नितीश पर हावी मोदी का खौफ

नितीश पर हावी मोदी का खौफ

”लालू कुन्बे के खिलाफ इनकमटैक्स, सीबीआई और इनफोर्समेट डायरेक्टेªट का इस्तेमाल करने का फैसला दिल्ली में विवेकानन्द फाउंडेशन के दफ्तर में हुई मीटिंग में हुआ था बताया जाता है कि मीटिंग में आरएसएस लीडरान के साथ नितीश के एक नजदीकी रिटायर्ड आईएएस अफसर भी मौजूद थे। उस दिन नितीश भी दिल्ली में थे और अपने नजदीकी अफसर के साथ मोबाइल के जरिए मुसलसल राब्ते में थे। रिपोर्ट मे तेजस्वी को भी नामजद करने का मश्विरा खुद नितीश कुमार का था ताकि लालू कुन्बे में उनका मुकाबला करने लायक कोई न रह सके।“

 

”लालू यादव सियासत और सोशल इंजीनियरिंग मे जितने माहिर हैं दिल के मामले में उतने ही कमजोर हैं। फौरन किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं इसी भरोसे की वजह से उन्होने नितीश को अपनी आस्तीन में ऐसा पाला कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद चीफ मिनिस्टर, होम मिनिस्टर और असम्बली स्पीकर तीनों ओहदे उन्हें सौंप दिए। अगर स्पीकर आरजेडी से होता तो नितीश कभी भी इतनी बड़ी साजिश न कर पाते। गठजोड़ सरकारों में हर प्रदेश मे यही फार्मूला रहा है कि चीफ मिनिस्ट्री, स्पीकर का ओहदा और होम मिनिस्ट्री एक पार्टी के पास नहीं रही है।“

 

”नितीश कितनी भी लफ्फाजी क्यों न करंे बिहार की किसी भी असम्बली सीट से वह एलक्शन नहीं जीत सकते। दावा कि उनके चेहरे पर ही गठबंधन जीता था अगर उनके चेहरे पर जीतता तो लालू की सीटें उनसे ज्यादा कैसे आ गई। उनकी ईमानदारी भी दिखावटी है एक रिटायर्ड आईएएस अफसर के जरिए उनके पैसे कमाने की खबरें है। बताया जाता है कि रेलवे मिनिस्ट्री के दौरान उन्होनेे अपने उस चहीते अफसर के जरिए जो घोटाले किए उनकी तफसील अब नरेन्द्र मोदी के हाथ लग चुकी है। इसी लिए वह मोदी के सामने भीगी बिल्ली बने हुए हैं।“

 

