काला धन, नोटबंदी पर सरकार की बौखलाहट

काला धन, नोटबंदी पर सरकार की बौखलाहट

कांग्रेस की कयादत में अपोजीशन पार्टियों ने आठ नवम्बर को मुल्क में मनाया यौमे स्याह

 

”क्रेडिट और डेबिट कार्डों के इस्तेमाल पर तकरीबन पौने दो फीसद (1.75ः) कमीशन का बोझ कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ता है। इसमे से एक फीसद रकम अमरीकी कार्ड कम्पनियों मवीजाफ और ममास्टरफ को जाता है। मोदी और अरूण जेटली जरा हिसाब लगा कर मुल्क को बताएं कि एक साल में उन्होने देश के लोगों की मेहनत की कमाई के कितने लाख करोड़ अमरीकी कार्ड कम्पनियों की तिजोरियों मंे पहुचा दिए?“

 

”नोटबंदी की बरसी पर मोदी सरकार ने काला धन मुखालिफ दिन तो अपोजीशन ने यौम-ए-स्याह (काला दिवस) मनाया। अपोजीशन पार्टियों ने तो नोटबंदी के नुकसानात गिनवा दिए लेकिन इसके फायदों के नाम पर अरूण जेटली समेत मोदी के तमाम वजीर कांग्रेस की मुबय्यना (कथित) बेईमानियां की गिनवाते रहे। अपनी कामयाबियां बयान नहीं कर पाए।“

 

”मोदी सरकार मंे बैठे वजीरों की बोखलाहट का आलम यह कि स्मृति ईरानी ने मगांधी खानदानफ को बदउनवानी का हममआनी (भ्रष्टाचार का पर्यायवाची) करार दे दिया। उधर भोपाल में मरकजी वजीर रविशंकर प्रसाद ने नोटबंदी के जो तीन फायदे गिनवाए उनमें यह भी बताया कि नोटबंदी से जिस्म फरोशी (देहव्यापार) में कमी आई है तो क्या सरकार अब इसका भी रिकार्ड रखने लगी है।“

 

हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली! नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर कांगे्रस की कयादत में पूरे अपोजीशन पार्टियों ने यौमे स्याह तो मोदी सरकार और पूरे आरएसएस कुन्बे ने काला धन मुखालिफ दिन मनाने को काम किया। इस दौरान नवम्बर के पहले हफ्ते में मीडिया ने मुल्क मे जितने सर्वे किए तकरीबन अस्सी फीसद लोगों का जवाब था कि नोटबंदी फिर जीएसटी से काफी नुक्सान हुआ है। छोटी और मंझोली सनअतें तो तकरीबन पूरी तरह खत्म ही हो चुकी हैं। खुद मोदी के अपने गुजरात की बड़ी सनअतें कपड़ा और हीरा मार्केट भी तबाही के दहाने पर पहुच चुकी हैं। कांगे्रस और दीगर अपोजीशन पार्टियों ने नोटबंदी और जीएसटी से हुए नुक्सान को तफसील से बयान किया। दूसरी तरफ मोदी सरकार के दर्जनों वजीरों ने मुख्तलिफ रियासतों मे जाकर कांगे्रस पर हमले किए लेकिन नोटबंदी और जीएसटी से मुल्क को कौन-कौन से फायदे हुए यह कोई नहीं बता पाया। अरूण जेटली की बताई हुई लाइन पर टेक्नालोजी वजीर रविशंकर प्रसाद ने भोपाल में नोटबंदी के तीन फायदे बताए। एक कश्मीर मे पत्थरबाजी कम हुई, दूसरे मुल्क में नक्सली सरगर्मियों में कमी आई और तीसरे यह कि नोटबंदी से जिस्म फरोशी में बहुत बड़ी कमी हुई है। यानी मोदी सरकार मुल्क में जिस्म फरोशी के कारोबार पर खास नजर रखे हुए है तभी तो रविशंकर प्रसाद को जिस्म फरोशी के आंकडों का पूरा इल्म है। अपनी मजहकाखेज कामयाबी गिनाते वक्त रविशंकर प्रसाद नेपाल और बांग्लादेश की ख्वातीन व लड़कियों को बदनाम भी कर गए। उन्होेने कहा कि नेपाल और बांग्लादेश से आकर जिस्म फरोशी का धंधा करने वाली लड़कियों की तादाद में कमी आई है। बड़बोली और चर्ब जबान वजीर स्मृति ईरानी ने नोटबंदी के फायदे बताने के बजाए कांग्रेस और राहुल गांधी पर घटिया किस्म  के हमले करने को तरजीह दी। उन्होने यहां तक कह दिया कि इंदिरा गांधी का कुन्बा बेईमानी और बदउनवानी का हिमायती है। बाकी वजीरों की तरह स्मृति ईरानी ने मनमोहन सिंह सरकार के दौर में हुई मुबैयना  बेईमानियों को खूब बढा-चढा कर बयान किया। राहुल गांधी के लोक सभा हलके अमेठी की खराब हालत का जिक्र किया लेकिन नोटबंदी के फायदे नहीं बता सकीं। उन्होने नरेन्द्र मोदी के अंदाज में ही प्रेस कांफ्रेस की।  सिर्फ अपनी बात कहती रहीं सवाल सुनना तो उन्हें पसंद ही नहीं है। स्मृति ईरानी को कौन बताए कि अगर कांगे्रस बेईमान है तो आप एक्तेदार में आ गईं आपने एक्तेदार मे आकर खुसूसन नोटबंदी करके मुल्क को कितने फायदे पहुचाए यह भी तो बताइए। दरअस्ल नोटबंदी के फायदे बयान करने बजाए कांगे्रस पर ही हमले करने की यह लाइन तो फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने साबिक वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह की बातों का अपनी हिसाब जवाब देकर तय कर दी थी। रविशंकर प्रसाद का यह बयान कि नोटबंदी से जिस्मफरोशी मे कमी आई है लखनऊ में एक कांग्रेस लीडर ने चुटकी लेतेे हुए कहा कि रविशंकर प्रसाद की यह बात सौ फीसद सच है। उनके आरएसएस कुन्बे में आम तौर पर लोगों की शादियां नहीं होती हैं जाहिर है कि जिस्म फरोशी की खबरें और अड्डों की मालूमात जितनी गैर शादी शुदा लोगों को होती है उतनी किसी को नहीं होती। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा सच बोल कर रविशंकर प्रसाद ने उनका दिल जीत लिया है।

