मुर्दा गाय के बहाने बुलंदशहर में दहशतगर्दी – मुसलमानों के घर लूटे मस्जिदों में घुस कर तोड़फोड़

मुर्दा गाय के बहाने बुलंदशहर में दहशतगर्दी – मुसलमानों के घर लूटे मस्जिदों में घुस कर तोड़फोड़

बुलंदशहर! एक तरफ पंचकुला में गुरमीत सिंह जैसे जानी ;बलात्कारीद्ध  के अंधे हामी आम शहरियों की जिंदगी दुश्वार बना रहे थे उसी वक्त बुलंदशहर से महज दस किलोमीटर के फासले पर वाके अदौली गांव में खुद को हिन्दू युवा वाहिनी के फौजी कहने वाले गुण्डे आम मुसलमानों के मकानात और गांव की दोनों मस्जिदों पर धावा बोलकर अपनी बहादुरी दिखा रहे थे। यह पूरा वाक्या एक तयशुदा साजिश का नतीजा था। बहाना गाय को बनाया गया। गांव के बाहर तालाब में एक मुर्दा गाय की लाश तैरती दिखी। फौरन ही हिन्दू युवा वाहिनी सरगर्म हो गई। मोबाइल फोन बजे और देखते ही देखते सैकड़ों गुण्डे गले में भगवा कपड़ा डाले मौके पर पहुच गए। गांव वालों के फोन पर शहर पुलिस कप्तान भारी पुलिस फोर्स के साथ गांव पहुच गए। पुलिस ने सबके सामने तालाब से गाय की लाश निकलवाई तो पता चला कि किसी की गाय मरी होगी तो गुण्डों ने उसके बहाने हंगामा करने की गरज से उसे तालाब में डाल दिया होगा। पुलिस ने गाय का पोस्ट मार्टम करा कर उसे दफ्न कर दिया और लोगों को समझा बुझाकर वापस चली गई।

गांव से पुलिस के हटते ही मोटर साइकिलों और टैªक्टरों पर सवार सैकड़ों गुण्डे पहुचे और देखते ही देखते मुसलमानों के घरों व दोनों मस्जिदों पर हमला हो गया। गुण्डों के तेवर देखने के बावजूद पुलिस अफसरान फोर्स को वापस ले गए। अगर दस.पन्द्रह पुलिस वालों को गांव में ही शाम तक रहने दिया जाता तो शायद गुण्डों को गांव में इस तरह दहशत फैलाने की हिम्मत न पड़ती। जब सबकुछ हो गया तो पुलिस कप्तान देहात ने कहा कि जिन लोगांे ने भी गांव में दंगा.फसाद फैलाने की कोशिश की है उनकी शिनाख्त करके सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होने मौके पर मौजूद मीडिया नुमाइंदों से अपील की कि वह अपनी वीडियो फुटेज की कापी जिला एडमिनिस्टेªशन को दे दें ताकि उसकी मदद से दंगाइयों की शिनाख्त की जा सके।

बाद में पता चला कि शहर और देहात दोनांे के ही हिन्दू युवा वाहिनी के लोगों ने बाकायदा एक साजिश के तहत मुर्दा गाय को तालाब में डलवाया था। इन गुण्डों ने जब गांव पहुच कर हंगामा शुरू किया तो गांव वालों ने भी उनसे कहा कि यह मामला गौकुशी का नहीं है यह तो एक गाय की फितरी मौत का मामला है। अगर गौकुशी का मामला होता तो गाय की गर्दन कटी होतीए दूसरे अगर मुसलमानों ने उसे जिबह किया होता तो पूरी गाय लाकर तालाब में क्यों फंेकतेघ् दंगाइयों ने कोई दलील नहीं सुनी और मुसलमानों के घरों पर धावा बोल दिया।

