अमरीका से चलेगी मोदी सरकार

अमरीका से चलेगी मोदी सरकार

मुल्क में जीडीपी गिरी, बेरोजगारी में जबरदस्त इजाफा, आम लोगों का घर चलना मुश्किल

 

”जालसाजी और गलत रेटिंग तय करने की वजह से जिस अमरीकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज पर अमरीकी सरकार ही भारी भरकम जुर्माना लगा चुकी है उसी ममूडीजफ ने अब यह कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी लगने के बाद से भारत की मईशत (अर्थव्यवस्था) में काबिले तारीफ बेहतरी हुई है। इस रिपोर्ट के बाद अरूण जेटली समेत मोदी के तमाम वजीर इतने खुश हैं जितना खुश वह कांग्रेस को हराकर भी नहीं हुए थे।“

 

”एक सौ तीस करोड़ के मुल्क में अमरीकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेण्टर ने सिर्फ 2664 लोगों से बात करके रिपोर्ट दे दी कि भारत के हर दस में से नौ लोगों में नरेन्द्र मोदी इंतेहाई मकबूल (लोकप्रिय) लीडर बन चुके हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के 88 फीसद लोग मोदी को ही अपने वजीर-ए-आजम की शक्ल में देखना चाहते हैं। इतना बड़ा झूट देश के लोग बर्दाश्त नहीं कर पाए तो मीडिया में रिपोर्ट का जिक्र बंद कर दिया गया। प्यू की रिपोर्ट ने तो मुल्क के सदफीसद मुसलमानों को भी मोदी का हामी करार दे दिया है।“

 

”मूडीज की रिपोर्ट का जिक्र करते वक्त अरूण जेटली इतने खुश थे कि हंसते वक्त उनके होंट कनपटी तक खुलते दिख रहे थे, अगर अरूण जेटली ने अपने एयर कण्डीशन्ड दफ्तर से निकल कर दिल्ली से मिले हुए नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव का जायजा ले लिया होता तो उन्हें पता चल जाता कि मुल्क की मईशत (अर्थव्यवस्था) तबाही की किस हद तक पहुच चुकी है। वह तो अफवाहों और झूट की बुनियाद पर सरकार चलाने के आदी हो चुके हैं।“

 

