घपलों घोटालों की मोदी हुकूमत

घपलों घोटालों की मोदी हुकूमत

डिफेन्स और हेल्थ मिनिस्ट्री में घोटाले, छत्तीसगढ़ में जमीन घोटाला, अमित शाह के बेटे का घोटाला

 

”हावित्जर-777 तोप घोटाला, हेल्थ मिनिस्ट्री में घोटाला, वी.के. सिंह पर कई इल्जामात, छत्तीसगढ़ के वजीर बृजमोहन अग्रवाल का जमीन घोटाला, वैंकयानायडू के बच्चों की मोटर कम्पनी और ट्रस्ट पर इल्जाम। अब सबसे बड़ा इल्जाम अमित शाह के बेटे पर। ईमानदार हैं तो मोदी लालू और और चिदम्बरम की तरह इन सबकी भी तहकीकात कराएं।“

 

”मोदी की मेहरबानियां और नोटबंदी के बाद रामदेव पर दौलत कैसे बरसने लगी। हरिद्वार के घाटों पर लावारिस घूमने वाला नेपाली लड़का 43 हजार करोड़ का मालिक कैसे बन गया। देश के सौ दौलतमंदों में वह उन्नीसवें नम्बर पर कैसे पहुंच गया। मोदी और उनकी सरकार को बताना चाहिए कि कोई भी लावारिस बच्चा किस धंधे के जरिए इतने पैसे कमा सकता है।“

 

”बीजेपी, उसकी सरकार और उसके लीडरान पर लगने वाले एक भी इल्जाम की तहकीकात कराने की हिम्मत नरेन्द्र मोदी नहीं कर सके। सारी एजेंसियों को लालू यादव, पी. चिदम्बरम और वीरभद्र सिंह के कुन्बों के खिलाफ लगा दिया। यह कहां की ईमानदारी है और इल्जामात की तहकीकात कराए बगैर खुद को ईमानदार बताने का क्या मतलब है।“

 

