दुनिया हासिल करने में एहतियात बरतें

दुनिया हासिल करने में एहतियात बरतें

मौलाना अशहद रशीदी

हजरत अबू असीब ;रजि0 से मरवी है कि एक रात नबी करीम ;सल0 मेरे पास से गुजरे और मुझे बुलाया। मैं नबी करीम ;सल0 के साथ चल पड़ा। फिर नबी करीम ;सल0 का गुजर हजरत अबू बक्र ;रजि0 के पास से हुआ। नबी करीम ;सल0 ने उनको भी आवाज दी। वह भी नबी करीम ;सल0 के साथ हो लिए फिर नबी करीम ;सल0 का गुजर हजरत उमर  ;रजि0 के पास से हुआ। नबी करीम ;सल0 ने उनको भी बुलाया। वह भी आ गए। फिर नबी करीम ;सल0 चले और एक अंसारी सहाबी के बाग में दाखिल हुए और बाग के मालिक से नबी करीम ;सल0 ने खजूरें खिलाने को कहा। वह खजूर का खोशा लाए और नबी करीम ;सल0 के सामने रख दिया। नबी करीम ;सल0 ने और सहाबा ने उसमें से नोश फरमाया। फिर नबी करीम ;सल0 ने ठंडा पानी मंगवाकर पिया और फरमाया कि तुम से कयामत के दिन इन नेमतों ;खजूर व ठंडे पानीद्ध के बारे में सवाल होगा। हजरत उमर ;रजि0 ने खजूर के खोशा को हाथ में लिया और ;हैरत से जमीन पर फेंक दिया जिस की वजह से खजूरें नबी करीम ;सल0 के सामने बिखर गईं फिर पूछा कि ऐ अल्लाह के नबी! क्या इसके बारे में भी कयामत के दिन हमसे सवाल होगा करीम ;सल0 ने फरमाया. हांए सिर्फ तीन चीजें ऐसी हैं जिनके बारे में सवाल नहीं होगा। एकए वह कपड़ा जिससे इंसान अपनी शर्मगाह को छुपाए। दूसरेए रोटी का वह टुकड़ा जिससे इंसान अपनी भूक मिटाए। तीसरेए वह छोटा कमरा जिस में दाखिल होकर इंसान सर्दी.गर्मी से बचे।

तशरीहः. नबी करीम ;सल0 मुख्तलिफ अंदाज से आखिरत की फिक्र सहाबा के जेहन व दिमाग में बिठाया करते थे और हमेशा आखिरत को दुनिया पर तरजीह देने की तलकीन करते थे। इस रिवायत में भी नबी करीम ;सल0 उम्मत के दिलों से दुनिया की मोहब्बत निकाल कर आखिरत की फिक्र पैदा करना चाहते हैं और यह बावर कराना चाहते हैं कि आखिरत की पकड़ से बचने का रास्ता इसके सिवा कुछ नहीं है कि इंसान दुनिया से बेरगबती अख्तियार करे और हस्बे जरूरत ही इसको हासिल करे। मजकूरा रिवायत के रावी हजतर अबू असीब ;रजि0 एक रात का किस्सा नकल करते हैं। जिसकी तफसील इस तरह है.

हजरत अबू असीब ;रजि0 फरमाते हैं कि एक रात नबी करीम ;सल0 अपने दौलत खाने से निकले और जब मेरे पास से गुजरे तो नबी करीम ;सल0 ने मुझे बुलाया। मैं भी नबी करीम ;सल0 के साथ हो लिया। फिर जब नबी करीम ;सल0 हजरत अबू बक्र ;रजि0 के पास से गुजरे तो नबी करीम ;सल0 ने उनको भी साथ ले लिया। इसी तरह हजरत उमर ;रजि0 को भी बुला लिया और सबको साथ लेकर नबी करीम ;सल0 एक अंसारी सहाबी के बाग में पहुंचे और उनसे फरमाया कि हमको खजूरें खिलाओ। वह फौरन खजूर का खोशा ले आए और नबी करीम ;सल0 के सामने रख दिया। उसमें से नबी करीम ;सल0 और आपके साथियों ने खजूरें नोश फरमाईं। फिर नबी करीम ;सल0 ने ठंडा पानी तलब फरमाया और खाने.पीने से फारिग होने के बाद नबी करीम ;सल0 ने सहाबा से फरमाया कि तुम से कयामत के दिन इन नेमतों के बारे में भी यकीनन सवाल होगाए हिसाब लिया जाएगा और पूछा जाएगा कि इन नेमतों को कहां से हासिल किया और कहां खर्च कियाघ् और इस्तेमाल करने के बाद अल्लाह तआला का कितना शुक्र अदा कियाघ् हजरत उमर ;रजि0 नबी करीम ;सल0 का यह इरशाद सुनकर हैरान रह गए और खजूर के खोशे को हाथ में लेकर जमीन पर फेंका और कहा कि क्या इसके बारे में भी सवाल होगाघ् यह तो कोई अनमोल और कीमती चीज नहीं है और न ही इसका हुसूल मुश्किल और दुश्वार है। नबी करीम ;सल0 ने फरमाया कि हांए इसके बारे में भी कयामत के दिन सवाल होगा क्योंकि खुदा की अता कर्दा वह हर नेमत के बारे में तुम से पूछा जाएगा चाहे वह बड़ी हो या छोटीए ज्यादा हो या कमए आसानी से दस्तयाब हुई हो या मुश्किल सेए फिर आगे नबी करीम ;सल0 ने फरमाया कि सिर्फ तीन चीजें ऐसी हैं कि अगर उनको बकदर जरूरत इस्तेमाल किया जाए तो उनके बारे में कयामत के दिन इंसान से कोई सवाल नहीं किया जाएगा।

