राष्ट्रपति ने की टीपू की तारीफ, बीजेपी हुई बेइज्जत

राष्ट्रपति ने की टीपू की तारीफ, बीजेपी हुई बेइज्जत

”सदर जम्हूरिया (राष्ट्रपति) ने टीपू सुल्तान की तारीफ की, भारतीय जनता पार्टी और आर.एस.एस. की हुई तौहीन“।

बैंगलोर! सदर-ए-जम्हूरिया (राष्ट्रपति) रामनाथ कोविंद के मुंह से मशहूर टीपू सुल्तान की तारीफ सुनकर टीपू को फिरकापरस्त और हिन्दू मुखालिफ हुक्मरां करार देने पर तुले आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के प्रोपगण्डा गरोह को न सिर्फ जबरदस्त धक्का लगा बल्कि अवामी तौर पर उन्हंे मातूब (अपमानित) भी होना पड़ा। नार्थ कन्नडा से लोग सभा और अब मोदी के वजीर अनन्त कुमार हेगड़े तक टीपू मुखालिफ मुहिम में लगे हुए हैं कर्नाटक सरकार ने दस नवम्बर को बड़े पैमाने पर टीपू का जन्म दिन मनाने का प्रोग्राम बनाया है।

सदर-ए-जम्हूरिया रामनाथ कोविन्द ने मैसूर के साबिक हुक्मरां टीपू सुल्तान की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक बहादुर देशभक्त थे और अंग्रेजों से लड़ते हुए उन्होंने हीरो जैसी मौत पाई। उनकी बहादुरी का जिक्र करते हुुए उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान तरक्की और मैसूर की राकेट के इस्तेमाल के मूजिद थे। बेंगलुरु में विधान सुधा के 60 साल पूरे होने की डायमण्ड जुबली तकरीबात मवज्र महोत्सवफ में कर्नाटक असम्बली के दोनों सदनों के मेम्बरान को खिताब करते हुए उन्होने कहा कि टीपू सुल्तान की इस टेक्नोलाजी को यूरोपी कौम ने अख्तियार किया। उन्होंने साइंस, टेक्नोलाजी, आर्ट और सकाफत में रियासत के कारनामों की तारीफ की। रामनाथ कोविन्द का यह बयान कुछ दिन पहले टीपू सुल्तान से मुताल्लिक तनाजे के उठने के बाद सामने आया है क्योंकि कर्नाटक सरकार ने 10 नवंबर को टीपू सुल्तान के यौमे पैदाइश पर तकारीब मनाने का मंसूबा तैयार किया है। कर्नाटक कानूनसाज असम्बली और कौंसिल  सेक्रेटेरिएट के 60 साल की तकमील के मौके पर खिताब करते हुए सदर ए जम्हूरिया ने कहा कि अंग्रेजों से लड़ते हुए टीपू सुल्तान ने हीरो की तरह मौत पाई। वह जंगी राकेट के मैसूर में इस्तेमाल में माहिर थे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के अवाम की ख्वाहिशात की इज्तिमाई तौर पर नुमाइंदगी यह दोनों सदन करते हैं। इसी दौरान बीजेपी के लीडरों ने इन तकारीब के दावतनामे को मुस्तरद करते हुए उसे एक शर्मनाक तकरीब करार दिया। मरकजी वजीर अनंत कुमार हेगडे ने टीपू सुल्तान की जयंती की तकरीब में उन्हें बुलाने पर सरकार पर नुक्ताचीनी की और कहा कि उन्हें इस तकरीब के लिए मदऊ (आमंत्रित) नहीं किया जाए।

उन्होंने मेम्बरान पर जोर दिया कि वह बामायनी जम्हूरियत को हकीकत की तरफ ले जाने के लिए शाइस्ता मेयार बरकरार रखें। याददहानी करवाई कि पार्लियामेंट मुबाहिस शाइस्तगी  और फैसला करने का मकाम है और उसी के जरिए हम जम्हूरियत को बामायनी हकीकत में बदल सकते हैं। रियासत से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी लीडरों ने जो मैसूर के हुक्मरां टीपू सुल्तान के यौमे पैदाइश पर तकरीब की मुखालिफत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम महज इस इमारत (विधान सुधा) की 60वीं सालगिरह नहीं मना रहे हैं बल्कि दोनों सदनों में बहस मुबाहिसे, बिलों और पालीसियों की मंजूरी की डायमण्ड जुबली भी मना रहे हैं, जिनसे कर्नाटक के अवाम की जिंदगी में बेहतरी आई है। असम्बली के दोनों एवानों ने मुश्तरका तौर पर  और इज्तिमाई तौर पर कर्नाटक के लोगों की ख्वाहिशात और तवक्कोआतं की नुमाइंदगी की है। न सिर्फ यह कि दोनों एवानों ने कन्नाडीगा अवाम के नजरियात, मुसबत सोच, तवानाई और फआलियत की नुमाइंदगी की है। यह इमारत कर्नाटक में अवामी खिदमात की एक तारीखी यादगार है। दोनों एवानों की कार्रवाइयों में सियासत की जिन अजीम हस्तियों ने  हिस्सा लिया वह सभी यहां मुलाकातें करती थीं।  उन शख्सियतों ने बहुत सी यादगार तकरीरें की हैं।

सदर ए जम्हूरिया ने कहा कि कर्नाटक के ख्वाब न सिर्फ कर्नाटक के लिए नहीं है, बल्कि यह ख्वाब पूरे भारत के लिए है। कर्नाटक मईशत का एक इंजन है यह एक छोटा भारत है जो अपनी सकाफत और लसानी इम्तियाज को खोए बगैर देश के नौजवानों को अपनी तरफ रागिब करता है। यह नौजवान यहां इल्म और रोजगार के लिए आते हैं और यहां वह जिस्मानी और जेहनी मेहनत करते हैं और यहां से फायदा उठाते हैं।

