मुसलमानों की लिंचिंग मंे संघ परिवार के लोग!

मुसलमानों की लिंचिंग मंे संघ परिवार के लोग!

”2017 के पहले ही छः महीनों में गाय के नाम पर हिंसा के 63  वाक्यात पेश आए हैं जो पिछले सालों से कहीं ज्यादा हैं। लिंचिंग यानि पीट-पीटकर मारे जाने वालों की तादाद पंाच सालों में 28 तक पहुच गई जिनमें 24 मुसलमान है। इन तमाम मामलात में बीजेपी सरकारों वाले प्रदेशों मंे 95 फीसद मुकदमें उन्हीं के खिलाफ दर्ज किए गए जो मारे गए। इसके बावजूद बीजेपी सदर अमित शाह कहते हैं कि मोदी के मुकाबले मनमोहन सिंह सरकार मंे लिंचिंग के वाक्यात ज्यादा पेश आए थे।“

 

”झारखण्ड के रामगढ में अलीम उद्दीन अंसारी को पीट-पीटकर मारे जाने के मामले में वीडियो क्लीपिंग की बुनियाद पर गिरफ्तार लोगों में बीजेपी, बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के लोग ही शामिल हैं। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की सख्त वार्निंग के तीसरे दिन गुवाहाटी में मवेशी ले जा रहे ट्रक को रोक कर आरएसएस से मुताल्लिक हिन्दू युवा छात्र परिषद के लोगोें ने मवेशी व्यापारियों को बुरी तरह पीटा, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।“

 

”उत्तर प्रदेश के वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ का कहना है कि गाय की स्मगलिंग करने वालों की पूजा नहीं की जा सकती लेकिन उन्होेने यह साफ नहीं किया कि इन स्मगलरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पुलिस करेगी या गौरक्षक? उन्हें यह भी साफ कर देना चाहिए कि महज गाय की अफवाह पर किसी पर हमला करने वालों के खिलाफ कोेई कार्रवाई होगी या नहीं? मुसलमान मुल्क भर में गौकुशी पर पाबंदी का मतालबा कर रहे हैं वह मतालबा कब तस्लीम किया जाएगा?“

 

नई दिल्ली। – झारखण्ड के रामगढ में हुई लिंचिंग मामले में गिरफ्तार नित्यानन्द महतो बीजेपी के तर्जुमान और सरगर्म लीडर है। तीन जुलाई को अदालत में हाजिर होने वाले दीपक मिश्रा और छोटू वर्मा दोनों बजरंग दल और गौरक्षा समिति के लीडर हैं इन सब को वीडियो में अलीम उद्दीन को पीट-पीटकर मारते देखा जा सकता है। नित्यानन्द की गिरफ्तारी के फौरन बाद मकामी बीजेपी लीडर उन्हें बचाने की कोशिशें करते दिखे।

– वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने पहली जुलाई को मुबय्यना गौरक्षकों को वार्निंग दी थी ठीक तीसरे दिन तीन जुलाई को भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाले असम में राजधानी गौहाटी के बाहर ही आरएसएस से मुताल्लिक हिन्दू तंजीम ‘हिन्दू युवा छात्र परिषद’ के लोगोें ने मवेशियों से लदे एक ट्रक को रोक कर ड्राइवर और मवेशी व्यापारी को सड़क पर पीटा। उन्हें भी पीट-पीटकर मार दिया जाता लेकिन कुछ मकामी हिन्दुओं के दबाव में ही मौके पर पहुची पुलिस ने किसी तरह उन्हें शदीद जख्मी हालत में बचा लिया उन्हें थाने में पनाह दी गई लेकिन हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

– उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ ने इसी बहस के दौरान यह कहकर सड़कों पर गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के हौसले बुलंद ही कर दिए कि गौ स्मगलरों और गौकुशी करने वालों की पूजा नहीं की जाएगी।

– भारतीय जनता पार्टी के कौमी सदर अमित शाह ने पहली जुलाई को गोवा मेें कह दिया कि लिंचिंग के वाक्यात मोदी की तीन सालों की सरकार के मुकाबले मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान 2011 से 2013 तक बहुत ज्यादा हुए थे। उनका यह बयान पूरी तरह गलत और लिंचिंग में मुलव्विस रहने वालांें का हौसला बढाने वाला ही कहा जाएगा।

– पहलू खान को पीट-पीटकर राजस्थान में मार डाला गया नामजद मुल्जिमान को गिरफ्तार करने के सवाल पर राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाब चंद कटारिया ने कह दिया कि पहलू खान तो गौकुशी और गायों की स्मगलिंग करने वालों में शामिल था। तीन लोग गिरफ्तार कर लिए गए बहुत है।