पटना! 2014 के लोक सभा एलक्शन के नतीजों से नरेन्द्र मोदी को मिली कामयाबी से सबसे ज्यादा खौफजदा नितीश कुमार ही हुए थे इसलिए कि नितीश को अच्छी तरह मालूम है कि लोक सभा एलक्शन में पार्टी को कामयाबी दिलाना तो दूर वह बिहार के किसी भी असम्बली हलके से खुद ही लडकर एलक्शन नहीं जीत सकते हैं। वह शरद यादव और मुलायम ंिसह यादव की पहल पर 2015 में महागठबंद्दन में शामिल तो हो गए थे लेकिन उस वक्त भी वह अंदरखाने आरएसएस लीडरान से मिले हुए ही थे। लालू परिवार के खिलाफ रिपोर्ट में तेजस्वी का नाम भी नितीश के कहने पर डाला गया। खबर है कि आरएसएस लीडरान और नितीश के दरम्यान उत्तर प्रदेश और बिहार काडर के दो रिटायर्ड आईएएस अफसरान पुल का काम कर रहे थे। एक सोची समझी हिकमते अमली के तहत आरएसएस और नरेन्द्र मोदी ने रामगोपाल यादव का इस्तेमाल करके शुरू में ही मुलायम सिंह यादव और उनकी पार्टी  को ‘महागठबंद्दन’ से अलग करा लिया था। लेकिन नितीश को लालू यादव, कांगे्रस और बिहार के अवाम को मुनासिब मौकेे पर ठगने के लिए छोडे़े रखा था। 2015 में बिहार असम्बली एलक्शन में लालू यादव की सोशल इंजीनियरिंग की ताकत से गठबंद्दन जीता तो नरेन्द्र मोदी अपनी शिकस्त बर्दाश्त नहीं कर सके। जो दो रिटायर्ड आईएएस अफसरान नरेन्द्र मोदी, आरएसएस और नितीश के दरम्यान पुल बने हुए थे वह विवेकानन्द फाउंडेशन के दफ्तर में बैठकर ही गठबंद्दन और सेक्युलर ताकतों के खिलाफ साजिश रचने का काम किया करते थे। इनमें से एक का काम नितीश के लिए काले द्दंद्दों और डील कराकर पैसे कमवाने का भी बताया गया है। खुद को ईमानदारी की अलामत बताने वाले नितीश कुमार दरअस्ल उसी अफसर के जरिए पैसा कमाते है। यह सिलसिला तभी से जारी है जब नितीश वाजपेयी सरकार में रेलवे मिनिस्टर थे। 2013 तक नितीश कुमार ने काफी पैसा इकट्ठा कर लिया था और उन्हें यह गलतफहमी भी हो चुकी थी कि वह अपोजीशन पार्टियों की जानिब से अगले वजीर-ए-आजम का चेहरा बन सकते हैं। इसी लिए जब बीजेपी ने 2013 के अपने गोवा अद्दिवेशन में नरेन्द्र मोदी को अगले वजीर-ए-आजम के तौर पर प्रोजेक्ट करने का एलान किया तो नितीश भडक गए और बीजेपी से उन्हेंने तकरीबन सोलह साल पुराना रिश्ता तोड़ लिया। दिल्ली में नितीश के कुछ नजदीकियों का कहना था कि उस वक्त तक नितीश ने बिहार के मुबय्यना (कथित) ईमानदार चीफ मिनिस्टर की जो तस्वीर बनाई थी उसके जरिए उन्हंे अगला वजीर-ए-आजम बनने का यकीन हो चुका था। उन्होनेे कांग्रेस सदर सोनिया गांद्दी और नायब सदर राहुल गांद्दी को भी अपने जाल में फंसा लिया था। उस वक्त तक उन्हें यह यकीन नहीं था कि नरेन्द्र मोदी मुल्क के कट्टरपंथी हिन्दुओं में मुस्लिम मुखालिफ ब्राण्ड बन चुके हैं। 2014 में मोदी की कामयाबी ने नितीश को और भी ज्यादा खौफजदा कर दिया। दिल्ली के सभी रास्ते बंद हो जाने की वजह से उन्होने तय कर लिया कि अब किसी भी कीमत पर बिहार की सत्ता हाथ से नहीं जाने देना है। 2015 के बिहार असम्बली एलक्शन में मिली शिकस्त नरेन्द्र मोदी और अमित शाह किसी भी कीमत पर बरदाश्त करने को तैयार नहीं थे उन्हंे तो हर हाल में पूरे उत्तर और पच्छिम भारत पर सियासी कब्जा चाहिए था। असम्बली एलक्शन में सबसे ज्यादा सीटें लाने के बावजूद लालू यादव ने नितीश पर इतना भरोसा किया कि चीफ मिनिस्टर और असम्बली स्पीकर दोनो ही ओहदे नितीश की पार्टी को दे दिए। लालू जितने अच्छे सियासतदां और सोशल इंजीनियरिंग के माहिर हैं दिल के मामले में उतने माहिर नहीं है। दिल के साफ होने की वजह से ही उन्होने स्पीकर का ओहदा भी नितीश की पार्टी को सौंप कर सियासी तौर पर अपने हाथ कटवा लिए। अगर स्पीकर लालू की पार्टी का कोई मेम्बर होता तो नितीश पूरे पांच साल तक उनके इशारों पर नाचते कभी द्दोका देने की हिम्मत न कर पाते। नितीश कुमार भले ही बीस महीने पहले गठबंद्दन के चीफ मिनिस्टर बन गए थे पहले दिन से ही उन्होने आरएसएस लीडरान से साठगाठ करके लालू यादव को सियासी चोट पहुचाने का फैसला कर रखा था। जदीद मरकज को पुख्ता खबर है कि जिस दिन विवेकानन्द फाउंडेशन के दफ्तर मे नितीश कुमार के नजदीकी रिटायर्ड आईएएस अफसर ने आरएसएस लीडरान के साथ बैठकर लालू यादव और उनके कुन्बे के खिलाफ सीबीआई, इनकमटैक्स मोहकमे और इनफोर्समेट डायरेक्टेªट को इस्तेमाल करने का फैसला किया उस दिन नितीश भी बिहार भवन मे मौजूद थे और फोन पर मुसलसल मीटिंग में मौजूद लोगों के साथ राब्ते में थे। लालू कुन्बे के खिलाफ लिखवाई जाने वाली एफआईआर मे तेजस्वी का नाम भी शामिल कराने का मश्विरा नितीश कुमार का ही था ताकि लालू कुन्बे की जानिब से चैलेंज करने की पोजीशन में कोई न रह सके।

