गुजरात में अब घिनौनी सियासत

गुजरात में अब घिनौनी सियासत

असम्बली एलक्शन जीतने के लिए बीजेपी, तमाम हथकण्डे अपना रही है, मुस्लिम नामों का जमकर इस्तेमाल

 

 

”नरेन्द्र मोदी ने अब तक गुजरात मे जितने एलक्शन लडे़ हैं सभी में मुसलमानांे का अलामती (सांकेतिक) इस्तेमाल करके सियासी फायदा उठाया है। इस बार भी ऐन एलक्शन के दौरान मुंबई और अहमदाबाद हवाई अड्डों से व आजमगढ से इस्लामिक स्टेट के मुबय्यना (कथित) दहशतगर्द बताकर आधा दर्जन से ज्यादा मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार किया गया है तो मोदी हामी एक चैनल ने दाऊद इब्राहीम की धमकी का आडियो भी पेश कर दिया।“

 

”हार्दिक पटेल की मुबय्यना (कथित) सेक्स सीडी ऐन एलक्शन के वक्त बीजेपी के नजदीकी अश्विन ने जारी करते हुए धमकी दी कि अभी और भी सीडी सामने आएंगी। फौरन ही मरकजी वजीर मनसुख माण्डवीया ने बयान दे दिया कि सरदार पटेल के डीएनए वाला शख्स (हार्दिक) की हरकतों ने सरदार पटेल और उनके पूरे समाज की तौहीन की है इस बयान से ही सीडी की पूरी साजिश बेनकाब होती है।“

”एलक्शन मुहिम के दौरान कांगे्रस लीडर राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर नोटबंदी व जीएसटी के जरिए हमले तो कर रहे हैं लेकिन अपनी बातों और बयानात से वह मोदी और उनकी पार्टी को एक भी ऐसा मौका नहीं दे रहे हैं जिसके सहारे आरएसएस परिवार एलक्शन को कम्युनल और गुजरात की असमिता का सवाल बना सके। इसी लिए इस्लामिक स्टेट, दाऊद और सेक्स सीडी का मामला गर्म किया गया है।“

