दिल्ली और आस-पास के इलाकों में सांस लेना हुआ दुश्वार

दिल्ली और आस-पास के इलाकों में सांस लेना हुआ दुश्वार

अंदलीब अख्तर

नई दिल्ली! नई दिल्ली और पास-पड़ोस की रियासतों में फजाई आलूदगी (वायु प्रदूषण) की सतह इंसानी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हद तक पहुंच गई और यहां के माहौल में जहरीले मस्मोगफ की चादर तन गई है और अब यहां सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। दिल्ली में फजाई आलूदगी की संगीन सूरतेहाल के पेशेनजर रियासती सरकार ने एक हफ्ते के लिए सभी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। दिल्ली में लोग सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत कर रहे हैं। दिल्ली की हवा में आलूदगी की शरह में मखतरनाक हदफ हद तक  इजाफे के बाइस पब्लिक हेल्थ सेक्टर में इमरजेंसी नाफिज कर दी गई है। मोहकमा सेहत से जुड़े माहिरीन ने शहरियों को ताकीद की है कि वह गैर जरूरी तौर पर घरों से बाहर न निकलें।

दिल्ली के वजीर-ए-आला अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा कि हर साल दिल्ली में इस मौसम में एक महीने के लिए गैस चैम्बर में तब्दीली  हो जाती है, और हम सबको मिलकर  इसका कोई  हल तलाश करना होगा।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली में आलूदगी की सतह के पेशेनजर पब्लिक हेल्थ इमरजेसी का एलान कर दिया है। माहिरीन का कहना है कि लोगों को खास तौर से सुबह के वक्त टहलने से बचना चाहिए क्योंकि उस वक्त हवा सबसे ज्यादा आलूदा होती है। बहुत से लोग आंखों में जनल और गले में खराश की शिकायत कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा मुश्किल बच्चों और बुजुर्गों के लिए है। माहिरीन का कहना है कि जहां तक मुमकिन हो लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यूपी, पंजाब और हरियाणा की सरकारों से पूछा है कि उन्होने सूरतेहाल को खराब होने से बचाने के लिए क्या इकदामात किए थे।

पिछले साल भी दिल्ली में सूरतेहाल इतनी खराब हो गई थी कि सांस लेना मुश्किल हो गया था। उस वक्त कहा गया था कि यह सूरतेहाल दीवाली के मौके पर पटाखों के इस्तेमाल और हरियाणा पंजाब में खेतो में आग लगाए जाने की वजह से  हुई थी।

उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आर्डर दिया था कि सरकार हवा के मेयार को बेहतर बनाने के लिए मंसूबा तैयार करे। लेकिन माहिरीन का कहना है कि तमाम इकदामात हवा खराब होने के बाद किए जाते हैं, इसे खराब होने से रोकने के लिए नहीं।

इस सूरतेहाल में बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा मोहतात रहने का हिदायत दी गई है और खबरदार किया गया है कि आइंदा कुछ दिनों में आलूदगी की इस शरह में मजीद इजाफा भी हो सकता है।

इंडियन मेडिकी एसोसिएशन ने मतालबा किया था कि फजा में नुक्सानदेह जर्रों में इजाफे में कमी की खातिर फौरी तौर पर इकदामात उठाए जाएं। एसोसिएशन ने बताया कि नई दिल्ली के अवाम को आंखों में जलन और गले में तकलीफ की शिकायत का सामना है, जिसकी वजह शहर की फजा में खतरनाक जर्रों की मौजूदगी में खतरनाक हद तक इजाफा है। पिछले साल आलमी इदारा सेहत की जानिब से जारी किए जाने वाले एक जायजे के मुताबिक नई दिल्ली दुनिया के आलूदातरीन शहरों में से एक है।

माहौलियाती आलूदगी की यह शरह एक ऐसे वक्त में ज्यादा हुई है जब जर्मन शहर बून में  आलमी माहौलियाती कांफ्रेंस काप-23 का आगाज हो चुका है। यूएन के जेरे एहतमाम जारी इस इजलास में 195 मुल्कों के पच्चीस हजार से ज्यादा अफराद शिरकत कर रहे हैं, जो पेरिस कलाइमेट डील के तहत किए जाने वाले वादों पर अमलदरामद के लिए एक आलमी हिकमते अमली तैयार करने की कोशिश करेंगे।

नई दिल्ली में रिकार्ड किए जाने वाले डेटा के मुताबिक, दिल्ली एयर क्वालिटी इंडेक्स में 999 प्वाइंट के साथ दुनिया का आलूदातरीन शहर था। एयर क्वालिटी  इंडेक्स के मुताबिक अगर फजाई आलूगदी की सतह 500 प्वाइंट पर पहुच जाए तो वह इंसानी सेहत के लिए नुक्सानदेह हो जाता है। इसके मुकाबले में मैक्सिको सिटी, लास एंजिल्स और बीजिंग में फजाई आलूदगी 51 से 100 प्वाइंट तक दर्ज की गई जबकि लंदन और न्यूयार्क में  फजा में आलूदगी 1 से 50 प्वाइंट तक रही।

नई दिल्ली के बाद, चीन के बाउडिंग को 298 प्वाइंट के साथ दूसरा आलूदातरीन शहर करार दिया गया  जबकि वल्र्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स में भारत का शहर चन्दरपुर 824 प्वाइंट के साथ खतरनाक हद को पार कर गया।

इस बीच नई दिल्ली में स्मोग और बढती हुई फजाई आलूदगी के खिलाफ मुजाहिरे भी हुए। दूसरी तरफ आलूदगी से बचाव के मास्क बनाने वाले लोगों का कारोबार उरूज पर पहुच गया है।

माजी में भी नई दिल्ली की सरकार फजाई आलूदगी को कम करने के लिए कई इकदामात करती रही है, जिनमें मखसूस अवकात में डीजल गाड़ियों और  ट्रकों वगैरह के दाािख्ले पर पाबंदी शामिल है।

इसी तरह टै©ंफिक के दबाव को कम करने के लिए एक दिन आड और एक दिन इवेन नम्बर की प्लेट वाली गाड़ियोको सड़क पर आने की इजाजत देने की तजवीज भी सामने आई थी।