कलम किताब से बंदूक का मुकाबला – कश्मीरी नौजवानों ने बताया हम बेमिसाल

कलम किताब से बंदूक का मुकाबला – कश्मीरी नौजवानों ने बताया हम बेमिसाल

श्रीनगर! दहशतगर्दों और सिक्योरिटी फोर्सेज की बदूकों के दरम्यान पिस रहे कश्मीरी नौजवानांे ने साबित किया है कि वह कलम और किताब से बंदूकों का मुकाबला आसानी से कर सकते है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) के इम्तेहान में मुसलसल कई सालों से कामयाबी के झंडे गाड़ कर कश्मीरी नौजवानों ने मुल्क के उन फिरकापरस्तों और फिरकापरस्ती में डूबे मीडिया के मंुह पर भी ताला लगाने की कोशिश की है जो ताकते और मीडिया आम कश्मीरी नौजवानों और तलबा को भाडे का पत्थरबाज साबित करने पर तुले हुए है। वैसे तो कश्मीर से पहले भी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के इम्तेहान मंे वहंा के नौजवान पास होते रहे हैं। लेकिन 2010 मंे शाह फैसल ने टाप करके आम कश्मीरी नौजवानों मंे एक नया जज्बा भर दिया। उसके बाद से हर साल कश्मीरी नौजवानों के यह इम्तेहान पास करने की तादाद में इजाफा ही होता जा रहा है। अभी 2016 के जो नतीजे आए हैं उसमें जम्मू-कश्मीर के बीस नौजवानों ने कामयाबी हासिल की है। जो अपने आप में एक रिकार्ड है।  इससे पहले 2015 मंे 12 नौजवानों ने यह इम्तेहान पास किया था उसमें  अनंतनाग के अतहर आमिर अल शफी खान टापर्स की लिस्ट में दूसरे नम्बर आए थे। उनके बैच मे टापर थी दिल्ली की टीना डाबी । आईएएस बनने के बाद दोनों में इश्क हो गया और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। 2016 के यूपीएससी के इम्तेहान में कश्मीर के बिलाल मोहिउद्दीन बट्ट ने दस टापर्स की लिस्ट में दसवें नम्बर पर अपना नाम दर्ज करा लिया। वह  हंदवाड़ा जिले के रहने वाले हैं।

1990 से 2009 तक 19 सालों में कश्मीर वादी से सिर्फ दो आईएएस और दो आईपीएस निकले थे। लेकिन 2010 में आईएएस में टाप करके शाह फैसल ने जैसे कश्मीरी नौजवानों का जेहन ही पूरी तरह तब्दील कर दिया और महज पांच सालों में जम्मू-कश्मीर के साठ (60) नौजवानों ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन का इम्तेहान पास करके एक नया रिकार्ड कायम कर दिया। इनमें सैयद आबिद रशीद, इनामुल हक, काजी सलमान बशीर अहमद बट्ट, डाक्टर मंजर जिलानी, पूजा हाली, आदित्य फोतेदार, सैयद सहरिश, मोहम्मद एजाज, राज कमल, विकास कुदन, आबिद सादिक, बशीर अहमद, राजा याकूब, शकील मकबूल, अभिषेक महाजन, आफाक गिरि, ओवैस अहमद, कमर उज्जमां, विक्रांत भूषण, महताब अहमद, अतहर आमिर उल शफी खान, शीमा नबी कासवा, शकील अहमद, दीबा फरहत, बशारत कय्यूम, सैयद जुनैद , सफदर अली वगैरह शामिल है। सफदर अली जेह (लद्दाख) के हैं बाकी जम्मू-श्रीनगर, पुलवामा, किश्तवाड़, मेढंर, गुरेज, सोपोर, शोपियां, मतलब यह कि हर जिले का कोई न कोई कश्मीरी शामिल है।

बिलाल मोहिउद्दीन बट्ट ने 2013 में इंडियन फारेस्ट सर्विस का इम्तेहान पास कर लिया था मगर वह आईएएस बनना चाहतें थे जिसके लिए उन्होने मेहनत की और यूपीएससी के 2016 के इम्तेहान में टाप टेन पास आउट में शामिल हुए। कश्मीर के हदवाड़ा से ताल्लुक रखने वाले बिलाल के भाई हिलाल डाक्टर हैं। सब-डिवीजन पुंछ के मेढर के रहने वाले जफर इकबाल सिविल से बीटेक कर चुके हैं और पीडब्ल्यूडी में असिस्टेंट इंजीनियर है। उनकी 39वीं रैेक आई है। जम्मू की रहने वाली आयुषी ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कालेज से एमएससी फिजिक्स करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी की और कामयाबी हासिल कीं। जम्मू के ही अखिल महाजन ने भी यूपीएससी के इम्तेहान में कामयाबी हासिल की उन्होेेने हैदराबाद की जवाहर लाल नेहरू टेक्निकल युनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने के बाद सिविल सर्विसेज के इम्तेहान की तैयारी की और कामयाबी हासिल की, उनके अलावा जम्मू के ही माहनीश डिगरा और विवेक भगत ने भी यूपीएससी के इम्तेहान मंें कामयाबी हासिल की है। श्रीनगर की बिसमा काजी डाक्टर बनना चाहतीथीं मगर बाद मंे उन्होने इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग के रास्ते को चुना फिर उन्होने यूपीएससी के इम्तेहान की तैयारी की और कामयाबी हासिल की।

शाह फैसल के आईएएस में टाप करने के बाद से कश्मीरी नौजवानों का रूझान सिविल सर्विसेज के इम्तेहान के लिए बढा। 2013 मे रियासत के 13 उम्मीदवारों ने आईएएस कैडर मंे जगह बनाई जिनमेे आठ कश्मीर रीजन के थे। इनमंे डाक्टर सहरिश असगर रियासत की पहली खातून आईएएस अफसर बनी थी। कश्मीर वादी की ही रूवैदा सलाम ने भी यूपीएससी का इम्तेहान पास किया और वह रियासत की पहली खातून आईपीएस अफसर बनी। 2014 में 16 नौजवानों ने इस इम्तेहान मे कामयाबी हासिल की जिनमें छः जम्मू रीजन के दूर दराज इलाकों के थे। गुज्जर बिरादरी के तीन नौजवानों डाक्टर ओवैस अहमद राना, कमर उल जमाल चैधरी और माहताब अहमद जगल शामिल थे। इनमें  जम्मू के सिमरन दीप सिंह ने महज 22 साल की उम्र मंे आईएएस का इम्तेहान पास किया तो राजौरी में डिप्टी कमिशनर के ओहदे पर तैनात इकबाल चैधरी और अतहर खान ने भी 23 साल की उम्र में आईएएस का इम्तेहान पास किया था।

कश्मीर के नौजवानों ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया है कि उनके आइडियल शाह फैसल जैसे लोग है। अगर उन्हें रियासत मंे पुरअम्न माहौल मिले तो वहां के तलबा मजीद कामयाबी के झंडे गाड़ सकते हैं। कश्मीर के नौजवानों का मानना है कि अगर सिस्टम में कोई खराबी है तो उससे टकरा कर उस खराबी को दूर नहीं किया जा सकता बल्कि सिस्टम का हिस्सा बनकर खराबी को दूर किया जा सकता है।  उन्हें पत्थर बाजी और सिक्योरिटी फोर्सेज की गोली के बजाए अपने कलम और जेहानत पर ज्यादा भरोसा है। वह सिस्टम में रहकर सिस्टम को बदलने की कोशिश करेंगे तभी  शायद कश्मीर के हालात भी सुधरेगे।