शिया-सुन्नी टकराव का सबब बन सकता है वक्फ बोर्डों मिलाना

शिया-सुन्नी टकराव का सबब बन सकता है वक्फ बोर्डों मिलाना

लखनऊ! शिया और सुन्नी फिरकों में झगड़ा डालने के मकसद से प्रदेश की योगी सरकार ने एक नया शोशा छोड़ा  है कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों को खत्म करके एक मउत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्डफ बना दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि औकाफ की इमलाक के फीसद के हिसाब से दोनों फिरकों के मेम्बर नामजद किए जाएंगे और उन्हीं में से किसी को सदर बना दिया जाएगा। चूकि सुन्नी वक्फ की इमलाक ज्यादा है लिहाजा यूपी सरकार के जरिए बने वक्फ बोर्ड मे चेयरमैन सुन्नी फिरके का होने का कवी इमकान है। शायद यही वजह है कि शिया वक्फ बोर्ड के मौजूदा चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस बात की सख्त मुखालिफत की है और स्टेट मिनिस्टर औकाफ मोहसिन रजा को कम पढा-लिखा बता दिया। सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने अलबत्ता इस बात का खैरमकदम किया है। लेकिन उन्होने यह कहकर सरकार के सामने दिक्कत खड़ी कर दी है कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों का अलग-अलग कयाम 1999 में उस वक्त की बीजेपी की कल्याण सिंह सरकार ने कराया था। उनकी इस बात से यह सवाल उठ रहा है कि क्या वक्फ बोर्डाें के सिलसिले में बीजेपी की पिछली (कल्याण सिंह) सरकार का फैसला गलत था। समाजवादी पार्टी में वजीर औकाफ रहे मोहम्मद आजम खान ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के इंजमाम (विलय) के सख्त खिलाफ हैं।

समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार में वजीर औकाफ रहे मोहम्मद आजम खान ने कहा कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों को खत्म करके एक दूसरा बोर्ड बनाना बिल्कुल गलत है। वह इस बात की सख्त मुखालिफत करते हैं। उन्होने कहा कि वह जब खुद वजीर थे तो उन्होने दोनों बोर्डाें के इंजमाम (विलय) को लागू नहीं किया था। उन्होेेंने कहा कि बीजेपी को नहीं मालूम कि पार्लियामेंट से ऐसा जाब्ता (नियम) बने जमाना हो गया है। इसके लिए बीजेपी को माफी मांगनी चाहिए। आजम खान की बात पर बीजेपी के कई लोगों का कहना है कि आजम खान की मदद से वसीम रिजवी ने बड़ी तादाद में औकाफ की जमीने बेची हैं। मजीद बेचने के चक्कर में हैं। इसीलिए यह गुरू-चेले नहीं चाहते कि शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड एक हो। इन लोगों का कहना  है कि अगर दोनों बोर्ड एक हो गए तो फिर शायद वक्फ की जायदादें आसानी से बिक न सकें। जबकि वसीम रिजवी और आजम खान दोनों का कहना है कि योगी सरकार का मंशा दोनों वक्फ बोर्डों को खत्म करके एक नया बोर्ड बनाकर  औकाफ की जायदादों को खुर्द-बुर्द करना है।

उत्तर प्रदेश सरकार करप्शन के इल्जामात से घिरे सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड का इंजमाम (विलय) करके मउत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्डफ बनाने पर गौर करेगी। इसके लिये इंतजामिया से तजवीज मांगी गई है। प्रदेश के वक्फ मिनिस्टर स्टेट मोहसिन रजा ने बताया कि उनके  पास खतों के जरिए ऐसे कई मशविरे आए हैं कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड का इंजमाम कर दिया जाए। ऐसा करना कानूनन सही भी होगा। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश और बिहार को छोड़कर बाकी 28 सूबों में एक-एक ही वक्फ बोर्ड है। वक्फ एक्ट-1995 भी कहता है कि अलग-अलग शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड बनाने के लिये कुल वक्फ इमलाक में किसी एक तबके की कम से कम 15 फीसद हिस्सेदारी होना लाजमी है। यानी अगर वक्फ की कुल 100 यूनिट हैं तो उनमें शिया वक्फ की कम से कम 15 यूनिट होनी चाहिये। उत्तर प्रदेश इस वक्त इस जाब्ते पर खरा नहीं उतर रहा है। उन्होंने कहा कि इस वक्त सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास एक लाख 24 हजार वक्फ यूनिट हैं जबकि शिया वक्फ बोर्ड के पास पांच हजार से ज्यादा यूनिट नहीं हैं, जो महज चार फीसद ही है।