नोटबंदी और जीएसटी के फायदों में मुल्क के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने महीनों पहले से कहना शुरू कर दिया था कि अभी वह कई और सख्त फैसले लेंगे। उन्होने बार-बार कहा कि मुल्क का मुस्तकबिल बनाने के लिए वह हाल को दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं। सवाल यह है कि अगर किसी मुल्क का हाल ही तबाह हो गया उस मुल्क का मुस्तकबिल किस बुनियाद पर खड़ा होगा। नोटबंदी में मुकम्मल तौर पर नाकाम हो जाने के बावजूद नरेन्द्र मोदी अपनी गलती तस्लीम करने के लिए आज तक तैयार नहीं हैं। उन्होने कैशलेस और ई-पेमेट पर जोर देकर एक साल में मुल्क के लोगों की लाखों करोड़ की मेहनत की कमाई को अमरीका की कार्ड कम्पनियों की जेबों में पहुचा दिया। जितने भी क्रेडिट और डेबिट कार्ड हैं तकरीबन सभी अमरीकी कम्पनियों, मास्टर और वीजा के हैं। कार्ड से भुगतान करने फिर पौने दो फीसद (1.75) पैसा कार्ड कम्पनी वसूल करती है। जिसमें एक फीसद रकम वीजा और मास्टर कार्ड कम्पनियों को जाता है। कार्ड स्वैप करने पर जो व्यापारी या दुकानदार भुगतान लेते हैं उन्हें बैंकों को उसकी फीस अलग से देनी होती है। अगर कोई शख्स कार्ड के जरिए पचास हजार रूपयों का भुगतान करता है तो बैंक का सवा फीसद कमीशन और कमीशन की रकम पर अट्ठारह फीसद जीएसटी कुल मिलाकर सात सौ इकहत्तर रूपयों का ज्यादा भुगतान करना होता है। क्या नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी और कैशलेस व ई-पेमेट का सिलसिला मुल्क के लोगों की जंेबें काट कर चाइना की कम्पनी पेटीएम और अमरीका की कार्ड कम्पनियों की तिजोरियां भरने के लिए शुरू किया है। क्या इसी तरह मुल्क तरक्की करेगा। कुल मिलाकर पूरी सरकार बौखलाहट का शिकार है।

