भगवा चश्मे से देखकर हो रही है सैलाब मुतास्सिरीन की मदद

भगवा चश्मे से देखकर हो रही है सैलाब मुतास्सिरीन की मदद

किशनगंज ;बिहार! बिहार के बेश्तर इलाकों खुसूसन सीमांचल मंे आए सैलाब की तुगयानी भले ही कम हो गई है। इस सैलाब से तबाह हुए लोगों के लिए रिलीफ का काम तकरीबन नहीं के बराबर है। पूरे सीमांचल के मदरसों ने ही लोगों को खाने पीने का सामान मुहैया करायाए खबर लिखे जाने तक मदरसों में भी गल्ला और खाने पीने का सामान खत्म हो चुका था। दवाएं न मिलने से तरह.तरह के अमराज ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। पूरे बिहार में मरने वालों की तादाद भले ही सरकार 550 के अंदर बताए हकीकत मंे यह हजार से ऊपर है। किशनगंज की तारीख में पहली बार ऐसा हुआ है कि अचानक वहां चार से आठ फिट तक पानी भर गया । राहत और इमदाद के नाम पर किशनगंज से कांगे्रस के लोक सभा मेम्बर मौलाना असरार उल हक कासमी और उनकी टीम को ही हर तरफ सरगर्म देखा गया। सीमांचल के लिए सरकार का रवैया देखकर ऐसा लगा कि नितीश कुमार पर पूरी तरह भगवा रंग चढ चुका है। सैलाब से मुतास्सिर अवाम खुसूसन मुसलमानों के साथ उनकी सरकार का रवैया सौतेलापन का रहा है। बिहार के कई जिले ऐसे हैं जहां के दर्जनों गांव कुछ इस तरह सैलाब में बह गए जैसे वह गांव वहां कभी रहे ही न हो।

बिहार के सैलाबजदा अजला में सैलाब की हालत में अब सुधार की खबरें मिल रही हैं जिसकी वजह से कुछ मकामात पर लोगों ने अपने घरों की तरफ लौटना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक तकरीबन 16 रिलीफ कैम्प चल रहे हैं जिसमें अभी 1ण्40 लाख लोग पनाह लिए हुए है। बिहार में सैलाब की तुगयानी का शिकार होकर स्टेट डिजास्टर मैनेजमेट मोहकमे की एक रिपोर्ट के मुतबिक अब तक 514 लोगों की जान जा चुकी है। सैलाब से किशनगंजए अररियाए पूर्णियाए कटिहारए पूर्वी चम्पारणए पच्छिमी चम्पारणए दरभंगाए मधुबनीए मुजफ्फरपुरए शिवहरए सीतामढीए समस्तीपुरए सारणए गोपालगंजए सीवानए सुपौलए मधेपुराए खगड़िया और सहरसा जिलों की एक करोड़ 72 लाख आबादी सैलाब से मुतास्सिर है। इनमें आठ लाख 54 हजार 936 लोगों को महफूज ठिकानों पर पहुचाया जा चुका है। सैलाब की वजह से खबर लिखे जाने तक 18 टंेªनें रद्द कर दी गई थीं।

वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोदी ने बिहार के सैलाबजदा इलाकों का हवाई दौरा किया। उन्हें शायद अपने दौरे के दौरान यह मालूम हो गया कि सैलाब जदा जिलों में अक्सरियत मुस्लिम आबादी की है। इसीलिए उन्होने राहत के नाम पर महज 500 करोड़ रूपए का पैकेज देने का एलान किया जबकि यूपीए हुकूमत के दौरान जब बिहार ऐसे ही सैलाब का शिकार हुआ था तो कांगे्रस सरकार ने बिहार हुकूमत को 1000 करोड़ का राहत पैकेज दिया था। मोदी के अलावा मध्यप्रदेश के वजीर.ए.आला शिवराज सिंह चैहान ने पंाच करोड का चेक वजीर.ए.आला नितीश कुमार को सौंपा। इसके अलावा बिहार सरकार ने सैलाब मुतास्सिरीन को राहत पहुचाने के लिए 1935 करोड़ रूपए जारी करने की मंजूरी का बजट कैबिनेट में मंजूर कराया था। नितीश कुमार ने कहा कि सैलाब में मरने वाले लोगों के घर वालों को दो.दो लाख रूपए और संगीन तौर पर जख्मी लोगों को पचास.पचास हजार रूपए की इमदादी रकम देने का एलान किया है। इसके अलावा सैलाब से मुतास्सिरीन कुन्बों को फी कुन्बा छः हजार रूपए का मुआवजा भी दिया जाएगा। इसमें तीन हजार रूपए कैश और तीन हजार का खाने का सामान दिया जाएगा। सैलाब से 30 लाख परिवार मुतास्सिर बताए जा रहे है।

नितीश कुमार के चीफ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह ने रियासत के 19 जिलों में सैलाब से हुए नुक्सान का अंदाजा लगाने के लिए मुताल्लिका मोहकमों को पांच सितम्बर के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होने कहा कि जो रिपोर्ट बनाई गई हैं उसपर नजरे सानी कर लिया जाए ताकि कोई प्वांइट छूटने न पाए। मोटे अंदाजे के मुताबिक नुक्सान की रकम दस हजार करोड़ रूपए तक जा सकती है। सीमांचल के जिलों  में ससबे ज्यादा पुलों का नुक्सान पहुचा है। बडी तादाद में सडकें टूट गई हैं। स्कूलों और दीगर इमारतों को भी नुक्सान पहुचा है।

बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश के 25 जिले सैलाब से मुतास्सिर हैं जिसमें 24 लाख से ज्यादा लोग फंसे हैं। 3000 गांव पानी से घिरे हुए है। पच्छिम बंगाल में सौ से ज्यादा लोगों की मौत सैलाब से हो चुकी  है। जबकि असम में दो सौ के करीब मौतें सैलाब की वजह से हुई यूपी में भी सौ से ज्यादा लोग सैलाब का शिकार होकर दम तोड़ चुके है। स्टेट डिजास्टर मैंनेजमेट मोहकमे के अफसरान का कहना है कि बारिश रूकने की वजह से नदियों की तुगयानी भी कम हुई है जिससे लोगों ने अपने घर लौटना शुरू कर दिया है। राहत और बचाव का काम जारी है। लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। बिहार के मुस्लिम अक्सरियती आबादी वाले सैलाब जदा जिलों में राहत और बचाव के काम की रफ्तार बहुत धीमी है। कुछ दीनी और मिल्ली तंजीमें ही इन जिलों मंे राहत और बचाव का काम अंजाम दे रही है और कैम्प लगाकर उन्हंे पनाह देने का काम कर रही है। सरकारी सतह पर काम कम बयानबाजी ज्यादा हो रही है।