बच्चों की कत्लगाह बना योगी का बीआरडी कालेज

बच्चों की कत्लगाह बना योगी का बीआरडी कालेज

”योगी आदित्यनाथ ही गोरखपुर से लोक सभा पहुचते रहे हैं। बच्चों में जेई जैसे मरज को रोकने के लिए पीने के साफ पानी के लिए उन्होने क्या कोशिश कीए मसेहरा में मुजव्विजा ;प्रस्तावितद्ध सालिड वेस्ट मैनेजमेट का काम 2008 से अब तक किसने रूकवा रखा है। नगर निगम पर उनके खुशामदियों का कब्जा है। बीआरडी मेडिकल कालेज के सामने ज्योतिनगर की खाली पडी दस बीघा जमीन पर लगा कूड़े का अंबार हटवाने के लिए उन्होने क्या किया इन सवालात का जवाब कौन देगा“

लखनऊ! वजीर.ए.आला आदित्यनाथ योगी के अपने शहर गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से गुजिश्ता दस से बारह अगस्त के दरम्यान महज दो दिनों में दम घुटने से साठ से ज्यादा मासूम बच्चों की जान चली गई। उसपर हंगामा हुआ तो योगी सरकार ने प्रिंसिपल समेत अस्पताल के आठ डाक्टरांे और मुलाजिमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर तो वजीर.ए.आजम नरेन्द्र मोेदी ने इन मौतों को कुदरती आफत ;प्राकृतिक आपदाद्ध बता कर सरकार को बचाने की कोशिश की। अब ताजा रिपोर्ट से पता चला कि जनवरी से अगस्त के आखिर तक आठ महीनों मंे इस मेडिकल कालेज में साढे बारह सौ ;1250द्ध बच्चों की मौत हो चुकी इनमें से 386 बच्चे तो सिर्फ अगस्त महीने में ही मौत के मुंह में चले गए। कालेज एडमिनिस्टेªशन ने कहा कि अगस्त मे  मरने वाले बच्चों की तादाद 386 नहीं बल्कि 290 है। मतलब यह कि अस्पताल की नजर में एक महीने में 290 बच्चों की मौत कोई ज्यादा नहीं है। बीआरडी मेडिकल कालेज का यह बेरहमी का रवैया यूं ही नहीं है। दरअस्ल कालेज  तो वजीर.ए.आला योगी के ही तौर तरीकों के मुताबिक बात और काम कर रहा है। अगस्त महीने में ही 386 या 290 बच्चों की मौत की खबर पर वजीर.ए.आला आदित्यनाथ नाराज हो गए और बोले कि क्या सारी जिम्मेदारी सरकार की ही है। उन्होने कहा कि मीडिया बार.बार कह रहा है कि अस्पताल मे गंदगी है हम भी इसे तस्लीम कर लेते हैं तो क्या गंदगी साफ करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही है। वह यहीं नहीं रूके बोले ‘मुझे तो लगता है कि कहीं ऐसा न हो कि लोग अपने बच्चों की उम्र दो साल होते ही उन्हें यह कहकर सरकार भरोसे ही न छोड़ दें कि सरकार ही उन बच्चों की परवरिश भी करे। बीआरडी कालेज में 27 से 29 अगस्त के दरम्यान 48 घंटों के अंदर ही 42 बच्चों की मौत हो गई। यह खबर आम हुई तो वजीर.ए.आला आदित्यनाथ को बहुत नागवार गुजरा और उन्होने इस किस्म का बयान गुस्से में दे डाला। जिस दिन वजीर.ए.आला योगी आदित्यनाथ गंदगी के लिए अवाम को जिम्मेदार ठहरा रहे थे उसी दिन गोरखपुर से 21 बच्चों के मरने की खबर आ रही थी लेकिन वजीर.ए.आला ने उसका जिक्र तक करना मुनासिब नहीं समझा। इस तरह खबर लिखे जाने तक तीन दिन में 63 बच्चों की मौत हो चुकी थी।

