नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा एलक्शन से पहलेे मुनाफा बख्श सपोर्ट प्राइज देने के अपने वादों को भुलाया – मदद के बजाए काश्तकारों का कत्ल

नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा एलक्शन से पहलेे मुनाफा बख्श सपोर्ट प्राइज देने के अपने वादों को भुलाया – मदद के बजाए काश्तकारों का कत्ल

”मुल्क के काश्तकारों पर एक अंदाजे के मुताबिक इस वक्त 12 लाख 60 हजार करोड़ का कर्ज है। मोदी के चहीते रिजर्व बैंक आफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल का कहना है कि अगर काश्तकारों का कर्ज माफ हो गया तो देश का खसारा कम करने और मआशी (आर्थिक)  तरक्की की तमाम कोशिशों पर पानी फिर जाएगा। खबर है कि मोदी सरकार अब तक मुल्क के कारपोरेट घरानों और बड़े थैलीशाहों को 17 लाख 15 हजार करोड़ की टैक्स रिबेट दे चुकी है। उसपर उर्जित पटेल खामोश रहे।“

 

”कांग्रेस के नायब सदर राहुल गांधी ने सात जून को मंदसौर मेें कत्ल किए गए काश्तकारों के घर वालोें से मिलने जाने का एलान किया तो शिवराज सरकार ने उन्हंे रोक दिया। अगले दिन वह राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश पहंुचे, कोई चार किलोमीटर तक पैदल चलकर मंदसौर के पास पहुचे तो हिरासत में ले लिए गए। इसके बावजूद उन्होने पुलिस को मजबूर किया तो कत्ल हुए काश्तकारों के घर वालों को बार्डर पर लाकर उनसे मिलवाया गया।“

 

”मध्य प्रदेश मंे आधा दर्जन से ज्यादा काश्तकारों को सरकार ने कत्ल कराया तो महाराष्ट्र मंे इतने ही गरीब काश्तकारों ने दो दिनों में खुदकुशी कर ली। यूपी के गाजियाबाद से मध्य प्रदेश के मालवा इलाके महाराष्ट्र भर में गुजरात के बनासकांठा होते हुए तमिलनाडु तक के काश्तकार अपनी परेशानियों की वजह से सड़कों पर उतरने को मजबूर, बडे़ पैमाने पर हिंसा के वाक्यात, तोड़-फोड़, टेªनें रूकी, जगह-जगह पुलिस का लाठी चार्ज।“

भोपाल! ‘तुम हमें खून दो फिर भी हम तुम्हारे साथ कोई रियायत नहीं करेंगे, ज्यादा चूं-चां की तो पुलिस की गोलियों से तुम से निपटा जाएगा।’ यह वह रवैय्या है जो नरेन्द्र मोदी की बनाई  हुई बीजेपी की प्रदेश सरकारों ने मुल्क के काश्तकारों के साथ अख्तियार कर रखा है। मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने छः जून को मंदसौर जिले के काश्तकारों पर फायरिंग करके छः काश्तकारों की जान ले ली और इल्जाम लगाया कि कांग्रेेस ने काश्तकारों को भड़का कर हिंसा पर उतरवाया था। सवाल यह है कि अगर काश्तकारों की गलती थी कांग्रेस के बहकावे मंे आकर वह हिंसा पर उतरे थे तो फिर घबरा कर शिवराज सिंह चैहान ने मारे गए काश्तकारों के लिए अब तक का सबसे बड़ा मुआविजा एक-एक करोड़ रूपए देने का एलान क्यों कर दिया। नरेन्द्र मोदी ने खुद ही 2014 के लोक सभा एलक्शन से पहले वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो वह काश्तकारों की पैदावार लागत पर पचास फीसद का मुनाफा शामिल करके सरकारी खरीद की कीमते (सपोर्ट प्राइस) तय कराएंगे। उनकी सरकार बने तीन साल हो गए अब उन्हें अपना वादा याद ही नहीं आ रहा है। सिर्फ मध्य प्रदेश के ही पूरे मालवा इलाके के काश्तकार सड़कों पर नहीं हैं बीजेपी सरकार वाले महाराष्ट्र के तकरीबन तमाम काश्तकार सड़कों पर हैं। उत्तर प्रदेश में दिल्ली के नजदीक गाजियाबाद के लोनी में भी सरकार के जरिए एक्वायर की गई अपनी जमीनों का मुनासिब मुआविजा मांगने के लिए बारह गांवों के काश्तकारों ने छः जून को ही द्दरना दिया था तो पुलिस ने बूढे काश्तकारों और उनकी ख्वातीन तक पर बुरी तरह से लाठी चार्ज कर दिया। मुआविजा मिलना तो दूर कोई सरकारी नुमाइंदा उनसे मिलने तक नहीं आया। उधर नरेन्द्र मोदी के गुजरात के बनासकाठा के आलू काश्तकार भी अपनी फसल  की मुनासिब कीमत के लिए सडकों पर हैं। तमिलनाडु के काश्तकार गुजिश्ता दिनों दिल्ली मंे नंगे होकर मजाहिरा कर चुके हैं। तीन महीने पहले ही मोदी ने असम्बली एलक्शन के दौरान उत्तर प्रदेश के काश्तकारों से कर्ज माफ करने का वादा  किया था। योगी सरकार आने के बाद काश्तकारों के कर्ज माफ करने का एलान तो हुआ लेकिन किन काश्तकारों का कर्ज माफ हुआ यह कोई  नहीं जानता। बीजेपी को वोट देने के बाद अब प्रदेश के काश्तकार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