अहमदाबाद! गुजरात असम्बली के एलक्शन में जैसे-जैसे दिन कम होते जा रहे हैं वैसे-वैसे मडर्टी पालिटिक्सफ या घिनौनी सियासत सामने आती जा रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि इस बार वह गुजरात की सत्ता से बीजेपी को बेदखल करके तकरीबन पच्चीस साल से खोए हुए इस प्रदेश में अपनी हुकूमत कायम कर ले। दूसरी तरफ वजीर-ए-आजम मोदी और अमित शाह से जमीनी सतह के मामूली बीजेपी वर्कर तक हर कीमत पर गुजरात पर अपना कब्जा कायम रखने के लिए हर हथकण्डा इस्तेमाल कर रहे हैं। खुद को भगवान शिव का भक्त बता कर गुजरात के मंदिरों में पूजा करने के साथ-साथ कांग्रेस नायब सदर राहुल गांधी गुजरात के हर तबके तक पहुंचने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने गुजरात दौरे के दौरान बीजेपी को एक भी ऐसा मौका नहीं दिया है जिसका नाजायज फायदा बीजेपी उठा सके। खुद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनका पूरा आरएसएस परिवार यह दावा कर रहा है कि पूरे मुल्क की तरह गुजरात में नरेन्द्र मोदी के मुकाबले दूसरा कोई लीडर किसी पार्टी में नहीं है। इसी के साथ बीजेपी ने घिनौनी और मुस्लिम मुखालिफ सियासत भी शुरू कर दी है। बीजेपी के सख्त मुखालिफ पाटीदार समाज के मजबूत लीडर हार्दिक पटेल को बदनाम करने और उनकी तस्वीर (छवि) खराब करने की गरज से बीजेपी ने अपने एक नजदीकी अश्विन साकड़शेरिया से खबर लिखे जाने तक तीन सेक्स सीडी जारी करा दी थी। सीडी जारी करते हुए अश्विन ने इल्जाम लगाया कि हार्दिक पटेल और उनके साथ आंदोलन में शामिल उनके नजदीकी सभी लड़के इंतेहाई बदकिरदार किस्म के हैं। उन्होने धमकी दी कि अभी और भी कई सीडी सामने आएंगी और अगर जरूरत पड़ी तो समाज की कुछ ऐसी लड़कियों को भी वह देश के सामने ले आएंगे जिनकी इज्जत के साथ हार्दिक पटेल और उसके साथियों ने बुरा सुलूक किया है। इसके अलावा एक सोचे समझे मंसूबे के तहत इस वक्त अपने नाम के साथ कई बार श्रीश्री लिखने वाले मअध्यात्मफ के ताजिर रविशंकर को अयोध्या मामला हल करने के नाम पर मैदान में उतार दिया गया ताकि मुसलमान रविशंकर की मुखालिफत करें और इस मुतवक्के (संभावित) मुस्लिम मुखालिफत को गुजरात एलक्शन में इस्तेमाल किया जा सके। नरेन्द्र मोदी ने अब तक गुजरात में जितने भी एलक्शन लडे़ हैं सभी में उन्होने मुसलमानों के नाम का अलामती (सांकेतिक) इस्तेमाल किया है। उत्तर प्रदेश् में भी वह कब्रस्तान और श्मशान का इस्तेमाल करके सियासी फायदा उठा चुके हैं। गुजरात एलक्शन शुरू होते ही मुंबई, अहमदाबाद और आजमगढ में आधा दर्जन मुसलमानों को गिरफ्तार कराकर हव्वा खड़ा किया गया कि यह मुस्लिम नौजवान इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्द हैं जो हिन्दुस्तान में बडे़ पैमाने पर हिन्दू इबादतगाहों और धर्मगुरूआंें पर हमला करने की साजिश रच रहे थे। यह कहानी कितनी बेबुनियाद है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है गिरफ्तार मुस्लिम नौजवानों के पास से एक चाकू तक बरामद नहीं हुआ है। दाऊद इब्राहीम तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने मुंबई मंे दाऊद की तीन जायदादें नीलाम कराने की तारीख चैदह नवम्बर मुकर्रर कराई थी। तेरह को मोदी के हामी एक टीवी चैनल ने दाऊद का मुबय्यना (कथित) आडियो चला दिया जिसमें चैनल की एक एंकर ने चीख-चीख कर कहा कि पूरी दुनिया को खौफजदा करने वाला हिश्ट्री शीटर दाऊद इब्राहीम देश के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी से बहुत डरता है। अगले दिन चैदह नवम्बर को चैनल ने फिर दावा किया कि कराची से चैनल को फोन आए हैं जिनके जरिए हिन्दुस्तान में 1993 दोहराए जाने की धमकी के साथ यह भी कहा गया है कि दाऊद इब्राहीम तो मोदी जैसे लोगों को न कुछ समझता है न उनसे डरता है। याद रहे कि 1993 में दाऊद इब्राहीम ने अपने लोगों से मुंबई में सीरियल बम धमाके कराए थे जिनमें ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। दाऊद इब्राहीम की इस मुबय्यना (कथित) धमकी राम बनाम हज का पोस्टर रविशंकर का अयोध्या ड्रामा और इस्लामिक स्टेट के मुबय्यना दहशतगर्दों की गिरफ्तारियां इन सभी की टाइमिंग और पेश किए जाने के तरीके पर एक नजर डाली जाए तो बीजेपी की अस्ल मंशा साफ दिखने लगेगी जो सिर्फ और सिर्फ गुजरात एलक्शन के लिए है।

