अरूण जेटली ने दिया बंैकांेे को दो लाख करोड का बूस्टर डोज

अरूण जेटली ने दिया बंैकांेे को दो लाख करोड का बूस्टर डोज

मुल्क की मईशत को पटरी पर लाने और डूबते को बचाने के लिए नौ लाख करोड का पैकेज

 

नई दिल्ली! नादहिंदों को कर्ज देकर डूबते बैंकांे को बचाने के लिए एक साल पहले वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की खुराक दी थी जब उससे भी कुछ फायदा नहीं हुआ तो गुजिश्ता 24 अक्टूबर को फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने दो लाख ग्यारह हजार करोड रूपए के बूस्टर लगाने की तशखीस की। इसका कितना असर होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इतना साफ हो गया कि नीम हकीमी मरज की पेचीदगी को बढा देती है। नोटबंदी के जरिए बैंकों की खस्ताहाली दूर करने के नुस्खे ने मुल्क की मईशत (अर्थव्यवस्था) को ही बीमार बना दिया। हालांकि गुजिश्ता बरस आठ नवम्बर को रात साढे आठ बजे एक हजार और पांच सौ के नोटों के रद्दी के टुकडे मंे बदलने का एलान किया था तो यह कहा था कि इससे काला धन बाहर आएगा जाली नोटों के धंधे पर लगाम लगेगी और इससे बढकर यह कि दहशतगर्दाे और माओवादियों की कमर टूटेगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उल्टा नोटबंदी ने बडे बडों की कमर तोड दी और पूूरे मुल्क को परेशानियों और दिक्कतों मंे मुब्तला कर दिया। नोटबंदी के फैसले का मनफी बसर यह हुआ कि तरक्की करती मुल्क की मईशत ही पटरी से उतर गई। मुल्क एक साल से यह सुनने का मुुंतजिर है कि कितना काला धन बैंकों में आया। कहा जा रहा है कि नोट गिनने का काम जारी है जब मुकम्मल होगा तब बताया जाएगा।

24 अक्टूबर को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की सदारत में काबीनाकी मीटिंग हुई उसमें कई अहम फैसले लिए गए। काबीना के फैसलों की जानकारी देते हुए फाइनेस मिनिस्टर अरूण जेटली ने अगले पांच साल का मआशी मंसूबा पेश किया और बताया कि मईशत की रफ्तार को तेज करने के लिए नौ लाख करोड के पैकेज का फैसला लिया गया है। इस पैकेज में सात लाख करोड रूपए की लागत से तिरासी हजार किलोमीटर की कौमी शाहराहें बनाई जाएंगी वहीं बैंकों को दो लाख करोड से ज्यादा दिए जाएगे। जो सात लाख रूपए सडकों की तामीर में खर्च किए जाएगंे उनकी मुद्दत पांच साल है जबकि बैंकों के दो लाख ग्यारह हजार करोड की रकम मरिकैपिलटलाइजेशनफ के नाम पर जल्द दस्तयाब करा दी जाएगी। इस एलान का शेयर बाजार में मुसबत असर दिखाई दिया और शेयर होल्डर्स ने अगले ही दिन दो लाख करोड कमा लिए। जबकि बैंकों के शेयर्स मंे छियालीस फीसद तक का उछाल दर्ज किया गया। पैकेज के एलान के बाद शेयर बााजर का इंडेक्स अपनी नई ऊंचाइयों पर पहुच गया चाहे वह मुंबई स्टाक एक्सचेंज का इंडेक्स हो नेशनल स्टाक एक्सचेज का निफटी।

नौ लाख करोड रूपए के पैकेज को एलान किए जाने की माहिरीने मआशियात ने भी तारीफ की है बाज ने यह भी कहा कि अगर पैकेज का एलान साल दो साल पहले होता तो मुल्क की मईशत में जो सुस्त रवी पाई जा रही है उससे बचा जा सकता था। मुल्क के सबसे बडे सरकारी बैक स्टेट बैंक आफ इंडिया की जानिब से कहा गया है कि बैंकों की पूंजी मंे इजाफा एक बडा सुधार है। इससे कर्ज की तकसीम बढेगी और रोजगार भी पैदा होगे। यह बात एसबीआई की एक रिपोर्ट इनकोरेप में कही गई। रिपोर्ट के मुताबिक बैंकिंग शोबे मंेे सरकारी बैंकों की सत्तर फीसद हिस्सेदारी है। इस मंसूबे से सरकार मुद्रा स्कीम मंे कर्ज देने मंे इजाफा करने में मदद मिलेगी। जिसमंे सबसे ज्यादा रोजगार देने के मौके हैं। पैकेज के एलान के बाद मोडीजइंसविस्टर सर्विस की जानिब से कहा गया कि बैेंकों में दो लाख ग्यारह हजार करोड की सरमायाकारी को मंसूबा साख के लिए मुसबत है। मरकजी सरकार के चीफ मआशी मुशीर अरविन्द सुब्रामण्यम के मुताबिक बैंेकों की पूजी बढाने के लिए रिकैपिटलाइजेशन बांण्ड जारी करने से सरकार पर सूद की शक्ल में करीब नौ हजार करोड का बोझ पडेगा और इस कदम से महंगाई बढने का कोई इमकान नहीं नजर आ रहा हैं रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि दो लाख ग्यारह हजार करोड से बैंकों  की नवसरमायाकारी स्कीम मुल्क की मआशी मुस्तकबिल के तहफ्फुज की सिम्त में एक तारीखी कदम है।

फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने नौ लाख करोड रूपए के पैकेज का एलान करते हुए सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि बैंेकों को डूबने से बचाने के लिए दो लाख ग्यारह हजार करोड का पैकेज दिया जा रहा है बल्कि इससे पहले उन्होने यह कहा कि मुल्क की मईशत को रफ्तार देने के लिए भारत माला प्रोजेक्ट को मिलाकर अगले पांच सालों में तिरासी हजार किलोमीटर की कौमी शाहराहों की तामीर पर छः लाख 90 हजार करोड रूपए खर्च किए जाएंगे और यह प्राजेक्ट उस वक्त तक पूरा कर लिया जाएगा जब मुल्क 2022 मे अपनी आजादी की 75वीं सालगिरह मनाएगा। इसमें सत्तर फीसद रकम मरकजी सरकार खर्च करेगी जबकि 30                 फीसद निजी हिस्सेदारी से हासिल की जाएगी। भारत माला प्रोजेक्ट मंे जिन तिरासी हजार किलोमीटर की कौमी शाहराहें बनाने के अज्म का इजहार किया गया है वह कैसे पांच साल में पूरी हांेगी उसकी तफसील नहीं बताई गई है। लेकिन मोदी सरकार बनने के बाद हाईवे की तामीर पर बहुत जोर दिया जा रहा है। वजीर ट्रांसपोर्ट नितिन गडकरी ने हर साल पन्द्रह हजार किलोमीटर सडक बनाने का निशाना रखा था लेकिन 2016-17 में सिर्फ आठ हजार दो सौ किलोमीटर सडकों की तामीर हो पाई। नौ लाख करोड का पैकेज दरअस्ल बैंकों को डूबने से बचाने के लिए नहीं बल्कि कारपोरेट सेक्टर को फिर से कर्ज देने की गरज से दिया गया है।  कौमी शाहराहों की तामीर की बात तो सानवी है।