जिले और शहर के मुसलमानों के घर लूटने और उनको खौफजदा करने की हिन्दू युवा वाहिनी की यह एक सोची समझी साजिश थी। अगर यह दहशतगर्द गाय के इतने बडे़ हमदर्द थे तो पहले यह पता लगाते कि गाय किस की थी दूसरे मुस्लिम घरों का कीमती सामान लूटने में कौन सी गाय भक्ति है। सोची समझी साजिश थ्ीा इसीलिए गौरक्षकों के नाम पर आए यह दहशतगर्द अपने साथ दो कौमी परचम ;तिरंगेद्ध भी लाए थे। एक गुण्डा तो तिरंगा लेकर मस्जिद के मीनार पर चढ गया उसके पीछे.पीछे कई गुण्डे चढ गए। गांव की दोनों मस्जिदों मंे इन दहशतगर्दाें ने जम कर तोड़.फोड़ की और मस्जिद के अंदर खड़े होकर भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे भी लगाए। गांव के बुजुर्गाें के दबाव में मुस्लिम नौजवानों ने इन गुण्डों के खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई तो नहीं की लेकिन मस्जिद के अंदर घुसकर जब यह गुण्डे भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे उस वक्त मुस्लिम नौजवानों का एक गु्रप भी वहां आ गया। उन्होने ‘हिन्दुस्तान जिंदाबाद’ की जवाबी नारेबाजी शुरू कर दी तो यह बुजदिल इस ख्याल से मस्जिद से भाग खड़े हुए कि कहीं मस्जिद के दरवाजे बंद करके मुस्लिम नौजवान इनकी पिटाई न कर दें।

यह कोई पहला वाक्या नहीं है इससे पहले स्याना हलके के एक गांव की हिन्दू लड़की सऊदी अरब से कमाकर वापस आए एक मुस्लिम नौजवान के साथ भागी थी तो हिन्दू युवा वाहिनी के ओहदेदार कहने वालों ने लड़के के पड़ोसी को पीट.पीटकर मार डाला था। इल्जाम लगाया था कि उस मरने वाले शख्स ने लड़की को भगाने में लड़के की मदद की और उसे पता था कि वह दोनों भाग कर कहां गए हैं। उस मामले मे अगर पुलिस ने लीपापोती करने के बजाए कातिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होती तो शायद अब गाय के बहाने इन गुण्डोें ने इस तरह अदौली गांव पर हमला करने की हिम्मत न की होती।

बाद में बुलंदशहर के सीनियर पुलिस कप्तान मुनिराज जी ने बताया कि इस मामले में दोनों तरफ यानी हिन्दू और मुसलमानों मंे से दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ देते हुए कहा कि तालाब से गाय की लाश निकाली गई तो उसके कान के पास और गर्दन के इर्दगिर्द कटे का निशान था। उन्होने यह भी कहा कि मस्जिद के मीनार पर चढकर नारेबाजी करने का जो वीडियो वायरल हो रहा है वह अदौली गांव का नहीं है। चन्द दिन कब्ल एक दूसरे गांव की मस्जिद पर इस तरह कुछ लोग चढे थे यह वीडियो उसी का है। सवाल यह है कि अगर दस.पन्द्रह दिन पहले किसी गांव की मस्जिद के मीनार पर कुछ गुण्डे चढे थे तो कप्तान ने उन गुण्डों के खिलाफ क्या कार्रवाई की थीघ् अगर कोई कार्रवाई नहीं की थी तो क्यों नहीं की थी।

दूसरी बात यह कि गाय के नाम पर अदौली गांव के मुस्लिम मकानात और मस्जिदों पर हमला किया था हिन्दू युवा वाहिनी के लोगों ने फिर मुसलमानों को किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया वह तो किसी पर हमला करने गए नहीं थे यह कौन सा इंसाफ है जिसकी बात वह कर रहे हैं क्या कप्तान मुनिराज को मालूम हो चुका है कि गाय किसकी थी और उसे मार कर तालाब में किसने फेंका था।