डोकलाम में चीन की नर्मी की अस्ल वजह

डोकलाम में चीन की नर्मी की अस्ल वजह

नई दिल्ली! डोकलाम में हिन्दुस्तान और चीन के दरम्यान महीनों से जारी खींचतान 29 अगस्त को उस वक्त तकरीबन खत्म हो गई जब दोनों मुल्कांे ने अपनी.अपनी फौजें हटाने पर रजामंदी जाहिर की । हिन्दुस्तान ने अपनी फौजे फौरन हटा ली लेकिन चीन ने अपनी फौज हटाने के बजाए सड़क बनाने के लिए जो मशीनरी वहां इकट्ठा की थी सिर्फ वह मशीनरी ही हटाई और यह कहकर अपनी फौज को तैनात रखा कि उनके सिपाही सिर्फ पेट्रोलिंग करने के लिए मौके पर मौजूद हैं। हर मामले की तरह वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी ने इस मामले में भी अपने मैनेजमेट का सुबूत दिया। देश के मीडिया में यह खबरे प्लाण्ट करवा ली कि चीन ने हिन्दुस्तान की ताकत के सामने दबकर यह समझौता किया है। उधर चीनी सरकार की तर्जुमान ने मीडिया को खिताब करते हुए एक सवाल के जवाब में दो इंतेहाई खतरनाक बातें कहींए एक यह  कि हिन्दुस्तानी फौज ने डोकलाम मे चीन की जमीन खाली कर दी हैए मतलब यह कि डोकलाम में जिस जगह दोनों मुल्कांे की फौजें तैनात थीं चीन उसे मुतनाजा इलाका ;विवादित क्षेत्रद्ध मानने के बजाए अपना इलाका मानता है। दूसरी खतरनाक बात उन्होने यह कही कि लद्दाख भारत का हिस्सा नहीं है। वह दोनों मुल्कों के दरम्यान मुतनाजा ;विवादितद्ध इलाका है। चीन सरकार की तर्जुमान की इन दोनों बातों पर मोदी सरकार की खामोशी खतरनाक है।

चीन के साथ हुआ यह समझौता यूं ही नहीं हो गया है। इसके पीछे दो और बड़ी वजहें है। एक यह कि पंाच सितम्बर को ब्रिक्स कांफ्रंेस में शिरकत करने के लिए वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी चीन जा रहे हैं। अगर डोकलाम मसला हल न होता तो यह सवाल उनका पीछा करता कि इतने तनातनी के हालात में वह चीन क्यों गएघ् अब मोदी ब्रिक्स कांफ्रेंस में शिरकत करेंगे तो वहां उन्हंे अपनी बात मजबूती से रखने का मौका मिलेगा। जाहिर है कि मोदी का सारा फोकस दहशतगर्दी और पाकिस्तान के खिलाफ होगा और होना भी चाहिए। क्योंकि जब तक पाकिस्तान से आने वाली दहशतगर्दी से हिन्दुस्तान का पीछा नहीं छूटता उस वक्त तक तरक्कियाती कामों और फैसलों पर असर पड़ता ही रहेगा।

चीन के भी हिन्दुस्तान के साथ बड़े पैमाने पर तिजारती मफादात हैं। अपना सामान खपाने के लिए उसे पड़ोस में ही एक सौ तीस करोड़ का भारी भरकम बाजार मिल रहा है। जिसे वह किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता। इस वक्त चीन हर साल तकरीबन छः लाख करोड़ का सामान हिन्दुस्तान को एक्सपोर्ट करता है। मुल्क की तीन बडी टेलीफोन कम्पनियां ही चीन से हर साल 22 से 25 हजार करोड़ तक के टेलीफोन चीन से लेते हैं। इंतहा यह है कि वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी ने बल्लभ भाई पटेल की सबसे बड़ी मूर्ति बनवाकर अहमदाबाद में लगवाने के लिए लोहा तो पूरे देश से मांगा था लेकिन मूर्ति बनाने का आर्डर उन्होने कई करोड़ रूपए मंें चीन को दे दिया। जो लोहा देश भर से मांगा था वह शायद उनके करीबी लोगों ने कबाड़ियों के हाथ बेच दिया और पैसा खा गए।

कुछ कम अक्ल और बहकावे में आकर इस्तेमाल होने वाले लोग अक्सर चीनी सामान के बायकाट का एलान करते रहते हैं। बायकाट भी दीवाली के पटाखों और झालरों तक महदूद रहता है जो कुल मिलाकर शायद सौ.डेढ सौ करोड़ की कीमत के होते हैं। चीन से बनकर आने वाले मुकेश अंबानी के जियो टेलीफोन सेटए तमाम बिजली कम्पनियों के एयरकंडीशनरोंए पंखोंए एलईडी बल्ब और दीगर सामानों के बायकाट की बात कभी नहीं होती। दुर्गापूजाए गणेश चतुर्थीए दीवाली पर पूजने के लिए गौरी गणेश की मूर्तियां चीन से आती हैं। हर साल तकरीबन दो लाख मुसलमान हज करने जाते हंै वहां से वह तसबीहए जानमाज और टोपियां वगैरह लाकर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को तोहफे में देते हैं। वह सब भी चीन की बनी होती हैं। उन्हें खरीदने का वाहिद ;एक मात्रद्ध मकसद यह भी होता है कि टर्की और ऐसे ही दीगर मुमालिक में बनी एक जानमाज की कीमत में चीन मे बनी तकरीबन एक दर्जन जानमाजें मिल जाती है। यही हाल टोपी और तसबीह का होता है। हिन्दुस्तान के बाजार पर चीन के सामान के असर का आलम यह है कि कान साफ करने की मामूली बड और जख्म पर लगाने के लिए बैडेज तक चीन से आ रहे हैं। मुल्क की जितनी भी बिजली कम्पनियां हैं सबने अपनी.अपनी प्रोडक्शन यूनिट हिन्दुस्तान से बंद करके चीन में लगा ली है। ऐसी सूरत में  चीन या उसकी जगह कोई भी दूसरा मुल्क होता तो वह हिन्दुस्तान से किसी भी कीमत पर टकराव मोल नहीं लेता। चीन भी उसी पालीसी पर चल रहा है और हमारे मुल्क मंे यह खबरे फैलाई जा रही हैं कि नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की सूझबूझ भरी डिप्लोमेटिक पालीसी की वजह से चीन ने डोकलाम पर नर्म रवैया अख्तियार किया है।

हिन्दुस्तान से जितना एक्सपोर्ट होता है उसका तकरीबन 12 फीसद हिस्सा चीन इम्पोर्ट करता है और चीन का दुनिया भर में जितना एक्सपोर्ट है उसका महज तीन फीसद हिस्सा हिन्दुस्तान इम्पोर्ट करता है। तब भी दोनों की टेªड में तकरीबन 60 बिलियन डालर का फर्क है। यानि हिन्दुस्तान चीन को जितना सामान एक्सपोर्ट करता है उससे साठ बिलियन डालर ज्यादा का सामान चीन से हिन्दुस्तान आता है। डोकलाम मामले कोे चीन ज्यादा हवा इस लिए भी नहीं दे रहा है कि इसी सितम्बर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सेट्रल कमेटी की मीटिंग होनी है। जिसमें नए सदर का एलक्शन भी होना है मौजूदा सदर शी जिन पिंग सदर की हैसियत से चीन के एक्तेदार पर आइंदा भी काबिज रहना चाहते हैं।