बच्चाखोर बनी योगी सरकार

बच्चाखोर बनी योगी सरकार

चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर मेडिकल कालेज में 80 से ज्यादा मासूमों की दम घुटने से मौत

 

”तीस-चालीस या सौ डेढ सौ कितने बच्चे बीआरडी मेडिकल कालेज मे आक्सीजन न होने से घुट-घुट कर मौत के मुंह में चले गए, योगी सरकार कई दिनों तक सही तादाद नहीं बता पाई, मरने वाले बच्चों का पोस्ट मार्टम भी नहीं किया गया, ताकि रिकार्ड न बन सके तो क्या सरकार बच्चों की तादाद छुपाना चाहती है। डीएम ने साफ कहा कि आक्सीजन की सप्लाई बदं होने से बच्चों की मौत हुई लेकिन चीफ मिनिस्टर कहते रहे गदगी की वजह से यह हादसा हुआ।“

 

”योगी सरकार ने इस दर्दनाक हादसे के लिए डाक्टर कफील अहमद की शक्ल मेें एक विलेन तलाश कर लिया उन्हें मुअत्तल कर दिया गया। सोलह अगस्त की डीएम की रिपोर्ट में कफील के बजाए पुराने प्रिंसिपल डाक्टर राजीव मिश्रा और डाक्टर सतीश कुमार को इस हादसे के लिए जिम्मेदार करार दिया गया। आरएसएस ने तो योगी से ‘प्रायश्चित’ तक करने के लिए कहा है।“

 

”आरएसएस और बीजेपी के ही पुराने लोगों के जरिए चलाए जाने वाले एक चैनल ने तो चैदह अगस्त को ही तहकीकात करके रिपोर्ट भी दे दी कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने डाक्टर कफील का इस्तेमाल करके चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने के लिए बच्चों को इस तरह मरवाने की साजिश रची है।  चैनल की रिपोर्ट में कफील के राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ नजदीकी ताल्लुकात भी बताए गए है।“

 

