सेक्युलर ताकतों को कमजोर करने के लिए आरएसएस से मिलकर रची साजिश – जम्हूरियत पर नितीश मोेदी का डाका

सेक्युलर ताकतों को कमजोर करने के लिए आरएसएस से मिलकर रची साजिश – जम्हूरियत पर नितीश मोेदी का डाका

”नितीश कुमार जम्हूरियत के सबसे बड़े बेईमान और मुजरिम हैं। बेईमानी सिर्फ पैसों की ही नहीं होती सबसे बड़ी बेईमानी तो यही है कि उन्होने लालू यादव के जरिए बिहार के मुसलमानों, यादवों, दलितोें और पिछड़ों के वोट लेकर सत्ता पर कब्जा किया फिर अवाम को धोका देकर उन्हीं मोदी के कदमांे में जा गिरे जिनके खिलाफ लोगो ने उन्हे वोट देकर सत्ता में बिठाया था।“

 

”मिट्टी मे मिल जाऊंगा बीजेपी के साथ कभी नहीं जाऊंगा और देश को आरएसएस से खाली (संघमुक्त) कराने का दावा करने वाले नितीश फिर आरएसएस की गोद में जा बैठे। नरेन्द्र मोदी ने नितीश के डीएनए पर सवाल उठाया था अब उसी घटिया डीएनए को अपने डीएनए में जम (विलय) कर लिया दुनिया जानती है जो अपने कौल पर कायम नहीं रहते वह खराब किरदार के लोग होते हैं।“

 

” नितीश कुमार की धोकेबाजी से लालू यादव भले ही बिहार की सत्ता से अलग हो गए हैं अवाम में नितीश की तस्वीर ही दागदार हुई है। नितीश शायद मोदी और आरएसएस की बेरहमी से खौफजदा हो गए हैं। उन्हें मालूम है कि मोदी की सीबीआई इस वक्त मुल्क भर में सिर्फ ममता बनर्जी और लालू परिवार के खिलाफ ही सरगर्म है अगला नम्बर उन्हीं का था।“

 

पटना! मुल्क की सियासत में सबसे बड़े धोकेबाज और सेक्युलर ताकतों के खिलाफ आरएसएस के साथ मिलकर साजिश करने वाले नितीश कुमार एक बार फिर अपना चेहरा खुद ही बेनकाब करते हुए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के कदमों मे जा गिरे हैं। उन्होने आरएसएस के साथ मिलकर सेक्युलर ताकतों के खिलाफ एक बडी साजिश रचकर बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, कांगे्रस और अपने जनता दल यूनाइटेड के गठजोड़ वाली सरकार गिराकर खुद भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर फौरन ही अपनी सरकार बना ली। उन्हें यह घिनौनी हरकत करने मंे जरा भी शर्म नहीं आई एक बार भी उन्हें यह ख्याल नहीं आया  कि बीस महीने कब्ल हुए बिहार असम्बली के एलक्शन में उन्होने फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ जिन मुसलमानों, यादवों, दलितों और पिछड़ों के वोट लेकर सत्ता में लालू यादव की मदद से वापसी की थी उनके इस कदम से उन तबकों पर क्या गुजरेगी। कांगे्रस और आरजेडी को सरकार से अलग करने की वजह यह बताई गई कि सीबीआई ने उनके नायब वजीर-ए-आला रहे तेजस्वी यादव के खिलाफ बेईमानी से इकट्ठा की गई दौलत के लिए रिपोर्ट दर्ज की तो उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया और नितीश किसी भी सूरत में अपनी ईमानदारी की तस्वीर (छवि) खराब करना पसंद नहीं करते। हकीकत यह है कि सबसे बडे़ बेईमान तो खुद नितीश है। जब उन्होने लालू यादव के साथ गठजोड़ किया था उस वक्त तक लालू यादव को चारा घोटाला में तीन साल की सजा हो चुकी थी और वह कोई एलक्शन नहीं लड़ सकते थे। नितीश बेईमानी के मुकदमे में दस साल की सजा काट रहे ओम प्रकाश चैटाला से मिलकर उनकी इडियन नेशनल लोकदल को अपने गठजोड़ में शामिल कराने खुद ही गए थे। सियासत में इससे बड़ी बेईमानी भी और क्या हो सकती है कि बिहार के अवाम से उन्होने फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ वोट लेकर सरकार बनाई और उन्ही वोटरों की ताकत को लेकर नरेन्द्र मोदी के कदमांे में जा बैठे। बिहार के अवाम के साथ इससे बडी बेईमानी और धोकेबाजी और क्या हो सकती है।