हार्दिक पटेल और उनके साथी तकरीबन दो सालों से पाटीदार समाज को रिजर्वेशन दिलाने का आंदोलन चला रहे हैं। लेकिन जिस दिन से उन्होने असम्बली एलक्शन में भारतीय जनता पार्टी को हराने और कांगे्रस की मदद करने का अपना इरादा साफ किया वह बीजेपी के दुश्मन नम्बर एक बन गए। हालत यह है कि इस वक्त बीजेपी कांग्रेस से ज्यादा हार्दिक पटेल को अपना मुखालिफ तस्लीम करके उनके खिलाफ प्रोपगण्डा करने में जुटी हुई दिखती है। इसी मुखालिफत के तहत तेरह नवम्बर को एक सीडी जारी की गई जिसमें मनीला के किसी होटल के एक कमरे में एक मर्द और एक औरत को पलंग पर बैठा दिखाया गया है थोड़ी देर बाद सीडी में अंधेरा आ जाता है तो दावा किया जाता है कि लाइट बंद कर दी गई। उस सीडी में हार्दिक पटेल है या कोई दूसरा इसका अंदाजा नही होता है। क्योंकि उनकी शक्ल साफ नहीं दिख रही है। लड़की की शक्ल भी नहीं दिखती है। सीडी सामने आने के बाद फौरन पकड़ भी गई। क्योंकि उसमें दिख रहे मर्द के सर पर बाल हैं सीडी 16 मई 2017 की है जबकि हार्दिक पटेल ने  उसी साल अप्रैल में मूंडन कराया था। यह बात पकड़ में आते ही एक दूसरी सीडी अगले दिन वायरल की दी गई जिसमें एक होटल के कमरे में एक ही पलंग पर एक लड़की और तीन लड़के दिख रहे हैं उनमें एक लड़के का सर मुंडा हुआ है। मतलब यह कि हर तरह की सीडीज अश्विन के पास मौजूद है जो चाहिए उसे वह वायरल करा देगा। पहली सीडी के लिए कहा गया कि मनीला के एक होटल की है। फिर अश्विन कहने लगा कि हार्दिक पटेल ने लड़की को अपनी बीवी बताया था उसे दिल्ली लेकर आया था यहां कनाट प्लेस से हमने उसे कपड़े खरीदवाए उसके बाद मसूरी के रिसार्ट में हनीमून मनाने का बंदोबस्त भी हमी ने कराया था। वह कहता है कि उसने आईबी को भी इसकी इत्तेला दी थी। सवाल यह है कि अश्विन ने दिल्ली, गुजरात और उत्तराखण्ड की पुलिस के बजाए सीधे आईबी को इसकी खबर क्यों दी थी।

सीडी पर हार्दिक पटेल ने कहा कि उन्होने तो पांच नवम्बर को ही कह दिया था कि बीजेपी वाले उसके खिलाफ कोई सीडी तैयार करा रहे है।ं उन्होने कहा कि जांच हो जाए अगर साबित हो जाए कि सीडी में वही हैं तो वह तस्लीम कर लेंगे। कांगे्र्रस लीडर शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि जिन लोगों ने आरएसएस लीडर संजय जोशी की सीडी बनवा कर उन्हें सियासत से अलग थलग कर दिया था वही लोग अब हार्दिक पटेल के खिलाफ वैसी ही साजिश कर रहे हैं। हार्दिक पटेल ने कहा कि जो सीडी उनकी बताकर वायरल की गई वह सरासर झूट है। उन्होने कहा कई लोगों के पास बीजेपी लीडरान की  सीडी भी है अब वह भी सामने आएंगी।

इस दरम्यान वजीर-ए-आजम मोदी के साथ अटैच मिनिस्टर आफ स्टेट जितेन्द्र सिंह ने एक नई बात कही है उन्होने कहा कि अगर हार्दिक सीडी को फर्जी बता रहे हैं तो अदालत में जाएं और अपनी बेगुनाही का सर्टिफिकेट ले आएं। जितेन्द्र सिंह के लोगों ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि सीडी में दिखने वाला शख्स हार्दिक पटेल ही है। दूसरे यह कौन सा कानून वह बता रहे हैं कि वह और उनके लोग किसी पर कोई भी झूटा इल्जाम लगा दें फिर लगाए हुए इल्जाम को साबित करने के बजाए जिस पर इल्जाम लगाएं उसीसे कहें कि वह अपनी बेगुनाही साबित करे। ऐसा एक कानून बीजेपी ने पोटा के नाम से बनाया था जिसमें प्रावीजन था कि मुल्जिम को ही अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी इल्जाम लगाने वाले को अपना इल्जाम साबित नहीं करना होगा।