स्टार्ट अप प्रोग्राम के दौरान वजीर.ए.आला आदित्यनाथ ने सारी जिम्मेदारी अवाम पर ही डालते हुए कहा कि हमारे अंदर सिविक सेंस ;शहरियांे जैसा शऊरद्ध नहीं है। हम सफाई भी नहीं करना चाहते हम समझते हैं कि सारी जिम्मेदारी सरकार की हैए नगर निगमों की है गांव सभा की है। जैसे कि हम खुद तमाम जिम्मेदारियों से आजाद हो गए। लोगों ने अपनी जिम्मेदारी सरकार को दे दी है। मुझे तो कभी.कभी ऐसा भी लगता है कि एक वक्त के बाद कहीं ऐसा न हो कि लोग एक दो साल तक अपने बच्चों केा पालने के बाद उन्हें सरकार के भरोसे न छोड़ दें कि सरकार ही बच्चों की परवरिश करे। उन्होेने कहा मैं देख रहा हूं  कि लोग गाय को घर में रखेंगे दूध बेचेंगे लेकिन दूध दुहने के बाद गाय को सड़क पर छोड़ देंगे कि इनको सरकार देखे। मेरे पास शिकायत आती है मेम्बरान असम्बली कहते हैं कि गांवों में गौशाला खोल दें मैंने कहा वाह दूध पियोगे तुम और घास लाने व गोबर उठाने का काम सरकार करे यह कैसे मुमकिन है।

अब देखना यह है कि तीन दिनों मे 63 बच्चों की मौत के लिए आदित्यनाथ  योगी किसकी बलि लंेगे। आदित्यनाथ  कई बार से गोरखपुर से लोक सभा  का एलक्शन जीत रहे हैं। बच्चों को बचाने के लिए पीने के साफ पानी का बंदोबस्त और गोरखपुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लाण्ट की सख्त जरूरत है। यह दोनों काम कराने की कोई कोशिश उन्होने नहीं की इसके लिए कौन जिम्मेदार है। बीआरडी मेडिकल कालेज के सामने ज्योतिनगर में खाली पड़ी दस बीघा जमीन पर कूडे का पहाड़ खड़ा है। नगर निगम पर भी योगी के खुशामदियों का कब्जा है उन्हें जवाब देना पड़ेगा कि यह कूड़ा हटवाने का काम उन्होेने क्यों नहीं किया। मसेहरा में वेस्ट मैनेजमेंट का काम क्यों रूका हुआ है इसकी जिम्मेदारी किस पर है

गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कालेज अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। यहां चिल्डेªन वार्ड में एक बार फिर 72 घंटों में 61 बच्चों ने दम तोड़ दिया। इनमें से 42 बच्चों की मौत सिर्फ 48 घंटों के दौरान होे गई।

अस्पताल के मुताबिकए 27ए 28 और 29 अगस्त को अस्पताल में 61 बच्चों की मौत हुई। इनमें इंसेफलाइटिस वार्ड में 11 बच्चों और नवजायदा ;नवजात बच्चों के वार्ड ;एनआईसीयूद्ध में 25ए वहीं बच्चों के एक और वार्ड में 25 बच्चों की मौत हुई। डाक्टरोें के मुताबिक यह बच्चे इंसेफलाइटिस के अलावा नवजायदा बच्चों को होने वाली न्यूमोनियाए सेप्सिस जैसी बीमारियों का शिकार थे। उन्होंने बताया कि आसपास के इलाके के लोग अपने बच्चों को संगीन मरज होने पर इलाज के लिए इसी अस्पताल में लेकर आते हैं। इस वजह से अस्पताल पर भी काफी दबाव रहता है। वहीं मकामी डाक्टरों के मुताबिकए गोरखपुर और इसके आसपास के इलाकों में जबरदस्त बारिश और सैलाब को देखते हुए आने वाले दिनों में इंसेफलाइटिस का असर और भी बढ़ने का खतरा है।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफलाइटिस के शिकार 60 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले में आक्सीजन की कमी से दर्जनों बच्चों की मौत के इल्जाम लगे थे। इस मामले में अपोजीशन पार्टियों ने रियासती सरकार पर जमकर हल्ला बोला थाए हालांकि यूपी सरकार ने आक्सीजन की कमी से इनकार किया था। यूपी के डीजी हेल्थ केके गुप्ता की तरफ से इस मामले में पुलिस को तहरीर दी गई थी। इस सिलसिले में दर्ज एफआईआर में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल रहे डाक्टर राजीव मिश्राए उनकी बीवी डाक्टर पूर्णिमा शुक्लाए डाक्टर कफील अहमदए डाक्टर सतीश समेत कुल 9 लोगों पर 7 दफाओं में केस दर्ज किया गया।