मनमोहन सिंह- साबिक वजीर-ए-आजम और दुनिया की सतह पर जाने माने माहिरे मआशियात (अर्थशास्त्री) डाक्टर मनमोहन सिंह ने एक बार फिर नोटबंदी को देश की मईशत का एक स्याह बाब (काला अध्याय) बताया है। उन्होंने वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी से कहा है कि उन्हें मान लेना चाहिए कि नोटबंदी एक भारी गलती थी।    दिल्ली में मोदी सरकार पर हमले के  बाद अहमदाबाद में मनमोहन सिंह व्यापारियों के बीच मरकजी सरकार की पालीसियों पर हमला करने से नहीं चूके। उन्होेने सात नवम्बर को नोटबंदी को एक मब्लंडरफ और तबाहकुन मआशी काम  करार दिया था।

साबिक वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह ने अहमदाबाद में कहा कि 8 नवंबर भारत की जम्हूरी तारीख का काला दिन है। दुनिया में किसी भी देश ने ऐसा फैसला नहीं लिया जिसमें 86 फीसद करेंसी को एक साथ वापस ले लिया हो। मनमोहन सिंह ने कहा कि कैशलेस इकोनामी को बढ़ावा देने के लिए नोटबंदी का फैसला बहुत गलत था।

उन्होेंने कहा कि मैंने जो राज्य सभा में कहा था वही आज भी कहूंगा कि नोटबंदी होने की वजह से  लोगों की मुश्किलों में इजाफा हुआ हैं। यह कारोबारियों पर एक मटैक्स टेररिज्मफ की तरह लागू हुआ है। मनमोहन सिंह बोले कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से भारत की मईशत को दोहरा झटका लगा, इसकी वजह से छोटे कारोबार की कमर टूट गई।

मनमोहन सिंह ने कहा था कि वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी को यह तस्लीम करना चाहिए कि नोटबंदी का फैसला एक बहुत बड़ी गलती थी और उन्हें अपनी गलती मान कर मईशत को सुधारने का काम करना चाहिए। मनमोहन सिंह ने कहा कि इसका (नोटबंदी का) फौरी असर नौकरियों पर पड़ा है। हमारे देश का तीन चैथाई गैर जरई रोजगार छोटी और मझोली सनअतों में हैं। नोटबंदी से इस शोबे को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, इसलिए नौकरियां चली गईं और नई नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं।

पिछले साल लागू की गयी नोटबंदी के बाद नौकरियां जाने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। सेंटर फार मानिटरिंग इंडियन इकोनामी की जानिब से जारी किए गये जनवरी-अप्रैल 2017 तक के आंकड़ों के मुताबिक इन चार महीनों में तकरीबन 15 लाख नौकरियां चली गईं। मुख्तलिफ सेक्टर्स के जुड़े आंकड़ों के मुताबिक सभी शोबों में माली साल 2016-17 में पिछले साल के मुकाबले में नौकरियों में कमी आयी है। बेरोजगारी के अंदाजे में इससे जुड़े ठोस आंकड़ों के न होने से काफी दिक्कत होती है लेकिन भारत सरकार की वजारते मेहनत के रोजगार सर्वे के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि आठ नवंबर 2016 को वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी के जरिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को उसी रात 12 बजे से बंद करने के एलान के बाद से नौकरियों में कमी आई है।

सीएमआईई के अंदाजे के मुताबिक जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान कुल 40 करोड़ पचास लाख नौकरी पेशा लोग थे जबकि उससे पहले के चार महीनों में यह तादाद 40 करोड़ 65 लाख थी। सीएमआईई का आंकड़ा आल इंडिया हाउसहोल्ड सर्वे की बुनियाद पर है जिसमें पूरे देश के 161167 घरों के 519285 बालिगों का सर्वे किया गया था। इन आंकड़ों से जाहिर है कि जनवरी से अप्रैल तक तकरीबन 15 लाख नौकरियां चली गईं। वहीं खुद को बेरोजगार बताने वालों की तादाद 96 लाख हो गई।

यह आंकड़े वजीर-ए-आजम मकौशल विकास योजनाफ के आंकड़ों से भी मेल खाते हैं। लोगों को रोजगार लायक बनाने के लिए चलाई गई इस खुसूसी स्कीम  पीएमकेवीवाई के जुलाई 2017 के पहले हफ्ते के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में सिर्फ 30 लाख 67 हजार लोगों को इस स्कीम के तहत टे©ंंिनग दी गई लेकिन उनमें से करीब 10 फीसद 2 लाख 90 हजार को ही नौकरी मिली। आईटी और फाइनेंस को छोड़कर दीगर सेक्टरों की 121 कंपनियों के रोजगार के आंकड़ों का मुताला करके पाया था कि बेश्तर कंपनियों में नोटबंदी के बाद रोजगार में कमी आयी है। बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड 107 कंपनियों में एक साल में मुलाजमीन की तादाद में 14,668 की कमी आयी।