लखनऊ! गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में हुई 63 बच्चों की मौत के मामले में डीएम राजीव रौतेला की जो रिपोर्ट आई है उसने चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। खुद योगी ने इस हादसे के लिए डाक्टर कफील अहमद की शक्ल में जो विलेन तलाश करके उन्हें मुअत्तल किया था डीएम ने उन कफील को इस हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं माना है और कहा है कि कालेज प्रिंसिपल और एनेसथीसिया के चीफ डाक्टर की लापरवाई के नतीजे मेंयह हादसा पेश आया। उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ के अपने शहर गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में दो दिन के अंदर 63 मासूम बच्चों की दम घुट कर मौत हो गई क्योंकि भुगतान न हो पाने की वजह से आक्सीजन लिक्विड गैस के सप्लायर ने आक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी। इस गैस सप्लायर को मोदी सरकार ने ही मार्च में पुराने सप्लायर से छीन कर काम दिया था। गैस की सप्लाई बंद होने से बच्चों के अलावा 25 दूसरे मरीज भी मौत के मुंह में चले गए। दस अगस्त के इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल में बच्चों के मरने की खबरें मुसलसल आती रही खबर लिखे जाने तक सवा सौ से ज्यादा बच्चे मौत के मुंह में जा चुके थे। बच्चों का कोई तजुर्बा और बच्चों के दर्द का एहसास न होने की वजह से योगी तीसरे दिन ही अस्पताल पहुचे जबकि गुलाम नबी आजाद की कयादत में कांगे्रस का एक वफ्द इस हादसे की अगली सुबह ही अस्पताल पहुच गया था। इस संगीन मामले में चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ उनके हेल्थ मिनिस्टर सिद्धार्थ नाथ सिंह, हेल्थ एजूकेशन मिनिस्टर आशुतोष उर्फ गोपाल टण्डन, कालेज के प्रिंसिपल रहे डाक्टर राजीव मिश्र, बीजेपी सदर अमित शाह और वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोेदी के अलग-अलग तरह के बयान आते रहे। नरेन्द्र मोदी ने तो इस दर्दनाक हादसे को लाल किले से एक कुदरती आफत (प्राकृतिक आपदा) कहकर इसपर पर्दा डालने की कोशिश की। मामले को फिरकावाराना रंग देने के लिए चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ ने डाक्टर कफील अहमद की शक्ल में एक विलेन तलाश करके उन्हें मुअत्तल कर दिया था। खबर लिखे जाने तक गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला की रिपोर्ट सरकार के पास आ चुकी थी। डीएम ने पूरे मामले के लिए उस वक्त के कालेज के प्रिंसिपल रहे डाक्टर राजीव मिश्रा और एनेसथीसिया डिपार्टमेंट के हेड डाक्टर सतीश कुमार की लापरवाई को इस हादसे के लिए जिम्मेदार करार दिया है। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में डाक्टर कफील अहमद को कुसूरवार करार नहीं दिया है। रिपोर्ट मे डीएम ने कहा कि नौ अगस्त को वजीर-ए-आला आदित्यनाथ ने अस्पताल का दौरा किया था। उस दौरे के फौरन बाद प्रिंसिपल राजीव मिश्रा और प्राक्टर सतीश कुमार दोनों मेडिकल कालेज से छुट्टी चले गए। इन दोनों को मालूम था कि आक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स ने भुगतान न होने की वजह से आक्सीजन की सप्लाई रोकने की वार्निंग दे रखी है। यह मसला हल किए बगैर ही यह दोनों अस्पताल से चले गए। याद रहे कि इस हादसे के दिन ही डीएम ने कैमरो के सामने मीडिया से कहा था कि आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से बच्चों की मौतें हुई हैं। चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ पहले दिन से ही कहते रहे हैं कि बच्चों की मौतें आक्सीजन की कमी से नहीं गंदगी की वजह से हुई है। अगर उनकी बात मान भी ली जाए तो क्या गंदगी के लिए सरकार और अस्पताल एडमिनिस्टेªशन जिम्मेदार नहीं है? योगी आदित्यनाथ यह नहीं बता रहे हैं कि मेडिकल कालेज को गोरखपुर का ही गैस सप्लायर आक्सीजन सप्लाई कर रहा था तो उनकी सरकार आने के बाद उसे हटा कर इलाहाबाद के सप्लायर पुष्पा सेल्स को ठेका किसने और क्यों दे दिया। अब तो आरएसएस ने भी बच्चों की मौत के लिए आदित्यनाथ योगी सरकार को जिम्मेदार तस्लीम कर लिया है। अवद्द प्रांत के संघ चालक प्रभु नारायण सिंह ने बच्चों के इस तरह मारे जाने के वाक्ए को एक संगीन वाक्या करार देते हुए कहा है कि इन मौतों के लिए आदित्यनाथ योगी और उनकी सरकार को ‘प्रायश्चित’ (निदामत) करना चाहिए। इस हादसे की जांच करने के लिए भारत सरकार ने तीन डाक्टरों की एक टीम भेजी थी। उस टीम में शामिल डाक्टर हरीश चेलानी ने भी चीफ मिनिस्टर की तरह ही कह दिया कि आक्सीजन की कमी की वजह से बच्चों की मौतें नहीं हुई हैं उधर भारत सरकार की हेल्थ मिनिस्ट्री यही कहती रही कि अभी तक उसे कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई रूकने से साठ से ज्यादा मासूम बच्चे दम घुटने से मौत के मुंह में चले गए तो चारों तरफ हंगामा मच गया। अपोजीशन की जानिब से सरकार को बच्चों का कातिल, कत्लेआम करने वाली सरकार और बच्चाखोर यूपी सरकार तक कहा जाने लगा। मेडिकल कालेज मे आक्सीजन लिकुइड गैस की सप्लाई दस अगस्त को बंद हुई उससे ठीक एक दिन कब्ल योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल का दौरा किया था। इस दिल दहलाने वाले भयानक हादसे से योगी सरकार इतने दबाव में आ गई कि अवामी गुस्से के खौफ की वजह से आदित्यनाथ 48 घंटों तक अपने ही शहर में जाने की हिम्मत नहीं कर पाए। सरकार की लापरवाई और पूरे मामले को भोण्डे अंदाज में छुपाने का नतीजा यह हुआ कि मरने वाले बच्चों की तादाद तक नहीं बताई गई। अफवाहों के मुताबिक 18 बालिग मरीजों समेत इस भयानक हादसे में डेढ सौ से भी ज्यादा मरीजों की जानें चली गई। मरने वाले बच्चों का न तो कोई रिकार्ड बताया जा सका न तादाद और न ही उनका पोस्ट मार्टम कराया गया। पोस्ट मार्टम कराया जाता तो रिकार्ड भी बनाना पड़ता। आदित्यनाथ से वजीर-ए-आजम तक सभी ने इस मामले में इतनी लापरवाई का मुजाहिरा किया कि बात-बात पर ट्वीट करने और इस्राईल तक जाकर ‘मोशे’ नाम के बच्चे के साथ फोटो शूट कराने वाले नरेन्द्र मोदी ने गोरखपुर के बच्चों के लिए गम और अफसोस का एक लफ्ज भी ट्वीट नहीं किया। हादसे के पांच रोज बाद 15 अगस्त को लाल किले से तकरीर करते हुए उन्होने बच्चोें की मौत पर रस्मी अंदाज में अफसोस जाहिर करके अपना फर्ज पूरा कर लिया। बीजेपी सदर अमित शाह ने बंगलौर में कह दिया कि इतने बड़े मुल्क में ऐेसे हादसे होते रहते हैं। प्रदेश के हेल्थ मिनिस्टर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इंतेहाई बेशर्मी के साथ कह दिया कि अगस्त महीने में बच्चो की मौतें तो होती ही रहती हैं। दस अगस्त के इस दर्दनाक हादसे की अगली ही सुबह कांगे्रस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद, पार्टी लीडरान की एक टीम के साथ गोरखपुर में मरने वाले बच्चों के वाल्दैन के गम में शरीक होने पहुच गए थे लेकिन चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ तीन दिन बाद तेरह अगस्त को पहुच सके। इसके बावजूद उन्होेने इल्जाम लगा दिया कि कांगे्रसियों का तो एहसास ही मर चुका है। डीएम गोरखपुर ने अगली सुबह ही एलान कर दिया था कि आक्सीजन की सप्लाई रोके जाने की वजह से बच्चों की मौतें हुई हैं। लेकिन आदित्यनाथ यही कहते रहे कि आक्सीजन नहीं गंदगी की वजह से बच्चों की मौते हुई हैं। सवाल यह है कि गंदगी की वजह से बच्चों की मौतें हुई हांे या आक्सीजन की वजह से जिम्मेदारी किस की है? एक हफ्ता गुजरने के बाद तक सरकार इन मौतों की वजह नहीं बता सकी थी। आदित्यनाथ और उनकी सरकार को इस मामले में एक विलेन की जरूरत थी तो उन्होने इंसेफलाइटिस वार्ड के इंचार्ज डाक्टर कफील अहमद को तलाश कर लिया। वही कफील अहमद जिन्होने नौ और दस अगस्त की रात में बच्चों को बचाने के लिए पूरे गोरखपुर के डाक्टरों और अपने पैसों से आक्सीजन का इंतेजाम भी किया था। योगी ने उन्हे हटाया तो सोशल मीडिया पर भक्तों ने डाक्टर कफील को अय्याश, रेपिस्ट, कमीशनखोर और प्राइवेट प्रैक्टिस करने का मुल्जिम करार दे दिया। गोरखपुर में तेरह अगस्त को योेगी ने मीडिया को भी डांट लगाई थी तो अगले दिन गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली तक के अखबार डाक्टर कफील अहमद के गुनाहों की खबरों से रंगे दिखे। योगी उनकी सरकार और पार्टी सभी बच्चों की मौत के हादसे को डायवर्ट करना चाहते थे जो उन्होंनेे एक मुस्लिम नाम कफील के जरिए कर लिया। गुलाम मीडिया का हाल यह कि इस वक्त बच्चों की मौतों के मामले को दबाने के लिए यह खबरें दी जाने लगी कि इससे पहले की सरकारों के दौर में कब कितने बच्चों की मौतें हुई। मतलब यह कि अगर पिछली सरकार के दौर में सौ-दो सौ बच्चों की मौत हुई थी तो योगी सरकार को भी उतने ही बच्चों की जानें लेने का अख्तियार दिया ही जाना चाहिए। एक शख्स के दो बच्चों की जाने गई अखबार देख कर बोला ‘भगवान इन पत्रकारों के बच्चों को भी इसी तरह मार दे तभी इनकी समझ में आएगा।’

बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों के मरने की इत्तेला कई दिनों तक आती रही। चैदह अगस्त को भी 16 बच्चों के मरने की खबर आई लेकिन इन मौतों से बेफिक्र वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी प्रदेश में बडे़ पैमाने पर कृष्ण जन्म अष्टमी मनाने की तैयारियों में मसरूफ रहे उन्होने डीजी पुलिस को खत लिखकर हिदायत दी कि वह जन्म अष्टमी मनाने की तैयारियां कराएं। उसी दिन प्रदेश कांगे्रस के सदर राज  बब्बर लखनऊ में अपनी पार्टी के हजारों लोगों के साथ गांधी के मुजस्सिमें के नीचे धरना देते रहे। उन्होने असम्बली तक एहतेजाजी मार्च करने की कोशिश की तो पुलिस ने रोक दिया। उधर साबिक चीफ मिनिस्टर अखिलेश यादव गोरखपुर के गंावों में घूम-घूम कर मरने वाले बच्चों के वाल्दैन के जख्मों पर मरहम लगाते दिखे। उन्होने बीआरडी मेडिकल कालेज जाकर बच्चों के वार्ड्स का भी मुआयना किया लेकिन सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के किसी छुटभैया तक ने अस्पताल या मरने वाले बच्चों के घरों की तरफ झांक कर देखने की भी जहमत तक नहीं की।