नई दिल्ली। अमित शाह के बेटे जयशाह की कम्पनी ”शाह टेम्पल इण्टरप्राइजे़ज़ प्राइवेट लिमिटेड“ तीन साल यानी 2013 से मुसलसल खसारे में थी। 2016 में कम्पनी ने अचानक 80 करोड़ पचास लाख कमा लिए, इतनी मोटी कमाई करने के बावजूद अगले ही साल कम्पनी बंद हो गई क्योंकि बहुत ज्यादा खसारा (घाटा) हो गया। इससे पहले अमित शाह भी खुद अपनी आमदनी में 400 गुने का इजाफा महज पांच सालों में दिखा चुके थे। मोदी खामोश है। डिफेन्स मिनिस्ट्री ने अमरीका से खरीदी गई हावित्जर 777 तोपों का सौदा खत्म नहीं किया जबकि पहली ही तोप ट्रायल में फट गई, हेल्थ मिनिस्ट्री के जिस घोटाले में हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज समेत तकरीबन एक दर्जन लोग जेल में है। उन लोगों ने जिन मेडिकल कालेजों के मामलात ठीक कराने के लिए करोड़ों की सौदेबाजी की थी उन मेडिकल कालेजों की फाइलें नीचे से ठीक होकर हेल्थ मिनिस्टर जे.पी. नड्डा के दफ्तर पहुंच चुकी थीं सीबीआई ने भांडा फोड़ दिया तो हेल्थ मिनिस्टर के दफ्तर से फाइले वापस की गई क्या मिनिस्टर की जानकारी के बगैर यह मुमकिन था? कुछ सालों पहले तक हरिद्वार के घाटों पर लावारिस घूमने वाला एक बच्चा बालकृष्ण बड़ा होकर योग व्यापारीय रामदेव के साथ हो लिया तो मुल्क में नोट बंदी होते ही वह लावारिस मुल्क के सौ दौलतमंदों की फेहरिस्त में उन्नीसवें नम्बर पर पहुंच गया। वह अब 43 हजार करोड़ की जायदाद का मालिक है। खुद रामदेव के पास तीन सालों खुसूसन नोटबंदी के बाद से बेशुमार दौलत आ गई। नोटबंदी के बाद से रामदेव और जयशाह जैसे मोदी के करीबियों पर जिस अंदाज में दौलत की बारिश हुई है उसे देखकर अरूण शोरी का यह बयान बिल्कुल सच दिखने लगा है कि ”नोटबंदी देश में अब तक मनीलाण्डरिंग का सबसे बड़ा घोटाला है जो बाकायदा एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया।“ खबर है कि बैंकों में नोट जमा करने की आखिरी तारीख तीस दिसम्बर 2016 तक चालीस से पैंतालीस फीसद कमीशन पर और उसके बाद 80-85 फीसद कमीशन पर पुराने नोट तब्दील कराने का धन्धा बड़े पैमाने पर चला है। छत्तीसगढ़ के वजीर और बीजेपी के सीनियर लीडर बृजमोहन अग्रवाल ने जंगलात मोहकमा और गरीब बेजमीन आदिवासियों को पट्टे पर दिए जाने वाली सत्ताइस एकड़ जमीन पर नाजायज कब्जा करके अपना रिसार्ट बना लिया, रिसार्ट बनाने में भी सरकारी पैसा खर्च कराया कोई कार्रवाई नहीं। मुल्क के नायब सदर (उपराष्ट्रपति) बन चुके साबिक मरकजी वजीर वेंकया नायडू के बेटे की टोयटा मोटर एजेन्सी ”हर्ष टोयटा“ और उनकी बेटी दीपा वेंक्ट के ”स्वर्ण भारत ट्रस्ट“ को बेईमानी के जरिए करोड़ों का फायदा पहुंचाया गया। महाराष्ट्र से राजस्थान तक जहां जहां बीजेपी सरकारें है हर जगह हजारों करोड़ के घोटाले सामने आ चुके है। मोदी के चहीते वजीर साबिक आर्मी चीफ वी.के. सिंह की बीवी ने तिलक मार्ग थाने में अपने ही पुराने फार्म हाउस के मैनेजर के खिलाफ ब्लेकमेल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई फिर रिपोर्ट वापस ले ली क्यों? खबर है कि आर्मी चीफ रहते हुए वी.के. सिंह ने जो मुबय्यना (कथित) घपले किए थे उनका पुराना मैनेजर सब जानता था इसलिए अपना हिस्सा मांग रहा था। पूरे मुल्क में बीजेपी लीडरान पर घपलों और घोटालों के जितने इल्जामात लगे नरेन्द्र मोदी ने एक की भी तहकीकात नहीं होने दी और दावा यह कि उनकी सरकार में कोई घपला                           नहीं हुआ। सवाल यह है कि जब अपने एक भी घपले की तहकीकात नहीं होने दी तो पाक साफ होने का दावा क्यों? दूसरी तरफ मोदी ने मुल्क मंे लालू यादव और पी. चिदम्बरम के कुन्बे के पीछे सीबीआई समेत मुल्क की तमाम एजेन्सियां लगा रखी हैं। यह कौन सी ईमानदारी है?

अमित शाह के बेटे जयशाह की मटेम्पल इण्टरप्राइजेजफ नाम की कम्पनी के जरिए बेईमानी की गई इसका सबूत यह भी है कि कम्पनी के घोटालों पर खबर जारी करने वाले पोर्टल ”द वायर“ पर खबर आते ही अमित शाह और जय शाह मीडिया से छुपते रहे लेकिन मरकजी वजीर रेलवे पियूष गोयल और उत्तर प्रदेश के हेल्थ मिनिस्टर सिद्धार्थ नाथ सिंह समेत कई वजीरों और पार्टी तर्जुमानों ने सफाई देने के लिए मोर्चा संभाला पियूष गोयल ने तो यह भी एलान कर दिया था कि जय शाह मद वायरफ पोर्टल पर सौ करोड़ का हतक इज्जत का मुकदमा दायर करेंगे। मुकदमा अहमदाबाद की निचली अदालत में पहुंचा भी लेकिन आगे इसलिए नहीं बढ़ सका कि जय शाह का वकील पेशी पर अदालत गया ही नहीं। मतलब क्या है जो पार्टी किसी पर मुकदमा करेगी वही अदालत से भाग खड़ी होगी।

