योगी के राज में मुश्किल हुआ टोपी पहनना

योगी के राज में मुश्किल हुआ टोपी पहनना

बागपत! वजीर-ए-आला आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालते हुए कहा था कि उनके राज में गुण्डे बदमाश या तो सुधर जाएंगे या फिर उनकी जगह जेल में होगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गुण्डे बदमाशों बल्कि फिरकापरस्ती के जहर में बुझे समाज दुश्मन अनासिर को खुली छूट मिली हुई है खुसूसन मुसलमानों और दलितों के साथ वह कुछ भी करें योगी पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने की हिम्मत ही नहीं कर पा रही है और अगर किसी ने जसारत की तो उसे उसकी सजा मिलती है। अब तो इंतेहा यह हो गई है कि मुसलमानों को टोपी पहनना भी मुश्किल हो गया है। टोपी और स्कार्फ पहनने की वजह से बागपत जिले के चार मुस्लिम नौजवानों को फिरकावाराना मुनाफरत के जहर में बुझे गुण्डों ने दिल्ली से शामली जाने वाली पैसिंजर टे©ंन में पीट-पीट कर लहूलुहान कर दिया।

इस वारदात के वक्त टे©ंन में बैठे दूसरे मुसाफिर महज तमाशाई बने रहे किसी ने गुण्डों को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह वाक्या बाइस नवम्बर की रात में पेश आया जब तीस साल के मौलाना मोहम्मद गुलजार और तीन दूसरे नौजवानों जिनमें एक उनका बीस साल का भांजा असरार, सत्रह साल का अबू बक्र और अट्ठारह साल का मोहम्मद बिन मोमिन की सात गुण्डों ने उस वक्त पिटाई कर दी जब टे©ंन कुछ ही देर में बागपत पहुचने वाली थी और अहेदा स्टेशन आने वाला था। मौलाना मोहम्मद गुलजार के बीस साल के भांजे असरार के मुताबिक यह गुण्डे डिब्बे मंे उनसे अगली सीट पर बैठे थे। हम लोग अपनी सीट से उठकर अहेदा हाल्ट पर उतरने ही वाले थे कि उनमें से एक ने हमारा रास्ता रोक लिया। गुण्डों ने खिड़कियां बंद कीं और अचानक हमें पीटना शुरू कर दिया। हम सभी पूछते रहे कि मसला क्या है। हम लोग यह समझ ही नहीं पाए कि वह सब मुश्तइल क्यो हुए मगर बाद में समझ मेे आया कि वजह क्या है। जब हमें वह लोग पीट रहे थे तो उनमें से एक यह कह रहा था कि मटोपी पहनता है? टोपी पहनना हम सिखाएंगे।फ वजह थी हमारा मजहब। मौलाना मोहम्मद गुलजार ने कहा कि हम अक्सर हमारे अकीदे के बारे में ऐसी बातें सुनते थे मगर यह कभी नहीं सोचा था कि हम फिरकावाराना मुनाफरत का शिकार बन जाएंगे।

इस वाक्ए ने हरियाणा के बल्लभगढ के जुनेद को टे©ंन में पीट-पीट कर कत्ल किए जाने की याद ताजा कर दी है और यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि बीजेपी की हुक्मरानी वाली रियासतों में क्या मुसलमानों की शक्ल व शबाहत ही इन मारपीट करने की वजह बन रही है। यह भी कि क्या बीजेपी सरकारों में ऐसे अनासिर कोे ऊपर से शह मिल रही है कि मुसलमानों के साथ ऐसा ही सुलूक किया जाए? क्योंकि खबर लिखे जाने तक फैली इसी किस्म की वारदातों की तरह कोई भी गुण्डा पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका था। मौलाना गुलजार के मुताबिक अहेदा हाल्ट पर टे©ंन महज आधा मिनट रूकती है जब टे©ंन अहेदा हाल्ट पर रूकी तो गुण्डों ने इमरजेसी चेन खींच कर पिटाई जारी रखी फिर वह उतर कर सुनहरा गांव की तरफ भाग गए। अचानक पिटाई से वह लोग इतना डर और सहम गए थे कि अहेदा हाल्ट पर उतरने की हिम्मत ही नहीं कर पाए। गुलजार और उनके दूसरे साथी अगले स्टेशन बागपत में उतरे और अपने रिश्तेदारों को वाक्ए की इत्तेला दे कर बुलाया। फिर वह लोग पुलिस स्टेशन गए और शिकायत दर्ज कराई इसके  बाद उन्होने बागपत के कम्युनिटी हेल्थ सेटर पर मेडिकल चेकअप कराया। कम्युनिटी हेल्थ संेटर के मेडिकल सुप्रीटेडेट डाक्टर सतीश कुमार ने बताया कि आधी रात के बाद तीन लोगों को जख्मी हालत में इमरजेसी वार्ड लाया गया।

असरार के जिस्म पर तेरह जख्म थे जिन में पांच छेद के जख्म थे शायद यह छेद बर्फ तोड़ने वाले आले से किए गए थे जबकि मौलाना गुलजार के जिस्म पर चार जगह छेद के जख्म थे और अबू बक्र के जिस्म पर दो जगह पर ऐसे ही छेद के जख्म पाए गए। बागपत के सर्किल अफसर दिलीप सिंह के मुताबिक इस तरह पीटे जाने की कोई वजह तो होगी हालांकि वह नही ंजानते कि वजह क्या है। हमने इस मामले में कई लोगांे से पूछगछ की और मुल्जिमान का सुराग लगाने के लिए कई स्टेशनों पर पुलिस का तैनात किया है।

अबू बक्र, असरार और मोहम्मद मोमिन के लिए दिल्ली जाना एक डरावने ख्वाब जैसा है। मौलाना मोहम्मद गुलजार के मुताबिक चैबालदा गांव के यह नौजवान अपने गांव से पहली बार दिल्ली के सफर पर वहां की जामा मस्जिद और निजामउद्दीन दरगाह देखने गए थे जाते वक्त उन लोगों में खासा जोश था लेकिन दिल्ली से वापसी पर जो वाक्या उनके साथ पेश आया उन लोगों ने आइंदा कभी भी दिल्ली न जाने की कसम खाई है। सिर्फ लिबास शक्ल व शबाहत की बुनियाद पर किसी को तशद्दुद का निशाना बनाना यही बताता है कि उत्तर प्रदेश में कैसे लोगों के हाथों में हुकूमत की बागडोर है और वह तशद्दुद के ऐसे इंतेहाई घिनौने वाक्यात को मामूली वाक्ए से ही ताबीर करते हैं। योगी सरकार और खुद योगी की जानिब से मुसलसल यही कहा जा रहा है कि रियासत में अम्न व कानून की सूरत में इंकलाबी तब्दीली आई है और जरायम के ग्राफ में जबरदस्त गिरावट। मगर जमीनी हकीकत यह है कि योगी सरकार आने के बाद जरायम का सैलाब सा आया हुआ है। दलितों और मुसलमानों को खास तौर से तशद्दुद का निशाना  बनाया जा रहा है।