मोदी सरकार में करोड़ों की रिश्वत खोरी

मोदी सरकार में करोड़ों की रिश्वत खोरी

नई दिल्ली! ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाली नरेन्द्र मोदी हुकूमत में आरएसएस लीडरों के जरिए बड़े पैमाने पर कमाई किए जाने की खबरों को उस वक्त और ज्यादा तकवियत (बल) हासिल हुई जब पार्टी की केरल यूनिट के बडे़ लीडर आर एस विनोद, तकरीबन छः करोड़ रूपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। बीजेपी ने विनोद का मामला काफी दिनों तक छुपाए रखा मामले पर लीपापोती करने के लिए पार्टी ने खुद ही अपने कोआपरेटिव सेल के सदर विनोद के खिलाफ लगे इल्जामात की तहकीकात करने के लिए पार्टी के ही दो लीडरान के पी श्रीसंन और ए के नजीर की तहकीकाती कमेटी बना दी। इन लोगों ने पूरे मामले की तहकीकात की तो यह बात साबित हुई कि आर एस विनोद ने एक मेडिकल कालेज के मालिक आर शाजी स ेउनके मेडिकल कालेज को मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से तस्लीम कराने और मेडिकल सीटंे एलाट कराने के लिए पांच करोड़ साठ लाख रूपए की रिश्वत पेशगी की शक्ल में ली। काम पूरा कराने का सौदा उन्होने पन्द्रह करोड़ में किया था।

आर एस विनोद का यह पहला मामला नहीं है। बताया जा रहा है कि मोदी हुकूमत बनने के बाद उसने दिल्ली जाकर हर तरह के काम कराने के ठेके लेने शुरू कर दिए थे। उसका दावा है कि मोदी सरकार के कई वजीरों के साथ उसके गहरे ताल्लुकात हैं जिनके पास जाकर वह तरह-तरह के काम करवा सकता है। इससे पहले भी वह कई मेडिकल कालेजों को मंजूरी दिला चुका है। इसलिए रिश्वत देकर काम कराने वालों को उसपर पूरा भरोसा भी हो गया था और लोग उसे पैसे देने में कोई खतरा महसूस नहीं करते थे। सवाल यह है कि अगर कोई शख्स दस-पन्द्रह करोड़ की रिश्वत देकर लोगों के काम करा देता है तो रिश्वत मे ली गई इतनी बडी़ रकम वह अकेले ही नहीं खा सकता।

जिस तरह मजबूरी में बीजेपी की केरल यूनिट ने विनोद के खिलाफ तहकीकात की कमेटी बनाई वह पकड़ा गया उसी तरह की कोई कमेटी बनाकर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह अपने वजीरों की भी तहकीकात कराएं कि किस-किस के दलाल प्रदेशों में फैले हैं जो दिल्ली आकर जायज-नाजायज सभी तरह के काम करा लेते हैं। पार्टी की इंटरनल तहकीकाती कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले तक केरल बीजेपी के प्रदेश सदर के राजसेखरन यही कहते रहे कि विनोद के मामले में मीडिया जरूरत से ज्यादा बढा-चढा कर खबरें दे रहा है। लेकिन अपनी ही पार्टी की रिपोर्ट आने के बाद शाम को उन्होंने विनोद को पार्टी से निकालने का एलान किया। साथ ही यह भी कहा कि पार्टी की मरकजी कयादत (नेतृत्व) इस मामले में नए सिरे से तहकीकात कराएगी।

आर एस विनोद पर रिश्वत लेने के इल्जाम कोई नई बात नहीं थी मामले ने तब तूल पकड़ा जब तिरूअनन्तपुरम के एक म्यूनिस्पिल कांउसलर और कारपोरेशन में लीडर आफ अपोजीशन ने वजीर-ए-आला को खत लिखकर इस पूरे मामले की सीबीआई जांच का मतालबा कर दिया। सीबीआई जांच का मतालबा होते ही बीजेपी में खलबली मच गई और फौरन ही एक इंटरनल तहकीकाती कमेटी बना दी गई। उस कमेटी ने यह बताकर किसी भी तहकीकाती एजेंसी का काम आसान कर दिया कि विनोद ने मेडिकल कालेज को मंजूरी दिलाने के लिए उसके मालिक शाजी से पांच करोड़ साठ लाख रूपए की रिश्वत ली।

रिश्वत लेकर मोदी हुकूमत से काम कराने वालों में आर एस विनोद अकेला नहीं है। पलक्कड़ के एक मेडिकल कालेज को मंजूरी दिलाने में बीजेपी के प्रदेश जनरल सेक्रेटरी एम टी रमेश पर भी पंाच करोड़ रूप्ए लेने का इल्जाम सामने आया है। रमेश ने भी इस इल्जाम की तरदीद (खण्डन) की और कहा उनपर यह इल्जाम गलत लगाया गया है। रमेश का नाम आते ही विनोद के भी हौसले बुलंद हो गए, उसने कह दिया कि पार्टी की इंटरनल तहकीकाती कमेटी ने उसपर रिश्वत लेने का इल्जाम साबित होना करार दिया है वह रिपोर्ट गलत है पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी की वजह से उसे फंसाया जा रहा है।

इतना संगीन इल्जाम लगने के बावजूद नरेन्द्र मोदी और उनके लोग अपनी सरकार को पाक-साफ बता रहे हैं। पिछले तीन सालों में बीजेपी लीडरान पर बेईमानी और रिश्वत के जितने भी इल्जाम लगे मोदी सरकार ने किसी भी इल्जाम की तहकीकात नहीं होने दी सभी मामलात को रफा-दफा कर दिया गया। केरल के आर एस विनोद और एस टी रमेश ने भी मोदी जैसी बातें करना शुरू कर दिया है। उन्होने कहा कि उनकी पार्टी के जो लोग उनपर इल्जाम लगाने में मुलव्विस हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए मतलब चोर-पुलिस वालों को जेल भेजने का मतालबा कर रहा है। मोदी और उनके सदर अमित शाह दोनों ही इन मामलात पर अपनी आंखें बंद किए हुए हैं। दुनिया का कोई भी शख्स यह बात मानने को तैयार नहीं हो सकता कि केरल और दूसरे प्रदेशों के बीजेपी के ओहदेदार करोडों की रिश्वत खाकर मोदी के वजीरों से काम कराने के लिए दिल्ली जाते हैं। वह दिल्ली में बैठे अपने आकाआंे को मोटी रकम दिए बगैर अकेलेे ही सारी रकम खा जाते हैं। लेकिन मोदी हैं कि मानते नहीं।