाकिस्तानियों के साथ मीटिंग में शामिल सभी हिन्दुस्तानियों को गिरफ्तार कराकर उनके खिलाफ मदेशद्रोहफ का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। साथ ही दिल्ली में तैनात पाकिस्तान के हाई कमिशनर को वापस भेजने की कार्रवाई भी होनी चाहिए। इस साजिश के मास्टर माइंड पाकिस्तान आर्मी के रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल अरशद रफीक को भारत लाकर मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ने के इल्जाम में मुदकमा चलाया जाना चाहिए। अगर सत्तर साल में सबसे ज्यादा ताकतवर और मकबूल (लोकप्रिय) प्राइम मिनिस्टर ने यह सब कार्रवाइयां न कराईं तो उनका खुद का चार साल पुराना जुमला मडूब मरो-डूब मरो दिल्ली की सरकार चलाने वालोफ उन्हीं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वैसे भी उनकी पूरी सरकार के लिए डूब मरने जैसे हालात ही हैं क्योकि अगर पाकिस्तान से आकर कुछ लोग दिल्ली में बैठकर भारत के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश करके वापस निकल जाएं और सरकार देखती रहे वजीर-ए-आजम रोते रहें तो यही कहा जाएगा कि डूब मरो-डूब मरो।

वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने एक नहीं कई बार कहा कि पाकिस्तान आर्मी के रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल अरशद रफीक गुजरात के एलक्शन पर असर डाल कर अहमद पटेल को गुजरात का चीफ मिनिस्टर बनाना चाहते हैं इसकी वह साजिश भी कर रहे हैं। अब हर तरफ यही सवाल पूछा जा रहा है कि पाकिस्तान हो या अमरीका दुनिया का कोई भी मुल्क हिन्दुस्तान के किसी भी प्रदेश के एलक्शन पर असर डालकर किसी शख्स को वजीर-ए-आला कैसे बनवा सकता है। अगर कोई मुल्क भारत के किसी प्रदेश पर असर डालकर किसी शख्स को चीफ मिनिस्टर बनवा सकता है तो यह बात भी मुल्क की सरकार और प्राइम मिनिस्टर के लिए मडूब मरनेफ वाली ही कही जाएगी।

गुजरात मे किए गए मुबय्यना (कथित) तरक्कियाती (विकास) कामों और आम हिन्दुओं के जज्बात भड़का कर मुसलमानों का नाम लेकर उन्हें खौफजदा करके नरेन्द्र मोदी इस बार भी अपनी भारतीय जनता पार्टी को जितवा कर एक बार फिर सत्ता हासिल कर सकते हैं लेकिन इस एलक्शन में उन्होंने जिन मुद्दों पर बात की वह मुद्दे इस बात का सबूत हैं कि मसबका साथ सबका विकासफ जैसा नारा भले ही वह दे रहे हैं उनके दिल में मुसलमानों के लिए कूट-कूट कर नफरत भरी है और उस नफरत को वह अब छुपाना भी नहीं चाहते। तकरीबन बीस दिनों में उन्होेने सौ के करीब जो पब्लिक मीटिंगें कीं उनमें गुजरात माडल और गुजरात की तरक्की (विकास) का मुद्दा तो कहीं था ही नहीं। उनके मुद्दे थे पाकिस्तान, अहमद पटेल, औरंगजेब, शाहजहां और दीगर मुगल बादशाह कांग्रेस के दो प्यादे शहजाद पूनावाला और सलमान निजामी। उनकी इंतखाबी तकरीरें सुनने के बाद देश भर के मुसलमान खौफजदा हो गए हैं कि साढे तीन साल तक प्राइम मिनिस्टर रहने के बावजूद अगर नरेन्द्र मोदी के दिल और जेहन में मुसलमानों के लिए इतनी नफरत भरी है अगर खुदा न ख्वास्ता वह गुजरात हार गए या न हारे तो 2019 का लोक सभा एलक्शन जीतने के लिए वह मुल्क के मुसलमानों के खिलाफ क्या कुछ नहीं कर सकते हैं। मुल्क के आम मुसलमानों को खौफजदा करने की गरज से राजस्थान के राजसमंद जैसी हिंसा के वाक्यात बाकायदा बीजेपी की प्रदेश सरकारों की मिली भगत से कराए जा रहे हैं मोदी इन वाक्यात के लिए कोई सख्त कार्रवाई भी नहीं कराते।