सदर-ए-जम्हूरिया (राष्ट्रपति) ने कहा कि कानूनसाज अवामी खिदमतगार भी हैं और कौम के मेमार भी हैं। यकीनन हर वह शख्स जो अपने फरायज  ईमानदारी से निभाता है और खुद को वक्फ करते हुए अंजाम देता है, वह कौम का मेमार  है। जो लोग इस इमारत को बरकरार रखते हैं वह देश के मेमार हैं। जो इस इमारत की हिफाजत करते हैं वह कौम के मेमार हैं। यह आम शहरियों की कोशिशें हैं जिन्होंने रोजमर्रा का काम लगन से किया है जिसकी वजह से कौमों की तामीर होती है जब कानूनसाज अरकान विधान सुधा में बैठते हैं और काम करते हैं उन्हें एतमाद होता है कि वह उसे नहीं भूलेंगे और उससे लगातार जज्बा हासिल करते रहते हंै।

सदर ए जम्हूरिया ने कहा कि हम कानूनसाजिया के तीनों पहलुओं से वाकिफ हैं कि यह मुबाहिसे, इंहिराफ और कतई फैसलों की जगह है और अगर हम चैथे पहलू वकार को भी इसमें शामिल कर लें तो पांचवां उंसुर जम्हूरियत भी एक हकीकत  बन जाएगा। कानूनसाजिया कर्नाटक के अवाम की ख्वाहिशात, तवक्कोआत और उम्मीदों का एक नमूना है जो सियासी अकायद, जात-पात और मजहब, नस्ल या जबान से अलग है। इसमें कानूनसाजिया के दोनों एवानों की इज्तिमाई दानिशमंदी की जरूरत है ताकि अपने अवाम के ख्वाबों को पूरा कर सकें।

सदर ए जम्हूरिया ने कहा कि यह कानूनसाज असम्बली और कानूनसाज कौंसिल ही है जो जम्हूरियत के मुकद्दस मंदिरों के तौर पर काम करती हैं और सियासी और पालीसी के अमल की सतह को ऊपर उठाने में तआवुन देती हैं। कर्नाटक के अवाम के नुमाइंदे के तौर पर दोनों एवानों के अरकान की यहां पर खुसूसी जिम्मेदारी है। उन्होंने कानूनसाज अरकान से कहा कि वह इस डायमण्ड जुबली का जश्न सिर्फ काबिले फख्र माजी के तौर पर न मनाएं बल्कि एक अजीम मुस्तकबिल के तयीं अपने अज्म के तौर पर भी मनाएं।

मुश्तरका एजलास से अपने खिताब के दौरान रामनाथ कोविन्द की जानिब से 18 वीं सदी के मैसूर के हुक्मरां टीपू सुल्तान की तारीफ पर रियासत में हुक्मरां  कांग्रेस और अपोजीशन बीजेपी के बीच बड़े पैमाने पर सियासी इल्जाम तराशियां शुरू हो गई हैं और दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के सख्त तंकीद का निशाना बनाया है। रियासती हुकूमत की जानिब से दस नवंबर को मैसूर के हुक्मरां की यौमे पैदाइश तकारीब मनाने के एलान पर पैदा हुए तनाजे के दरम्यान यह नई सियासी तब्दीली आई है। बीजेपी ने टीपू सुल्तान को मजहबी भेदभाव बरतने वाला और बेरहम कातिल करार देते हुए उन्हें खिराजे अकीदत की पेशकश की, मुखालिफत की थी।  रामनाथ कोविंद ने श्रीकृष्णा देवयाई कर्नाटक की मुख्तलिफ तारीखी शख्सियात के साथ टीपू सुल्तान के कारनामों का हवाला दिया। कर्नाटक मुकन्निना की डायमण्ड जुबली तकरीब में रामनाथ कोविंद के इस खिताब का हुक्मरां कांगे्रस के अरकान ने मेंजें थपथपाकर खैरमकदम किया। साबिक रियासत मैसूर के हुक्मरां टीपू सुल्तान, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कट्टर दुश्मन तस्लीम किए जाते हैं जो 1799 में श्री रंगापटनम में अपने किले की हिफाजत के लिए ब्रिटिश फौज से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे।

बीजेपी लीडर के एस ईश्वरप्पा ने वाक्ए की सख्त मजम्मत करते हुए रियासती सरकार पर सदर-ए-जम्हूरिया के ओहदे का बेजा इस्तेमाल करते हुए उनके खिताब में टीपू सुल्तान के नाम का हवाला शामिल करने का इल्जाम लगाया। ईश्वरप्पा ने कहा, सदर की जानिब से टीपू सुल्तान के हवाले  पर हम अगर एतराज करते तो इससे  प्रोटोकाल की खिलाफवर्जी हो सकती है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कारगुजार सदर दिनेश गंडो राव ने बीजेपी लीडरान के इल्जामात पर रद्देअमल का इजहार करते हुए कहा कि बीजेपी को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने (अपोजीशन लीडर ने)  यह कहने की कोशिश की कि सदर ए जम्हूरिया ने महज किसी की लिखी हुई तकरीर पढ़ी है वह (बीजेपी) सदारती ओहदे और सदर ए जम्हूरिया की तौहीन कर रहे हैं।  चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया ने ट्विटर पर लिखा कि रामनाथ कोविन्द को कर्नाटक मुकन्निना  से उनके मुदब्बिराना खिताब पर मुबारकबाद।

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