गुजराती नौजवानों से घिरे मोदी

गुजराती नौजवानों से घिरे मोदी

हार्दिक पटेल, जिगनेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर की टीम राहुल गांधी की फौज में तब्दील

”नरेन्द्र मोदी की मीटिंगों से भीड नदारद, एलक्शन का एलान तेरह दिन रूकवा कर नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के चार दौरे कर डाले, 11 हजार करोड के प्रोजेक्ट का एलान कर डाला और सैकडों वादे  अवाम से किए लेकिन लोग उनके वादों पर यकीन करने के लिए तैयार नहीं हैं। आम लोगों का कहना है कि पच्चीस साल से बीजेपी हुकूमत होनेे के बावजूद जो काम नहीं हुए उनके लिए नरेन्द्र मोदी वादे कर रहे हैं इन वादों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।“

 

”राहुल गांधी की अहमदाबाद मंे तारीखी पब्लिक मीटिंग देखकर परेशान बीजेपी ने मडर्टी ट्रिक्सफ अख्तियार करते हुए एक वीडियो वायरल कराया कि मीटिंग मंे लोगों को पैसे देकर बुलाया गया दो घंटे के अंदर ही हकीकत सामने आ गई कि वह वीडियो दो मार्च 2017 का मणिपुर का है। मोदी हुकूमत ने एक होटल से निकलते हुए हार्दिक पटेल का वीडियो भी वायरल कराया इल्जाम लगाया कि वह राहुल गांधी से पैसे लेकर निकल रहे हैं। यह भी झूट साबित  हुआ।“

 

 

”हार्दिक पटेल के आंदोलन मंे शामिल रहे उनके नजदीकी नरेन्द्र पटेल, निखिल सवानी, वरूण पटेल और रेशमा पटेल को 26 सितम्बर को बीजेपी में शामिल कराकर अमित शाह ने एक बडा तीर मारने का दावा किया था। बाद में नरेन्द्र पटेल ने मीडिया के सामने दस लाख रूपए पेश करते हुए कहा कि उन्हें एक करोड रूपए देने के वादे पर तोडा गया था दस लाख रूपए एडवांस दिए गए थे इससे भी बीजेपी की बहुत थू-थू हुई।“

 