– 24 जून को दिल्ली-मथुरा लोकल टेªन में 16 साल के जुनेद को कत्ल करने वालों में सबसे पहले गिरफ्तार किए गए रमेश चन्द ने पुलिस कस्टडी मे मीडिया से साफ कहा कि उसके साथी ने जुनेद को गाय खाने वाला मुल्ला कह कर हमला किया था। इसके बावजूद मकामी बीजेपी मेम्बर असम्बली टेकचंद बार-बार यही कहते रहे कि गाय खाने वाला मुल्ला जैसी बात किसी ने नहीं कही थी।

– हरियाणा के वजीर अनिल विज बार-बार मुबय्यना (कथित) गौकुशी और गायों की स्मगलिंग करने वालोें को सबक सिखाए जानेे का एलान करके गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को उकसाने का काम करते रहते हैं।

– अब तक गाय की हिफाजत के नाम पर सड़कों पर हिंसा और पीट-पीटकर मारे जाने के वाक्यात पेश आए हैं उनमें सिर्फ पांच फीसद मामलात मंे हिंसा और कत्ल करने वालों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए गए हैं। 95 फीसद मामलात में गुण्डों की दहशतगर्दी का शिकार होकर मरने वालों के खिलाफ ही गौकुशी, गौस्मगलिंग और जानवरों पर जुल्म (अत्याचार) करने की दफाओं में ही मुकदमे दायर किए गए है। क्योंकि बेश्तर (अधिकांश) वाक्यात उन्हीं प्रदेशों में पेश आए हैं जिनमें भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं। इन प्रदेशों की पुलिस को अच्छी तरह पता है कि इस सिलसिले मंे सरकार की मंशा क्या है।

यह तमाम बातें पुख्ता सबूत हैं कि कोई कितनी भी सफाई क्यों न दे लिंचिंग और गाय के नाम पर सड़कों पर हिंसा करने वालों का ताल्लुक आरएसएस और बीजेपी से ही है। अब तो बीजेपी की सबसे पुरानी सियासी दोस्त शिवसेना ने भी अपने अखबार ‘सामना’ के तीन जुलाई के शुमारे में साफ तौर पर लिख दिया है कि गौरक्षकोें के हाथों सड़कों पर मुसलमानों को ही पीट-पीट कर मौत के घाट उतारा जा रहा है।  मुस्लिम मुखालिफत की सियासत करने वाली शिवसेना ने भी इस वहशीपन और लिंचिंग के लिए गौरक्षकों कोे जिम्मेदार ठहराते हुए इन्हें बीजेपी और आरएसएस से मुताल्लिक बताया है। शिवसेना ने इस बात पर सख्त एतराज किया है कि महाराष्ट्र से मिले प्रदेश गोवा में गाय जिबह करने और खाने पर कोई पाबंदी नहीं है जबकि वहां गुजिश्ता पन्द्रह सालों से भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है। शिवसेना ने मतालबा किया है कि गौकुशी के मामले में एक जैसी पालीसी पूरे मुल्क के लिए होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के सौ दिन मुकम्मल होने पर एक टीवी चैनल के प्रोग्राम में साफ तौर पर कहा कि ‘गौतस्करों को पूजेंगे नहीं’। उनके इस बयान पर किसी को कोई एतराज नहीं है मुसलमान तो पहले से ही पूरे मुल्क में गौकुशी पर पाबंदी लगाए जाने का मतालबा कर रहे हैं। लेकिन वजीर-ए-आला योगी को यह भी बताना चाहिए कि कौन गाय के स्मगलर हंैं और कौन गाय पालने वाले यह तय करने का काम पुलिस और कानून करेगा या सड़कांे पर गौरक्षकों के नाम पर इकट्ठा होने वाली हिंसक भीड़ तय करेगी? अब योगी महज हिन्दू महासभा और भारतीय जनता पार्टी के लीडर ही नहीं हैं प्रदेश के संवैधानिक मुखिया भी हैं। उनको पूरा रिकार्ड मिल सकता है आज तक गाय और उसके गोश्त की अफवाह पर गौरक्षकों ने जितने भी हमले किए कितने मामलात में गाय का गोश्त बरामद हुआ और कितनी महज अफवाहे निकलीं। अगर कहीं गाय मिली भी हो तो क्या गौकुशी करने वाले को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाए किसी भीड़ को यह अख्तियार दे दिया गया है कि वह गौकुशी करने वाले को पीट-पीट कर मार डाले। अगर ऐसा ही करना मुनासिब समझा जा रहा है तो एक कानून बनाकर गौरक्षकों को ही यह अख्तियार दे दिया जाना चाहिए कि अगर कोई गौकुशी में मुलव्विस पाया जाए तो वह उसे पीट-पीटकर कत्ल कर दें। फिर इस मामले में पुलिस का कोई रोल भी नहीं होना चाहिए। वजीर-ए-आला ने आधी बात करते हुए यही कहा कि ‘गौतस्करों की पूजा नहीं की जाएगी’ उनकी इस बात का गौरक्षकों ने तो यही मतलब निकाला होगा कि गाय की स्मगलिंग करने और काटने वालों को सजा देने की छूट उन्हें मिल गई है।