गुजरात में मुस्लिम वोटर इतने नहीं हैं कि उनके वोटों से एलक्शन के नतीजों पर कोई खास फर्क पडे़ लेकिन बीजेपी बार-बार एलक्शन में मुसलमानों का हव्वा इस लिए खड़ा करती है कि गुजरात के हिन्दू वोटरों को मुसलमानों के नाम पर खौफजदा करके पोलराइज किया जा सके। बार-बार यह मैसेज भी दिया जाता है कि सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और उसके लीडर नरेन्द्र मोदी ही मुसलमानों को ठीक कर सकते हैं, कांग्रेस तो मुसलमानों की मुंहभराई (तुष्टिकरण) ही करती रहती है। बीजेपी के लोगों ने पहले तो हज बनाम राम का मैसेज सोशल मीडिया पर डाला, फिर उसके पोस्टर दिखने लगे। पोस्टर में एक तरफ काबा शरीफ की तस्वीर लगाई गई जिसके साथ लिखा था हार्दिक पटेल, अल्पेश और जिग्नेश (भ्।श्र) दूसरी तरफ भगवान राम की तस्वीर लगाई गई जिसके साथ लिखा था (त्।ड) रूपानी, अमित शाह और मोदी। अहमदाबाद की कुछ कालोनियों में मुसलमानों के घरों पर निशान बनाए गए, इसी किस्म के निशान 2002 के दंगों के दौरान बने थे। निशान बनाने का मकसद सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को मुश्तइल (उत्तेजित) और दहशतजदा करने का था लेकिन मुसलमानों ने इन निशानात का कोई नोटिस नहीं लिया। हद यह है कि क्रास का निशान जफर सरेशवाला के घर पर भी लगा जो मोदी के सबसे बड़े हिमायती हैं। जिन इलाकों में यह निशान बनाए गए उनमें एलाइंट फ्लैट्स, अमन कालोेनी और डीलक्स फ्लैट्स समेत छः इलाके शामिल हैं। उल्टी सीधी पोस्टर बाजी और निशान लगाने जैसी हरकतें घिनौनी साजिश नहीं तो और क्या हैं?

बीजेपी गुजरात की मौजूदा घिनौनी सियासत में पूरी तरह मुलव्विसा (संलग्न) है। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता। क्योंकि बीजेपी केे नजदीकी अश्विन सांकड़शेरिया ने हार्दिक पटेल के खिलाफ सीडी वायरल की तो बीजेपी लीडर मनसुख माण्डवीया फौरन सामने आ गए। अभी यह साबित भी नहीं हो सका कि सीडी में दिखने वाला शख्स हार्दिक पटेल है या नहीं मनसुख ने हार्दिक पटेल को सरदार पटेल की तौहीन करने वाला गुजरात की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाला और पाटीदार समाज की लड़कियों की इज्जत लूटने वाला करार दे दिया। इसे भी घिनौनी सियासत ही कहा जाएगा। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ गुजरात से ही ज्यादा हंगामा शुरू हुआ।

असम्बली एलक्शन मंे वोटों के लिए गुजरात बीजेपी किसान मोर्चा के सदर वीरेन्द्र सिंह मस्त ने घटिया बयानबाजी की तमाम हदें ही पार कर दीं। उन्होने कहा कि आजादी से ठीक पहले जब सरदार वल्लभ भाई पटेल, बारदोई में जारी किसान आंदोलन को खत्म कराने में जुटे हुए थे उस वक्त जवाहर लाल नेहरू लेडी एडविना माउंटबेटन को मोहब्बत नामा (प्रेमपत्र) लिखने और मुल्क की तकसीम से मुताल्लिक कागजात पर दस्तखत करने में मसरूफ थे। उन्होनेे राहुल गांधी पर इल्जाम लगाया कि राहुल गांधी हर बार छुट्टियां मनाने ऐसी जगहों पर ही क्यों जाते हैं जो जगहें ऐश और अय्याशी के लिए मशहूर हैं। अब वीरेन्द्र सिंह से कौन पूछे कि वह आरएसएस से हैं जिनके यहां शादी व्याह का रिवाज कम है फिर उन्हें ऐसी जगहों का पता कैसे चल गया जो ऐश और अय्याशी के लिए हों और अगर राहुल गांधी ऐसी जगहों पर जाते हैं तो वह कौन सा गुनाह करते हैं। मुल्क का कानून और सुप्रीम कोर्ट दोनों कह चुके हैं कि कोई बालिग मर्द-औरत अगर अपनी मर्जी से जिस्मानी ताल्लुक (शारीरिक सम्बंध) कायम करते हैं तो उनका यह अमल गैर कानूनी नहीं है।¯