नाएफ को हटाए जाने से नाराजगी – शाह सलमान के फैसले की मुखालिफत

नाएफ को हटाए जाने से नाराजगी – शाह सलमान के फैसले की मुखालिफत

शाही खानदान के कुछ लोगों को पसंद नहीं आया मोहम्मद बिन सलमान को वली अहद बनाना, नाएफ को किया गया नजरबंद

 

रियाज! पिछले दिनों क्राउन प्रिंस समेत तमाम ओहदों से हटाए गए शाह सलमान के भतीजे मोहम्मद नाएफ बिन अब्दुल अजीज को अपने बादशाह सलामत चचा सलमान के फैसले से नाराजगी का इजहार यानि शाह की नजर में मुखालिफत बहुत भारी पड़ गई और उन्हें जेद्दाह के उनके अपने महल में महसूर (कैद) कर दिया गया है। शाही खानदान के कुछ लोग नाएफ को हटाए और मोहम्मद को क्राउन प्रिंस बनाए जाने से खुश नहीं हैं मगर वह खुल कर मुखालिफत का इजहार नहीं कर पा रहे हैं। शायद यही वजह है कि नाएफ समेत खानदान के उन सभी लोगों के मुल्क से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है जो इस फैसले के खिलाफ हैं। न्यूयार्क टाइम्स मे छपी इस खबर के मुताबिक सऊदी अरब की आले सऊद हुकूमत ने शाह सलमान के जरिए अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाने के फैसले की मुखालिफत करने वालों पर यह पाबंदी लगाई है। अखबार ने यह खबर चार सऊदी हुक्काम के हवाले से देने का दावा किया है। हालांकि सऊदी अरब के एक अहलकार ने अखबार की इस खबर की तरदीद की है मगर तफसील बताने से इंकार कर दिया जिससे साफ होता है कि अखबार की खबर में कुछ न कुछ सच तो जरूर है।

सऊदी अरब के उन हुक्काम ने जिन्होने शाही खानदान से ताल्लुकात बाकी रखने की बिना पर अपना नाम छुपाए रखने की शर्त पर न्यूयार्क टाइम्स को बताया कि सऊदी अरब की एक ऐसी शख्सियत के खिलाफ जो अभी तक एक बडे ओहदे पर रही है इस किस्म का कदम सऊदी शाह के 31 साल के बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाने की मुखालिफत करने पर उठाया है। जाहिर है कि उनका इशारा नाएफ बिन अब्दुल अजीज की तरफ था जो अभी तक क्राउन प्रिंस थें। हांलाकि सऊदी अरब का मीडिया यह जताने की भरपूर कोशिश कर रहा है कि शाह सलमान का अपने बेटे को वली अहद बनाने का फैसला सबको कुबूल है और इसपर किसी को एतराज नहीं है। खानदान के लोगों की इलीगंेस कौंसिल के 34में से 31 मेम्बरान ने इस फैसले पर अपनी मोहर लगा दी है। ऐसी खबरें सऊदी मीडिया ने दी थी।

लेकिन इन खबरों की असलियत और उस पर से पडा पर्दा न्यूयार्क टाइम्स की उस खबर ने हटा दिया जिसमें सऊदी हुक्काम के हवाले से बताया गया कि शाह सलमान का अपने बेटे को वली अहद बनाने का फैसला ‘सबको’ पंसद नहीं आया है। सऊदी मीडिया भले ही इस तब्दीली को पुरअम्न बता रहा है लेकिन मिल रही खबरों के मुताबिक खामोशी की राख के ढेर में मुखालिफत की चिंगारियां छुपी हुई हैं और नाएफ बिन अब्दुल अजीज को इस तरह  से हटाए जाने से शाही खानदान के कुछ अराकीन की जानिब से सख्त नाराजगी का इजहार किया गया है और उसमें शदीद एख्तेलाफात पैदा होगए हैं। खबर है कि सऊदी हुक्काम इस बात से खौफजदा हैं कि अगर नाएफ बिन अब्दुल अजीज खुलकर अवाम के सामने शाह की मुखालिफत में आ गए तो फिर बगावत के आसार नुमायां हो सकते हैं। शायद यही वजह है कि नाएफ को उनके जेद्दाह मे बने महल में नजरबंद कर दिया है ताकि कोई उन तक न पहुच सके साथ ही सऊदी मीडिया एख्तेलाफात और मुखालिफत की खबरों को गलत बता रहा है।

