मायावती के लालच में तबाह होती बीएसपी

मायावती के लालच में तबाह होती बीएसपी

लखनऊ! पैसों की लालच में बीएसपी सुप्रीमो मायावती अपनी पार्टी को तबाह करने मंे लगी हैं। आहिस्ता-आहिस्ता वह सभी पुराने लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का काम करती जा रही है। उनका ताजा शिकार उनके  इंतेहाई नजदीकी कहे जाने वाले इंद्रजीत सरोज बने है। क्योंकि सरोज पार्टी मेम्बरान से पैसा इकट्ठा करने के लिए तैयार नहीं थे। बीएसपी के कई लोगों ने बताया है कि उत्तर प्रदेश असम्बली और लोक सभा के पिछले एलक्शन में जितने भी उम्मीदवार थे मायावती ने सबको हुक्म दिया कि वह अब पन्द्रह-पन्द्रह लाख रूपए पार्टी दफ्तर में जमा करे। इन्द्रजीत सरोज जैसे लोगों की ड्यूटी लगी कि वह सबसे पैसा इकट्ठा करवाने का काम करें। तमाम कोशिशों के बावजूद सरोज किसी एक भी मेम्बर से पैसा जमा कराने मंे कामयाब नहीं हुए तो उन्हंें फौरन निकाल दिया गया।

राज्य सभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती ने अपनी पार्टी के ओहदेदारों और पिछले लोक सभा व असम्बली एलक्शन में उम्मीदवार रहे लोगों की मीटिंग बुलाकर कहा था कि नसीम उद्दीन सिद्दीकी उनका सारा पैसा लेकर भाग गए हैं इसलिए उनके पास पार्टी चलाने के लिए भी पैसे नहीं बचे है। जबकि अब हर महीने की अटठारह तारीख को आंदोलन भी चलाना है। इसलिए सब लोग पन्द्रह-पन्द्रह लाख रूपए जमा करे। उनकी यह बात सुन तो सबने ली लेकिन पैसे देने के लिए तैयार कोई नहीं है। लोगों का कहना है कि अभी छः महीने पहले तक तो वह एलक्शन लडे हैं जो पैसे थे एलक्शन में लग गए अब मायावती को कहां से दे। दूसरे यह कि अगर वह पैसे जमा भी कर दे तो इस बात की क्या गांरटी है कि अगला असम्बली एलक्शन जो साढे चार साल बाद होगा उस वक्त तक मायावती उन्हें पार्टी में रहने भी देगी। दूसरे यह कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी कांगे्रस बीएसपी और समाजवादी पार्टी का जो महागठबंधन कराने की बात चल रही है अगर वह बन गया तो बीएसपी को एक तिहाई से ज्यादा सीटें नहीं मिलेगी ऐसे में बाकी दो तिहाई उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट कैसे मिलेगा। क्या उस वक्त मायावती टिकट न पाने वालों के पैसे वापस कर पाएंगी?

लोक सभा एलक्शन में एक भी सीट जीत न पाने के बावजूद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने दीवार पर लिखी इबारत नहीं पढी नतीजा यह कि उत्तरप्रदेश असम्बली का एलक्शन आते-आते पार्टी के कई सीनियर और कांशीराम के वक्त के लोगों ने या तो पार्टी छोड़ दी या फिर पार्टी से निकाल दिएगए। जिसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी बीस सीटंें ही जीत सकी। दलित-ब्राहमण-मुस्लिम की सोशल इंजीनियरिंग के जरिए 2007 में उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने के बाद से उनकी सारी इंजीनियरिंग फेल हो गई। दरअस्ल तब उन्होने पार्टी के ब्राहमण लीडरों के बहकावे में आकर पार्टी के मुस्लिम लीडरों और मुसलमानोें की तौहीन करने वाले बयान देते हुए कई बार कहा कि उन्हें मुसलमानों ने वोट नहीं दिए जिसका नतीजा यह हुआ कि 2012 मे समाजवादी पार्टी ने यादव-मुस्लिम वोटो की बदौलत प्रदेश मंेे सरकार बना ली इसके बाद 2014 के एलक्शन में बडी तादाद में दलित वोटर बीजेपी में चले गए। मायावती एक भी लोक सभा सीट नहीं जीत सकीं तो उन्हें एहसास हुआ कि मुसलमानों को नजरअंदाज करके उन्होने गलती की तो उन्होंनेे 2017 के असम्बली एलक्शन से कई महीने पहले तकरीबन सौ मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दे दिया तो इससे नाराज होकर उनके साथ सत्ता का मजा लूट चुके कई ब्राहमण लीडर बीजेपी में शामिल हो गए। उन सबने मायावती पर पैसे मांगने का इल्जाम लगाया। इसके बाद पार्टी के कद्दावर मुस्लिम लीडर नसीमउद्दीन सिद्दीकी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। यहां भी मामला पेैसे की वसूली का था। मायावती की रकम वसूल कर न दे पाने की वजह से पासी समाज के कद्दावर लीडर इन्द्रजीत सरोज को भी पार्टी से निकाल दिया गया है। जिस तरह से एक-एक करके पार्टी के पुराने लीडरों को पार्टी से निकाला जा रहा है वह रास्ता बीएसपी को तबाही की तरफ ही ले जाएगा।