नितीश कुमार ने ईमानदारी का जो लबादा ओढ रखा है वह भी फर्जी और बनावटी बताया जाता है। खबरें तो यहां तक मिल रही है कि उन्होनेे मोटी-मोटी कमाई के लिए एक रिटायर्ड आईएएस अफसर को अपनी नाक का बाल बना रखा है। उस अफसर के जरिए पैसे कमाने का उनका सिलसिला रेलवे मिनिस्ट्री से ही शुरू हो गया था। एक इत्तेला के मुताबिक रेलवे मिनिस्टर की हैसियत से उन्होने जो कारनामे किए थे उनकी तफसील अब वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के हाथों तक पहुच चुकी है इसी लिए नितीश मोदी के सामने भीगी बिल्ली की तरह दुम हिलाने को मजबूर है। बेशर्मी और अखलाकी (नैतिक) बेईमानी का आलम यह है कि जिन नरेन्द्र मोदी को वह पानी पी-पीकर कोसते और उनका मजाक उड़ाते रहे हैं अब उन्हीं मोदी के लिए कहने लगे कि 2019 के लोक सभा एलक्शन मे मोदी और भी ज्यादा सीटें जीतकर वापसी करेंगे। कहने लगे कि देश में नरेन्द्र मोदी के मुकाबले का कोई दूसरा लीडर है ही नहीं न ही आने वाले सालों में कोई उनका मुकाबला कर सकेगा। मोदी भक्ति का उनका यह हाल तब है जब खबर लिखे जाने तक वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात तक नहीं की थी बीजेपी के तीसरे दर्जे के लीडर ही नितीश के राब्ते में रहे हैं।

जहां तक ईमानदारी का सवाल है वह भी नितीश का ढोंग ही है। अगर वह ईमानदार होते तो बिहार के अवाम के वोट लेकर उनके साथ बेईमानी न करते और उसी बीजेपी की गोद मंे न बैठते जिस बीजेपी के खिलाफ बिहार के लोगों ने उन्हंे और गठबंद्दन को वोट देकर उन्हे सत्ता सौपी थी। दिमाग खराबी का आलम यह है कि अब कह रहे हैं कि एलक्शन में गठबंद्दन का चेेहरा तो वही थे उन्हीं के ईमानदार चेहरे पर लोगों ने वोट दिए। उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि अगर उनके चेहरे पर वोट मिला था तो बराबर सीटंें लड़कर लालू उनसे ज्यादा सीटंें कैसे जीत गए। अगर उन्हीं का चेहरा देख कर गठबंद्दन को वोट मिला था तो जनता दल यूनाइटेड को कम से कम नब्बे सीटें मिलनी चाहिए थी। दोनों पार्टियां 103-103 सीटों पर लडी थीं नितीश सिर्फ 71 पर और लालू 80 सीटों पर जीते थे।

