फिर सरगर्म हुआ लाल मस्जिद का मुल्ला बुर्का

फिर सरगर्म हुआ लाल मस्जिद का मुल्ला बुर्का

इस्लामाबाद! अमरीका की हराम की दौलत के जरिए इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के अहाते में दहशतगर्द पैदा करने वाला मस्जिद का साबिक इमाम अब्दुल अजीज दस साल बाद दुबारा सरगर्म हुआ है। अजीज के सरगर्म होते ही पाकिस्तान मे चल रहे दहशतगर्द गरोहों की तादाद में एक और इजाफा हो गया है। इस्लामाबाद में लाल मस्जिद से होने वाली दहशतगर्दी की हरकतों को काबू करने के लिए दस जुलाई 2007  को उस वक्त की परवेज मुशर्रफ हुकूमत ने फौज का हमला करा दिया था। बुजदिल अब्दुल अजीज बुर्का पहन कर औरतों के साथ निकल भागने की कोशिश में पकड़ा गया था। वह दस साल बाद फिर से सरगर्म हुआ है और कह रहा है कि पाकिस्तान में इस्लामी खिलाफत कायम करने के लिए उसने बड़ी तादाद में दहशतगर्द तैयार कर रखे हैं। उसने एलान किया है कि दहशतगर्दाें की नई फौज के सहारे वह पाकिस्तान हुकूमत पर कब्जा करेगा और खुद खलीफा बनेगा।

याद रहे कि अब्दुल अजीज को पाकिस्तान हुकूमत की मार्फत अमरीका ने करोड़ों डालर यह कह कर दिए थे कि वह लाल मस्जिद मेें दहशतगर्द पैदा करके अमरीकी फौजों की मदद के लिए अफगानिस्तान भेजेगा। काफी दिनों तक अब्दुल अजीज और उसका छोटा भाई यह काम करते रहे लेकिन हराम की अनाप-शनाप दौलत ने दोनों भाइयों का दिमागी तवाजुन इतना बिगाड़ दिया कि उन्होनेे अमरीका और पाकिस्तान हुकूमत दोनों को एक साथ आंखें दिखानी शुरू कर दी। नतीजा यह कि 2007 में अमरीका के कहने पर जनरल परवेज मुशर्रफ ने ठीक उसी तरह लाल मस्जिद पर फौज उतार दी जिस तरह कभी भिंडरावालां को खत्म करने के लिए इंदिरा गांधी ने अमृतसर के सुनहरी गुरूद्वारा पर आप्रेशन ब्ल्यू स्टार किया था। अब्दुल अजीज और उसके भाई ने लाल मस्जिद के कैम्पस में मदरसा तो खोल ही रखा था अंदर उसने अपना प्राइवेट टीवी और रेडियो स्टेशन भी कायम कर रखे थे। फौज ने जब लाल मस्जिद को घेरा और एलान किया कि औरतों को निकलने के लिए रास्ता दिया जाएगा तो अजीज ने अपने रेडियो और टीवी के जरिए एलान करना शुरू कर दिया कि पाकिस्तानियों घर से निकलो यह जेहाद का वक्त है। हमारे साथ मिलकर हुकूमत के खिलाफ जेहाद करो। इस एलान के ठीक पांच मिनट बाद उसने अपनी बीवी का बुर्का ओढकर फरार होने की कोशिश की और पकड़ा गया। तभी से उसका नाम ममुल्ला बुर्काफ भी पड़ गया। उसे आम तौर पर मुल्ला बुर्का ही कहा जाता है।

जब तक अब्दुल अजीज को पाकिस्तानी हुकूमत फौज और खुफिया एजेसी आईएसआई की हिमायत और पैसा मिलता रहा अब्दुल अजीज और उसका भाई दोनों अपनी ताकत बढाते रहे उनकी जहरीली तकरीरों से दहशतगर्दांे के हौसले बुलंद होते थे। दोनों भाइयों ने मिलकर कई हजार दहशतगर्द पैदा करके पाकिस्तान और अफगानिस्तान मे तैनात किए थे। उनके खिलाफ फौजी कार्रवाई हुई तो अजीज बुर्का ओढकर भागने की कोशिश मे पकड़ा गया। लेकिन उसका छोटा भाई नहीं भाग सका। क्योंकि उसकी बीवी हामिला थी और चंद घंटों में ही उसे बच्चा होने वाला था। वह फौज के हाथों मारा गया, उसके मरने के फौरन बाद उसकी बीवी ने एक बेटे को जन्म दिया था। लाल मस्जिद चलाने वाले दो मुल्ला भाइयों के पास असलहे की कितनी ताकत थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन्हें काबू करने के लिए फौज को एक हफ्ते तक इनसे बाकायदा जंग करना पड़ी थी। उस टकराव में सैकड़ोें लोग मारे गए थे और हजारों जख्मी हुए थे। पाकिस्तान हुकूमत का हाल यह है कि बाद में हुकूमत ने लाल मस्जिद के खिलाफ आप्रेशन करने के इल्जाम में जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमा भी चलाया था। वह मुकदमा अभी खत्म नहीं हुआ है। अब्दुल अजीज दस साल बाद अब फिर से सरगर्म हुआ है और कह रहा है कि अपने बनाए हुए दहशतगर्दों की ताकत पर पाकिस्तान में खिलाफत कायम करेगा और खुद ही पहला खलीफा बनेगा। अब देखना यह है कि पाकिस्तान की मौजूदा हुकूमत उसके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।