नई दिल्ली! नोेटबंदी और जीएसटी लगने के बाद मुल्क में बेरोजगारी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तकरीबन तमाम छोटी और मंझोली सनअतें (उद्योग) बंद हो गईं। सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली आईटी कम्पनियों में मुसलसल छटनी हो रही है। प्रदेशों को बडे़ पैमाने पर रेवेन्यू फराहम कराने वाली कांस्ट्रक्शन सनअत नव्वे फीसद तक ठप हो चुकी है। जीडीपी में तकरीबन तीन फीसद गिरावट दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनके तमाम वजीर इसलिए खुश हैं कि जालसाजी के लिए बदनाम अमरीकी क्रेडिट रेटिंग एजेेंसी ममूडीजफ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार की मआशी (आर्थिक) पालीसी पूरी तरह कामयाब है। इसलिए मूडीज ने 17 नवम्बर को हिन्दुस्तान की रेटिंग बीएए से बढ़ाकर बीएए-2 कर दी है। इससे दो-तीन दिन पहलेे अमरीका की ही एक थिंक टैंक एजेंसी मप्यू रिसर्च ंसेंटरफ ने अपने एक सर्वे की बुनियाद पर रिपोर्ट दी थी कि भारत में नरेन्द्र मोदी अब भी सबसे ज्यादा मकबूल (लोकप्रिय) लीडर हैं। यहां तक कि हर दस में से नौ लोग मोदी हामी हैं। ममूडीजफ के कुछ अफसरान यह रिपोर्ट जारी करने से तीन दिन कब्ल दिल्ली आए थे। दिल्ली में मूडीज टीम ने भारत सरकार के आला सतही (उच्च स्तरीय) लोगों से मुलाकात की थी और वापस जाकर मोदी व उनके वजीरों को खुश करने वाली रिपोर्ट जारी कर दी। ममूडीजफ अमरीका में न सिर्फ काफी बदनाम हो चुकी है बल्कि कुछ साल पहले गलत और जालसाजी भरी रेटिंग की वजह से अमरीका सरकार इस पर भारी भरकम जुर्माना भी लगा चुकी है। मूडीज पर इल्जाम लगा था कि गलत और जालसाजी भरी रेटिंग जारी करके इसने  अमरीका के मआशी सिस्टम (अर्थव्यवस्था) को तबाह करने का जुर्म किया था। यह क्रेडिट रेटिंग कम्पनी मुफ्त में काम भी नहीं करती यह किसी भी मुल्क या ग्रुप की तारीफ करने और महाई रेटिंगफ के लिए भारी भरकम फीस भी लेती है। खबर है कि यह फीस काले और सफेद धन दोनों शक्लों में होती है। मूडीज से चन्द दिन पहले ही अमरीका के ही एक और थिंक टैंक मप्यू रिसर्च सेण्टरफ ने मोदी की मकबूलियत (लोकप्रियता) से मुताल्लिक जो रिपोर्ट दी उसमें तो झूट और जालसाजी के तमाम रिकार्ड ही तोड़ दिए। उसके मुताबिक भारत के हर दस में से नौ लोग नरेन्द्र मोदी को ही पसंद करते हैं यानी नव्वे फीसद लोगों में मोदी मकबूल हैं। रिपोर्ट आई एक-दो दिन तो बीजेपी लीडरान, मोदी भक्तों और आरएसएस परिवार ने इसका जिक्र किया लेकिन जल्दी ही शायद इन सबकी समझ में आ गया कि यह रिपोर्ट कुछ ज्यादा हो गई। नव्वे फीसद लोग मोदी को पसंद करते हैं इसका मतलब तो यह हुआ कि अपोजीशन नाम की कोई चीज भारत में है ही नहीं। इसके अलावा मुल्क में 18 से 20 फीसद मुसलमान भी मोदी को चाहने लगे हैं। एक-दो दिन बाद ही इस रिपोर्ट का जिक्र बंद हो गया क्योंकि इतना बड़ा झूट देश के लोग हज्म नहीं कर पा रहे थे।

मूडीज की रिपोर्ट आने के बाद वैसे तो मोदी के तमाम वजीर फूले नहीं समा रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा खुश दिखे फाइनंेस मिनिस्टर अरूण जेटली खुशी में कनपटी तक मुंह खोल कर हंसते हुए उन्होने कहा कि मभारत के मआशी इस्लाहात (आर्थिक सुधारों) पर जिन लोगों को शक है अब उन्हें संजीदगी के साथ खुद का एहतसाब (आत्मचिंतन) करना चाहिए। मूडीज ने जीएसटी, बैंकों की सरमायाकारी (पूंजीकरण), डिजिटलीफिकेशन जैसे कदमों का सही और हकीकत पर मबनी (आधारित) तजजिया किया है। फौरन ही मूडीज की रिपोर्ट के फायदे भी गिनवा दिए गए कहा गया कि इसके बाद अब मुल्क में गैर मुल्की सरमायाकारी (विदेशी निवेश) का सैलाब आ जाएगा।फ इण्टरनेशनल मानिटरिंग फण्ड, वल्र्ड बैंक और एडीबी से बडे़-बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सस्ते शरह सूद (ब्याज दर) पर कर्ज मिलेगा। बैंकों और घरेलू कम्पनियों के लिए गैर मुल्की (विदेशी) कर्ज सस्ता होगा, पेंशन और हेज फण्ड के जरिए भी गैर मुल्की सरमायाकारी में इजाफा होगा और मेक इन इंडिया के लिए विदेशी कम्पनियों की हौसला अफजाई होगी। अगर मूडीज की रिपोर्ट को मब्रहमवाक्यफ (भगवान की वात) मानने से पहले अरूण जेटली ने अपने एयर कण्डीशन्ड दफ्तर से निकल कर दिल्ली के किनारे गुडगांव, नोएडा और गाजियाबाद तक जाकर सनअतों (उद्योगों) का जायजा लेने की जहमत कर  ली होती तो शायद उनकी समझ में आता कि मूडीज रिपोर्ट कितनी फर्जी है और इस रिपोर्ट का मुल्क की जमीनी हकीकत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। अब अगर जरा भी ईमानदारी हो तो जेटली यह भी बता दें कि इस रिपोर्ट को गढवाने के लिए ममूडीजफ ने फीस के नाम पर भारत को कितना ठगा है?