हकीकत यह है कि 2013 से 2015 तक नितीश कुमार इस गलतफहमी में थे कि वह अपोजीशन पार्टियों की मदद से मुल्क में नरेन्द्र मोदी का मुतबादिल (विकल्प) बन सकते हैं। इसीलिए उन्होने 2013 में अपना चोला तब्दील किया था जैसे ही उन्हें यह अंदाजा लगा कि मुतबादिल बन पाने की सलाहियत उनमें नहीं है तो ‘महागठबंधन’ में रहते हुए उन्होने कोई दस महीने पहले नरेन्द्र मोदी और आरएसएस के साथ खुफिया तरीके से मिलकर सेक्युलर ताकतों के खिलाफ सजिश रचनी शुरू कर दी। इसी सजिश के तहत अपोजीशन पार्टियों में वह अकेले लीडर थे जिन्होने नोटबंदी  के मोदी के फैसले की हिमायत की फिर मुबैयना (कथित) सर्जिकल स्ट्राइक की हिमायत की और अब राष्ट्रपति के एलक्शन में अपनी पार्टी व अपने गठबंधन के लीडरान से मशविरा किए बगैर ही मोदी के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की हिमायत का एलान कर दिया था। यही नितीश है जिन्होेने 2015 में लालू यादव और कांगे्रस के साथ गठजोड़ करते वक्त कहा था कि वह मिट्टी मे मिल जाएंगे लेकिन कभी भी दुबारा बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। उन्होने कहा था कि मुल्क को आरएसएस से आजाद (संघ मुक्त) कराएंगे। नितीश की बदनियती का आलम यह है कि अब उन्होने इस्तीफा देकर बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया तो शरद यादव समेत अपने किसी भी साथी  को एतमाद (विश्वास) में नहीं लिया। वह ईमानदार होने का ढोग चाहे कितना क्यों न करें बिहार के अवाम के साथ उन्होने जो बेईमानी और धोकेबाजी की है उसकी दूसरी कोई मिसाल मिलना मुश्किल है।

भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी भी इतने जम्हूरियत (लोकतन्त्र) पंसद हैं कि गोवा में उनके चीफ मिनिस्टर और सभी छः वजीर एलक्शन हार गए। उनकी पार्टी तीसरे नम्बर पर आ गई थी फिर भी खरीद-फरोख्त करके उन्होने मनोहर परिक्कर के जरिए गोवा की सरकार पर कब्जा कर लिया यही मणिपुर में किया था अब वही काम बिहार में किया। बिहार असम्बली में 243 मेम्बरान में बीजेपी और उसके साथ एनडीए में शामिल पार्टियों को सिर्फ 53 सीटें मिली थीं यानी एक चैथाई से भी कम। इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी ने अपने परिवार के पुराने खुशामदी नितीश कुमार के साथ मिलकर बिहार की सत्ता को भी लूट लिया।

नितीश  कुमार के इस फैसले से उनकी पार्टी में भी काफी नाराजगी का माहौल पैदा हो गया है। उनकी पार्टी के सबसे सीनियर लीडर शरद यादव राज्य सभा मेम्बर अली अनवर और जनरल सेक्रेटरी अरूण सिन्हा ने दिल्ली मंे खुल कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। उनके 71 मेम्बरान असम्बली में 5 मुसलमान और बारह यादव हैं जिन्हें नितीश ने अपने सरकारी मकान में कैद कर रखा था। वह लोग भी इस फैसले से काफी नाराज बताए जाते हैं। शायद नितीश और बीजेपी की सरकार की उम्र ज्यादा लम्बी न होगी।