मुल्क की सत्ता में बैठ कर सिर्फ वजीर-ए-आजम मोदी ने ही गुजरात एलक्शन में बेसिर-पैर की बयानबाजी नहीं की उनके बयान की हिमायत में  उनके फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली और वजीर कानून रविशंर प्रसाद भी पेश-पेश रहे उन दोनों ने भी मोदी की तरह ही छः दिसम्बर को पाकिस्तानियों के साथ मणिशंकर अय्यर के घर पर हुई डिनर मीटिंग को मश्कूक (संदेहहास्पद) करार दिया और सवाल किया कि क्या इस मीटिंग की कोई इजाजत भारत सरकार और वजारते खारजा (विदेश मंत्रालय)  से ली गई थी। रविशंकर और अरूण जेटली भी अपना मालिक और भगवान मान चुके मोदी की तरह किसी पर गलत इल्जाम लगाने के लिए झूट और सिर्फ झूट का सहारा लेते दिखाई दिए। क्या उन्हें नहीं मालूम कि जो लोग पाकिस्तान से आए थे वह बाकायदा हिन्दुस्तान का मवीजाफ लेकर आए थे। वीजा मांगने वाले हर शख्स को उसी वीजा फार्म पर बाकायदा यह लिखकर बताना भी पड़ता है कि वह किस ममकसदफ के लिए भारत आना चाहते हैं। दूसरे खुर्शीद महमूद कसूरी की हैसियत के लोगों को भारत सरकार से मंजूरी हासिल किए बगैर पाकिस्तान में काम कर रहा हिन्दुस्तानी हाई कमिशन वीजा दे भी नहीं सकता। इन हकायक (तथ्यों) के बावजूद मोदी, जेटली और रविशंकर गलत बयानी करते रहे। 6 दिसम्बर को मणिशंकर अय्यर के घर की जिस मीटिंग को मोेदी ने साजिश की मीटिंग बताया उसमें पाकिस्तानी मेहमानों के अलावा साबिक नायब सदर जम्हूरिया (उप राष्ट्रपति) हामिद अंसरी, साबिक वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह, रिटायर्ड आर्मी चीफ जनरल दीपक कपूर, तीन सहाफी प्रेमशंकर झा, राहुल खुशवंत सिंह और अजय मिश्रा, साबिक खारजा सेक्रेटरी सलमान हैदर के साथ के एस वाजपेयी, टी सी ए राघवन, सी घड़े खान, शरद संभरवाल जैसे डिप्लोमैट और साबिक मरकजी वजीर के नटवर सिंह वगैरह शरीक थे। इन्हेे मोदी ने साजिशी करार दे दिया।

वजीर-ए-आजम की सतह से इतना गलत, झूटा और सतह से गिरा हुआ (स्तरहीन) इल्जाम लगाने से मनमोहन सिंह जैसे संजीदा रहने वाले बुजुर्ग को भी गुस्सा आ गया। उन्होनेे कहा कि इस किस्म का झूटा और घटिया इल्जाम लगा कर नरेन्द्र मोदी ने लक्ष्मण रेखा पार की है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्हें देश से मांफी मांगनी चाहिए। उन्होने कहा कि वजीर-ए-आजम मोदी ने साबिक नायब सदर जम्हूरिया,  साबिक वजीर-ए-आजम और आर्मी चीफ समेत कई अहम इदारों (संस्थानों) की तौहीन करने का काम किया है। उन्होने कहा कि मोदी जिस ओहदे पर बैठे हंै उसका एहतराम (सम्मान और गरिमा) गिराने का काम मोदी कर रहे हैं। मनमोहन सिंह ने कहा कि मामूली सियासी फायदा उठाने के लिए नरेन्द्र मोदी ने जो झूट और अफवाहें फैलाई हैं उनसे उन्हें तकलीफ भी हुई है और उन्हें गुस्सा भी है। उन्होने कहा कि शायद गुजरात में होने वाली अपनी सियासी शिकस्त का अंदाजा मोदी को लग गया। इसीलिए वह गैर मुहज्जब (अभद्र) अल्फाज का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होने इल्जाम लगाया कि नरेन्द्र मोदी अपने मामूली सियासी मफाद के लिए हर संवैधानिक ओहदे की तस्वीर (छवि) धूमिल करने की मोहलिक (घातक) हरकतें कर रहे हैं।

प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी के जरिए गुजरात की रैलियों में लगाए गए इल्जामात और उनपर दस साल तक मुल्क के वजीर-ए-आजम रहे संजीदा और शरीफ लीडर मनमोहन सिंह का सख्त जवाबी बयान इन दोनों के बाद नरेन्द्र मोदी के पास दो ही रास्ते बचे हैं। पहला यह कि अगर उन्होेेने साजिश किए जाने का झूटा इल्जाम लगाया है तो उन्हें अपने बयान पर अफसोस जाहिर करके मामला खत्म कर देना चाहिए और अगर उनका बयान व इल्जाम सच्चा है तो साजिशी मीटिंग में शामिल तमाम लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कराएं। अगर उन्होनेे दोेनों काम नहीं किए तो फिर उन्हीं का जुमला उनपर फिट करते हुए कहा जाएगा मडूब मरो, डूब मरो मुल्क की सरकार चलाने वालोफ क्योेंकि तुम सरकार चलाने लायक ही नही हो।