गुजरात में दलितों के कत्ल पर खामोश – बीजेपी-आरएसएस का केरल में हंगामा

गुजरात में दलितों के कत्ल पर खामोश – बीजेपी-आरएसएस का केरल में हंगामा

अहमदाबाद! आरएसएस के एक स्वयं सेवक के केरल मंे मारे जाने पर पूरा आरएसएस परिवार कुन्नूर जिले में शोर-शराबा करने पहुच गया। बीजेपी सदर अमित शाह ने केरल के वजीर-ए-आला पिनराई विजयन पर आरएसएस स्वयं सेवकों को कत्ल कराने का इल्जाम लगाकर उनके जिले में कोई आठ किलोमीटर लम्बी पदयात्रा कर डाली। दूसरी तरफ अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के अपने प्रदेश गुजरात में दलितों पर मुसलसल हो रहे मजालिम पर पूरे आरएसएस ने मुजरिमाना खामोशी अख्तियार कर रखी है। केरल जाने से पहले अमित शाह गुजरात में थे और गुजरात गौरव यात्रा निकाल रहे थे। उनकी यात्रा के दौरान ही आनन्द जिले के भद्रानिया गांव में 21 साल के एक दलित नौजवान जयेश सोलंकी को सिर्फ। इसलिए पीट-पीटकर कत्ल कर दिया गया कि कातिलों के मुताबिक उसने नवरात्रि पर होने वाला गरबा देखने की जुर्रत की थी। उसको सिर्फ पीट-पीट कर कत्ल ही नही किया गया बल्कि उसका सर दीवार से मार कर बुरी तरह तोड़ा भी गया। इतने संगीन और घिनौनी हरकत की अमित शाह ने मजम्मत तक नहीं की। अमित शाह की गुजरात गौरव यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले ही 29 सितम्बर को अहमद जिले में शहर से महज 15 किलोमीटर पर वाके लिम्बोदरा गांव में कुणाल महेरिया नाम के तीस साल के एक दलित नौजवान की गांव के ही सवर्णों ने यह कह कर बुरी तरह पिटाई कर दी थी कि महेरिया ने अंग्रेजों की तरह स्टाइलिश मूंछे क्यों रखी हैं। यही नहीं भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाले मध्यप्रदेश के गुना जिले के महूखान गांव में चालीस साल के एक दलित को गांव के सवर्णों ने यह कह कर तीस सितम्बर को पीट-पीट कर मार डाला कि  नीलम अहिरवार नाम के इस दलित ने उनके खेत से फसल की चोरी की है। चोरी का इल्जाम लगाने वाला दीन बंधु शर्मा है। उसी के कहने पर गांव के सवर्णों ने इकट्ठा होकर नीलम अहिरवार को पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस का कहना है कि अहिरवार को इस तरह कत्ल करने के इल्जाम में गांव के 24 सवर्णों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। नीलम अहिरवार को सिर्फ पीट-पीटकर मारा ही नहीं गया उसके घर पर धावा बोल कर सबकुछ तहस-नहस कर दिया गया। घर पर हमले में अहिरवार की बीवी को भी नहीं छोड़ा गया। जानवरों की तरह हुई पिटाई  में उसकी बीवी को कई संगीन चोटें आईं। उनका एक हाथ भी वहशी हमलावरों ने तोड़ दिया। नीलम अहिरवार का डरा-सहमा बेटा छोटू कहता है कि झूटा इल्जाम लगाकर उसके बाप को पीट-पीट कर मार डाला गया। यह कातिल अब मुझे और मेरी मां को भी कत्ल कर सकते हैं। इसी लिए वह पुलिस के पास नहीं जा रहा है।

गुजरात में दलित पर हो रहे मजालिम और हिंसा के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। अभी मूंछ रखने को लेकर दलित नौजवान कुणाल महेरिया के साथ मारपीट का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा है कि एक दलित नौजवान को गरबा देखने पर पीट-पीटकर कत्ल कर दिए जाने का मामला सामने आया है। मामला आणंद जिले का है, जहां गरबा देखने आए 21 साल के दलित नौजवान जयेश सोलंकी को पीट-पीट कर दिया गया। कत्ल का इल्जाम पटेल तबके  कुछ लोगों पर लगा है जो गरबा का इंतजाम कर रहे थे। इस वाक्ए को लेकर दलित तबके में जबरदस्त गुस्सा है। कुछ पटेलों का कहना है कि गुजरात मंे पटेलों और दलितों के इत्तेहाद से घबराई बीजेपी ने जयेश सोलंकी के कत्ल को जबरदस्ती पटेलों के सर मढ दिया है ताकि यह इकट्ठा न हों। इस मामले में दायर शिकायत का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि जयेश सोलंकी, उसका रिश्तेदार प्रकाश सोलंकी और दो दीगर लोग भद्रानिया गांव में एक मंदिर के बगल केे घर के पास बैठे थे। उस वक्त वहां गरबे का प्रोग्राम हो रहा था। तभी एक शख्स ने उनकी जात के बारे में तौहीन आमेज तब्सिरा (अपमान जनक टिप्पणी) किया। एक कातिल ने कहा कि दलितों को गरबा देखने का अख्तियार नहीं है। उसने दलितों की जात का नाम लेकर गालियां बकीं और अपने कुछ साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद जयेश समेत  बाकी सभी दलितों की पिटाई कर दी गई। कातिल कितने वहशी हैं कि उन्होेंने जयेश का सिर एक दीवार पर दे मारा। जयेश बुरी तरह जख्मी हो गया। अस्पताल में उसकी मौत  हो गई।