यूपी एसटीएफ ने गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल रहे राजीव मिश्रा और उनकी बीवी पूर्णिमा शुक्ला को 29 अगस्त को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया।

गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में दिमागी बुखार के मरीजों के लिए बना 100 बिस्तरों वाला आइसीयू मरीजो की तादाद के सामने छोटा पड़ गया है। एक बिस्तर पर लेटे दो.दो बच्चे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। 9 से 14 अगस्त के बीच यहां भर्ती 100 से ज्यादा बच्चे दम तोड़ चुके हैं। इनमें आधी से ज्यादा मौतों की वजह आक्सीजन की कमी को बताया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर आरण्केण् मिश्र पर डालते हुए उन्हें मुअत्तल कर दिया गया। लेकिन मेडिकल कालेज में मौतों का सिलसिला थमा नहीं। 14 अगस्त की सुबह से शाम सात बजे तक 14 मासूम वाल्दैन को बिलखता छोड़ कर दुनिया से रूखसत हो चुके थे। 2005 से अब तक 5ए000 से ज्यादा मासूमों की कब्रगाह बन चुके बीआरडी मेडिकल कालेज में हो रहीं मौतें सरकारी बेईमानी और नाअहली पर मुहर लगा रही हैं। इस दौरान मरकजी और रियासती सरकार ने सिर्फ गोरखपुर मेडिकल कालेज में दिमागी बुखार के मरीजों के इलाज के लिए 2ए000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए हैं लेकिन असल बीमारी पकड़ में नहीं आ रही।

गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौतों की जांच कर रही चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार की कयादत वाली कमेटी को डाक्टरों की जबरदस्त लापरवाई के सबूत मिले हैं। गोरखपुर मेडिकल कालेज मेडिकल एजूकेशन मोहकमे के तहत है। मेडिकल कालेज एडमिनिस्टेªशन के एक अफसर बताते हैंए दिमागी बुखार के लिए बने आइसीयू में डाक्टरों  का इंतजाम मेडिकल कालेज करता है जबकि पैरामेडिकल स्टाफ मोहकमा हेल्थ के जिम्मे है। आइसीयू का इंतजाम से जुड़े लोगों के बीच तालमेल न होने से हालात खराब हैं। 2005 में दिमागी बुखार की वबा ;प्रकोपद्ध बढने पर हेल्थ मोहकमे ने अस्पताल का इंतजाम मेडिकल कालेज को सौंपने की तजवीज सरकार को भेजी थी लेकिन इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया। इसी साल संजय गांधी पीजीआई ;एसजीपीजीआई लखनऊ में माइक्रोबायलोजी शोबे के डाक्टरों की एक टीम ने सरकार से गोरखपुर मेडिकल कालेज के आइसीयू के लिए अलग से आक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने की सिफारिश भी की थी। यह सिफारिश भी अब तक ठंडे बस्ते में है। गोरखपुर डिवीजन में तैनात रहे ज्वाइंट डायरेक्टर ;हेल्थद्ध डाक्टर एण् केण् वर्मा बताते हैंए बच्चों की मौतों की जिम्मेदारी से बचने के लिए अस्पताल को दो शोबों में तकसीम  किया गया है। चैंकाने वाली बात यह भी है कि गोरखपुर मेडिकल कालेज समेत कुशीनगरए देवरियाए बस्तीए गोरखपुर के जिला अस्पतालों के आइसीयू में लगे वेंटिलेटर के साथ जरूरी एक्चुअल ब्लड गैस ;एबीजीद्ध मशीन नहीं लगाई गई है। यह मशीन जिस्म में आक्सीजन और कार्बन डाई आक्साइड की सतह जांचने के लिए जरूरी है। एक जिला अस्पताल के सुप्रीटेडेट बताते हैंए एबीजी मशीन न होने से काफी दिक्कतें हैं।