भारतीय जनता पार्टी और नितीश की साजिश का सबूत यह भी है कि नितीश ने इस्तीफा दिया तो दस मिनट के अंदर बीजेपी लीडर सुशील मोदी अपनी पार्टी के मेम्बरान असम्बली को लेकर उनके पास पहुच गए नरेन्द्र मोदी ने फौरन ही नितीश की तारीफों के पुल बांध दिए और फौरन एलान हो गया कि अब नितीश जेडीयू और बीजेपी की मिलीजुली सरकार के चीफ मिनिस्टर होंगे। स्पीकर की हैसियत से उत्तरप्रदेश में पार्टियों मंे तोड़-फोड़ और दलबदल कराने में बेईमानी के रिकार्ड बनाने वाले बिहार के गवर्नर केशरीनाथ त्रिपाठी ने नितीश के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी को सरकार बनाने का मौका दिए बगैर सुबह दस बजे ही नितीश कुमार को चीफ मिनिस्टर और बीजेपी के सुशील मोदी को डिप्टी चीफ मिनिस्टर का हलफ दिला दिया। लालू यादव कहते हैं कि उन्हें तो काफी पहले से पता था कि नितीश कुमार बीजेपी से मिलकर साजिश कर रहे हैं। लेकिन गठबंधन बचाए रखने के लिए वह खामोश रहे। लालू की यह बात सदफीसद सच है कि नितीश ने मोदी के साथ साजिश करके उनके पूूरे कुन्बे के खिलाफ सीबीआई का इस्तेमाल किया औैर तेजस्वी तक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।

नितीश कुमार अगर जनतन्त्र के डाकू और आज की तारीख में मुल्क के सबसे बडे़ धोकेबाज सियासतदां न होते तो लालू और उनके बेटे तेजस्वी के साथ सरकार नहीं सकते थे और उनके अंदर जमीर (आत्मा) नाम की जरा सी कोई चीज होती तो आरएसएस की गोद में बैठने के बजाए वह अवाम के दरम्यान जाते, एलक्शन कराते, अवाम से कहते कि वह बेईमानी के साथ खडे़ होने में मजबूर हैं इसलिए उन्हें दुबारा मुकम्मल अक्सरियत से जिताइए ताकि ईमानदार सरकार प्रदेश को देे सकें। ऐसा करने के बजाए उन्होने अवाम को धोका देकर अपनी कुर्सी पक्की कर ली।

नितीश कुमार ने छठी बार बिहार के चीफ मिनिस्टर की शक्ल में भले ही हलफ ले लिया है उनकी इस हरकत पर पूरे मुल्क में थू-थू मची हुई है कांग्रेस क नायब सदर राहुल गांधी ने कहा कि नितीश कुमार ने  बिहार के अवाम, कांग्रेस और महागठबंधन तीनों को धोका दिया है। राहुल ने कहा, बिहार में ‘महागठबंधन’ को फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ अक्सरियत मिली थी, लेकिन उन्होंने अपने मफाद के लिए ऐसी ताकतों से हाथ मिला लिया है। उन्होंने कहा, नितीश कुमार ने कांग्रेस और महागठबंधन दोनो को धोका दिया है। उन्होने कहा कि उन्हें तो कई महीनो से मालूम था कि नितीश कुमार इस किस्म की हरकत कर सकते है। उन्होने कहा कि अस्ल बात यह है कि आज की सियासत में हर कोई उसूलों को छोड़कर अपने-अपने मफाद  ज्यदा देखने लगे हैं।