कानूनन देखा जाए तो यह पहले से ही गलत चल रहा है। मोहसिन रजा ने कहा कि सुन्नी और शिया मुस्लिम वक्फ बोर्ड के इंजमाम के मश्विरे को संजीदगी से लेते हुए सरकार ने इस बारे में इंतजामिया से तजवीज मांगी है। लाॅ मोहकमे के जायजे के बाद तजवीज आएगी तो उस पर गौर करके मउत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्डफ बना दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ज्वाइंट बोर्ड बनने की सूरत में उसमें वक्फ इमलाक के फीसद के हिसाब से शिया और सुन्नी मेम्बर नामजद कर दिए जाएंगे। चेयरमैन उन्हीं में से किसी को बना दिया जाएगा। इस बीच, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने  मोहसिन रजा के इस बयान पर रद्देअमल में कहा कि फिलहाल तो शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों का कयाम अप्रैल 2015 में हो चुका है। उनकी मुद्दतकार पांच साल की होगी। वक्फ कानून में ऐसा कोई जाब्ता नहीं है कि चलते हुए बोर्ड को तहलील (भंग) कर दिया जाए। जब बोर्ड का टर्म खत्म हो जाए, तब सरकार जांच कराए कि किसके कितने वक्फ हैं और उनकी आमदनी क्या है। उन्होंने बताया कि वक्फ एक्ट में यह भी कहा गया है कि वक्फ की कुल आमदनी में किसी एक वक्फ बोर्ड का शेयर कम से कम 15 फीसद होना चाहिये। अगर हुसैनाबाद ट्रस्ट की आमदनी को शामिल कर दिया जाए तो कुल आमदनी में शिया वक्फ बोर्ड की हिस्सेदारी 15 फीसद से ज्यादा हो जाएगी। फिलहाल यह मामला अदालत में है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने कहा कि सरकार अगर शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों का इंजमाम करना चाहती है तो वह इसका इस्तकबाल करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 1999 में उस वक्त की कल्याण सिंह सरकार ने इन दोनों बोर्ड की अलग अलग तश्कील की थी।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या मौजूदा बीजेपी सरकार की नजर में उसी की पार्टी की उस वक्त की सरकार का फैसला सही नहीं था। मोहसिन रजा ने कहा कि सेंट्रल वक्फ कौंसिल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पास महज तीन हजार वक्फ यूनिट हैं। अगर हम उसको पांच हजार भी मान लेते हैं तो भी अलग शिया वक्फ बोर्ड रखने का कोई मतलब नहीं हैं। अलग-अलग चेयरमैन, सीईओ और दीगर स्टाफ रखने से फुजूलखर्ची ही होती है। इससे सरकार पर बोझ बढ़ता है। मालूम हो कि सेंट्रल वक्फ कौंसिल ने उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बेजाब्तगियों की शिकायत पर जांच करायी थी। पिछली मार्च में आयी जांच रिपोर्ट में तमाम शिकायतों को सही पाया गया था।

वक्फ के स्टेट मिनिस्टर मोहसिन रजा ने शिया और सुन्नी बोर्ड को लेकर अलग-अलग तैयार की गयी रिपोर्ट वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। मोहसिन रजा के मुताबिक करप्शन के इल्जामात से घिरे उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड जल्द ही तहलील (भंग) किए जाएंगे। वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिलने के बाद इसपर अमल शुरू कर दिया जाएगा।