अमित शाह के बेटे जय शाह पर इतना संगीन इल्जाम लगा, अमित शाह या उनके बेटे जय शाह ने अगर सफाई देना मुनासिब नहीं समझा तो पियूष गोयल, सिद्धार्थ नाथ सिंह, बीजेपी के सभी तर्जुमान और मरकजी लीडरान को उनकी तरफ से सफाई पेश करने का कौन सा कानूनी या अख्लाकी (नैतिक) हक हासिल हो गया। यह तो ऐसे ही है जैसे जिस पर चोरी का इल्जाम लगे, वह घर में छुपा बैठा रहे और मोहल्ले वाले कहते फिरे कि वह तो चोर हो ही नहीं सकता। जितनी जल्दबाजी में पियूष गोयल जयशाह की सफाई देने कूद पड़े उसका भी भांडा फूट चुका है, क्योंकि बिजली मिनिस्टर रहते हुए पियूष गोयल ने शेयर ट्रेडिंग और जरई पैदावार (कृषि उत्पादों) के शोबे (क्षेत्र) में काम करने वाली जय शाह की कम्पनी टेंपल इंटर प्राइजे़ज को न सिर्फ बिजली प्रोजेक्ट के ठेके दिला रखे थे। सिर्फ ठेके ही नहीं दिलाए थे बल्कि अपने कन्ट्रोल में आने वाले पब्लिक सेक्टर इदारे से दस करोड़ पैंतीस लाख का कर्ज भी बगैर किसी जमानत के दिला दिया था इसी तरह राजेश खण्डवाला नाम के एक शख्स की कम्पनी ने भी 15 करोड़ 78 लाख का कर्जा दे दिया। जबकि खण्डवाला की कंपनी की कुल हैसियत ही ग्यारह करोड़ से कम है। इतना ही नहीं 51 करोड़ रूपया जय शाह की कंपनी टेंपल इंटरप्राइजेज को विदेश से आया है। अस्सी करोड़ 50 लाख तक का टर्न ओवर पहुंचाने वाली जय शाह की कंपनी खसारा बताकर अगले ही साल बंद भी कर दी गई। ऐसा शातिराना घोटाला आज तक न सुना गया न तो देखा गया। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी बार-बार कहते रहे हैं कि वह बेईमानी (भ्रष्टाचार) से लड़ रहे है वह न खाएंगे न खाने देंगे। अब साबित हो चुका है कि खाने न दूंगा वाला जुमला उन्होंने मुल्क के आम लोगों और गरीबों के लिए कहा था, अपने लोगों के लिए बिल्कुल नहीं कहा था। अब तो आर.एस.एस. के सीनियर लीडर दत्तात्रेय होसबोले भ्ीा जय शाह पर लगे इल्जाम की तहकीकात कराने के लिए कह चुके है फिर भी राजनाथ सिंह ने कहा कि तहकीकात की जरूरत ही नहीं है।

मोदी की डिफेंस मिनिस्ट्री ने अमरीका के साथ हावित्जर-777 तोप का सौदा किया है जो पहली दो तोपे आई, उसमें से एक का ट्रायल गुजिश्ता दो सितम्बर को पोखरन में किया गया तो उसकी नाल ही फट गई। उसके साथ आई दूसरी तोप का ट्रायल भी नहीं लिया गया और सौदा रद्द भी नहीं किया गया। ऐसी क्या मजबूरी है। बजाहिर तो ऐसा ही लगता है कि सौदे में बड़ा घपला हुआ है इसलिए सौदा जारी है। हेल्थ मिनिस्ट्री के जिस घोटाले में हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज समेत एक दर्जन से ज्यादा लोग जेल पहुंच चुके है उसमें भी उन कालेजों की फाइलों की तहकीकात नहीं कराई गई जिन फाइलों को ठीक करने के लिए करोड़ों का घपला और रिश्वतखोरी की बात सामने आई।

