फर्जशनास अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करके – योगी सरकार प्रदेश में कानून का राज नाफिज करेगी

फर्जशनास अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करके – योगी सरकार प्रदेश में कानून का राज नाफिज करेगी

लखनऊ! बीजेपी के लोक सभा मेम्बर राघव लखनपाल शर्मा ने सहारनपुर में दलित-मुस्लिम दंगा कराने की साजिश की, सीनियर पुलिस कप्तान के घर पर हमला कराया, सरकारी कार्रवाई मंे पुलिस कप्तान को ही हटा दिया गया। बरेली की डीएम ने बीजेपी मेम्बर असम्बली के कहने पर गैर कानूनी काम नहीं किया। दोनांे में टकराव हुआ, दो महीने के अंदर डीएम को ही चलता कर दिया गया। बुलंदशहर में स्याना हलके की सर्किल अफसर श्रेष्ठा ठाकुर ने बगैर हेलमेट और बगैर कागजात के मोटर साइकिल चलाने वाले बीजेपी वर्कर प्रमोद कुमार का चालान कर दिया तो स्याना के बीजेपी सदर मुकेश भारद्वाज ने एक भीड़ इकट्ठा करके श्रेष्ठा ठाकुर का घेराव किया, बदजुबानी की तो सीओ ने भीड़ की परवा किए बगैर साफ तौर पर कह दिया कि वह कानून के मुताबिक काम करेगी किसी के दबाव में नहीं आएंगी। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीओ को फौरन बुलंदशहर से हटाकर बहराइच फेंक दिया। इस किस्म की कार्रवाइयों का ही असर है कि वजीर-ए-आला आदित्यनाथ के बार-बार कहने के बावजूद प्रदेश मंे नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था) के हालात किसी भी तरह काबू मंे नहीं आ रहे हैं। राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में जरायम का सैलाब सा आ चुका है। जिलों में तैनात अफसरान इस पसोपेश में हैं कि वह कानून के मुताबिक काम करें या बीजेपी वर्कर्स और लीडरान की मर्जी के मुताबिक।

इसी कशमकश का नतीजा है कि पुलिस अफसरान अपने ही मातहतों पर हाथ उठाने वालों और कत्ल तक कर देने वालों के खिलाफ मुस्तैदी से कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। पिछली अखिलेश सरकार मंे नाजायज माइनिंग के बड़े चर्चे थे लेकिन किसी पुलिस वाले की जान नहीं ली गई थी। लेकिन पहले बहराइच में नाजायज माइनिंग करा रहे बीजेपी लीडर के बेटे की माइनिंग के गड्डे में दो बच्चे दब कर मर गए या मार दिए गए। इसके बाद बिजनौर के चंदक में यूपी-उत्तराखण्ड सरहद पर गंगा किनारे मडावर थाने की बालावाली चैकी पर पिछले एक साल से तैनात दारोगा शहजोर सिंह मलिक को 30 जून की रात गोपालपुर गांव से कुछ दूर बंद पडी कांच की फैक्ट्री के पास कत्ल कर दिया। दारोगा शहजोर सिंह मालिक को बदमाशों ने बडी बेरहमी से कत्ल किया था। उसकी गर्दन व उंगली कटी हुई थी जिस्म पर चोटोें के कई निशान थे और उनकी सरकारी पिस्टल गायब थी। साफ लग रहा था कि उन्होने मरने से पहले जम कर मुकाबला किया था। यूं तो दारोगा मलिक के कत्ल के लिए नामालूम बदमाशों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन कुछ गांव वालों ने दबे लफ्जों मंे बताया कि दारोगा मलिक माइनिंग माफिया का शिकार हो गए जो गंगा किनारे से बालू निकालते हैं और उसी के पास बनी भडावर चैकी के इंचार्ज शहजोर मलिक उसकी मुखालिफत करते थे। दारोगा मलिक के कत्ल को एक हफ्ता बीत चुका है मगर उनके कातिल पकड़े नहीं गए हैं। इसी तरह की बेहिसी लखनऊ मंे एडवोकेट जनरल रहे राघवेन्द्र सिंह के गनर मनोज शुक्ला की मौत पर दिखाई जा रही है। पुलिस ने बगैर किसी तहकीकात के कह दिया कि मनोज शुक्ला शराब के नशे में गोमती मंे डूब गए क्योंकि जहां उनकी लाश मिली उसके साहिल पर शराब की बोतल और गिलास भी मिला था। लेकिन जब मनोज के भाई ने बताया कि मनोज शराब ही  नहीं पीते थे तो पुलिस अफसरान थोडा परेशान दिखे। इस तरह अगर अपने ही मोहकमें के लोगों की मौत पर बेहिसी का मुजाहिरा होगा तो क्रिमिनल्स के हौसले तो बढेगे ही ठीक उसी तरह जैैसे रायबरेली के उस वक्त के एसपी गौरव सिंह ने पांच लोगों के कत्ल को हादसा बता दिया था जिसके बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन जुर्म की तह तक जाकर मुजरिमों को पकडने के बजाए अपना फैसला सुना देने की पुलिस वालों की हरकतों से ही प्रदेश के जरायम में इजाफा हो रहा है।

