जरायम पेशा अनासिर जैसा साक्षी – कब कार्रवाई करेंगे मोदी

जरायम पेशा अनासिर जैसा साक्षी – कब कार्रवाई करेंगे मोदी

नई दिल्ली! शातिर किस्म के जानी ;बलात्कारीद्ध गुरमीत सिंह कोसी पंचकुला की स्पेशल सीबीआई अदालत ने कुसूरवार ठहराया। अभी उसकी सजा का एलान भी नहीं हुआ था कि जिना के केस मंे मुल्जिम रहे बीजेपी के उन्नाव से लोक सभा मेम्बर और एक और फर्जी साधु सच्चिदानन्द साक्षी और हरियाणा के एक वजीर मनीष ग्रोवर गुरमीत सिंह जैसे शातिर मुजरिम और दहशतगर्द की हिमायत में खुल कर सामने आ गए। साक्षी ने अदालतों को ही धमका दिया बोला कि अदालतों को भी कुछ सोचना चाहिए एक दो लड़कियों की बात पर यकीन न करें करोड़ांे लोगों के जज्बात का भी ख्याल रखें अदालतें। उधर हरियाणा के वजीर और रोहतक से मेम्बर असम्बली मनीष ग्रोवर ने गुरमीत के हामियों की हिंसा की यह कह कर हिमायत की कि ‘बाबा के हामियों ने जो कुछ किया वह उनके फितरी ;स्वाभाविकद्ध गुस्से का नतीजा है। उस वजीर ने सारी जिम्मेदारी मीडिया के सर मढ दी। बोला कि अगर 50 हजार या एक लाख लोग अपने गुरू बाबा के लिए इकट्ठा होंगे तो उन्हें गुस्सा भी जरूर आएगा।

सच्चिादानन्द साक्षी और मनीष ग्रोवर के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करके भारतीय जनता पार्टी और वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी ने साबित कर दिया कि गुरमीत सिंह के तमाम गुनाहों को बीजेपी की प्रदेश और देश की सरकारों की पुश्तपनाही हासिल रही है। साक्षी के खिलाफ कुछ वकीलों ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में तौहीन.ए.अदालत का मुकदमा चलाने की दरख्वास्त गुजारी तो अदालत ने इस क्रिमिनल जेहन शख्स पर मुकदमा चलाने से यह कहकर इंकार कर दिया कि वह इस लायक भी नहीं है कि अदालत उसका नाम तक ले।

सच्चिादानन्द साक्षी ने जो कुछ कहा वह इसलिए कहा कि जो मुकदमा गुरमीत सिंह पर अब चला है उस तरह का इल्जाम उसपर सत्रह साल पहले उस वक्त लग चुका है जब सन् 2000 में उसकी अपनी दो सेविकाआंे ने उसपर रेप ;बलात्कारद्ध करने का इल्जाम में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। उस वक्त दिल्ली लखनऊ दोनों  जगहों की सत्ता बीजेपी के हाथों में थी इसलिए गैर कानूनी सरकारी दबाव से उसपर लगे इल्जामात को रफा.दफा कर दिया गया था। इससे भी पहले 1997 में फर्रूखाबाद के मजबूत बीजेपी लीडर ब्रहमदत्त द्विवेदी के मर्डर में भी साक्षी पर उंगलियां उठी थीं उस वक्त ब्राहमण मुखालिफ कहे जाने वाले कल्याण सिंह की उत्तर प्रदेश में थी। इसलिए कल्याण सिह ने सच्चिदानन्द को बचा लिया था। बताते चलें कि सच्चिादानन्द साक्षी और कल्याण सिंह दोनों का ताल्लुक लोधी समाज से है इसीलिए कल्याण सिंह हमेशा से उसकी मदद करते रहे हैं। 2014 में उन्नाव से लोक सभा का टिकट भी उसे कल्याण सिंह ने ही दिलाया था।

सच्चिादानन्द पेशावर क्रिमिनल जेहन शख्स है। मर्डर और रेप के इल्जामात के अलावा एमपी लेड फण्ड में घोटाला करने के मामले में भी वह फंस चुका है। अपने दोस्त कल्याण सिंह की सिफारिश पर मुलायम सिंह यादव ने साक्षी को राज्य सभा का मेम्बर बनवा दिया था तो उसने एमपी लेड फण्ड में ही घपला कर डाला। यह घोटाला साबित हो गया था। इसीलिए 1996 में उसे राज्य सभा से मुअत्तल करके बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस किस्म के लोग पार्लियामंेट में और वजारतों में शामिल किए जाएंगे तो ऐसे ही जरायम होते दिखेगे जैसे जरायम मजहबी डेरे की आड़ में डेरा सच्चा सौदा में गुरमीत सिंह के हाथों किए जा रहे थे। साक्षी जैसों का इलाज तो यही है कि उन्हें भी गुरमीत सिंह का साथी मुल्जिम ;सहअभियुक्तद्ध करार देकर इनपर भी उन्हीं दफाओं में मुदकमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें भी गुरमीत सिंह के साथ जेल में डाल दिया जाना चाहिए।

देखना यह है कि मुल्क में मजहबए विश्वास और सियासी पार्टियों के नाम पर होने वाली हिंसा बर्दाश्त न किए जाने की बातें करने वाले वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी क्या कार्रवाई करते हैं।