जब कम से कम चार प्रदेशों के काश्तकार भयानक गर्मी की परवा किए बगैर सड़कों पर थे, शिवराज पुलिस के हाथांे कत्ल हुए छः काश्तकारों की चिताएं पूरी तरह जल भी नहीं पाई थीं उसी दरम्यान सात मई को मोदी के चहीते रिजर्व बैंक आफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल ने साफ कह दिया कि मुल्क के काश्तकारों के कर्ज माफ नहीं किए जा सकते अगर इतनी बड़ी रकम माफ कर दी गई तो देश को मआशी (आर्थिक) तरक्की के रास्ते पर ले जाने की कोशिशों पर पानी फिर जाएगा। सरकारी आदाद व शुमार (आंकड़ों) के मुताबिक मुल्क के काश्तकारों पर इस वक्त 12 लाख साठ हजार करोड़ का कर्ज है। इसीलिए उर्जित पटेल कह रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम माफ करने से देश की तरक्की रूक जाएगी। दूसरी तरफ एक इत्तेला के मुताबिक नोटबंदी से पहले मुल्क में जितनी कीमत के हजार और पांच सौ के करेसी नोट चलन मंे थे तकरीबन उनके बराबर 17 लाख 15 हजार करोड़ के टैक्सेज की रियायत मोदी सरकार कारपोरेट घरानों को दे चुकी है। बड़े थैलीशाहांें और कारपोरेट घरानों पर पूरा मुल्क लुटाते वक्त उर्जित पटेल को देश की मआशी तरक्की पर कोई असर पड़ता नहीं दिखा था। महाराष्ट्र के काश्तकारों पर तीस हजार करोड से ज्यादा का कर्ज है और आज पानी की किल्लत की वजह से महाराष्ट्र की तकरीबन 77 फीसद जमीन ऐसी है जिसकी आबपाशी का कोई बंदोबस्त नहीं है। काश्तकारी की कीमतों में मुसलसल इजाफा, शहरों के नजदीक उपजाऊ जमीनों को हाउसिंग स्कीमांे के लिए एक्वायर किए जाने का नतीजा यह निकला है कि आज मुल्क भर के सात करोड़ से ज्यादा काश्तकार अपना गांव छोड़कर शहरों मंे मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। वजह यह है कि शहरों में प्राइवेट सेक्टर में भी चपरासी की तंख्वाह साढे सात से दस  हजार तक है। शहरों में प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज का चलन बहुत बढा है सिक्योरिटी गार्ड को भी साढे सात-आठ हजार रूपए महीना मिल ही जाता है। जबकि गांवों में काश्तकारों की आमदनी आज भी ढाई से तीन हजार रूपए महीना की ही है।

कांग्रेस नायब सदर राहुल गांधी ने मंदसौर में पुलिस के हाथों कत्ल किए गए काश्तकारों के घर वालों से मुलाकात करने जाने का सात जून को एलान किया तो मध्य प्रदेश हुकूमत ने उन्हें रोक दिया लेकिन आठ जून को राहुल गांधी ने कहा कि काश्तकारों के घर वालों से मिलने जरूर जाएंगे। वह राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश में दाखिल हुए तो वहां भी पुलिस का जबरदस्त पहरा था। गाड़ी छोड़कर वह एक मोटर साइकिल के जरिए आगे बढे तो आगे पुलिस ने फिर रोका लेकिन राहुल ने कहा कि वह मंदसौर जरूर जाएगंे। सड़क गाडी और मोटर साइकिल छोड़कर उन्होने खेतों का रास्ता पकड़ा, सख्त गर्मी और तेज धूप में चार किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद वह मंदसौर पहुचे तो शहर के बाहर ही पुलिस ने उन्हंे  हिरासत में ले लिया। उनके साथ जनता  दल यूनाइटेड के सीनियर लीडर शरद यादव, कांग्रेेस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, राजस्थान कांग्रेस के सदर सचिन पायलेट, मध्य प्रदेश कांगेे्रस के सदर अरूण यादव समेत बड़ी तादाद में कांग्रेसी लीडर भी मौजूद थे।