पहली जुलाई को गोवा में भारतीय जनता पार्टी के सदर अमित शाह ने यह कहकर मुबय्यना (कथित) तौर पर गौरक्षकों  के हौसले बुलंद कर दिए कि लिंचिंग (पीट-पीटकर कत्ल करने) के वाक्यात मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान मोदी सरकार के तीन सालों के मुकाबले बहुत ज्यादा हुए थे। अब गौरक्षक वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के बयान और वार्निंग को नजरअंदाज करके हिसाब बराबर करने मंे लग जाएंगे। सरकारी आदाद व शुमार (आंकड़ें) बताते हैं कि 2010  से अब तक लिंचिंग के 63 मामलात पूरे मुल्क में पेश आए हैं। इनमें तकरीबन  नव्वे फीसद वाक्यात 2014 से अब तक यानी मोदी सरकार के दौरान पेश आए हैं। सबसे ज्यादा वाक्यात इसी साल यानी 2017 के पहले ही छः महीनों में हो गए। अमित शाह इस हकीकत को झुटलाने पर तुले हैं कि मई 2014 में मोदी सरकार आने के बाद से इस साल जून तक गाय के बहाने मुसलमानों पर बत्तीस हमले हुए है। इन हमलों में तेइस मुसलमानों को सरेआम पीट-पीटकर मार डाला गया। पचास से ज्यादा जख्मी हुए और गाय के गोश्त के बहाने हरियाणा में दो बेकसूर मुस्लिम ख्वातीन की इज्तेमाई आबरूरेजी (सामूहिक बलात्कार) भी हुई है। आदाद व शुमार यह भी बताते हैं कि 2011 से अब तक 26 हिन्दुओं पर बच्चा चोरी के बहाने हमले किए गए इन हमलों में पंाच लोगों को कत्ल कर दिया गया। जबकि 74 को मार-मार कर जख्मी किया गया है। अमित शाह के बयान के बाद चार जुलाई को विश्व हिन्दू परिषद के लीडर सुरेन्द्र जैन ने तो यहां तक कह दिया कि किसी भी लिंचिंग की वारदात में गौरक्षकों का हाथ नहीं है। उन्हें तो जबरदस्ती बदनाम किया जा रहा है। सुरेन्द्र जैन ने उल्टा इल्जाम लगा दिया कि 2011 से अब तक गाय की स्मगलिंग करने और गौकुशी करने वालों ने गौरक्षकों और पुलिस पर डेढ सौ से ज्यादा हमले किए हैं।

झारखण्ड के रामगढ में सारे बाजार पीट-पीटकर मारे गए अलीमउद्दीन कत्ल केस में नित्यानन्द महतो और संतोष सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस कप्तान किशोर कौशल के मुताबिक दोनों बीजेपी के मकामी लीडर हैं। बाद में तीन जुलाई को अदालत में सरेण्डर करने वाले दीपक मिश्रा और छोटू वर्मा गौरक्षा समिति के लीडर है। बारह मुल्जिमान में इन चारों का जिक्र मजबूरन जरूरी हो गया था क्योंकि इन सभी के चेहरे वीडियो  फुटेज में साफ-साफ दिख रहे हैं। दीपक मिश्रा और छोटू वर्मा क्रिमिनल भी हैं, गौरक्षा के नाम पर तरह-तरह के क्राइम करते रहे हैं। खुद को बहुत बड़ा हिन्दुत्ववादी साबित करने के लिए दोनों भगवा कपडे़ पहनते हैं। बेशर्म इतने हैं कि तीन जुलाई को दोनों अदोलत में हाजिर हुए तो उस वक्त भी भगवा कपडे़ पहने हुए थे, माथे पर तिलक था, अदालत में इस तरह की सरगर्मियां दिखा रहे थे जैसे देश में उनसे बडा हिन्दुत्ववादी लीडर दूसरा कोई है ही नहीं। पुलिस को भी उनके साथ बहुत अदब से पेश आते देखा गया।

खबर है कि बीजेपी के किसी छुटभैया लीडर ने नहीं बल्कि खुद वजीर-ए-आला रघुवर दास ने पुलिस कप्तान से बात करके कहा था कि नित्यानन्द महतो, संतोष सिंह, छोटू वर्मा और दीपक मिश्रा को इस मामले में नामजद न किया जाए लेकिन पुलिस कप्तान किशोर कौशल ने उन्हें जब यह बताया कि खुद इन्ही लोगों ने अलीमउद्दीन अंसारी की पिटाई करने का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है उसमें इन सबके चेहरे साफ नजर आते हैं। वह वीडियो लाखों लोगों तक पहुच चुका है इसलिए इन लोगों को छोडना फिलहाल मुनासिब  नहीं है। यह सब इतने शातिर क्रिमिनल हैं कि अलीमउद्दीन को मारते वक्त इन्हें अच्छी तरह मालूम था कि उनकी गाडी में गाय का गोश्त नहीं है। इसीलिए इन लोगों ने उसकी वैन भी जला दी ताकि उसमें रखे भैंस और बकरे के गोश्त की फोरेंसिक तहकीकात न हो सके।

वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के सख्त बयान के बाद तीन जुलाई को असम की राजधानी गुवाहाटी के बाहरी हिस्से में  ‘हिन्दू युवा छात्र परिषद’ के नाम पर गुण्डों ने एक ट्रक रोक लिया, जिसमें मवेशी लदे थे, ट्रक ड्राइवर और मवेशी व्यापारियों को निकाल कर सडक पर बुरी तरह से पीटा, भीड़ इकटठा हो गई भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस बुलाई तो पुलिस वाले जख्मियों को उठाकर थाने ले गए मकामी टीवी चैनलों ने इस वाक्ए का वीडियो घंटों तक दिखाया वीडियो में पिटाई करने वाले दहशतगर्दों की तस्वीरें साफ नजर आ रही थीं लेकिन पुलिस ने किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की, गुवाहाटी ईस्ट के पुलिस कमिशनर मोहनीश मिश्रा ने अजीबो गरीब दलील देते हुए  कहा कि पिटने वाले लोगों ने रिपोर्ट ही नही लिखवाई तो हम किसी के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। मोहनीश मिश्रा के बयान का मतलब यह है कि  सडक पर चाहे कितना संगीन जुर्म क्यों न हो जाए अगर कोई रिपोर्ट लिखवाने वाला न हो और क्राइम करने वाले साफ दिख रहे हों तो भी पुलिस मुल्जिमीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। जिस ट्रक को रोक कर हिन्दू युवा छात्र परिषद के गुण्डों ने ड्राइवर और व्यापारियों को मारा उसपर सवार व्यापारियों ने मवेशी खरीद-फरोख्त के सारे कागजात दिखाए थे।

हरियाणा में दिल्ली-मथुरा लोकल टेªन में सफर करते वक्त जुनैद नाम के जिस सोलह साल के लडके को पीटकर और चाकुओं से गोेद कर मारा गया था उसके जिस्म मे चाकू के पचपन जख्म पाए गए यानि उसका तकरीबन पूरा जिस्म ही छलनी कर दिया गया था। जाहिर है कि इतना संगीन जुर्म ऐसा कोई शख्स नहीं कर सकता जिसे बाकायदा इस तरह चाकूबाजी की टेªनिंग न मिली हो। इस तरह की टेªनिंग पिछले कई सालांे से किन कैम्पों में दी जा रही है यह किसी से छुपा नहीं है। इस वहशियाना कत्ल केस मंे पुलिस ने चार और लोगों को गिरफ्तार किया है। जीआरपी के पुलिस कप्तान कमलदीप गोयल ने यह तो बता दिया कि गिरफ्तार होने वालों में पचास से चैबीस साल तक के लोग हैं। लेकिन वह उनके नाम बताने के लिए तैयार नहीं हुए। इस मामले में पलवल के रहने वाले रमेश चन्द्र को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

राजस्थान के अलवर में पहलू खान का कत्ल हुए महीनों गुजर चुके हैं शुरू में ही तीन लोगांे को गिरफ्तार कर लिया गया था जबकि 12 के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज थी बाकी गिरफ्तारियां क्यों नहीं इस सवाल पर राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाब चन्द्र कटारिया ने भड़कते हुए कहा कि अब गायों की स्मगलिंग  और गौकुशी करने वालों की शिकायत पर गौरक्षकों को फंासी पर नहीं चढाया जा सकता। बीजेपी के रामगढ हलके से मेम्बर असम्बली ज्ञानदेव आहूजा पहले ही एलान कर चुके हैं कि गौरक्षकों की गिरफ्तारी के खिलाफ वह बाकायदा आंदोलन चलाएंगे और किसी भी गौरक्षक को गिरफ्तार नहीं होने देंगे।