आरएसएस स्वयं सेवक के कत्ल पर मोदी हुकूमत बेचैन

आरएसएस स्वयं सेवक के कत्ल पर मोदी हुकूमत बेचैन

तिरूअनन्तपुरम! देश के सभी बीजेपी सरकारों वाले प्रदेशों में गाय के नाम पर कभी ‘धर्मरक्षा’ के नाम पर मुसलमानों को पीट-पीट कर मार दिया जाता है तो मोदी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगती, लेकिन केरल में दो गरोहों के दरम्यान गैंगवार में गुजिश्ता 29 जुलाई को एक आरएसएस वर्कर 34 साल के राजेश को उसके मुखालिफ गरोह ने कत्ल कर दिया तो पूरी हुकूमत मैदान मंे उतर आई। होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने केरल के वजीर-ए-आला पिनराई विजयन को फोन करके आरएसएस वर्करों की हिफाजत करने के लिए कहा तो गवर्नर सदाशिवम ने चीफ मिनिस्टर को अपने सामने तलब ही कर लिया। बीजेपी की केरल यूनिट के सदर कुमानम राजसेखरन ने इल्जाम लगाया कि राजेश का माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के हामियों ने कत्ल किया है। इस कत्ल के लिए उन्होने 30 जुलाई को केरल बंद का एलान किया जिसका कोई खास असर नहीं हुआ।

केरल मे भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने सीपीएम के काडर से मुकाबला करने के लिए जिन लोगों को आगे कर रखा है उनमें बेश्तर (अधिकांश) ऐसे हैं जो हिश्ट्रीशीटर और क्रिमिनल रिकार्ड वाले बताए जाते हैं। इसीलिए केरल में अक्सर मारपीट और सियासी कहे जाने वाले कत्ल की वारदातें होती रहती हैं। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के काडर और जिला सतह के ओहदेदारान में भी आरएसएस की तरह शोरेपुश्त (बाहुबलि) लोगों की भरमार है। 29 जुलाई केा आरएसएस स्वयं सेवक राजेश के कत्ल के बाद आरएसएस स्वयं सेवकों और बीजेपी के लोगों ने सीपीएम के स्टेट सेक्रेटरी के बालाकृष्णन के बेटे बिनीश कोडियेरी पर हमला किया और उनके दफ्तर को तोड़-फोड़ कर तबाह कर दिया। आरएसएस ने बिनीश पर ही इल्जाम लगाया कि उन्होने राजेश का कत्ल कराया है। आरएसएस की जानिब से लिखवाई गई रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने सीपीएम काडर के दस लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें चार यूथ और तलबा यूनिट के मेम्बरान हैं।

सवाल यह है कि अगर आरएसएस के किसी एक नौजवान को गैंगवार में कत्ल किया जाता है तो मरकजी होम मिनिस्टर और गवर्नर दोनों उतावले होेकर चीफ मिनिस्टर से फोन पर बात भी करते हैं और उन्हें बुलाकर एक तरह से धमकी भी देते हैं तो यही काम यह लोग उस वक्त क्यों नहीं करते जब बीजेपी सरकारों वाले राजस्थान, हरियाणा और झारखण्ड में इकट्ठा कई मुसलमानों को पीट-पीट कर मार दिया जाता है। आखिर मारे जाने वाले इंसानों के दरम्यान मोदी हुकूमत जानिबदारी (पक्षपात) से काम क्यों करती है।