दूर तक फैला है पेट्रोल चोरों का जाल

दूर तक फैला है पेट्रोल चोरों का जाल

लखनऊ! पेट्रोल पम्पों पर पेट्रोल चोरी किए जाने के सिलसिले में जब एसटीएफ ने ताबड़तोड़ छापे मारी की और चोरी पकड़े जाने पर पेट्रोल पम्प सील कर दिए तो कईयों की डीलरशिप कैंसिल करा दी गई। इसी छापेमारी के दौरान लखनऊ बाराबंकी समेत आसपास के जिलों के कई पेट्रोल पम्प मालिकान ने एसटीएफ को बताया कि उनको ही पूरा तेल नहीं मिलता है तभी वह पेट्रोल चोरी पर मजबूर होते हैं। इसकी इत्तेला पुलिस को दी गई तो सरोजनी नगर पुलिस ने टैकरों से डीजल-पेट्रोल चुराने वाले गरोह के बारह लोगों को पकड़ कर पर्दाफाश करने का दावा किया है। लेकिन अवाम की नजर में यह महज दिखाने की कार्रवाई है। तेल कम्पनियों के डिपो से निकलने वाले टैंकरों से पेट्रोल-डीजल की चोरी का खेल लम्बे अर्से से जारी है। जिसमें पुलिस वालों के अलावा डिपो के मुलाजिम और तेल कम्पनियों के अफसरान की मिलीभगत भी रहती है। हाईवे पर बने ढाबों के बाहर इन टैंकरों से पेट्रोल-डीजल की चोरी को कभी भी देखा जाता है।

इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आई ओ सी एल) के डिपो से टैंकरों के निकलते ही पेट्रोल-डीजल चोरी का खेल शुरू हो जाता है। सरोजनी नगर के इंडियन आयल डिपों से निकलते ही टैंकर अनौरा की तरफ टैेकर घूम जाते हैं। जहां से डीजल-पेट्रोल चोरी किए जाने के बाद ही टैंकर पेट्रोल पम्पों की तरफ रवाना होते हैं। पुलिस ने भी खानापुरी करते हुए अनौरा में छापेमारी की और अनौरा गांव के बारह लोगों को पेट्रोल-डीजल चोरी करने वाले गरोह का बताकर गिरफ्तार किया। जबकि छः लोगों को फरार बताया। पकडे़ गए लोगों के पास से पुलिस ने 900 लीटर पेेट्रोल-डीजल, 70 लीटर केरोसिन, 40 पीपे और तेल नापने वाले पीतल के पांच गेज बरामद हुए। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि मुल्जिमान के पास से टैकरों का ताला खोलने वाली ग्यारह चाबियां भी मिली हैं। इसी वजह से पुलिस को शक है कि चोरी के इस खेल में डिपो के मुलाजिमीन और अफसरान भी शामिल हो सकते हैं।

लखनऊ के सीनियर पुलिस कप्तान दीपक कुमार का कहना है कि यह शक इसलिए हो रहा है क्योंकि टैंकर के ताले की एक चाबी डिपो और दूसरी आईओसीएल के अफसरान के पास रहती है। ऐसे मे मुल्जिमान के पास से चाबियों का बरामद होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है और डिपो के मुलाजिमीन व इंडियन आयल के अफसरान की शमूलियत का शक पैदा कर रहा है। सीनियर पुलिस कप्तान दीपक कुमार डिपो और कम्पनी के लोगों का इस खेल में शामिल होने का शक तो जाहिर कर रहे हैं लेकिन इस खेल में पुलिस वालों के शामिल होने की बात मानने के लिए तैयार नहीं है न ही उन्होने यह जानने की कोशिश की कि अनौरा गांव मे तेल चोरी में लोगों को पकड़ा लेकिन उसके पास के बेहटवा गंाव और अमौसी की एक वर्कशाप मे भी तेल चोरी का धंधा चल रहा था मगर पुलिस ने वहां पर दबिश क्यों नहीं दी। एसएसपी दीपक कुमार भले ही 12 लोगों को पकड़ कर तेल चोरी के रैकेट का पर्दाफाश करने के दावे कर रहे हैं सच्चाई यही है कि पुलिस की मिलीभगत से ही तेल का यह खेल चल रहा था।

बाखबर जराए से पता चला है कि सरोजनीनगर थाने का एक सिपाही इस खेल की वह कड़ी है तो तेल चोरों को पुलिस से जोडती है। यह सिपाही पिछले तकरीबन 14 साल से इसी इलाके में तैनात है। अगर कभी उसका ट्रांसफर भी कर दिया जाता है तो चंद दिनों के अंदर ही वह वापस यहीं आ जाता है। खबर तो यहां तक है कि इस सिपाही ने दूसरे के नाम से एक ट्रांसपोर्टर के साथ पार्टनरशिप में टैंकर भी ले रखा है यही नहीं इलाके मे जहां-जहां भी टैंकरों से तेल चोरी किया जाता है वहां के हर ठिकाने से पुलिस को बीस हजार रूपए रोज रिश्वत के तौरपर मिलते। यह रकम भी यह सिपाही तेल चोरों से वसूल कर अपने अफसरान तक पहुचाता है। यही वजह है कि सरोजनी नगर में लम्बे अर्से से चल रहे तेल चोरी के इस धंधे को रोकने की मकामी पुलिस ने कभी कोई कोशिश नहीं की। लेकिन जब पेट्रोल पम्प मालिकान से इस तेल चोरी के खेल की खबर एसटीएफ को लगी तो उसने पुलिस के सीनियर अफसर को जानकारी दी उसी सीनियर अफसर की हिदायत पर यह कार्रवाई हुई। लेकिन जराए का कहना है कि सिपाही ने छापे से पहले खबर पहुचा दी थी इसलिए असल खिलाडी फरार हो गए और महज 12 ऐसे लोग पकडे गए जो कैरियर का काम करते है। यही वजह थी कि वह सिपाही इस छापेमारी की कार्रवाई में भी शामिल नहीं था। लेकिन इस बारे में सीनियर पुलिस कप्तान दीपक कुमार भी कुछ कहने के लिए तैयार नहीं हैं।