राजस्थान से मध्य प्रदेश तक बीजेपी हुकूमतों ने राहुल गांधी को रोकने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन दोनों सरकारें मिलकर भी उन्हे रोक नहीं पाई, मंदसौर के नजदीक जब उन्हें शिवराज पुलिस ने हिरासत में लिया तब भी राहुल ने पुलिस से यही कहा कि आप हमें जेल भेजिए या कहीं और, हम मारे गए काश्तकारों र्के घर वालों से मुलाकात करने जरूर जाएंगे। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए राहुल ने कहा कि काश्तकारों को मरवाने की जिम्मेदारी वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और वजीर-ए-आला शिवराज सिंह चैहान दोनों की है। उन्होेने कहा कि मोदी हुकूमत कारपोरेट घरानों और बडे़ थैलीशाहों को तो लाखांे करोड़ की छूट दे रही है। लेकिन कुछ हजार रूपए के लिए काश्तकारों पर गोली चलवा रही है। हम इसके खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे।

मध्य प्रदेश पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में तो ले लिया लेकिन पूरी सरकार के हाथ पैर फूले रहे कई अफसरान ने उनसे खुशामद करते हुए कहा कि आप वापस दिल्ली चले जाइए, लेकिन राहुल गांधी इस बात पर अड़े रहे कि वह कत्ल किए गए काश्तकारों के घर वालों से मिले बगैर नहीं जाएंगे। तो एडमिनिस्टेªशन ने फोन पर काश्तकारों के घर से बात कराई। फोन पर ही राहुल गांधी ने उनसे कह दिया कि वह उन लोगोें से मिले बगैर वापस नहीं जाएंगे। आखिर में एडमिनिस्टेªशन के अफसरान ने यह तय किया कि मारे गए काश्तकारों के घरवालों को मध्य प्रदेश और राजस्थान के बार्डर पर लाकर राहुल गांधी से मुलाकात करा दी जाए। राहुल गांधी भी इस बात पर तैयार हुए, मारे गए काश्तकारों के घर वालों को बार्डर पर लाया गया वहां राहुल से मुलाकात हुई, राहुल ने उन्हें यकीन दिलाया कि वह उनके साथ हर हाल  में खडे़ रहेगे।

मध्य प्रदेश मंे शिवराज पुलिस के हाथों कत्ल किए गए काश्तकारों की हिमायत मंे उत्तर प्रदेश के काश्तकारों ने भी एलान कर दिया कि वह बड़े शहरों को दूध और सब्जियों की सप्लाई नहीं करेंगे। मध्य प्रदेश के मंदसौर में शिवराज सिंह चैहान ने अपनी बेलगाम पुलिस के हाथों छः जून को छः काश्तकारों की जानें लेनेे के बाद इल्जाम लगाया कि कांग्रेस ने काश्तकारों को उकसा कर हिंसा पर आमादा किया। काश्तकारों की तरफ से शिवराज के इस बयान पर सख्त नाराजगी जाहिर की गई। उन्होने कहा कि उनके आंदोलन को बदनाम करने के लिए शिवराज सिंह चैहान इस किस्म की सतही बयान बाजी कर रहे हैं। कांगे्रस ने अगर काश्तकारों को भड़काया भी तो अपोजीशन पार्टी होने के नाते क्या कांगे्रस काश्तकारों से यह कहती कि आप के चीफ मिनिस्टर बहुत भले और काश्तकारों के बड़े हमदर्द हैं आप लोग अपने मतालबात पर जोर न दीजिए। कांगे्रेस ने तो वही किया है जो जम्हूरी सिस्टम में किसी भी अपोजीशन पार्टी को करना चाहिए।