दिल्ली के सियासी हलकों में यह खबरें भी गर्म हैं कि रेलवे में नितीश ने जो घपले किए थे उनकी तफसील वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के पास बिहार असम्बली एलक्शन के वक्त ही पहुच गई थीं और उन्होने मुनासिब वक्त पर उनका इस्तेमाल करने के लिए रख लिया था। अब खबर है कि मोदी ने बडी सफाई के साथ कह दिया था कि वह नितीश सरकार बर्खास्त करा देंगे। नितीश इसी से खौफजदा होगए और तकरीबन एक साल से वह लालू यादव और कांग्रेस के साथ जो साजिशें कर रहे थे उनपर फौरन अमल कर दिया। एक खबर यह भी है कि नरेन्द्र मोदी को खुश करने की गरज से उन्होेने ही अपने पुराने साथी सुशील मोदी को लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ कई अहम दस्तावेज भी दिए। यह दीगर बात है कि इन दस्तावेजात में कई गढे हुए झूटे और फर्जी हैं।

अगर नितीश के अंदर जर्रा बराबर भी ईमान और आत्मा नाम की कोई चीज होती तो बिहार के अवाम के साथ द्दोकेबाजी करने के बजाए दुबारा एलक्शन मैदान में जाने का फैसला करते। उन्होने ऐसा इस लिए नहीं किया कि फिर उनकी पार्टी के दो तिहाई मेम्बरान असम्बली टूटकर अलग हो जाते लालू यादव की मर्जी का कोई चीफ मिनिस्टर बन जाता फिर नितीश अपनी जिंदगी में दुबारा चीफ मिनिस्टर कभी न बन पाते। वह कुछ भी कर सकते हैं। जोड़तोड़ के जरिए 2005 मे मिली चीफ मिनिस्ट्री नहीं छोड़ सकते। चीफ मिनिस्ट्री के लिए अगर उनके वालिद जिंदा होते तो उन्हें भी द्दोका देते। नितीश कुमार आदतन द्दोकेबाज हैं। उनके साथ मिलकर समता पार्टी बनाने वाले जार्ज फर्नाडीज को उन्होनेे द्दोका दिया, लालू यादव को दूसरी बार द्दोका दिया है। जनता दल यूनाइटेड बनाने वाले शरद यादव को द्दोका दिया। सोनिया गांद्दी और राहुल गांद्दी से द्दोकेबाजी की सबसे ज्यादा बिहार के अवाम को द्दोका दिया। बडे़े त्यागी बनकर जीतन राम माझी को 2013 में उन्होने अपनी जगह चीफ मिनिस्टर बनवाया था लेकिन बहुत दिनों तक कुर्सी छोड़कर रह नहीं सके तो मांझी को द्दोका दे दिया।

राहुल गांद्दी और तेजस्वी यादव ने कहा कि नितीश ने बिहार के अवाम और उन दोनों के साथ द्दोकेबाजी की तो नितीश ने एलान कर दिया कि वह एक-एक इल्जाम का जवाब देेंगे। जवाब तो उनके पास है नहीं हां कोई नया झूट जरूर बोलेंगे। बेशर्मी दिखाएंगे और इसी तरह का जवाब देंगे कि नरेन्द्र मोदी तो भगवान हो चुके हैं उनके मुकाबले आज देश में दूसरा कोई लीडर ही नहीं है। वैसे जोडी खूब बनी है उनके मुताबिक मोदी के मुकाबले आज मुल्क में दूसरा कोई नहीं है तो बिहार के अवाम की जुबान में उनसे बड़ा द्दोकेबाज, झूट बोलने वाला और ईमानदारी का ढोग रचने वाला मुल्क में दूसरा कोई नहीं है।