मुसलमानों को गाय के बहाने पीट-पीटकर कत्ल किए जाने के वाक्यात की पूरी दुनिया मंे गंूज – देश उठ खड़ा हुआ तो बोेले मोदी

मुसलमानों को गाय के बहाने पीट-पीटकर कत्ल किए जाने के वाक्यात की पूरी दुनिया मंे गंूज – देश उठ खड़ा हुआ तो बोेले मोदी

”गौरक्षा के नाम पर मुसलमानांें को पीट-पीटकर कत्ल किए जाने के वाक्यात पर मोदी ने कहा कि गाय के नाम पर इंसानों का कत्ल बर्दाश्त नहीं। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गुलाम नबी आजाद ने इस बयान को फरेब करार देते हुए कहा कि जब पूरा देश 28 जून को उठ खड़ा हुआ तब उसके दबाव में मोदी का यह बयान आया जिसका कोई मतलब ही नहीं है।“

 

”दलितों की तरह मुसलमानों पर रोज हो रहे हमलों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाए सिर्फ बयानबाजी करके वजीर-ए-आजम मोदी अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं। अगर उनकी नजर में भी फर्जी गौरक्षक गुण्डे हैं तो बताएं कि गौरक्षा के नाम पर बनी तरह तरह की तंजीमों (संगठनों) पर सरकार ने क्या कार्रवाई की। गौरक्षकों की ब्लैक मेलिंग तो कई बार सामने आ चुकी है।“

 

”पहलू खान को मारे जाने पर राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाब चन्द कठेरिया का बयान, बुरहानपुर में पुलिस के जरिए मुसलमानों पर पाकिस्तान परस्त होेने का इल्जाम और देशद्रोह का फर्जी मुकदमा कायम करना। झारखण्ड के चीफ मिनिस्टर की खामोशी और हरियाणा के वजीर अनिल विज की गौरक्षकों की हिमायत इस बात का सबूत है कि बीजेपी की पुश्तपनाही में मुसलमानों पर हमले हो रहे हैं।“

 

 

नई दिल्ली! 2014 में नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद से मुल्क के मुख्तलिफ मकामात पर गाय और उसके गोश्त के बहाने तो कश्मीर में जेहाद और इस्लाम के नाम पर मुसलमानों को पीट-पीट कर मार डालने के वाक्यात की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी है नरेन्द्र मोदी के अमरीका दौरे के वक्त वाशिंगटन में अमरीकी सिखों ने मुसलमानों के हक में मजाहिरा किया। ”मोदी वापस जाओ“ के प्लेकार्ड दिखाए। 28 जून को मुल्क भर में लोगों ने जबरदस्त मजाहिरा किया हिंसा के इन वाक्यात की सख्त मजम्मत करते हुए बयान दिए यानी पूरा मुल्क जब बोल पड़ा तभी सवा सौ करोड़ का वजीर-ए-आजम होने का दावा करने वालेे नरेन्द्र मोदी ने भी जुबान खोली। उनकी इस खामोशी पर सभी को हैरत भी थी और गुस्सा भी। 29 जून को नरेन्द्र मोदी को भी एहसास हुआ कि अब जरूरत से ज्यादा हिंसा हो चुकी है उन्होने साबरमती आश्रम के एक जलसे में कहा कि गाय के नाम पर इंसानों का कत्ल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने गौरक्षा के नाम पर इस तरह इंसानों की जान लेने वालों को सख्त वार्निंग देते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नरेन्द्र मोदी के बयान पर कांग्रेेस के सीनियर लीडर और राज्य सभा में लीडर आफ अपोजीशन गुलाम नबी आजाद ने मोदी के इस बयान को दबाव में दिया गया बयान करार देते हुए इसे महज फरेब करार दिया। उन्होने कहा कि 28 जून को जब पूरा मुल्क सडकों पर आ गया और गौरक्षा के नाम पर की जा रही हिंसा के खिलाफ जबरदस्त तरीके से आवाज बुलंद की तभी मुल्क के दबाव में नरेन्द्र मोदी ने यह बयान दिया है।

मुसलमानों को पीट-पीट कर मार डालने के जितने भी वहशियाना वाक्यात पेश आए हैं कुछ को छोड़कर बाकी सभी बीजेपी सरकारों वाले प्रदेशों में ही पेश आए। दूसरे प्रदेशों में जो एक-दो वाक्यात पेश आए उनमें भी पीट-पीटकर मारने वालों का ताल्लुक आरएसएस परिवार से ही पाया गया है। इन वाक्यात के बाद बीजेपी सरकारों का जो रवैय्या सामने आया वही इस बात का सबूत है कि कहीं न कहीं इन वहशी हरकतों को बीजेपी सरकारों की पुश्तपनाही हासिल है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोहाद गांव में शिवराज पुलिस ने चैम्पियन्स ट्राफी में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने का इल्जाम लगाकर जिस तरह डेढ दर्जन मुस्लिम नौजवानों को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया, थाने में उनकी पिटाई की वह तो पुख्ता सबूत है कि कई रियासती बीजेपी सरकारें मुसलमानों के खिलाफ बाकायदा साजिश कर रही हैं और उन्हे पीट-पीटकर मारने वाले ‘भगवा दहशतगर्दों’ को मोहरों की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। यहां मोदी के एक पुराने बयान का जिक्र जरूरी है। एक टीवी चैनल के अदालत प्रोग्राम में चैनल की जानिब से उनसे जब कश्मीर के सिलसिले में यह सवाल किया गया था कि कश्मीरी अवाम की अक्सरियत सड़कों पर आ जाती है ऐसे में सख्त कार्रवाई कैसे मुमकिन है तो जवाब में इंतेहाई घमण्ड के साथ मोदी ने कहा था ‘उन्हें भी ठीक किया जा सकता है मैंने गुजरात मंें करके दिखाया नहीं है क्या।’ उनके कहने का मकसद साफ था कि उन्होने गुजराती मुसलमानों को ‘ठीक’ करके दिखाया है। उनकी सरकार बनने के बाद शायद गौरक्षकों के नाम पर दहशतगर्दी करने वालों ने भी मुल्क भर के मुसलमानों को ठीक करने का ठेका ले लिया है। 28 जून को सिर्फ हिन्दुस्तान के ही तमाम बड़े शहरों में आम लोगों ने सड़कों पर उतर कर इस किस्म की मुस्लिम मुखालिफ हिंसा की मुखालिफत नहीं की अमरीका और यूरोप के मुल्कों से भी ऐसे मजाहिरों की इत्तेला मिली है। इस मजाहिरे के पीछे कोई पार्टी या तंजीम (संगठन) नहीं थी ‘नाट इन माई नेम’ के नाम से आम लोगों ने खुद ही इसमें शरीक होकर अपने गुस्से का इजहार किया।

ताजा मामला हरियाणा का है जहां खडावली गांव के पन्द्रह साल के हाफिज नौजवान जुनैद को चलती टेªन में पहले यह कह कर पीटा कि मुल्ला है साला गाय खाता है फिर चाकू मार कर उसे बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। वह चैबीस जून को दिल्ली से ईद की खरीदारी करके अपने दो भाइयों के साथ दिल्ली-मथुरा लोकल टेªन से वापस अपने गांव जा रहा था। वह रोजे से था टेªन में पन्द्रह-सोलह गुण्डे रास्ते से सवार हुए पहले उन्होने सीट खाली करने के लिए कहा फिर मुल्ला गाय खाने वाला कह कर यह भेड़िए उसपर टूट पडे और उसकी जान ले ली।  क्योंकि वह मुसलमान था। मारने से पहले गुण्डे कातिलों ने उसे पाकिस्तान चले जाने तक कहा। हरियाणा सरकार ने पहले तो इस मामले को दीगर मामलात की तरह ही रफा-दफा करने की कोशिश की लेकिन अवामी दबाव बढा तो हरियाणा सरकार ने जुनैद के घर वालों को दस लाख रूपयों की माली मदद देने के साथ ही इस हमले में शदीद तौरपर जख्मी उनके दोनों भाइयों को सरकारी नौकरी देने का एलान किया। इस मामले में अब तक पांच लोग गिरफ्तार किए जा चुके  हैं। सबसे पहले गिरफ्तार होने वाले पलवल के जोधपुर गांव के 35 साल के रमेश ने मीडिया के सामने साफ कहा कि वह शराब पिए हुए था इसलिए नशे मे वह भी जुनैद को पीटने मंे शामिल हो गया था। उसने साफ कहा कि मारने वाले दूसरे लोगों ने मारते वक्त कहा था कि यह मुल्ला गाय खाता है। रमेश के इस बयान के बावजूद इलाके के बीजेपी मेम्बर असम्बली टेकचंद यही कहते रहे कि मुल्ला कहने या गाय खाने की बात नहीं हुई थी।

30 जून को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने सरबरमती में तकरीर करते हुए गौरक्षा के नाम पर हिंसा में मुलव्विस गुण्डों को एक बार फिर वार्निंग दी। ठीक उसी दिन उन्ही की पार्टी की सरकार वाले झारखण्ड में रामगढ जिले के बाजार टांडा में गौरक्षक भेडियों ने सरेआम 42 साल के अलीम उद्दीन उर्फ असगर अली को पीट-पीटकर मार डाला। इन भेडियों को सिर्फ यह शक था कि असगर अली की वैन में रखा गोश्त गाय का है। जिस दिन जुनैद को टेªन मे कत्ल किया गया उसके अगले दिन पूर्वी दीनाजपुर में गौकुशी का इल्जाम लगाकर 33 साल के मोहम्मद नासिर, 30 साल के नसीर उल हक और 32 साल के समीर उद्दीन को पीट-पीटकर मार डाला गया। पुलिस ने अजित बसु, असिन बसु और कृष्णा पोद्दार को गिरफ्तार किया।

हरियाणा में जुनैद के कत्ल मामले ने पूरे मुल्क को हिला दिया ‘नाट इन माई नेम’ बैनर तले मुल्क के तमाम बड़े शहरों के अलावा लंदन और अमरीका तक के लोगों ने घरोे से निकलकर मुसलमानों को पीट-पीटकर मारे जाने के खिलाफ आवाज बुलंद की, दिल्ली के जंतर-मंतर से दक्खिन भारत के तिवेन्द्रम में सेक्रेटेरिएट के सामने के मैदान और चेन्नई तक में लोग खडे दिखाई दिए। मुबई के कार्टर रोड पटना के करगिल चैक, गांधी मैदान, पूना के बाबा साहेब अम्बेडकर मूर्ति केे नीचे, लखनऊ में जीपीओ पार्क गांधी के मुजस्सिमे के नीचे, कोलकाता में दखिनापन प्रीमीसेस मधुसूदन मंच, कोचीन में हाई कोर्ट चैराहे, जयपुर के गांधी नगर, चण्डीगढ के सेक्टर सत्रह, इलाहाबाद के सुभाष चैराहा, हैदराबाद के टंैक बंद और बंगलौर मे टाउन हाल समेत मुल्क का कोई ऐसा बडा शहर नहीं था जहां के लोग इस हिंसा के खिलाफ हाथों में प्लेकार्ड लेकर खामोशी से खडे न हुए हों। शायद इसी अवामी दबाव की वजह से तीस जून को नरेन्द्र मोदी ने गुंजरात में कहा कि गौकुशी के बहाने इंसानों का कत्ल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

28 जून के मजाहिरे में मुजाहिरीन ऐसे प्लेकार्ड उठाए हुए थे, जिन पर लिखा था, नाट इन माई नेम’ (मेरा नाम लेकर नहीं)। मुजाहिरीन ने नरेंद्र मोदी की सरकार की इस खामोशी की भी मजम्मत की, जो उसने अकलियत और दलित आबादी पर किए जाने वाले हमलों के बारे में अब तक खामोशी अख्तियार कर रखी है।  नई दिल्ली में किए जाने वाले ऐसे एक एहतेजाजी मार्च में हजारों लोगं शरीक हुए, जिनमें सीनियर शहरी और बहुत से वाल्दैन भी थे, जो अपने बच्चों को भी साथ लाए थे। इन लोगों ने अपने हाथों में शमा लिए अम्न के लिए गीत भी गाए।

इसी तरह मुंबई में भी एक मजाहिरा किया गया, जिसमें बारिश के बावजूद बालीवुड के कई कलाकारों के साथ सैकड़ों शहरियों ने भी शिरकत की। इसके अलावा भारत के कई दीगर बड़े शहरों में भी हिंदू इंतेहा पसंद हमलावरों के खिलाफ ऐसे ही एहतेजाजी मुजाहिरे और मार्च किए गए।

2014 में जब से नरेंद्र मोदी की सियासी पार्टी भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, तबसे हिन्दू गौरक्षक हमलावर कम से कम एक दर्जन मुस्लिम मर्दाें और लड़कों को सरेआम कत्ल करके मार चुके हैं।

जब से बीजेपी की सरकार आई है, गाय की हिफाजत के नाम पर हिंसा में तेजी से इजाफा हआ है। हरियाणा, पच्छिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और देश के कई दीगर सूबांे में भीड़ की हिंसा में लोगों की जानें गई हैं।

ताजा वाक्या झारखंड का है जहां पिछले दिनों गौकुशी के शुब्हे में एक शख्स को बुरी तरह पीटा गया और उसके घर को आग लगा दी गई।

पिछले कुछ दिनों में पच्छिम बंगाल में तीन मुसलमान नौजवानों को मुबैयना तौर पर गाय चोरी के इल्जाम में हलाक किया गया है। ईद से ठीक पहले श्रीनगर में एक पुलिस अफसर को शहर की जामा मस्जिद के बाहर पीट-पीटकर कत्ल कर दिया गया।

हालिया वाक्ए में पिछले दिनों नई दिल्ली के बाहरी इलाके में एक ट्रेन में सवार तकरीबन बीस लोगो ने चार मुसलमानों को तशद्दुद का निशान बनाया। । एक कम उम्र मुसलमान लड़के जुनैद पर चाकू से वार किए गए थे जबकि दो दीगर शदीद तौर से जख्मी हो गए थे।

यह झगड़ा ट्रेन में बैठने के लिए एक सीट से शुरू हुआ था लेकिन जल्द ही एक भीड़ ने मुस्लिम मुसाफिरों को  गाय का गोश्त खाने वाले  कह कर पीटना शुरू कर दिया था। वाजेह हो कुछ हिन्दू गाय को मजहबी तौर से मुकददस समझते हैं और देश के कई सूबों में इस जानवर को काटने  पर भी पाबंदी लगा दी है, जबकि कुछ सूबों में तो यह बाकायदा जुर्म है, जिसकी सजा उम्र कैद है।

देश में ऐसे कई हिंदू गरोह बन गए हैं, जो कानून से ऊपर होकर अपने दम पर इस बात को यकीनी बनाने की कोशिश में हैं कि किसी गाय का कत्ल न किया जाए। ऐसे गरोहों में शामिल लोेग  मुख्तलिफ टीमों की शक्ल में अपनी छापामार कार्रवाई करते हैं और अगर उनके मुताबिक कोई आदमी किसी गाय को काटने की कोशिश में है, तो उसके खिलाफ अदालत ऐक्शन भी ले लेती हैं।

नाकदीन का कहना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से ऐसे हिंदू गरोहोें के हौसले बुलंद हुए हैं।इ इसानी हुकूक के लिए काम करने वाली तंजीमोें के मुताबिक मोदी सरकार मुसलमानों की हिफाजत के लिए और कानून हाथ में लेने वाले हिंदू शिददतपसंदोें के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम हो चुकी है।

 

 

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