योगी सरकार में क्राइम का ग्राफ पिछली अखिलेश सरकार के मुकाबले कहीं ज्यादा बढता दिख रहा है। योगी सरकार में अखिलेश सरकार के मुकाबले  डकैती की वारदातों में 19.64 फीसद, लूट में 29.18 फीसद, बलवे में 30.83 फीसद, चोरी में 63.49 फीसद, फिरौती के लिए अगवा में 66.67 फीसद और रेप की वारदातों में 45.45 फीसद का इजाफा हुआ है। 15 मार्च से 15 अप्रैल तक जहां कत्ल की 245, लूट क ीह273, रेप की 179, चोरी की 105, बलवे की 75 और डकैती की बीस वारदातें हुई थीं वहीं 16 अप्रैल से 31 मई के दौरान कत्ल की 798, रेप की 957, लूट की 754, डकैती की 47, फिरौती के लिए अगवा की 10, चोरी की 1991 और अलवे की 2242 वारदातें पेश आ चुकी  हैं। इन्हीं आंकड़ों से जाहिर होता है कि योगी सरकार में किस तरह जरायम का सैलाब आया हुआ है।

प्रदेश का वजीर-ए-आला बनते ही आदित्यनाथ योगी ने प्रदेश में कानून का राज नाफिज करने की बात कही थी और एलक्शन के दौरान अखिलेश सरकार के खराब नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था) को जंगल राज बताते बीजेपी नहीं थकती थी लेकिन सरकार बने सौ दिन बीत गए प्रदेश में कानून के बजाए क्रिमिनल्स का राज नजर आता है। प्रदेश में क्राइम पर काबू करने में योगी सरकार किस बुरी तरह नाकाम है इसका पता इसीसे चलता है कि योगी सरकार ने तीन महीने में तीन एडीजी लाॅ एण्ड आर्डर बनाए हैं। सरकार बनते ही वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ एडीजी लाॅ एण्ड आर्डर दलजीत चैधरी को अप्रैल में हटाकर आदित्य मिश्रा को एडीजी लाॅ एण्ड आर्डर बनाया गया था। लेकिन वह भी प्रदेश में बढ रहे क्राइम पर काबू करने में नाकाम रहे तो उन्हंें हटाकर आनंद कुमार को नया एडीजी बनाया है। इसी तरह पेट्रोल चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले एसटीएफ के एसएसपी रहे अमित पाठक को भी हटा दिया गया है हालांकि उन्हें गोरखपुर का सीनियर पुलिस कप्तान बनाया गया है। लेकिन तीन महीने में तीन एडीजी बनाए जाने से पता चलता है कि सरकार किस तरह चल रही है।