यहां यह बताना जरूरी है कि शाह सलमान ने पिछली 21 जून को एक फरमान जारी करके अपने भतीजे नाएफ को हटाकर अपने बेटे को क्राउन प्रिंस बनाया था उससे पहले उन्होने अपने सौतेले भाई मुकरिन बिन अब्दुल अजीज को क्राउन प्रिंस के ओहदे से हटाकर भतीजे नाएफ को वली अहद बनाया था। फिर उसे भी हटा दिया। सऊदी शाह सलमान का यह कदम साबिक सऊदी शाह अब्दुल अजीज की उस वसीयत और मंशूर के खिलाफ बताया जा रहा है जिसमें सऊदी एक्तेदार भाई से भाई को मुंतकिल किए जाने की बात कही गई है। इस वसीयत की रौशनी में साफ नजर आता है कि शाह सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद को नया शाह बनाने के लिए यह सारा खेल खेला है। चूंकि वसीयत में एक्तेदार भाई को मंुतकिल करने की बात कही गई थी लिहाजा शाह सलमान ने सबसे पहले अपने सौतेले भाई मुकरिन को क्राउन प्रिंस के ओहदे से हटाया। खानदान में कोई मुखालिफत न कर सके इसलिए खानदान के चहीते माने जाने वाले नाएफ को नया क्राउन प्रिंस बना दिया तभी मुकरिन को हटाने की मुखालिफत नहीं हुई लेकिन जब शाह सलमान ने अपना असली दाव चला और नाएफ को हटाकर अपने बेटे को क्राउन प्रिंस बना दिया तो खानदान के अंदर से मुखालिफत की आवाजें बंुलद होने लगी।

इन आवाजों को दबाने के लिए पहले नाएफ को नजरबंद किया और सऊदी अरब से उसके बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी। इसके बाद एक सऊदी अलकार ने सफाई दी और नाएफ की नजरबंदी की न्यूयार्क टाइम्स में छपी खबर को गलत बताया। नाएफ को हटाकर मोहम्मद को क्राउन प्रिंस बनाने के पीछे अस्ल इशारा अमरीका के नए सदर डोनाल्ड ट्रम्प का बताया जा रहा है। खुफिया जराए से मिली खबरों के मुताबिक अमरीका को नाएफ बिन अब्दुल अजीज से जो काम लेना था वह ले चुका है। 2003 से 2006 के दरम्यान अलकायदा के खिलाफ नाएफ से सख्त कार्रवाई करवाई थी लेकिन अब अमरीका के लिए अलकायदा कोई मायनी नहीं रखता है। अब उसकी सारी तवज्जो आईएसआईएस के दहशतगर्दोें को बढाने की है। आईएसआईएस के दहशतगर्दों के नापाक कदम सऊदी अरब में मस्जिदे नबवी तक भी पहुच चुके है। मगर शाह सलमान और उनका बेटा मोहम्मद आईएसआईएस के खिलाफ सख्त कदम उठाने का कायल नहीं हैं। सऊदी मीडिया चाहे जितना मामले को दबाने की कोशिश करे न्यूयार्क टाइम्स ने चार अमरीकी और चार सऊदी हुक्काम के हवाले से खबर छापी है जिसे सऊदी अहलकार ने पूरी तरह गलत बताया है।

सऊदी अरब के हुक्काम चाहे जितना अमरीका की गुलामी में सर झुकाए सच्चाई यही है कि अमरीका और उसके नए सदर डोनाल्ड ट्रम्प मुसलमानों से शदीद नफरत करते हैं। यही वजह है कि सऊदी अरब ने ट्रम्प के जाल में फंसकर कतर से न सिर्फ अपने रिश्ते खत्म कर लिए बल्कि उसपर हर तरह की पाबंदी भी लगा दी। कतर का जुर्म ईरान की हिमायत मंें बयान देना था। लेकिन अमरीकी सदर ट्रम्प की बेटी बीवी के साथ नाचते हुए आले सऊद की औलादों ने कभी अमरीका से यह नहीं कहा कि वह इस्राईल से कहे कि मुसलमानों के किब्ला-ए-अव्वल मस्जिदे अक्सा को मुसलमानोें के हवाले कर दे उल्टे कतर के शहरियों पर हज करने की पाबंदी लगा दी। दरअस्ल सदर ट्रम्प अमरीका के जरिए बनाए गए आईएसआईएस दहशतगर्दाें के लिए एक महफूज पनाहगाह की तलाश में हैं जहां उन्हें छुपाया जा सके और ईरान के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके। वह ईरानी पार्लियामेंट और ईरान के रूहानी पेशवा आयतुल्लाह खुमैनी की मजार पर आईएसआईएस दहशतगर्दों का नापाक हमला करवा भी चुका है। अमरीका को अपना मकसद पूरा करने के लिए शाह सलमान और उनका बेटा मोहम्मद बिन सलमान मुनासिब लग रहे हैं। लेकिन अमरीका की यह दोस्ती शाह सलमान कोे भारी भी पड़ सकती है। क्योंकि अमरीका की तारीख रही है कि जो उसका दोस्त बना जिसने उसे दूद्द पिलाया उसे अमरीका ने डसा जरूर है। शाह सलमान को सद्दाम हुसैन के अंजाम से इबरत लेना चाहिए।