एक तरफ तो पूरे मुल्क में बेरोजगारी रोज नए-नए रिकार्ड कायम कर रही है, बंद हो चुकी सनअतें (उद्योग) शुरू होना तो दूर बची हुई सनअतों में भी ताले पड़ रहे हैं। कांस्ट्रक्शन सनअत के शुरू होने की कोई उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ मूडीज का कहना है कि मौजूदा माली साल 2017-18 में ही भारत की जीडीपी 6.7 फीसद (ः) तक पहुंचने की पूरी उम्मीद है और अगले माली साल 2018-19 में यह 7.5 फीसद पर कायम रहेगी। मौजूदा माली साल 2017-18 मंें सिर्फ चार महीने बचे हैं देखना यह है कि अरूण जेटली और नरेन्द्र मोदी जादू की कौन सी छड़ी घुमाने वाले हैं जो जीडीपी को 6.7 फीसद तक पहुंचा देगी?

मूडीज से पहले अमरीकी थिंक टैंक मप्यूरिसर्च सेण्टरफ ने अपना एक सर्वे जारी करके पूरे हिन्दुस्तान को तकरीबन बेहोशी के आलम में पहुचा दिया। मप्यूफ ने कहा कि मुल्क के दस में से नौ लोग नरेन्द्र मोदी को ही पसंद करते हैं। साढे तीन साल पहले 2014 के लोक सभा एलक्शन में मोदी को भारत के सिर्फ 31 फीसद लोगों ने पसंद किया था। साढे तीन सालों में उन्होने कौन सा ऐसा कारनामा कर दिया कि उन्हें पसंद करने वालांे की तादाद बढ कर नव्वे फीसद (90ः) हो गई? इस रिपोर्ट के बाद लोग मजाक में यह तक कहने लगे हैं कि अपोजीशन पार्टियों के लोग एक दूसरे पर शक करने लगे हैं इंतेहा यह कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका और राबर्ट वाड्रा तक एक दूसरे पर शक करने लगे हैं कि कहीं अगला मोदी के हामियों में तो शामिल नहीं हो गया है? अब लोग उन दस फीसद लोगों को तलाश कर रहे हैं जिन्होने मप्यूफ के सर्वे में मोदी की मुखालिफत की है। मुल्क के 18-20 फीसद मुसलमान इस ख्याल से परेशान हैं कि क्या अब उन्हें भारत का बाशिंदा ही तस्लीम नहीं किया जा रहा है?

प्यू रिसर्च सेण्टर की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होने एक सौ तीन करोड़ की आबादी में सिर्फ दो हजार छम सौ चैंसठ (2664) लोगों पर ही सर्वे किया है। इससे बड़ी जालसाजी और क्या हो सकती है? आखिर वह 2664 लोग किन इलाकों और किन बिरादरी के हैं जो हर दस में से नौ मोदी भक्त हो चुके हैं? अगर मप्यूफ ने गुजरात में ही सूरत के व्यापारियांे, दलितों, पिछड़ों और पाटीदारों में जाकर यह सर्वे कर लिया होता तो शायद हर दस में से दो लोग भी मोदी के चाहने वाले न निकलते। सवाल यह है कि मूडीज हो या मप्यूफ क्या अब मोदी की सरकार ऐसी ही जालसाज और ठग कम्पनियों के सहारे चलेगी। आखिर मुल्क के लोगों पर झूट की चादर कब तक डाली जाती रहेगी? यह बात समझ में आने वाली नहीं है कि खुद नरेन्द्र मोदी को इन रिपोर्ट्स की हकीकत का एहसास नहीं होगा लेकिन वह भी जानबूझ कर इसी तरह के सहारे तलाश करते रहते हैं। समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव शायद ठीक ही कह रहे हैं कि बीजेपी के लोग जितनी खुद एतमादी (आत्मविश्वास) के साथ झूट बोलते हैं कोई दूसरा नहीं  बोल सकता।