यौम ए आजादी ;15 अगस्त के मौके पर पहली बार लखनऊ में विधानभवन पर तिरंगा फहराते हुए वजीर.ए.आला आदित्यनाथ ने अपनी तकरीर में गोरखपुर में बच्चों की मौतों का जिक्र किया। वह बोले दिमागी बुखार फैलने की अस्ल वजह गंदगी है जिसकी वजह से बच्चों की मौतें हो रही हैं। गोरखपुर मेडिकल कालेज के सामने चरगावां इलाके के ज्योतिनगर में खाली पड़ी दस बीघा जमीन पर कूड़े का लगा अंबार चीफ मिनिस्टर को चुनौती दे रहा है। दिमागी बुखार से सबसे ज्यादा शिकार बनने वाले कुशीनगर के तमकुहीराज इलाके के मेम्बर असम्बली अजय कुमार सिंह कहते हैंए दिमागी बुखार से मुतास्सिर किसी भी जिले में न तो सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का बंदोबस्त है और न ही पीने के साफ पानी का ही कोई इंतजाम । इन दोनों वजहों के चलते गरीब कुन्बों के बच्चे इस बुखार की जद में आ रहे हैं। सरकार का ध्यान अस्पताल बनवाने और मशीनें खरीदने में हैं। फरवरीए 2008 में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट स्कीम फार स्माल एण्ड मीडियम टाउन के तहत गोरखपुर के मसेहरा में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कायम करने की स्कीम बनी थी। इसके लिए 28 एकड़ जमीन भी खरीदी गई। तामीर के लिए मुतखब कंपनी 2011 में ब्लैकलिस्ट कर दी गई। इसके बाद से सरकार अब तक कोई दूसरी कंपनी का इंतखाब नहीं कर पाई है।

गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला बताते हैंए मसेहरा में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की तामीर में आने वाली रूकावटंें दूर कर ली गई हैं। जल्द ही तामीर शुरू हो जाएगी।  दिमागी बुखार के असर को बढ़ाने में गंदे पानी का भी खासा तआवुन है। गोरखपुर में राप्ती में मिलने वाली नदी आमी में बढ़ती आलूदगी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ;एनजीटीद्ध ने सरकार को नोटिस जारी किया है। आमी बचाओ मंच के कनवीनर विश्वविजय सिंह कहते हैए नदियों में कचरा डालने से और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का बंदोबस्त न होने से गोरखपुर और आसपास के जिलों में जमीन के अंदर के पानी को बुरी तरह आलूदा कर दिया है।

किसी भी बच्चे को झटके के साथ तेज बुखार आने पर उसे एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम ;एईएसद्ध का मरीज मानकर इलाज करने की हिदायत डाक्टरों को है। लेकिन बीमारी की वजह क्या है इसकी तहकीकात अभी तक पूरी नहीं हुई है। गोरखपुर मेडिकल कालेज के अहाते में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी ;एनआइवीद्धए पुणे की एक शाखा इस पर रिसर्च कर रही है। यहां की लेबोरेटरी जांच में माहौलियात और गंदगी में पाए जाने वाले एंट्रोवायरसए स्क्रब टाइफसए रुबेला वायरसए हरपीज सिंप्लेक्स वायरसए वेरीसोला जोस्टर वायरस समेत कुल 137 किस्म के वायरस की शिनाख्त की गई है जो जिस्म में दाखिल होकर दिमाग की झिल्ली में सूजन पैदा करते हैं जिसे एईएस कहा जाता है। एनआइवी में रिसर्च कर रहे एक डाक्टर बताते हैंए कई वायरस के फैलने की वजह एईएस के इलाज में दिक्कतें हैं। यही वजह है कि इसका टीका भी कारगर नहीं हो पा रहा है। हालांकि जापानी इंसेफ्लाइटिस ;जेईद्ध की रोकथाम के लिए हुई सरकारी टीकाकारी मुहिम पर भी सवाल उठ रहे हैं। मच्छर से होने वाली जेई से 2016 में कुल 74 मौतें हुई थीं जो 2005 में कुल 304 मौतों के बाद दूसरी सबसे बड़ी तादाद है।

गोरखपुर में इंसेफ्लाइटिस खात्मा मुहिम के चीफ कैंपेनर और बच्चों के अमराज के माहिर सीनियर डाक्टर आरण्एनण् सिंह कहते हैंए जेई टीकाकारी तभी कारगर है जब एक टीके के 365 दिन के अंदर दूसरी डोज भी दी जाए लेकिन सरकार सिर्फ एक ही डोज से काम चला रही है।  सरकार का दावा है कि दिमागी बुखार के शिकार जिलों में सद फीसद लोगों को टीका लगाया गया है। यह दावा गलत है क्योंकि इसका कोई ठोस सबूत या रिकार्ड नहीं है।