अहमदाबाद! तेरह दिनों में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की जानिब से गुजरात के लिए ग्यारह हजार करोड़ के लुभावने प्रोजेक्ट्स का एलान, भावनगर के दाहेज से घोघा के दरम्यान समन्दर में रो-रो फेरी सर्विस समेत कई आधे अधूरे कामों का इफ्तेताह और खुद की मुखालिफत करने वालों को एक पैसा भी मरकजी सरकार से न देने के एलान कराने के बाद आखिर 25 अक्टूबर को चीफ एलक्शन कमिशनर ए के ज्योति ने मजबूरन हिमाचल के एलक्शन प्रोग्राम के एलान के तेरहवें दिन गुजरात असम्बली के एलक्शन के प्रोग्राम का एलान करके एक बड़ी सियासी जंग की शुरूआत करा दी। इस दरम्यान गुजरात में तेजी के साथ उभर कर सामने आए पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल, बैकवर्ड लीडर अल्पेश ठाकोर और दलित लीडर जिगनेश मेवाणी ने इस एलक्शन में चारों तरफ से वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी का घेराव कर दिया। अल्पेश ठाकोर ने तो 23 अक्टूबर को एक बडे जलसे में कांग्रेस लीडर राहुल गांधी के साथ डायस पर आकर कांग्रेस में शामिल होने का एलान किया और अगले ही दिन नरेन्द्र मोदी से कई गुना ज्यादा बड़ी रैली करके अपनी ताकत का एहसास भी करा दिया। खबर लिखे जानेे तक हार्दिक पटेल और जिगनेश मेवाणी कांग्रेस मंे बाकायदा शामिल तो नहीं हुए थे लेकिन दोनों नें ही कांग्रेस के साथ जाने और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी को उखाड़ फेंकने का एलान कर दिया था। तीन गुजराती नौजवानों और चैथे राहुल गांधी से घिरे वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने इन तीनों के खिलाफ पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगा दी। 25 अक्टूबर को मेहसाणा की एक अदालत से हार्दिक पटेल के खिलाफ गैर जमानती वारण्ट भी जारी हो गया अगले दिन वह अदालत में हाजिर हुए। मोदी ने साफ-साफ धमकी गुजरातियांे को दे दी कि उनके मविकासफ की मुखालिफत करने वालों को भारत सरकार एक पैसा भी नहीं देगी। मडर्टी पालिटिक्सफ में महारत हासिल कर चुकी भारतीय जनता पार्टी ने होटल ताज उम्मेद का एक सीसीटीवी फुटेज पुलिस के जरिए टीवी चैनलों मंे चलवा कर इल्जाम लगा दिया कि हार्दिक पटेल तो होटल में राहुल गांधी से मोटी रकम लेने गए थे। मोदी के बनाए हुए डिप्टी चीफ मिनिस्टर नितिन पटेल ने एलक्शन को फिरकावाराना रंग देने की कोशिश में इंतेहाई घटिया बयान देेते हुए कहा कि एलक्शन जीतने के लिए राहुल गांधी पाकिस्तानी दहशतगर्द सरगना हाफिज सईद की भी मदद ले सकते हैं। इसपर हार्दिक पटेल के हामियों ने कहा है कि नितिन पटेल ने हार्दिक पटेल की मिसाल हाफिज सईद से देकर पूरे पटेल समाज की तौहीन की है। बीजेपी सदर अमित शाह ने 26 सितम्बर को हार्दिक पटेल के पांच करीबी साथियों को तोड़ कर बीजेपी  में शामिल करके इसे अपना मास्टर स्ट्रोक बताया था उनमें से नरेन्द्र पटेल और निखिल सवानी ने 23 अक्टूबर को कई इल्जामात लगाकर बीजेपी से ताल्लुक खत्म करने का एलान कर दिया। नरेन्द्र पटेल  ने तो बाकायदा दस लाख रूपए मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि वरूण और रजनी पटेल के साथ उन्हें बीजेपी के प्रदेश सदर जीतू भाई वगानी ने बुलाकर एक करोड़ रूपए देने के एवज में बीजेपी में शामिल होने को कहा था दस लाख एडवांस दिए थे। चारोे तरफ से घिरे नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर खुद को सबसे बड़ा और तेज कहने वाले चैनल मआजतकफ का सहारा मिल गया। इस चैनल ने 24 अक्टूबर को एक सर्वे दिखाकर दावा किया कि गुजरात के 76 फीसद लोग नरेन्द्र मोदी के  साथ हैं। इसलिए बीजेपी प्रदेश असम्बली की 182 में से 115  से 125 तक सीटें जीत रही है। इसी चैनल ने चन्द दिन पहले एक सर्वे दिखाकर कांग्रेस को जीतता हुआ बताया था। अब उसी चैनल ने बता दिया कि कांग्रेस को सिर्फ 57 से 65 तक सीटें मिलेंगी। अब खबर है कि हर तरफ से घिरे नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने एक बार फिर मजहब के नाम पर असम्बली का मौजूदा एलक्शन भी लड़ने की हिकमते अमली (रणनीति) पर काम करना शुरू कर दिया है।

एलक्शन कमीशन के एलान के मुताबिक गुजरात की 182 असम्बली सीटों का एलक्शन दो मरहलों (चरणों) में होंगे। पहले मरहले में नौ दिसम्बर को 89 सीटों की पांेलिंग होगी और 14 दिसम्बर को दूसरे मरहले में 93 सीटों की पोलिंग होगी। सभी 182 सीटों पर वोटों की गिनती हिमाचल प्रदेश असम्बली के साथ ही 18 दिसम्बर को होगी। यानी 18 दिसम्बर को दो पहर बाद तक पता चल जाएगा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश मे अगली सरकार किस पार्टी की बनेगी।

2001 मंे गुजरात की सत्ता संभालने के बाद नरेन्द्र मोदी अब तक असम्बली और लोक सभा के तीन-तीन एलक्शन लड़ चुके हैं। असम्बली के 2002 एलक्शन में उनकी कयादत में उनकी पार्टी को 2007 और 2012 मे मिलने वाली सीटों में भले ही कमी आती गई हो असम्बली में मुकम्मल अक्सरियत हासिल करने में उन्हें कभी परेशानी नहीं हुई।2002 में गोधरा हादसे या मुबय्यना (कथित) साजिश और पूरे गुजरात में इंसानियत के कत्लेआम के बाद हुए एलक्शन में मोदी ने 182 में से 127 सीटंे जीती थीं। 2007 मंे दस सीटें कम होकर 117 और 2012 मंेे 115 पर पहुच गई। 2004, 2009 और 2014 तीन लोक सभा एलक्शनों में भी गुजरात में मोेदी की कयादत में नुमायां कामयाबी हासिल की। 2014 में तो उन्होने प्रदेश की तमाम लोक सभा सीटें जीत ली थी।