मंदसौर में काश्तकारों को कत्ल किए जाने के बाद हालात और भी बिगड़ गए खबर लिखे जाने तक देवास, नीमच, झबुआ, धार, सिहोर, रतलाम और उज्जैन समेत तकरीबन पूरे मालवा इलाके के काश्तकारो में गुस्से का उबाल सा आ गया। सरकार ने सभी शहरों में दफा 144 नाफिज कर दी उसके बाद कई शहरों में कफ्र्यू लगा दिया गया। इस सख्ती के बावजूद काश्तकार कुछ सुनने को तैयार नहीं हुए उनका हंगामा जारी रहा, हाईवे पर रोक कर 25  से ज्यादा ट्रक और आधा दर्जन पुलिस की गाड़ियों को जला दिया। तकरीबन पूरे मालवा इलाके में इण्टरनेट सर्विंसेज भी बंद कर दी गई। खुद को प्रदेश का ‘मामा’ बताने वाले शिवराज सिंह चैहान या उनके किसी वजीर मंदसौर जाकर कत्ल किए गए काश्तकारों के घर वालों से हमदर्दी जाहिर करने की हिम्मत नहीं कर पाए। मंदसौर के डीएम स्वतन्त्र कुमार सिंह हड़ताली काश्तकारों को समझाने गए थे तो काश्तकारों ने उन्हें धक्के देकर भगा दिया उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। डीएम ने भागते हुए कहा कि काश्तकारों पर फायरिंग का कोई आर्डर नहीं दिया गया था। काश्तकारों की जान लेने वाली पुलिस के जिला कप्तान का दिमाग अगले दिन तक ठिकाने नहीं लगा था। उन्होने कहा कि काश्तकारों के भेष में समाज दुश्मन अनासिर (अराजक तत्व) हमला कर रहे हैं। उन्हंे ठीक करना हमें आता है। जोनल आईजी मकरंद देडस्कर ने तो एक बिल्कुल नई बात कह दी। उन्होनेे कहा कि हां पुलिस फायरिंग तो हुई लेकिन काश्तकार किस की गोलियों से मारे गए इसका अंदाजा तो पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही लगेगा। खबर लिखे जाने तक मंदसौर समेत मध्य प्रदेश के कई जिलों में काश्तकारों का आंदोलन जारी था धरने पर बैठे काश्तकारों ने दर्जनों सरकारी गाड़ियांे और बसों वगैरह को जला दिया था कई जगहोंु पर टेªन की पटरियां उखाड़ दी थीं जिसकी वजह से बड़ी तादाद में टेªनों को रद्द करना पड़ा था। काश्तकारों के नुमाइंदांे का कहना था कि अबतो बात आर-पार की है हम या तो अपने मतालबात सरकार से तस्लीम करांएगे या फिर सड़कों पर ही मर जाएंगे। याद रहे कि मध्य प्रदेश में काश्तकारों को इस तरह पुलिस के हाथों कत्ल किए जाने का सिलसिला पुराना है। दिग्विजय सिंह सरकार में1998 मंे एलक्शन से पहले उस वक्त बीजेपी ने काश्तकारों का आंदोलन कराया था और फायरिंग में डेढ दर्जन काश्तकार मारे गए थे।

मध्य प्रदेश के खराब हालात देखकर महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर देवेन्द्र फडनवीस ने आठ जून को काश्तकारों से मुलाकात करने और गुजिश्ता साल 31 अक्टूबर से पहले के कर्ज माफ करने का एलान कर दिया। एक अहम फैसला लेते हुए उन्होेने किसानों की कर्ज माफी का एलान कर दिया। उन्होने कहा कि 31 अक्टूबर से पहले लिए गए किसानों के सभी कर्ज माफ कर दिए जाएगंे। सरकार अपनी तरफ से किसानों को आंदोलन खत्म कराने की तमाम कोशिशें कर रही है। महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन के दरम्यान गुजिश्ता कुछ दिन में कम से कम चार किसानों की खुदकुशी की खबरें सामने आई हैं। पुलिस ने कहा कि रमेश रामदास दलवी (26) ने सात जून को जालना जिले के भोकारदार तहसील मेें अपने खेत मंे फांसी लगा ली। पुलिस के मुताबिक दलवी ने एक हफ्ता पहले भी खुदकुशी की कोशिश की थी लेकिन कुछ पड़ोसियों ने उस वक्त बचा लिया था।

इसकेे अलावा नांदेड़ जिले में 40 साल के परमेश्वर वानखेड़ेे ने फांसी लगा ली। बुलढाणा के मेहकर तहसील में किसान संजय घानवाट (46) ने खेती में नुक्सान होने पर खुदकुशी कर ली।