नोएडा में 3700 करोड़ की पोंजी स्कीम मामले का पर्दाफाश करने पर एसटीएफ के एसएसपी के तौर पर अमित पाठक की बहुत तारीफ हुई थी इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पम्प पर चिप लगाकर पेट्रोल चोरी करने वालों के खिलाफ मुहिम चलाई थी। जिसके बाद पूरे प्रदेश के कई पेट्रोल पम्पों पर चोरी पकड़ी गई थी। इस मामले मंे तकरीबन दर्जन पेट्रोल पम्पों की डीलरशिप कैंसिल की गई तो साठ पेट्रोल पम्प मालिकान के खिलाफ एफआईआर लिखवाई गई है। पेट्रोल चोरी में अब तक 46 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि 74 पेट्रोल पम्पों को सीज किया गया है। प्रदेश के 6600 पेट्रोल पम्पों की जांच पूरी हो चुकी है। जिनमें 194 में गड़बड़ी पाई गई है। इन सभी को सीज किया जाएगा और उनके लाइसंेस भी रद्द किए जाएंगे। जिनके लाइसंेस रद्द होंगे उनके कुन्बे के किसी भी फर्द को पेट्रोल पम्प का लाइसंेस नहीं दिया जाएगा। इस बारे में बताया जा रहा है कि एसएसपी अमित पाठक के आर्डर पर एसटीएफ ने पेट्रोल चोरों के खिलाफ मुहिम चलाई थी लेकिन एसटीएफ के दूसरे जिलों में जाते ही मामले मैनेज होने लगे। चूंकि ज्यादातर पेट्रोल पम्प या तो बीजेपी लीडरों और ओहदेदारों के हैं या फिर बीजेपी हामियों के हैं लिहाजा एसटीएफ की छापेमारी से परेशान पेट्रोल पम्प मालिकान ने अमित पाठक को ही हटवाने  में कामयाबी हासिल कर ली चूंकि अमित पाठक के दामन पर अपने काम में नाकामी का कोई धब्बा नहीं था लिहाजा उन्हें गोरखपुर का सीनियर पुलिस कप्तान बनाकर हटाया गया।

वजीर-ए-आला बनने के बाद योगी आदित्यनाथ सिर्फ कानून का राज नाफिज करने की बयानबाजी ही करते रहे, उधर प्रदेश में क्राइम की वारदातों में इजाफा होता रहा। योगी सरकार ने भले ही अपने सौ दिन की कामयाबी में सरकार को लाॅ एण्ड आर्डर के मोर्चे पर कामयाब बताया है सच्चाई यह है कि पिछले तीन महीने में प्रदेश के नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था)की जितनी खराब सूरतेहाल रही है अखिलेश के पंाच सालों के दौरान भी नहीं रही। प्रदेश में भगवा गमछा बांधे गौरक्षकों के भेष में गुण्डों की फौज सडकों पर टहल रही है जो गाय तो दूर बकरे और मुर्गे के गोश्त खरीदने वालों से भी बदसुलूकी करते रहते हैं। रेप के वाक्यात में इजाफा हुआ तो इज्तेमाई तौर से कत्ल करने की वारदातें भी बढ गई। इलाहाबाद में चार लोगों को कत्ल किया गया लड़कियों से रेप किया गया तो सीतापुर के दाल व्यापारी की बीवी और बेटे समेत कत्ल कर दिया गया। अप्रैल से ही सहारनपुर में जो आग लगी वह अभी भी ठीक से बुझी नहीं है। रायबरेली में चुनावी रंजिश में पांच लोगों को बेरहमी से पीट-पीटकर जिंदा जला दिया गया। इसके बावजूद वजीर-ए-आला योगी और वजीर-ए-आजम के ‘गोदी मीडिया’ को उत्तर प्रदेश का नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था) खराब नहीं लग रहा है। हालांकि तीन महीने में तीन एडीजी लाॅ एण्ड आर्डर बनाए जाने से ही साफ हो जाता है कि सरकार कानून का राज नाफिज करने में बुरी तरह नाकाम हुई है।