योगी आदित्यनाथ की एक प्राइवेट आर्मी हिन्दू युवा वाहिनी भी है। गाय या गाया के गोश्त की महज अफवाह पर ही लाठी डण्डों तलवारों और दीगर असलहों से लैस होकर फौरन कहीं किसी पर भी हमला करने की आदी इस आर्मी का एक बंदा भी बीआरडी कालेज में मासूम बच्चों की मौत की खबर पर अस्पताल जाकर मदद करने नहीं पहुचा। हिन्दू युवा वाहिनी के इसी रवैय्ये पर तंज करते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट आ गई। जिनमें लिखा था कि यह तो इंसानों के बच्चे थे इसलिए कोई कुछ नहीं बोला एक गाय या गाय का बच्चा मरा होता तो हिन्दू युवा वाहिनी के बहादुर लड़ाके अस्पताल की ईट से ईट बजा देते।

इतनी बड़ी तादाद में बच्चों की मौत की वजह क्या बताई जाए योगी और उनकी सरकार कई दिनों तक इसी कशमकश में फंसी रही। पहले ही दिन गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला नेे बाकायदा मीडिया के कैमरों के सामने बताया कि बीआरडी कालेज में आक्सीजन की सप्लाई रूकने की वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया। उन्होने कहा कि जो कम्पनी आक्सीजन सप्लाई करती है उसका तकरीबन सत्तर लाख रूपया अस्पताल पर बकाया है। कई बार नोटिस देने के बावजूद अस्पताल ने भुगतान नहीं किया तो गैस सप्लायर ने सप्लाई रोक दी। उसी के नतीजे में इतना भयानक और दर्दनाक हादसा पेश आया। चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ ने डीएम की बात को गलत माना और कहा कि बच्चों की मौत तो गंदगी की वजह से हुई है। चीफ सेक्रेटरी की कयादत में कमेटी बना दी गई है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी। सवाल यह है कि अस्पताल का यह वाक्या इतना पेचीदा तो नहीं कि तहकीकात में हफ्तों और महीनों का वक्त लग जाए। इसकी तहकीकात तो एक या दो दिनों मंे ही मुकम्मल हो सकती थी। अगर योगी के मुताबिक बच्चों की मौतें आक्सीजन बंद किए जाने से नहीं हुई तो इतने अहम मामले में गलत इत्तेला देने के लिए योगी ने डीएम के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। अगर उन्हें मुअत्तल न करते तो तबादला तो कर ही सकते थे। ऐसा तो कुछ नहीं हुआ।