इस बार जो हालात दिख रहे हैं उनमंे मोदी की सियासी कश्ती आसानी से  पार लग जाएगी इस पर किसी को यकीन नहीं हो रहा है। प्रदेश के जिन तीन नौजवानों हार्दिक पटेल, जिगनेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर ने मोदी और बीजेपी को चारों तरफ से घेर रखा है उनकी उम्र भले ही कम है मगर उन तीनों का जादू पाटीदारों, दलितों और पिछड़ों के सर चढ कर बोल रहा है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और पार्टी जनरल सेक्रेटरी से मुलाकात करके उन तीनों ने अपना मौकुफ भी वाजेह (स्पष्ट) कर दिया है कि इस एलक्शन में वह लोग बीजेपी को हराने का काम करेगे। चूंकि गुजरात में दो ही पार्टियां हैं इसलिए बीजेपी को हराने की सूरत में कांगे्रस को ही फायदा मिलेगा। इसके बावजूद इन तीनों के जलसों और अवामी मीटिंगों में शामिल होेेने वाली  भीड़ में रोज बरोज इजाफा ही होता जा रहा है। मोदी को घेरने वाले एक नौजवान हार्दिक पटेल की तो अभी तक असम्बली एलक्शन लडने लायक उम्र भी नहीं हुई है। खुद मोदी तो इन तीनों के खिलाफ सीधे कुछ बोलने से बचते हैं लेकिन उनके खिलाफ हर एजेसी को लगा रखा है। आप कांग्रेस के साथ क्यों जा रहे हैं इस सवाल पर हार्दिक पटेल ने बडी सफाई के साथ कहा कि अगर मुल्क में कांग्रेस मजबूत रहेगी तो जम्हूरियत (लोकतन्त्र) भी रहेगी। भारतीय जनता पार्टी मजबूत रही तो डिमाक्रेसी नहीं रहेगी। उन्होने कहा कि कांगे्रस, बीजेपी और किसी भी पार्टी में शामिल होना उनका जम्हूरी हक है।

इन तीनों के घेराव और तीनों के ऊपर राहुल गांधी के हमलों से परेशान वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने अपनी हर तरह की फौज लगा दी है। किसी के भी खिलाफ मडर्टी सियासतफ करने वाली बीजेपी की टीम ने राहुल गांधी की 23 अक्टूबर की तारीखी पब्लिक मीटिंग अहमदाबाद के गांधी मैदान मंे हुई तो उसे देखकर बीजेपी और पूरे आरएसएस परिवार पर ऐसी बौखलाहट तारी हो गई कि फौरन एक वीडियो वायरल करके इल्जाम लगा दिया गया कि अहमदाबाद की रैली में कांग्रेस ने पैसे देकर भीड इकट्ठा की थी। वीडियो में दिखाया गया कि कांग्रेस के झण्डे और पोस्टर हाथों में उठाए हुए कुछ लोगों को कतार में खडा करके बाकायदा नोट दे रहे है। दो घंटे के अन्दर ही यह  झूट पकड़ गया जब पता चला कि वह वीडियो तो दो मार्च 2017 का मणिपुर का था जहां म्युनिस्पिल एलक्शन हो रहा था। इससे पहले मोेदी सरकार ने अहमदाबाद के होटल ताज उम्मेद से हार्दिक पटेल को एक लैपटाप बैग लेकर निकलते हुए सीसीटीवी की वीडियो वायरल करा कर इल्जाम लगाया कि हार्दिक पटेल राहुल गांधी से पैसे लेकर निकल रहे हैं।

अवाम में पकड खोती बीजेपी और नरेन्द्र मोदी ने गुजरात मंे अपने जमाने मंे हुए तमाम एलक्शन की तरह इस एलक्शन को भी मजहबी रंग देना शुरू कर दिया। डिप्टी चीफ मिनिस्टर नितिन पटेल ने शगूफा छोडा के एलक्शन जीतने के लिए राहुल गांधी दहशतगर्द सरगना हाफिज सईद की मदद भी ले सकते हैं तो बीजेपी के तर्जुमान संबित पात्रा ने एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान निखिल वासानी सें साफ साफ सवाल किया कि निखिल आप गुजरात के लीडर की हैसियत से मोदी-अमित शाह और विजय रूपानी को देखना चाहते हैं या अहमद पटेल को। संबित पात्रा गुजरातियों को यह मैसेज देना चाह रहे थे कि गुजरातियों केा अहमद पटेल या किसी मुसलमान को अपना लीडर नहीं मानना चाहिए। इससे  पहले 2012 के असम्बली एलक्शन में खुद नरेन्द्र मोदी यही कर चुके है।। उस वक्त केशुभाई पटेल की इलाकाई पार्टी का कांगे्रस के साथ समझौता हुआ था तो मोदी पूरे गुजरात मंे यह तकरीर करते फिर रहे थे कि कांग्रेस तो ममियां अहमद पटेलफ को गुजरात का अगला वजीर-ए-आला बनाने की साजिश कर रही है। मतलब साफ है कि मोदी की नजर में किसी मुसलमान का गुजरात या किसी दूसरे प्रदेश का वजीर-ए-आला बनना एक साजिश है। इस बार अभी तक मोदी ने तो इस तरह की जुबान बोलना शुरू नहीं किया है लेकिन अपने चेलों और गुलामों को उन्होनेे इस काम पर जरूर लगा दिया है।