नितीश कुमार के बीजेपी से हाथ मिलाने के खिलाफ जेडीयू में पहली बगावत के सुर सामने आने लगे हैं। पार्टी के राज्य सभा मेम्बर अली अनवर ने कहा है कि उनका जमीर बीजेपी के साथ जाने की इजाजत नहीं देता। जेडीयू ने जिन कारणों से जेडीयू से अलग होने का फैसला किया था वह वजह अभी भी बनी हुई हैं। मेरा जमीर बीजेपी के साथ जाने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा, अगर पार्टी ने उन्हें उनकी बात रखने का मौका दिया तो वह जरुर अपनी बात पार्टी के सामने रखेंगे।

कांगे्रस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह ने निशाना साधते हुए कहा, क्या कोई ट्रेन छूटी जा रही थी जैसे कोई चोरी-डकैती हो रही थी रातों-रात। कोई अखलाकियात (नैतिकता) की बात नहीं थी। नितीश  हमेशा अखलाकियात की बात करते हैं क्या यही नैतिकता है? अवाम ने आपको बीजेपी-संघ के खिलाफ वोट दिया था।

अब नितीश कुमार उनके तर्जुमान और कुछ मीडिया नुमाइंे इस पूरे वाक्ए की जिम्मेदारी कांगे्रस पर डालने का काम शुरू कर दिया। सभी ने कहना शुरू कश्र दिया कि अगर कांगे्रस और राहुल गांधी को कई महीनों से नितीश और बीजेपी की साठगाठ का अंदाजा था तो कांगे्रस ने कुछ किया क्यों नहीं? सवाल यह है कि इसमें कांगे्रस क्या कर सकती थी। कांगे्रस सदर सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति के एलक्शन उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए 22 जून को सभी अपोजीशन पार्टियों की मीटिंग बुला रखी थी। उन्हें पता चला कि नितीश कुमार कुछ गड़बड़ कर सकते है तो उन्होने 21 को सुबह गुलाम नबी आजाद को नितीश से बात करने के लिए पटना भेजा। वहां नितीश कुमार के साथ उनकी बात हुई। गुलाम नबी आजाद पटना हवाई अड्डे से दिल्ली  के लिए रवाना भी नहीं हो सके थे तभी नितीश ने एलान कर दिया कि उन्होने तोे रामनाथ कोविंद की हिमायत करने का फैसला कर लिया है। मोदी के कदमों में सेरेण्डर करने से बमुश्किल चार दिन पहले नितीश दिल्ली आए और राहुल गांधी से मिलने उनके घर भी गए। वहां भी बातचीत में उन्होेने राहुल से झूट ही बोला। ऐसे मंे राहुल या कांगे्रस क्या कर सकते थे।

यह कोई नया मामला नहीं है। 2005 से वह बार-बार धोेेकेबाजी करके छठी बार वजीर बने हैं। वह कभी खुद को लालू यादव का छोटा भाई बताया करते थे फिर अचानक लालू की पीठ में छुरा घोप कर जार्ज फर्नाडीज के साथ आरएसएस की गोद में बैठ गए समता पार्टी नाम की अलग पार्टी बना ली। जिसके सदर जार्ज फर्नाडीज बने। जार्ज फर्नाडीज को धोका देकर उन्होेंने जनता दल यूनाइटेड नाम से पार्टी बना ली, शरद यादव उनके लीडर बने फिर शरद यादव को धोका देकर खुद ही पार्टी के सर्वेसर्वा बन बैठे। बिहार में उनकी कुर्मी जात के सिर्फ छः फीसद वोटर हैं। 2013 में उन्होेने फिरकापरस्त बीजेपी को भी धोका दिया इस दरम्यान उन्होंने चीफ मिनिस्ट्री छोडकर जीतन राम माझी को चीफ मिनिस्टर बनाया लेकिन ज्यादा दिनों तक कुर्सी से अलग नहीं रह सके और जीतन राम माझी को हटा कर खुद ही चीफ मिनिस्टर बने गए।