टैंकरों से तेल चुराने का खेल कोई नया नहीं है। लम्बे अर्से से यह धंधा जारी है। ऐसे में पुलिस को इस बात की खबर न हो कि उसके इलाके में पेट्रोल और डीजल चोरी का धंधा चल रहा है नाकाबिले यकीन बात है। कुछ लोगों का तो यह तक कहना है कि सरोजनीनगर थाने के ज्यादातर पुलिस वाले मुफ्त में यही चोरी का पेट्रोल और डीजल अपनी गाड़ियों में इस्तेमाल करते हैं। लिहाजा एक तरीके से तेल चोरी का यह धंधा पुलिस की सरपरस्ती में ही चल रहा है जिसमें डिपो और कम्पनी के अफसरान भी शामिल रहते हैं। इसका सबूत उस वक्त मिल भी गया जब आईओसीएल के तर्जुमान मनोज अवस्थी ने कहा कि टैंकरों से तेल चोरी की जानकारी आयल कम्पनी को थी डीजीएम टेक्निकल ने इस बारे में तीन बार पुलिस अफसरान को खत लिखकर कार्रवाई के लिए भी कहा था। उन्होनंे कहा कि इस बात की जांच कराई जाएगी कि मुल्जिमान के पास चाबियां कैसे पहुची दूसरी तरफ आईओसीएल के डिपो इंचार्ज एन के श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्हें किसी की गिरफ्तारी या टैंकर से तेल चोरी होने के मामले की जानकारी नहीं है। इससे तो यह मतलब निकलता है कि आयल कम्पनी ने टैंकर से तेल चोरी होने की इत्तेला उस डिपो इंचार्ज को नहीं थी जिसके डिपो से निकलने वाले टैंकरों से ही डीजल-पेट्रोल की चोरी हो रही थी। इससे साफ होता है कि डिपो इंचार्ज श्रीवास्तव भी इस पूरे तेल चोरी के रैकेट मंे शामिल हंै हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस ने न तो डिपो के इंचार्ज समेत किसी मुलाजिम से और न ही आयल कम्पनी के किसी अफसर से इस सिलसिले मंे पूछगछ की थी।

तेल चोरों का यह जाल बहुत दूर तक फैला हुआ है। इसलिस महज 12 लोगों को पकड़ कर पुलिस दावा कर रही है कि उसने तेल चोरों का गरोह पकड़ लिया जबकि पकडे गए लोग तो महज कैरियर हैं जो पेट्रोल-डीजल को इधर से उधर ले जाने का काम करते है। इस खेल के बारे में बताया जाता है कि सरोजनीनगर के इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड के  डिपो से रोजाना 350 टैंकर रवाना होते हैं जिनके पम्पों पर पहुचने से पहले ही उनमें से कुछ टैंकरों से सौ लीटर से ज्यादा डीजल-पेट्रोल निकाल लिया जाता है। मुलाजमीन-अफसरान और पुलिस की मिलीभगत से चलने वाले तेल चोरी के रैकेट में 19 लाख रूपए का पेट्रोल-डीजल चोरी होता है। एक टैंकर में चार चैम्बर बने होते हैं। (बाकी पेज चैदह पर) जिनमें 12000 लीटर पेट्रोल-डीजल आता है। इनमें से कुछ टैंकरों के हर चैम्बर से 27-27 लीटर पेट्रोल-डीजल निकालते हैं। चोरी किया हुआ पेट्रोल 60 रूपए में और डीजल 50 रूपए लीटर के हिसाब से बेचा जाता है। इस चोरी की जानकारी पेट्रोल पम्प से जुडे सभी मोहकमों के अफसरान को होती है। यही वजह है कि अगर कोई पेट्रोल पम्प मालिक कम माल आने की शिकायत करता है तो उसे डीलरशिप कैंसिल कराने की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। यही वजह है कि वह पेट्रोल-डीजल कम नाप कर कन्ज्यूमर को चूना लगाते हैं। इससे तो लगता है कि पेट्रोल-डीजल यानि तेल चोरी के इस खेल में आयल कम्पनियों के अफसरान डिपोे के मुलाजमीन, पुलिस वाले और बाट-माप मोहकमे के लोग भी शामिल रहते है। जबकि कार्रवाई सिर्फ पेट्रोल चोरी करने वाले पेट्रोल पम्पों या छोटे मुल्जिमान के खिलाफ होती है।