पहली चीज को बयान करते हुए नबी करीम ;सल0 ने फरमाया कि इंसान अगर बकदर जरूरत शर्मगाह को छुपाने की नीयत से कपड़ा इस्तेमाल करेगा तो कयामत के दिन उन कपड़ों के बारे में पूछगछ नहीं की जाएगी और न कोई सवाल होगा। जरूरत के बकदर कपड़े सिलवाना और इस्तेमाल करना इस शर्त के साथ जायज है कि नीयत बदन को ढकने की हो दिखावे की और अपनी शान व शौकत के इजहार की नीयत न हो। आजकल मुस्लिम समाज में कपड़ों के हवाले से दो तरह की खराबियां फैल रही हैं। पहलीए कीमती और महंगे कपड़ों का चलन आम हो गया है। हालांकि तन को ढकने का काम सस्ते कपडों से भी लिया जा सकता है। खासतौर पर ख्वातीन कपड़ो की खरीदारी में हद से ज्यादा खर्च करती है और जरूरत से ज्यादा कपडे सिलवा कर अलमारियों की जीनत बना देती हैं और यह भूल जाती हैं कि कल कयामत के दिन हिसाब देना होगा खास तौर पर जरूरत से ज्यादा कपड़े और निहायत कीमती सूट और जोडे़ कयामत के दिन इंसान के लिए परेशानी व जिल्लत का जरिया बनेंगे। दूसरीए शान व शौकत और दिखावे के लिए तरह.तरह के कीमती और महंगे कपड़ों का इस्तेमाल शरीअत में नापसंदीदा है। अपनी बड़ाई और दौलत का इजहार के लिए किसी भी तरह की पोशाक और लिबास का इस्तेमाल बदनीयती की वजह से एक जुर्म है। जिसके बारे में कयामत के दिन सवाल होगा। आज के मआशरे में यह गुनाह फैल चुका है और मर्दों व औरतों के जेहन से यह निकल गया है कि खुदा हमारी नीयतों से खूब वाकिफ है। कल उसका सामना किस मुंह से करेगे और अपनी खराब नीयत को उससे कैसे छुपाएंगेघ् अगर कोई शख्स महज अल्लाह की नेमतों के इजहार और शुक्राने की नीयत से अच्छा और साफ सुथरा लिबाह पहनता है तो इसमें कोई हरज नहीं है। बल्कि कुरआने मजीद में इसकी तरगीब दी गई है।

नबी करीम ;सल0 दूसरी चीज को जिक्र करते हुए इरशाद फरमाते हैं कि इंसान अपनी भूक मिटाने के लिए जो कुछ खाएगा उसका भी कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा और उसके बारे में भी इसंान से कुछ नहीं पूछा जाएगा। मगर जरूरत से ज्यादा खर्च करना और महज दौलत के नशे में चूर होकर बेजा खर्च करना जैसा कि आजकल शादी व्याह के मौके पर होता है किसी भी तरह मुनासिब नहीं है। अगर आदमी हस्बे जरूरत अपने और अपने घर वालों पर खर्च करे और खाने में फरावानी अख्तियार करे तो इसमें कोई हरज नहीं है लेकिन बिरादरी और खानदान वालों पर अपनी मालदारी का रौब डालने और दूसरों की नक्काली मे तकरीब के मौके पर बिला जरूरत खाने पीने पर जो कुछ खर्च किया जाएगा उसपर यकीनन सवाल किया जाएगा। एक.एक चीज का हिसाब कयामत के दिन लिया जाएगा। क्योंकि दौलत का असल  मालिक अल्लाह है उसी ने हमको इस्तेमाल के लिए दिया है। हम इसके मालिक नहीं है। वह जिस तरह से खर्च करने का हुक्म दिया है वैसे खर्च करना हमारी जिम्मेदारी है जिसको आज लोगों ने भुला दिया है और यह समझ लिया है कि हम मालिक हैं जो चाहें करें।

नबी करीम ;सल0 तीसरी चीज का जिक्र करते हुए इरशाद फरमाते हैं कि इंसान अगर गर्मी और सर्दी से बचने के लिए जरूरत के बकदर कोई छोटा सा कमरा या घर बना लेता है और उसमें रिहाइश  अख्तियार कर लेता है तो उसके हवाले से भी उससे कोई सवाल व जवाब और पूछगछ नहीं होगी लेकिन अगर नमूद व नुमाइश और दिखावे के लिए निहायत कीमती घर कोई तामीर करेगा तो उसको हिसाब देना ही होगा। आजकल बहुत से लोग महज शौक को पूरा करने और दूसरे के मुकाबले में हसीन व जमील और बेशकीमती घर बनाने में पानी की तरह दौलत खर्च करते हैं और यह समझते है कि दौलतमंदों को अपने शौक पूरे करने का पैदाइशी हक है। जिसपर किसी को एतराज का कोई अख्तियार नहीं है। हालांकि वह यह भूल जाते हैं कि तमाम खजानों का मालिक अल्लाह है वह हमारा भी मालिक है और हमारी दौलत उसी की अताकर्दा है। वही उसका हकीकी मालिक है अगर हमने इसका गलत इस्तेमाल किया तो कल कयामत के दिन वह तमाम इंसानों से सामने पूछगछ करेगा और हिसाब लेगाए कौन है जो उसकी पकड़ से बचने में कामयाब होगाए उसके सवालात से बच जाएगाघ्