दरअसल प्रदेश के खराब लाॅ एण्ड आर्डर की वजह बीजेपी के लीडरान, ओहदेदारान और वर्कर्स हैं। यह लोग खुद ही को सरकार समझ कर दबंगई करते रहते हैं। सरकार भी इन्ही गुण्डे नुमा लोगों की सुनती है। तभी तो बीजेपी वर्कर का चालान करने के जुर्म में स्याना (बुलंदशहर) की सर्किल अफसर श्रेष्ठा सिंह को हटाकर बहराइच जैसे छोेटे जिले में भेज दिया गया। शायद यही वजह है कि बिजली मोहकमे के एक आला अफसर ने अपने मातहत लोगों से कह रखा है कि बीजेपी के लोगों की इज्जत (सम्मान) करो वर्ना कार्रवाई के लिए तैयार रहो। इस तरह से अगर प्रदेश चलाया जाएगा तो फिर क्राइम की वारदातों में इजाफा होगा और अनारकी फैलेगी। वजीर-ए-आजम कहते हैं कि गौरक्षक के भेष में गुण्डों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा गाय की हिफाजत के नाम पर किसी का कत्ल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तो योगी अगले रोज कहते हैं इंतजामिया गाय के स्मगलरों और गैर कानूनी बूचड़खाने चलाने वालों की पूजा नहीं करेगी। ऐसा कह कर वह गौरक्षक के भेष में गुण्डागर्दी करने वालों की हिमायत करते नजर आते हैं। ऐसी बातों  से कानून का राज कैसे लागू होगा?

बीजेपी लीडरान का आलम यह है कि बीजेपी के वजीर ओम प्रकाश राजभर गाजीपुर के डीएम संजय कुमार खत्री से कुछ काम कराना चाह रहे थे जो उन्होंने मना कर दिया जिसपर राजभर इतना नाराज हो गए कि उन्होने कहा कि अगर डीएम खत्री को नहीं हटाया गया तो वह इस्तीफा दे देगे। दरअस्ल संजय कुमार खत्री समाजवादी पार्टी की सरकार से गाजीपुर के डीएम हैं। वह बेहद ईमानदार और साफ सुथरी इमेज रखते हैं। इसलिए बीजेपी सरकार में उन्हें हटाया नहीं गया। ओम प्रकाश राजभर उनसे कुछ गलत काम कराना चाहते थे जिसे करने से उन्होंने मना कर दिया तो वह उन्हें हटाने पर तुल गए। इधर ‘भासपा’ डीएम खत्री की हिमायत मे आ गई सरकार में शामिल ‘भासपा’ का कहना था कि संजय खत्री ईमानदार और सख्त फर्जशनास अफसर हैं उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। जिसके बाद खुद वजीर-ए-आला योगी ने ओम प्रकाश राजभर को अपने पास बुलाकर आधा घंटा डांटा तो बाहर निकल कर राजभर ने कहा कि उनकी 19 मांगे थी जिनमें 17 वजीर-ए-आला ने फौरन निपटा दी है। अब इस्तीफे का कोई सवाल नहीं है। जाहिर है कि बीजेपी के राजभर जैसे लोग पूरे प्रदेश के ईमानदार अफसरों के काम काज में अडंगे लगाकर दिक्कतें पैदा कर रहे हैं और योगी सरकार अफसरों के खिलाफ ही कार्रवाई कर रही है। वह चाहे श्रेष्ठा सिंह का तबादला हो चाहे आदित्य मिश्रा का चाहे अमित पाठक का, संजय खत्री की हिमायत में भासपा न आती तो उन्हें भी हटा दिया जाता। सरकार के इसी रवैये ने प्रदेश के नज्म व नस्क की सूरतेहाल बिगाड़ रखी है।