अखलाक के कातिलों को जमानत, चार्जेज फ्रेम नहीं

अखलाक के कातिलों को जमानत, चार्जेज फ्रेम नहीं

नोएडा! ठीक दो साल पहले 28 सितम्बर 2015 को दादरी के बिसाहडा गांव में गाय के गोश्त के बहाने मोहम्मद अखलाक नाम के उनचास साल के एक मुसलमान को उनके घर मे घुस कर एक भीड ने  पीट-पीट कर मार डाला था उस मामले में यूपी पुलिस का रवैया इतना यकतरफा है कि अब तक फास्ट टै©ंक कोर्ट मंे इस कत्ल के चार्जेज भी फ्रेम नहीं हो सके है। जबकि इस मामले के तमाम मुल्जिमान जमानत पर बाहर आ चुके है और पूरे मुकदमे को अपनी मर्जी के मुताबिक रंग देने की कोशिश मंे लगे हुए हैं। एक मुल्जिम की जेल में मौत हो गई थी बाकी सत्रह मुल्जिमान में आखिरी रूपेन्द्र कुमार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुजिश्ता आठ सितम्बर को पचास हजार के जाती मुचलके पर जमानत दे दी थी। इससे पहले पुनीत, विवेक, श्रीओम, हरिओम, सौरभ, विशाल, भीम वगैरह की जमानते होचुकी थीं। अखलाक को मारने वालों में सभी का ताल्लुक बीजेपी से था अब उत्तर प्रदेश मंें योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार है। नतीजा यह कि सरकारी वकील भी मुल्जिमान के साथ खडे नजर आते है। शायद इसीलिए गैंगस्टर एक्ट और कत्ल की दफा 302 समेत एक दर्जन संगीन दफात के मुल्जिमान को जमानतें मिल गईं। लेकिन मुकदमे में चार्जेज फ्रेम नहीं हुए।

मोहम्मद अखलाक कत्ल मामले में एक तरफ तो यह हो रहा है कि उनके कत्ल मंे मुलव्विस नामजद मुल्जिमान को जमानत मिल गई है और उनके खिलाफ फर्दे  जुर्म आयद करने मंे पुलिस नाकाम रही है तो दूसरी तरफ मोहम्मद अखलाक के पूरे कुन्बे को बेजड़ बुनियाद का बना दिया गया है। मोहम्मद अखलाक के अफरादे कुन्बा कहते हैं कि उन्हें अपने आबाई गांव जहां उनके आबा व अजदाद पैदा हुए और वहीं मौत पाई हमंे गांव छोंडने पर मजबूर किया गया। मोहम्मद अखलाक के बेटे 22 साल के दानिश की जिंदगी और कैरियर तकरीबन बर्बाद हो चुका है। वह किसी काम के लिए मेडिकली फिट नहीं रह गया है। मोहम्मद अखलाक के भाई जान मोहम्मद बताते हैं कि किस तरह हमलावरों ने उसके सरपर मशीन दे मारी थी कि उसका सर खुल गया था। दानिश सर के कई आपरेशनो के बाद बच तो गया लेकिन सारी जिंदगी माजूरों की जिंदगी गुजारेगा।ं पुरा कुन्बा अखलाक के कत्ल का इंसाफ मिलने का मुंतजिर है। सितम यह कि वह लोग भी इंसाफ का मतालबा कर रहे हैं जिन्होने मोहम्मद अखलाक को पीट-पीट कर मार डाला था कह रहे हैं कि जिन लोगों ने गाय के बछडे को मारा उसे भी तो इंसाफ मिले। बिसाहड़ा गांव से कुछ दूरी पर वाके दादरी कस्बा में गौरक्षक के नाम से मशहूर वैद्धनागर ने हिन्दू रोजनामा के नुमाइंदे से कहा कि  गाय के बछडे को काटने वालों को अभी तक सजा नहीं मिली है। वैद्धनागर ने कहा कि इस करतूत के लिए मोहम्मद अखलाक और जान मोहम्मद के खिलाफ ना तो मुकदमा कायम किया गया है और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इंसाफ सबके साथ बराबर होना चाहिए। अगर अखलाक को इंसाफ मिलता है तो गौमाता के कातिलों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिसे मुकद्दस जानवर तस्लीम किया जाता है। वाजेह हो कि पिछले साल जुलाई में यूपी पुलिस ने अखलाक और उसके कुन्बे वालों और जान मोहम्मद के खिलाफ उत्तर प्रदेश इंसदाद गौकुशी एक्ट 1955 केे तहत मुकदमा दर्ज किया था।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद गौरक्षक गुण्डों के हौसले बढे हुए हैं जो कसर थी वह आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने यह कहकर पूरी कर दी कि गौरक्षक अदालतों से परेशान न हों। पुलिस की पूरी कोशिश यही है कि जितना मुमकिन हो मुकदमे को खींचा जाए ताकि गोरक्षक गुण्डे बेलगाम होकर अंजाम देते रहें।