समाजवादी में अखिलेश ही सब कुछ

समाजवादी में अखिलेश ही सब कुछ

आगरा! समाजवादी पार्टी के दसवें कौमी इजलास में अखिलेश यादव दूसरी बार न सिर्फ पार्टी के कौमी सदर चुन लिए गए बल्कि नेशनल एक्जीक्यूटिव की मीटिंग के बाद पार्टी सदर की मुद्दत कार तीन साल सेे बढाकर पांच साल कर दी गई। अखिलेश के जरिए पार्टी के सरपरस्त बनाए गए उनके वालिद मुलायम सिंह इस इजलास मंेे शरीक नहीं हुए, हालांकि अखिलेश ने उन्हें खुद मदऊ (आमंत्रित) किया था। खबर है कि वह आना भी चाहते थे मगर उनके छोटे भाई शिवपाल यादव ने उन्हें रोक दिया। इससे पहले अखिलेश यादव ने अपने चचा शिवपाल यादव से बात की और उन्हें भी शिरकत की दावत दी। शिवपाल यादव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और यह कहकर आने से इंकार कर दिया कि वह नेशनल एक्जीक्यूटिव के मेम्बर नहीं हैं। अखिलेश यादव अब पांच साल के लिए पार्टी के कौमी सदर बन गए हैं। यानि अब पार्टी में अखिलेश ही सब कुछ हैं। इन पांच सालो के दौरान लोक सभा और प्रदेश असम्बली के एलक्शन भी हो जाएंगे। जो अब अखिलेश की ही कयादत में समाजवादी पार्टी लड़ेगी।

सदर चुने जाने के बाद अखिलेश यादव ने मुखालिफीन खासकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। मरकजी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने व्यापारियों को तबाह कर दिया। उन्होने कहा कि देश के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। देश के सामने इस वक्त खासे मसायल है जिनसे हमको मिलकर लड़ना है। दूसरी बार सदर बने अखिलेश यादव की राह में अब कोई रोड़ा नहीं है। अब वह पार्टी के सारे फैसले खुद कर सकते है उन्हेे कोई रोकने वाला नहीं होगा। इस बार समाजवादी पार्टी के कौमी सदर के तौर पर अखिलेश ज्यादा मजबूत हुए है। अखिलेश की राह में सबसे बडी रूकावट उनके चचा शिवपाल यादव थे जो फिलहाल खामोश है। अब पार्टी में सीधे तौर पर शिवपाल अखिलेश के सामने कहीं नहीं टिकते दिखते। इस से पहले समाजवादी पार्टी में कई पावर सेंटर होने की बात कहीं जाती थी। कुछ फैसले मुलायम सिंह यादव लेते थे तो कुछ फैसले शिवपाल यादव किया करते थे। कई बार मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव के फैसले को भी पलट देते थे। जब अखिलेश यादव यादव यूपी के सीएम थे तब प्रदेश में साढे तीन सीएम होने की बात भी कही जाती थी लेकिन अब साफ हो चुका है कि समाजवादी पार्टी में बास अखिलेश यादव ही हैं।

मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश यादव को आशीर्वाद दे दिया है। अखिलेश ने कहा कि महमने इस बीच नेता जी (मुलायम सिंह) से कई बार बात की। हम चाहते थे कि नेता जी आएं।  नेता जी ने समाजवादी पार्टी के लिए भी नेक ख्वाहिशात भेजी हैं। अब यह बात साफ हो गई है कि मुलायम सिंह अपने भाई शिवपाल के साथ नहीं बल्कि बेटे अखिलेश के साथ हैं। इसको एक तरह से शिवपाल के सरेंडर के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी प्रदेश सदर नरेश उत्तम ने बताया कि नेशनल एक्जीक्यूटिव  की मीटिंग में मुस्तकबिल में पार्टी की हिकमते अमली को लेकर खाका खींचा गया। इसके अलावा यह फैसला लिया गया कि बीएसपी से कोई भी गठबंधन नहीं होगा। हालांकि कांग्रेस के साथ दोस्ती पक्की है, लेकिन लोकल बाडीज  चुनाव पार्टी अकेले दम पर ही लड़ेगी। मतलब साफ है कि अखिलेश यादव अपनी तैयारी में लग गए है अब वह नौजवानों में नया जोश लाना चाहते हैं और मुखालिफीन को पस्त करना चाहते हैं। अखिलेश के दोबारा सदर बनने के साथ ही यह तय हो गया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव और 2022 का उत्तर प्रदेश असम्बली चुनाव उन्हीं की कयादत में लड़ा जाएगा। यूपी के नगर निगम चुनावों के दौरान भी पार्टी से सारे फैसले अखिलेश यादव ही लेंगे। जिसकी तैयारी उन्होंने शुरू भी कर दी है।