इन्द्रजीत सरोज को पार्टी से निकाले जाने से चंद रोज कब्ल पार्टी के एमएलसी ठाकुर जयवीर सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी। जयवीर सिंह को 2012 में बीएसपी ने एमएलसी बनाया था उनकी मुद्दत 5 मई 2018 को खत्म हो रही थी। वह भी बीजेपी में शामिल हो गए है। पार्टी छोड़ने के बाद जयवीर सिह ने अपने पुराने साथी स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ प्रेस कांफ्रेंस करके मायावती पर पैसे मांगने का इल्जाम लगाते हुए कहा था कि बीएसपी कांशीराम के उसूलों से भटक गई है। ऐसा ही इल्जाम इन्द्रजीत सरोज ने लगाया है। इन्द्रजीत सरोज का कहना था कि मायावती ने उन्हें फोन करके कहा था कि पार्टी की माली हालत खराब है प्रदेश की हर असम्बली सीटसे नौ से 22 लाख रूपए तक वसूल कर पार्टी फण्ड में जमा करना है। इन्द्रजीत सरोज ने कहा कि जब उन्होने पैसे इकट्ठा करने से इंकार कर दिया तो मायावती ने उनसे  कहा कि ऐसे आदमी की पार्टी में जरूरत नहीं है। आपको पार्टी के सभी ओहदों से हटाया जाता है। इन्द्रजीत सरोज ने कहा कि चूंकि नसीमउद्दीन सिद्दीकी के मामले में पार्टी की किरकिरी हो चुकी थी इसलिए प्रेस कांफ्रेंस नहीं की गई। इन्द्रजीत सरोज ने अपने ढाई सौ हामियों के साथ इस्तीफा दे दिया तो पार्टी के जोनल कोआर्डीनेटर अशोक गौतम ने कहा कि साजिश के तहत इन्द्रजीत सरोज उल्टी सीधी बयानबाजी कर रहे हैं। सरोज के बाद अब उनके हमियो पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है और उन्नाव से साबिक मेम्बर असम्बली राधेलाल रावत को भी बर्खास्त कर दिया है। कुछ और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। सरोज के हामियों का कहना है कि मायावती का पैसे की लालच और उनका तानाशाही भरा रवैया पार्टी को तबाही की तरफ ले जा रहा है। इन लोगोे का कहना है कि मायावती आज की तारीख में यह हकीकत मानने के लिए तैयार नहीं है कि अगर कोई पार्टी से जुडा है तो यही बहुत है। इसके बाद वह रकम का मतालबा कर रही है। असम्बली एलक्शन साढे चार साल बाद होना है पार्टी हाशिए पर है ऐसे में कौन पैसे देगा।

दरअस्ल बीएसपी सुप्रीमो मायावती की समझ में नहीं आ रहा है कि वह पार्टी को कैसे संभालें और अपना दलित वोट बैंक कैसे सहेज कर रखे। इन्द्रजीत सरोज को पार्टी से निकाले जाने के बाद दलितों के पार्टी से छिटकने का खतरा बढ गया है। क्योंकि सरोज पासी समाज के कद्दावर लीडर माने जाते हैं। यह भी खबर है कि लोक सभा एलक्शन से पहले बीएसपी मंे बडी तादाद में बगावत हो सकती है। पार्टी के कई लीडर और मेम्बरान असम्बली बीजेपी लीडरों के राब्ते में बताए जाते है। ऐसे में बीएसपी के लिए आनेवाला वक्त और मुसीबत लाएगा और पार्टी खात्मे की कगार पर पहंुच सकती है।

बीएसपी के बानी कांशीराम के साथ-साथ कांधे से कांधा मिलाकर उनके मिशन में जो लोग शामिल हुए थे तकरीबन उन सभी लोगांें को मायावती बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। इनमें पार्टी के पहले प्रदेश सदर जंग बहादुर पटेल के अलावा राम लखन वर्मा, बरखू राम वर्मा, आरके चैधरी, श्रीराम यादव, राज बहादुर , दीनानाथ भास्कर, ईसम सिंह, बलिहारी बाबू, रामरति बिंद, डाक्टर मसूद, मोहम्मद अरशद, कैप्टन सिकंदर रिजवी, राम प्रसाद, प्रमोद कुरील, जगन्नाथ राही, अशोक वर्मा, आरके पटेल, कमलाकांत गौतम, स्वामी प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, हरपाल सैनी, प्रदीप सिंह और नसीम उद्दीन सिद्दीकी जैसे पुराने व कद््दावर लीडरों को मायावती ने बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। कुछ ने अपने सियासी फायदे के लिए बीएसपी को छोड दिया था। पार्टी के जिन पुराने और वफादार लीडरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है उनमें अब इन्द्रजीत सरोज का नाम भी जुड़ गया है।

जितने भी लोगों को मायावती ने पार्टी से निकाला है सबका एक ही इल्जाम है कि मायावती उनसे पैसों की वसूली के लिए दबाव डालती थीं पैसों की लालच मंे उन्होने  कांशीराम के मिशन को फरामोश कर दिया है। मायावती को पैसे नहीं पहुचा सके तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जिस तरह से पार्टी के पुराने लीडर पार्टी छोडकर जा रहे हैं यह सिलसिला अगर लोक सभा तक जारी रहा तो बीएसपी पूरी तरह तबाह हो जाएगी इसमें कोई शक नहीं है।