नासिक जिले के येवला तहसील में पांच जून की रात में नवनाथ चांगदेव भालेराव ने जहरीला दवा पीकर खुदकुशी कर ली। किसान आंदोलन को लेकर शिवसेना ने कर्ज में डूबे किसानों को मायूसी में डुबाने के लिए मोदी की मरकजी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी सदर उद्धव ठाकरे ने सिर्फ असली किसान नेताओं से बात करने की सरकार की पेशकश का मजाक उड़ाया। हालात इतने शर्मनाक हैं कि गुजिश्ता सात 7 सालों में करीब 98 हजार किसानों-खेतीहर मजूदरों ने खुदकुशी की है।

महाराष्ट्र में किसानों का आंदोलन जारी रहने के बीच शिवसेना के वजीरोें ने आठ जून को कैबिनेट की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस बीच किसानों का एक प्रदेश सतह का सम्मेलन मुुबई से 150 किलोमीटर दूर नासिक में किसान क्रांति मोर्चा के जरिए बुलाया गया। जिसमें आंदोलन के मुस्तकबिल के प्रोग्राम पर चर्चा हुई। यह आंदोलन पहली जून से जारी है।

महाराष्ट्र में जहां 2014 में 4,004 किसानों ने खुदकुशी की, वहीं 2015 में 4,291 किसानों ने। इनमें से 1293 मामले कर्ज में डूबे काश्तकारों के हैं। किसी भी दूसरे प्रदेश के  मुकाबले में महाराष्ट्र में किसानों ने सबसे ज्यादा खुदकुशी की है। महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना (1,358) दूसरे, कर्नाटक (1,197) तीसरे और छत्तीसगढ़ 854 मौतों के साथ चैथे नम्बर पर है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 94.1 फीसद खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए।

महाराष्ट्र क वजीर जराअत पांडुरंग फुंडकर के असम्बली हलका अकोला में एक किसान प्रदीप गुंजल ने खुदकुशी कर ली। महाराष्ट्र में एक हफ्ते के किसान आंदोलन के दौरान किसानों की खुदकुशी का यह दसवांें मामला है। इससे पहले नौ और किसान खुदकुशी कर चुके हैं। 23 साल के प्रदीप पर बैंक का 50 हजार रुपये का कर्ज था।  बैंक का कर्ज न अदा कर पाने और फसल में घाटा होने के चलते प्रदीप बहुत परेशान था।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करते दिख रहे है। दोनों ही प्रदेशों में इसका गहरा असर देखने को मिल रहा हैं। दूध और सब्जियों के दाम में अचानक जबरदस्त इजाफा हो गया हैं। महाराष्ट्र के अहमदनगर से शुरू हुए छोटे से किसान आंदोलन ने अब महाराष्ट्र में महा आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर ली है। कोंकण को छोड़कर महाराष्ट्र भर के करीब 5 लाख से ज्यादा किसान हड़ताल पर हैं, जिसमें सात जून को कई पुरतशद्दुद वाक्यात पेश आए।  यह आंदोलन और तेज हो गया।

महाराष्ट्र के किसानों की मांगे हैं कि किसानों के सभी कर्ज माफ किए जाएं, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू की जाएं, खेती के लिए बिना सूद के कर्ज मिले, 60 साल के उम्र वाले किसानों को पेंशन दी जाए,  दूध के लिए फी लीटर 50 रुपये दिए जाएं,

हड़ताल की वजह से मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर और दूसरे बड़े शहरों में दूध, ताजा फल, सब्जियों और यहां तक कि अनाज जैसी जरूरी चीजों की किल्लत और कीमतों में इजाफा हो गया।

किसानों की नाराजगी का आलम यह है कि औरंगाबाद में किसानों ने हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहा दिया। औरंगाबाद के अलावा शिरडी, नासिक, पुणे, सतारा और कोल्हा पुर के अलावा प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी किसान आंदोलन कर रहे हैं।

किसानों ने रियासती सरकार को मुंबई जैसे बड़े शहरों के लिए दूध और सब्जी की सप्लाई भी बंद करने की धमकी दी है। नवी मुंबई सब्जी व गल्ला बाजार कमेटी (एपीएमसी) में जराए के मुताबिक, मुंबई में दूध की सप्लाई काफी हद तक बेअसर रही। हालांकि किसानों के आंदोलन के डर से सब्जियां लाने वाली गाड़ियों की तादाद में कमी देखी गई। मुंबई की जानिब जाने वाली दूध और सब्जियों की गाड़ियों को किसान रोकने की कोशिश करते दिखे। मुंबई की सबसे बड़ी एपीएमसी मंडी में सब्जियों की आवक भी आंदोलन की वजह से 30 फीसद तक कम हो गई है।

फोटो किसानों के आंदोलन का

 

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