गुजरात में दलितों के खिलाफ मजालिम का यह कोई पहला मामला नहीं है। मुसलसल ऐसे वाक्यात में इजाफा हुआ है। क्योंकि बीजेपी सरकार इस पर पूरी तरह से आंख बंद किए हुए है जिससे जात, मजहब को बुनियाद बनाकर जरायम करने वालों के हौसले बढे हुए हैं। जयेश को फौरन करमसद अस्पताल ले जाया गया। उसे रात भर संगीन हालत में अस्पताल में रखा गया। सुबह डाक्टरों ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। डिप्टी एसपी एससी-एसटी सेल एएम पटेल ने बताया कि पुलिस ने तरहरीर की बुनियाद पर आठ लोगों के खिलाफ मजालिम एक्ट और कत्ल की दफाओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मुल्जिमान की गिरफ्तारी हो गई थी। पुलिस के डिप्टी एसपी  (एससी-एसटी सेल) एएम पटेल ने कहा कि कत्ल का वाक्या  जिस तरह बताया गया है उससे साफ है कि कत्ल  किसी प्लानिंग के तहत नहीं किया गया है। मुल्जिमान और मकतूल के दरम्यान  कोई दुश्मनी सामने नहीं आई है। वाक्या आपस में अचानक हुई गर्मा-गर्मी से पैदा हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस वाक्ए के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। मुल्जिमान को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गुजरात में दलितों पर मजालिम का यह कोई पहला वाक्या नहीं है। पिछले दिनों गुजरात में दलितों के खिलाफ मजालिम के कई मामले सामने आए हैं। हाल ही में स्टाइलिश मूंछ रखने पर दलित नौजवान के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। ऊना कस्बे में गौकुशी को लेकर चार दलित नौजवानों को सरेआम बेरहमी से पीटे जाने के वाक्ए के खिलाफ बड़ा आंदोलन भी हुआ था, लेकिन दलितों पर मजालिम के मामले नहीं थम रहे। इसकी वजह यह बताई गई है कि दलितों को सबक सिखाने और उनको उनकी औकात पर रखने की मुहिम के पीछे आरएसएस का हाथ है। गुजरात मंें 22 सालों से बीजेपी की सरकार है जिसपर पूरी तरह आरएसएस का कण्ट्रोल है।

भद्रानिया गांव में जयेश सोलंकी के  बेरहमाना कत्ल मामले में नामजद कातिलों के बारे में पुलिस का कहना है कि उनमें एक नाबालिग है, दो तालिब इल्म (विद्यार्थी) हैं, बाकी सभी खाते-पीते पटेल परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें 22 साल का दिपेश पटेल कालेज मंे पढता है वह गांव प्रधान सर्जिला पटेल का भतीजा है। 24 साल का संजय उर्फ भीमो पटेल वल्लभ विद्यानगर की एक प्राइवेट कम्पनी में अच्छी तंख्वाह पर नौकरी करता है। 27 साल का चिंतन पटेल घर से खाता-पीता है उसने दसवीं के बाद पढाई छोड़ दी थी वह बेरोजगार है। 27 साल का ही धवल पटेल युगाण्डा के कम्पाला में एक रिसार्ट में नौकरी कर रहा था तीन महीने पहले ही वह वापस अपने गांव आया था। जिग्नेश पटेल 34 साल का है वह काश्तकारी करता है। रित्विक पटेल 22 साल का है वह भदरान की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता है। उसका ताल्लुक स्वामी नारायण तबके से है। 22 साल का रिपेन पटेल कामर्स में ग्रेजूएट है वह भी भदरान की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता है। आठवां नाबालिग है। इस लिए उसकी शिनाख्त जाहिर नहीं की गई है। इन सभी का और उनके घर वालों का कहना है कि वह जयेश सोलंकी को मारने में शामिल नहीं थे सभी बेगुनाह हैं पुलिस ने उनपर झूटा केस दायर कर दिया है। सभी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

अहमदाबाद से महज 15 किलोमीटर के फासले पर कलोल ताल्लुका के लिम्बोदरा गांव के दो दलित नौजवानों 30 साल के कुरूनाल महेरिया और 24 साल के पियूष परमार को मोटर साइकिल पर जाते वक्त रोक कर बुरी तरह पीटा गया। पिटाई करने वाले गांव के सवर्णों का कहना था कि इन दोनों ने अंग्र्रेजों की तरह स्टाइलिश मूंछ क्यों रखी हुई है। गांव के एक दलित सतीश महेरिया ने कहा कि हम दलित नौजवानों पर सवर्णों के मजालिम आम बात हैं। खौफ की वजह से हमारे बुजुर्ग हम पर जुल्म करने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी नहीं करने देते। इतना ही नहीं गांव में जो बार्बर शाप है उनमें हम दलितों के बाल भी नहीं काटे जाते हैं। गांव में बार्बर शाप चलाने वाले विजय लिम्बछिया ने भी इस बात की तस्दीक करते हुए कहा  कि वह दलितों के बाल नहीं काटते हैं। उनकी दाढी भी नहीं बनाते हैं। क्यांेकि गांव के सवर्णोंे ने हमें ऐसी हिदायत दे रखी है। यह उस गुजरात का हाल है जहां 22 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है सबसे ज्यादा बारह सालों तक नरेन्द्र मोदी गुजरात के चीफ मिनिस्टर रहे हैं।