एक तरफ मोदी हुकूमत का यह हाल है कि बिहार में बैठे बीजेपी लीडर सुशील मोदी ने लालू यादव और उनके कुन्बे के खिलाफ जितने भी इल्जाम लगाए, अगले ही दिन सब पर तहकीकात का आर्डर हो गया। तो फिर बीजेपी और उससे जुड़े हुए लोगों पर जो इल्जामात लगे उनकी तहकीकात क्यों नहीं। अमित शाह के बेटे जय शाह की कम्पनी पर लगे इल्जाम की तहकीकात हो यह बात साफ तौर पर आर.एस.एस. लीडर दत्तात्रेय होसबोले ने कही, बाद में शायद मोदी का दबाव है या कुछ और कि आर.एस.एस. की जानिब से यह कह दिया गया कि अगर जय शाह के खिलाफ सुबूत हो तो जांच कराई जाए। सवाल यह है कि सुबूत तो जांच एजेंसी इकट्ठा करेगी पहले तो जितने सुबूत थे वह खबर में आ ही चुके है। अब अगर सरकार इस हठधर्मी पर उतरी है कि वह दूसरों के दिए सुबूतों पर एतबार ही नहीं करेगी तो इसका क्या इलाज है? जहां तक सुबूत का ताल्लुक है, छत्तीसगढ़ के वजीर ब्रजमोहन अग्रवाल तो खुद ही कह रहे है कि उनकी बीवी और बेटे ने जो रिसार्ट बनाया है उसकी तहकीकात करा दी जाए अगर जमीन जंगलात मोहकमे की निकले तो वह छोड़ देंगे। फिर भी सरकार तहकीकात कराने के लिए तैयार नहीं है। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ के 36 में से 22 जिले इस बार जबरदस्त खुश्कसाली (सूखे) का शिकार हो गए इन जिलों में पांच-दस कुंटल भी धान पैदा नहीं हुआ इसके बावजूद रमन सिंह सरकार ने पहले कहा कि 17 लाख टन धान खरीद का निशाना (लक्ष्य) रखा गया है, कीमत के अलावा काश्तकारों को बोनस भी दिया जाएगा।  आनन फानन 22 हजार करोड़ रूपए धान की कीमत और बोनस के नाम पर खर्च कर दिए गए। जब धान पैदा नहीं हुआ था तो यह पैसा किस पर खर्च किया गया। इसमें भी किसी सुबूत की जरूरत है।

26 मई 2014 को मोदी हुकूमत बनी उसके बाद पूरे देश के जज्बात उभार कर फायदा उठाने के लिए खुद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने हर मौके पर गंगा का जिक्र किया। बार-बार कहा गया कि गंगा साफ करके दिखाएंगे, इसके लिए किसी जमाने की फायर ब्रांड बीजेपी लीडर कही जाने वाली उमा भारती को गंगा की सफाई का मिनिस्टर बना दिया गया। यह कहा गया कि गंगा की सफाई को लेकर सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं है साढ़े तीन साल में गंगा की सफाई के नाम पर तकरीबन 11 सौ करोड़ खर्च कर दिए गए लेकिन गंगा दो मीटर भी साफ नहीं हुई। हद यह है कि गंगा की सफाई के सिलसिले में जो मीटिंगे दिल्ली में बुलाई गईं, उन पर करोड़ों रूपए जरूर खर्च हो गए खुद उमा भारती ने एलान किया था कि अगर दिसम्बर 2018 तक वह गंगा की सफाई न करा पाई तो भागेंगी नहीं बल्कि गंगा में ही कूद जाएंगी। 2017 खत्म होने वाला है। एक मीटर भी गंगा साफ नहीं हु ई, करोड़ रूपए खर्च  भी हो गए मोदी ने उमा भारती को गंगा में कूदने से बचा लिया। उनसे गंगा की सफाई की जिम्मेदारी वापस लेकर नितिन गडकरी को सौंप दी। गंगा की सफाई के नाम पर जो करोड़ों रूपए खर्च दिखाए गए, अगर वह घपला नहीं है तो क्या है, इस घपले की तहकीकात के लिए मोदी हुकूमत और आर.एस.एस. को क्या सुबूत चाहिए?