अस्पताल की हालत यह है कि इस दर्दनाक हादसे के तीन दिन बाद आदित्यनाथ ने अस्पताल का दौरा किया तकरीबन डेढ घंटे तक वार्ड में रहे इसके बावजूद वार्ड की गंदगी खत्म नहीं हुई और उनके वापस आने के बाद अगले दिन तकरीबन डेढ दर्जन बच्चे फिर मौत के मुंह में चले गए। बीआरडी कालेज के प्रिंसिपल डाक्टर राजीव मिश्रा ने इस हादसे के अगले ही दिन अपने ओहदे से इस्तीफा दे दिया। बाद में सरकार ने उन्हें मुअत्तल करने का भी एलान किया। इस पर इंण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के सदर के के अग्रवाल ने कहा कि डाक्टर राजीव मिश्रा को गलत तरीके से मुअत्तल किया गया है।

वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ ने तेरह अगस्त को गोरखपुर में कहा कि इस मामले की तहकीकात कराई जाएगी और जो लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे उनको ऐसी सख्त सजा दी जाएगी कि लोग बहुत दिनों तक याद रखेंगे। वजीर-ए-आला के इस बयान के बाद ही उनके हामी कई टीवी चैनल सरगर्म हो गए, सभी ने डाक्टर कफील अहमद को विलेन बनाना शुरू कर दिया। एक चैनल ने कई घंटों तक यह साबित करने की कोशिश की कि कुछ सियासी पार्टियों ने योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए डाक्टर कफील अहमद को इस्तेमाल किया और उसी के जरिए बच्चों को मरवाने की साजिश रची गई। चैनल की रिपोर्टर ने डाक्टर कफील के राहुल गांधी और अखिलेश यादव के रिश्तों का भी जिक्र कर दिया। चैनल का मकसद साफ था कि कांगे्रस और समाजवादी पार्टी ने एक साजिश के तहत डाक्टर कफील के जरिए बच्चों को मरवाने की साजिश रची। इन खबरों और सरकार के काम करने के तरीके से इतना तो वाजेह (स्पष्ट) हो चुका है कि इस पूरे मामले के लिए कफील को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा और इस बहाने भी कुछ हिन्दुओं को जज्बाती तौर पर भड़काकर उनके वोट ठगे जाएंगे। आक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के लिए चैनल ने कहा कि उसका ढाई अरब का सालाना कारोबार है 65-70 लाख के लिए वह सप्लाई क्यों बंद करेगी? साथ यह भी कहा गया कि कम्पनी मालिक की राहुल गांधी के साथ नजदीकी है। अस्पताल के पुराने प्रिंसिपल डाक्टर राजीव मिश्रा और पुष्पा सेल्स दोनों कह रहे हैं कि 68 लाख 65 हजार रूपयों का भुगतान न होने पर पुष्पा सेल्स ने सप्लाई बंद करने के लिए तीन बार तहरीरी नोटिस दिया था लेकिन चैनल कह रहा है कि इतनी बड़ी कम्पनी है 68-70 लाख रूपयों के लिए वह सप्लाई क्यों बंद करेगी।

यह तमाम रिपोर्टें इसलिए दिखाई और शाया (प्रकाशित) की जा रही है ताकि पूरे मामले में आक्सीजन सप्लायर पुष्पा सेल्स, साबिक प्रिंसिपल राजीव मिश्रा, पुष्पा सेल्स का भुगतान रोकने वाले अफसरान में से सभी को छोड़ कर डाक्टर कफील अहमद को ही कुर्बानी का बकरा बना दिया जाए। जिस कफील डाक्टर की तारीफों में तेरह अगस्त तक सोशल मीडिया और मकामी अखबार बढ-चढ कर खबरें शाया कर रहे थे वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद अगले दिन यानी चैदह अगस्त के अखबारात में उन्ही डाक्टर कफील की हिश्ट्रीशीट कुछ इस अंदाज में शाया की गई कि जैसे वह मुल्क का सबसे बड़ा क्रिमिनल हो आखिर यह स्पांसर्ड खबरें किस बात की जानिब इशारा कर रही थी। मुमकिन है जब तक यह अखबार कारईन (पाठकों) के हाथों तक पहुचे डाक्टर कफील गिरफ्तार भी हो चुके हों।