यशवंत सिन्हा ने फिर साधा नरेन्द्र मोदी पर निशाना

यशवंत सिन्हा ने फिर साधा नरेन्द्र मोदी पर निशाना

नोटबंदी के मामले में वजीर-ए-आजम को तुगलक जैसा बताया

 

अहमदाबाद! आईएएस अफसर रहे मुल्क के साबिक वजीर खजाना यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी के लिए एक बार फिर वजीर-ए-आजम पर निशाना साधा है। नोटबंदी के एक साल बाद जहां बीजेपी लीडर और वजीर-ए-आजम मोदी सब नोटबंदी के फायदे गिना रहे थे, सीनियर बीजेपी लीडर यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी को नाकाम बताते हुए नरेन्द्र मोदी को अपनी सनक के लिए मशहूर बल्कि बदनाम बादशाह मोहम्मद बिन तुगलक जैसा बता दिया। तारीख में मोहम्मद बिन तुगलक का शुमार सनकी और अपनी मर्जी के मुताबिक अवाम मुखालिफ गलत फैसले करने वाले बादशाह के तौर पर होता है। यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी के लिए मोदी को तुगलक जैसा बताते हुए कहा कि उसने भी नोटबंदी की थी। गुजरात एलक्शन के दौरान आए यशवंत सिन्हा के बयान से बीजेपी परेशानी में पड़ गई है। नरेन्द्र मोदी की गलत पालीसियों के लिए उनपर निशाना साधने वाले यशवंत सिन्हा अकेले लीडर नहीं हैं अदाकार से सियासतदां बनने वाले शत्रुधन सिन्हा भी बीजेपी और नरेन्द्र मोदी पर हमले करते रहते हैं। यशवंत सिन्हा के हमले पर वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी या उनके फाइनंेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने तो कुछ नहीं कहा मगर तेलंगाना के बीजेपी लीडर कृष्ण सागर को आगे कर दिया जिन्होने कहा कि अगर उनको दिक्कत है और पार्टी में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो यशवंत सिन्हा और शत्रुधन सिन्हा दोनों को पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए।

नोटबंदी के फैसले को लेकर साबिक वजीर खजाना  यशवंत सिन्हा के तेवर और तल्ख हो गए हैं। वह अपनी पार्टी की सरकार और पी एम मोदी  को खूब खरी खोटी सुना रहें हैं। इस बार उन्होंने मोदी के फरमान का मुआजना  मोहम्मद बिन तुगलक से किया  है। उन्होंने कहा है कि 14वीं सदी के दिल्ली सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने भी 700 साल पहले नोटबंदी की थी। इस कदम के लिए मोदी की तंकीद करते हुए सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी ने मुल्क की मईशत (अर्थव्यवस्था) को  3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने एक प्रोग्राम में कहा कि बहुत सारे ऐसे शहंशाह (राजा) हुए हैं, जो अपनी करंेसी  लेकर आये। कुछ ने नयी करेंसी (मुद्रा)  को चलन में लाने के साथ-साथ पहले वाली करेंसी का भी चलन जारी रखा, लेकिन 700 साल पहले एक शहंशाह मोहम्मद बिन तुगलक था, जो नई करेंसी लेकर आया और पुरानी करेंसी  के चलन को खत्म कर दिया।

यशवंत सिन्हा के यह बागी तेवर पार्टी के  अंदर लगातार पसोपेश के हालात  पैदा कर रहें हैं। वह कभी मोदी तो कभी  अरुण जेटली पर हमला बोल रहें हैं। गुजरात दौरे के पहले ही दिन उन्होंने लोकशाही बचाओ  में जेटली से इस्तीफे की मांग करने की बात गुजरातियों से की थी। इसके पहले सिन्हा ने गुजिश्ता 26 सितंबर को  अरुण जेटली पर इक्तेसादी (आर्थिक) मोर्चे पर नाकाम होने का इल्जाम लगाया था। उस वक्त  उनके इस बयान के बाद न सिर्फ बीजेपी में बल्कि पूरी हिन्दुस्तानी सियासत  में उबाल आ गया था। उस वक्त  उन्होंने कहा था कि अपने काम काज  को लेकर अब तक सवालों से बेपरवा नरेंद्र मोदी सरकार को लगभग साढ़े तीन साल का अर्सा पूरा होने के बाद सबसे मुश्किल  चैलेंजेज और सवालों से जूझना पड़ रहा है। यह सवाल घरेलू व बाहरी दोनों मोर्चों पर ताबड़तोड़ किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि नोटबंदी पर पार्लियामेंट  में चर्चा के दौरान साबिक वजीर आजम व मुल्क  में नर्मकारी  लाने वाले डाक्टरॉ मनमोहन सिंह का वह बयान हर कोई याद कर रहा है, जिसमें उन्होंने जीडीपी में दो फीसद तक कमी आने का खदशा  जाहिर किया था।

वैसे यशवंत सिन्हा अकेले नहीं हैं बल्कि शत्रुघ्न सिन्हा भी लगातार पार्टी लीडरशिप और मुल्क की कमजोर इक्तेसादी हालत को लेकर सवाल उठाते रहें हैं। शत्रुघन सिन्हा ने हाल ही में कहा था कि बीजेपी तभी लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सकती है जब पार्टी मवन मैन शोफ और मटू मैन आर्मीफ के खांचे से बाहर निकलेगी। इन दोनों के इस रवैये से पार्टी में बेचैनी  का माहौल है। यशवंत सिन्हा के ताजा बयान के बाद तेलंगाना के बीजेपी लीडर कृष्ण सागर राव ने  कहा कि अगर यशवंत सिन्हा और शत्रुघन सिन्हा को हुकूमत में परेशानी है और उन्हें पार्टी फोरम में मुद्दों पर चर्चा के लिए मुनासिब मौका नहीं मिल रहा है तो उन्हें पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए।