सऊदी अरब की कयादत में कतर से सात मुल्कोें ने रिश्ते तोडे़ – मुस्लिम मुल्कों के दरम्यान शिया-सुन्नी टकराव

सऊदी अरब की कयादत में कतर से सात मुल्कोें ने रिश्ते तोडे़ – मुस्लिम मुल्कों के दरम्यान शिया-सुन्नी टकराव

नई दिल्ली! सऊदी अरब और उसके दबाव में सात मुस्लिम मुल्कों ने कतर से अपने तमाम ताल्लुकात खत्म करने का फैसला कर लिया क्यांेकि कतर सऊदी अरब का दुश्मन माने जाने वाले मुल्क ईरान के साथ अपने रिश्ते खत्म नहीं करना चाहता। कतर मुस्लिम ब्रदरहुड का भी हिमायती है और फिलिस्तीन के लिए लड़ने वाले हमास की भी मदद करता रहता है। पच्छिमी मुल्कों खासकर अमरीका और ब्रिटेन के मुस्लिम मुखालिफ प्रोपगण्डे का जवाब देने के लिए कतर ने अलजजीरा नाम का टीवी चैनल खड़ा कर दिया जो अमरीका की नाराजगी का सबब बना। सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) किसी भी कीमत पर अमरीका को नाराज करने के लिए तैयार नहीं हैं। कतर को अलग-थलग करने का बहाना फिलहाल यह मिला कि कतर के सरकारी मीडिया ने पिछले दिनों अमीर कतर तमीम बिन हमाद अल सानी का एक बयान नश्र किया जिसमें उन्होने सऊदी अरब से कहा था कि ईरान मुखालिफ जो जज्बात पैदा किए जा रहे हैं वह आलमे इस्लाम के मफाद के खिलाफ है। कतर से ताल्लुकात खत्म करने वाले मुल्कांे में सऊदी अरब के अलावा बहरीन, यूएई, मिस्र, लीबिया, यमन वगैरह शामिल हैं इन सभी मुल्को ने यह तक एलान कर दिया कि कतर एयर लाइन्स के हवाई जहाज इन मुल्कों के हवाई अड्डे पर न तो उतरेंगे और न ही इन मुल्कों की हवाई सरहद में उनको गुजरने की इजाजत होगी। कतर से ताल्लुकात खत्म करने के फैसले मंे बाद में मालदीब भी शामिल हो गया।

कतर के साथ किए गए मुस्लिम मुल्कांे के इस फैसले का सबसे बुरा असर हिन्दुस्तान पर पड़ने वाला है क्योंकि हिन्दुस्तान के छः लाख से ज्यादा लोग कतर में काम करते हैं जिन मंे बेश्तर उत्तर प्रदेश के हैं। कतर के पास लिक्वीफाइड कुदरती गैस (एलएनजी) का बहुत बडा जखीरा है। दुनिया भर के मुल्कों को कतर से ही गैस एक्सपोर्ट होती है। हिन्दुस्तान जितनी गैस इमपोर्ट करता है उसका पैसठ फीसद हिस्सा कतर से ही आता है। गैस के जखीरे की वजह से ही कतर का शुमार दौलत मंद मुल्कांे में होता है। फुटबाल का आलमी कप का मुकाबला 2022 में कतर में होना है।

वैसे तो यह कहा जा रहा है कि कतर के अमीर ने सऊदी अरब के ईरान  मुखालिफ रवैये के खिलाफ बयान दिया इसलिए  यह झगडा शुरू हुआ लेकिन अदर की खबर यह बताई जाती है कि अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प जब सऊदी अरब के दौरे पर आए थेे तभी उन्होने कतर के खिलाफ मंसूबा तैयार करा दिया था। ईरान के सियासतदानों का कहना है कि कतर क्योंकि शिया हुकूमत वाला मुल्क है इसलिए उसकी तरक्की सऊदी अरब से अमरीका और इस्राईल किसी को रास नहीं आ रही है। अब खतरा यह बढ गया है कि अमरीका के इशारे पर सऊदी एयरफोर्स यमन की तरह कतर पर बमबारी कर सकती है या  अमरीका खुद ही इराक और लीबिया की तरह कतर के खिलाफ फौजी कार्रवाई को अंजाम दे सकता है।

सऊदी अरब समेत छः अरब मुल्कों की जानिब से सिफारती ताल्लुकात खत्म करने की कार्रवाई को कतर ने बिला जवाज और गैर मुंसिफाना करार दिया है। कतर की वजारत ने कहा है कि सऊदी अरब, मिस्र, यमन, मुत्तहिदा अरब अमीरात (यूएई) लीबिया और बहरीन ने बेबुनियाद इल्जाम लगाकर ताल्लुकात खत्म किए इस इकदाम का कोई कानूनी जवाज नहीं है। कतर ने यह भी कहा कि ताल्लुकात खत्म करने का फैसला उसकी खुद मुख्तारी की खिलाफवर्जी है और ऐसे इकदामात का मकसद हम पर अपनी मर्जी  की पालीसियां थोपना है। वाजेह हो कि आलमे अरब की मजबूत ताकतों ने गुजिश्ता पांच जून को कतर से सिफारती ताल्लुकात खत्म करने का फैसला यह इल्जाम लगाकर करते हुए किया कि वह अलकायदा, आईएसआईएस, हमास और इखवानुल मुस्लिमून (मुस्लिम ब्रदर हुड) जैसी दहशतगर्द तंजीमों की हिमायत करने के साथ ही ईरान से भी अपने ताल्लुकात बनाए रखना चाहता है जो सऊदी अरब और आलमे अरब के दीगर मुल्कोें को कतई बरदाश्त नहीं है। इन मुल्को ने ताल्लुकात खत्म करने के एलान के साथ ही यह भी कह दिया कि इन सभी मुल्कों मंे मौजूद कतर के शहरियांे से कहा गया है कि पन्द्रह दिनों के अंदर उन्हें भी मुल्क छोड़ना होगा। मुत्तहिदा अरब अमीरात (यूएई) ने दोहा से सिफारती ताल्लुकात खत्म करने का  एलान करते हुए अमीरात के शहरियों से भी कहा गया है कि कतर मंे रिहाइश, सफर और वहां से गुजरने से गुरेज करें। इतना ही नहीं यह भी कह दिया गया कि आइंदा 24 घंटों के अंदर कतर से यूएई आने और जाने के तमाम किस्म के टैªफिक बंद कर दी जाएगी। इस मकसद के लिए यूएई ने अपनी जमीनी, फजाई, और समन्दरी सरहद बंद कर दी है। जबकि सऊदी अरब का यह इल्जाम है कि कतर गुजिश्ता कई साल से संगीन खिलाफवर्जियां कर रहा है और सऊदी अरब की तमाम अपीलों को मुस्तरद करता रहा है। सऊदी अरब कतीफ खित्ते में शिया आबादी को उकसाने में भी अहम रोल अदा करता रहा है। सऊदी अरब और छः दूसरे अरब मुल्कोें के कतर से रिश्ते खत्म करने के फैसले के बाद यह बातें भी सामने आने लगी हैं कि जिन इल्जामात के तहत ताल्लुकात खत्म किए गए हैं सऊदी अरब तो बहुत पहले से ऐसी सरगर्मियों में न सिर्फ मुलव्विस है बल्कि दहशतगर्दों की मदद करता रहा है।

 

अमरीका और ब्रिटिश जांच एजेसियों की नजर में सऊदी अरब का किरदार भी मशकूक है जिन से वह बडे पैमाने पर हथियार खरीदता है। ब्रिटिश अमरीकन सिक्योरिटी इनफारमेशन कौसिल के सीनियर  एडवाइजर यूसुफ बट्ट के मुताबिक पिछली तीन दहाइयों में सऊदी अरब से गरीब मुस्लिम मुल्कों में कट्टरपसंद वहाबी इस्लाम को फरोग देने में सौ अरब डालर से ज्यादा रकम खर्च की गई है। यूसुफ ने यह दावा अमरीकी वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट पर शाया एक मजमून में किया था। 2010 में विक्लिक्स ने उस वक्त की अमरीकी फारेन मिनिस्टर हिलेरी क्लिटन और अमरीकी सिफारतकारों के बीच हुई बातचीत के कुछ खुफिया दस्तावेज अवामी तौर पर जाहिर किया था। उनके मुताबिक हिलेरी ने दिसम्बर 2009 में अपने सिफारतकारों को लिखा था कि अलकायदा, लश्करे तैयबा के लिए सऊदी अरब माली इमदाद का अहम जरिया बना हुआ है।

इराक, लीबिया और सीरिया को बुरी तरह तबाह व बर्बाद करने के बाद इसी खित्ते के किसी दूसरे मुल्क को निशाना बनाने की कार्रवाइयां शुरू कर दी गई हैं और वह मुल्क है सऊदी अरब से जमीनी सरहद से जुडने वाला महज तेइस लाख की आबादी वाला मुल्क कतर। कतर का रकबा वैसे तो साढे ग्यारह हजार स्क्वायर किलोमीटर है। मगर इसकी फी कस सालाना आमदनी सबसे ज्यादा है जो एक लाख उनतीस हजार सात सौ डालर हैै। कतर के पास जिस कुदरती गैस का जखीरा है उससे वह दुनिया की तैतीस फीसद मांग पूरी करता है।

कतर से रिश्ते तोडने के फैसले से खलीज मंे चैडी होती दरार तो जाहिर ही हो रही है और यह भी पता चल रहा है कि इस्लाम दुश्मन और साम्राजी ताकतें इस खित्ते मेें नए-नए तरीको को इस्तेमाल करके आपस में लडवाने की साजिशें रचती रहती हैं। ईरान से बार-बार मुंह की खाने के बाद अमरीका ने सऊदी अरब और ईरान के कशीदा रिश्तों का फायदा उठाते हुए खित्ते को फिर से बोहरान की जद में ला दिया है। हालांकि कुवैत ने इस बोहरान कोे खत्म करने के लिए अपने तौर से कोशिशे शुरू कर दी हैं तो तुर्की और सूडान भी ऐसी ही कोशिशों मंे मसरूफ है। कुवैत के अमीर शेख सबाहअल अहमद अल सबाह जल्द ही सऊदी अरब का दौरा करेंगे और जिम्मेदारो ंसे बात चीत करके बोहरान खत्म कराने की कोशिश करंेगे। हालात क्या रूख अख्तियार करते हैं फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है लेकिन इतना तो साफ नजर आर रहा है कि अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया सऊदी अरब दौरे ने यह गुल खिलाया है। कतर के खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई है उनमंे बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब, और मुत्तहिदा अरब अमीरात का उससे फजाई राब्ता तोडना भी शामिल है। इससे वहां खाने पीने और दीगर चीजों की सप्लाई फितरी तौर पर मुतास्सिर होगी इससे कारोबार और सरमायाकारी पर चोट पहुचेगे ही और इस का असर उन लोगों पर पडेगा जो वहां पर रोजी रोटी कमाने गए है। सात मुल्को से रिश्ते तोडने के बाद कतर में जो हालात पैदा हुए हैं उनके पेशेनजर फिलहाल साढे छः लाख हिन्दुस्तानियों को यह खतरा नहीं है कि उन्हें मुल्क छोडना है। लेकिन यही सूरतेहाल लम्बे अर्से तक रही तो दुश्वारियों में इजाफा यकीनी है। कतर जिस तरह जमीनी और समन्दरी सर हदों से घिरा हुआ है उसमें बहुत दिनों तक यह सूरतेहाल न सिर्फ उसकी मईशत के लिए बल्कि उससे गैस लेनेवाले मुल्को के लिए नुक्सानदेह साबित होगी।