कहते है कि जब बुरे दिन आते हैं तो आदमी का हर काम उल्टा हो जाता है। कुछ ऐसा ही  इस वक्त गुजरात मंे बीजेपी के साथ हो रहा है। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रिसिंपल सेक्रेटरी रहे ए.के. ज्योति को चीफ एलक्शन कमिशनर बनवाया, ज्योति ने हर बार की तरह हिमाचल प्रदेश और गुजरात असम्बली एलक्शन का एलान करने के बजाए सिर्फ हिमाचल का एलान किया। उन्हेंनेे नरेन्द्र मोदी को तेरह दिन का मौका दे दिया तो मोदी ने जल्दी-जल्दी गुजरात के चार दौरे कर डाले। इस बीच ग्यारह हजार करोड के प्रोजेक्ट का एलान कर दिया। हार्दिक पटेल पर चल रहे देशद्रोह के मुकदमे समेत पाटीदार आंदोलन के दौरान 463 पटेलों पर कायम किए गए डेढ सौ से ज्यादा मुकदमे वापस ले लिए। मोदी ने एलान किया कि काश्तकारों को तीन लाख रूपए का कर्ज सूद के बगैर दिया जाएगा। सफाई मुलाजमीन की नौकरियां मुस्तकिल की जाएगी। असिस्टेट एलेक्ट्रीशयंस की तनख्वाहों में इजाफा किया जाएगा। दर्जा चार तक के सरकारी मुलाजमीन को दीवाली बोनस दिया जाएगा। प्रदेश के आठ लाख बीस हजार सरकारी मुलाजमीन के डीए में एक फीसद का इजाफा किया जाएगा। म्यूनिस्पिलटी मुलाजमीन आईआईटी और दीगर टीचरांेे की तंख्वाहंे बढाई जाएगी। मा वात्सल्य मेडिकल इशोरेस को लिमिट ढाई लाख रूपए कर दी जाएगी। भावनगर के कलियाविट इलाके के उन पन्द्रह हजार मकानों को रेगुलराइज कर दिया जाएगा जो चालीस साल से तोड़े जाने का खतरा झेल रहे है। आशा हेल्थ वर्कर्स  की तंख्वाह बढाई जाएगी ड्रिप आबपाशी सिस्टम के आलात (उपकरणों) पर अदा की जाने वाली 18 फीसद जीएसटी की रकम को सरकार काशतकारांे को वापस करेगी। सरकारी ग्राट के बगैर चलने वाले स्कूल कालेजों में दस साल की मुलाजिमत पूरी कर चुके टीचरों की नौकरियां मुस्तकिल कर दी जाएगी।

मोदी ने इस तरह के वादों की झडी लगा दी लेकिन लोगों ने उनकी बातों पर यकीन नहीं किया। उनके बडौदा रोड शो मे भीड़ इकट्ठा नहीं हुई दिल्ली से एलान करके गए थे कि सौराष्ट्र में सात लाख लोगों की पब्लिक मीटिंग करने जा रहे हैं। मौके पर 70 हजार लोग भी इकटठा नहीं हुए तमाम सीटें खाली पडी रही। वह उत्तर प्रदेश के वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ को बुलाकर गुजरात ले गए। एक दिन में तीन पब्लिक मीटिंग लगवाई। किसी भी मीटिंग मंे एक हजार लोग भी इकटठा नहीं हुए। उनका रोड शो  कराया गया तो उसमें लोग सडक पर नहीं आए। यह देखकर मोदी और बीजेपी का परेशान होना लाजिमी हैं उन्हें इस बात की परेशानी है कि राहुल गांधी, हार्दिक पटेल, जिगनेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर की मीटिंगों मेें भीड रोज बरोज बढ़ती जा रही है। एलक्शन का एलान तेरह दिन रूकवाकर जो सैकडों एलानात कर डाले। वह एलान करते वक्त वजीर-ए-आला विजय रूपानी या प्रदेश सरकार के किसी नुमाइंदे को साथ तक नहीं रखा। गुजरात के आम लोग यह कह रहे हैं कि 25 साल से प्रदेश मंें बीजेपी की सरकार बारह साल तक खुद मोदी वजीर-ए-आला रहे, साढे तीन साल  से वह वजीर-ए-आजम हैं अभी तक उन्होने कुछ काम नहीं किया तो अब उनके नए वादों को झूटा ही समझा जाएगा उनपर किसी को एतबार नहीं है।