दोनो वक्फ बोर्डों को खत्म करके एक वक्फ बोर्ड बनाए जाने की खबरों से परेशान शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने प्रदेश के वक्फ वजीर स्टेट मोहसिन रजा पर अयोध्या में राम मंदिर तामीर में रूकावट पहुचाने का इल्जाम लगाया है। वसीम ने कहा कि यह कहना कि शिया वक्फ कुल औकाफ की तादाद से मौजूदा वक्त में 15 फीसद कम है इसलिए शिया व सुन्नी दोनों बोर्डों को एक कर दिया जाएगा। कम जानकारी की वजह से दिया गया बयान है। वकफ बोर्डों के इंजमाम (विलय) के मामले को राम मंदिर से जोड़ते हुए वसीम रिजवी ने मीडिया से कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के जरिए राम मंदिर को लेकर हाई कोर्ट में मंदिर के हक में जो हलफनामा दाखिल किया गया है उससे कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम इदारे व धर्मगुरू घबराए हुए हैं।

वसीम रिजवी ने कहा कि 1941 में शिया और सुन्नी अलग-अलग वक्फ बोर्डाें की तश्कील  (गठन) हुई थी। उस वक्त शिया वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड प्रदेश के कुल औकाफ से 15               फीसद ज्यादा थे। जिसकी वजह से वह आज तक अलग-अलग हैं। वसीम का कहना है कि वक्फ एक्ट के मुताबिक सिर्फ औकाफ की तादाद (संख्या) को नहीं औकाफ की आमदनी को भी बुनियाद बनाया है। प्रदेश के तमाम औकाफ की कुल आमदनी में शिया औकाफ की आमदनी 15 फीसद से ज्यादा है। जिसकी वजह से प्रदेश में शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड एक नहीं किए जा सकते।

औकाफ के वजीर ममलिकत मोहसिन रजा व उनके हामियों का कहना है कि चूंकि शिया वक्फ बोर्ड ने वक्फ की जमीनों को सबसे ज्यादा रामपुर और बरेली में बेचकर आजम खान को करोड़ों की रकम दी जो उन्होने अपनी जौहर युनिवर्सिटी में लगाई है इसीलिए वह वक्फ बोर्डों के इंजमाम के खिलाफ हैं। रही बात वसीम की तो उसके खिलाफ चूंकि वक्फ की जायदादें बेचने के मामलात की जांच चल रही है इसीलिए वह बेसिर पैर के इल्जाम लगा रहे हैं। मोहसिन रजा का कहना है कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वक्फ को अपनी बपौती समझते हैं इसीलिए निहायत अहमकाना दलील लेकर आए कि चूंकि बाबरी मस्जिद बनाने वाला मीर बाकी शिया था लिहाजा मस्जिद शिया वक्फ बोर्ड की है। लेकिन वक्फ बोर्ड सिर्फ निगरां होता है मालिक नहीं इसलिए उसे अपनी प्रापर्टी किसी को देने का हक नहीं होता है। चूंकि वसीम रिजवी ने पूरे प्रदेश के मुख्तलिफ अजला में इसी तरह औकाफ की प्रापर्टी बेची है लिहाजा वह जांच और जेल जाने के खौफ से घबराए हुए हैं और वक्फ बोर्डों के इंजमाम (विलय) को राम मंदिर तामीर में रूकावट बता रहे हैं। मोहसिन रजा का कहना है कि वसीम का यह कहना भी गलत है कि शिया वक्फ की आमदनी कुल औकाफ की आमदनी का 15 फीसद है। वह सवाल करते हैं कि अगर यह बात सही मान ली जाए कि अलग शिया वक्फ बोर्ड बनाते वक्त शिया औकाफ की तादाद कुल औकाफ के 15 फीसद से ज्यादा थी तो वह औकाफ और उसकी जायदादें अब कहां चली र्गईं कौन बेच कर खा गया, शिया औकाफ की तादाद कम कैसे हुई इसका जवाब तो शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन को देना ही चाहिए।