पार्टी के कौमी इजलास के लिए आए अखिलेश यादव जब पांच अक्टूबर को सहाफियों से मुखातिब हुए तो उन्होने योगी और मोदी सरकार पर सख्त हमले किए मगर अखिलेश  अपने चचा शिवपाल यादव के लिए काफी नरम नजर आए। उन्होने कहा कि मेरी चचा शिवपाल से बात हुई है। उन्होने आशीर्वाद दिया है। प्रेस कांफ्रेस में अखिलेश ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, किसान के साथ कर्ज माफी के नाम पर धोका हुआ, नौजवान को नौकरी नहीं, जानबूझकर अहम मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। इन लोगों ने गाय और गोबर पर भी वोट मांगा था, क्रबिस्तान और श्मशान पर भी वोट मांगा था। कहा था अच्छे दिन आ जाएंगे कम से कम वो हकीकत सामने कब आएगी यह तो उनको, बीजेपी को बताना चाहिए।फ नोट बंदी ने कारोबारियों और आम आदमी की कमर तोड़ दी है।  योगी सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा, यूपी की सरकार का जो बजट है, मैंने एवान में भी कहा था कि तरक्की को रोकने वाला बजट है, यूपी की तरक्की पूरी तरह रूक गई है न पुल बन रहा है, न सड़क, न बिजली बेहतर हुई है, हेल्थ सर्विसेज ठप हुई हैं, सरकार कमियां छुपाने के लिए जांच के नाम पर जांच बैठा रही है।फ

गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा, सरकार आक्सीजन की कमी मान नहीं  रही है, जहां बच्चों की जान चली जाए, नौजवानों कौ नोकरी न मिले और तरक्की ठप हो जाए तो देश की तरक्की भी रुकती नजर आएगी। ताजमहल के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरते हुए अखिलेश ने कहा, ताजमहल उनके लिए कोई बड़ी चीज न हो लेकिन ताजमहल से हजारों लोगों की रोजी रोटी जुड़ी है। यह भारत की पहचान भी है यहां कारोबार-रोजगार मे हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई की एकता दिखाई देती है। इसीलिए जानबूझकर बीजेपी ऐसे मुद्दे उठा रही है। आगरा ने जिन लोगोें को जिताया है उनसे पूछो कि ताजमहल अच्छा है या खराब है।

उन्होंने आगे कहा, फेसबुक-वाट्सऐप पर आज सबसे ज्यादा निगेटिव सेंटीमेंट उन्हीं लोगों के खिलाफ हैं जो डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। इन्हीं लोगों ने जहर फैला-फैलाकर चुनाव जीता था लेकिन आज यह खुद निशाने पर हैं। हमारी पार्टी डिजिटल मामलों मे सबसे आगे थी। हमने लैपटाप बांटे लेकिन झूठ फैलाने में हम उनके सामने नहीं ठहर पाए। अगले चुनाव में वह फिर आपको कोई अफीम पकड़ा देंगे और आप बहक जाएंगे।

यादव ने कहा कि नौजवान समाजवादी पार्टी के साथ खडे हैं। परिवार में कहीं कोई टकराव नहीं है नेताजी के साथ चचा शिवपाल यादव ने भी आशीर्वाद दिया है। उन्होनेे कहा कि मरकज और यूपी की बीजेपी सरकारें नाइंसाफी कर रही हैं। उन्हें रोकना होगा और समाजवादी पार्टी ही इन्हें रोक सकती है। इन सरकारों ने अभी तक अवाम को परेशान करने के अलावा कोई भी काम नहीं किया है। नोटबंदी करके गरीबों, मजदूरों, आम आदमी और कारोबारियों की कमर तोड़ दी बची खुची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी है। इस इजलास में मुल्क की मुख्तलिफ रियासतों से 15 हजार से ज्यादा नुमाइंदों ने शिरकत की इस इजलास ने एक बात तक कर दी कि अब अखिलेश यादव ही समाजवादी पार्टी में सब कुछ हैं। वह जो चाहेगें पार्टी में अब वही होगा।