ईरान तक पहुंचा इस्लामिक स्टेट

ईरान तक पहुंचा इस्लामिक स्टेट

तेहरान! आईएसआईएस और अमरीका की मुबैयना (कथित) साजिश के तहत ईरानी पार्लियामंेट पर दहशतगर्दों ने जिस मकसद से हमला किया था वह मकसद पूरा होता इसलिए नहीं दिखा कि हमले के वक्त पार्लियामंेट मे मौजूद मेम्बरान न तो खौफजदा हुए न भगदड़ मची बल्कि बेश्तर (अधिकांश) मेम्बरान ने दहशतगर्दों पर जवाबी हमले की भी कोशिश की। इस हमले में सात लोगों की जान गई और चारों हमलावर भी मारे गए। पार्लियामेंट के साथ-साथ इमाम खुमैनी के मकबरे पर भी सात जून को सुबह हमला हुआ। हमले में मकबरे के दरवाजे को ही कुछ नुक्सान पहुचा। मुस्लिम मुल्कांे के दरम्यान शिया-सुन्नी के नाम पर टकराव का जो माहौल अमरीकी साजिश से बना था इस हमले ने नफरत और टकराव के उस माहौल में मजीद जहर घोलने का काम किया है। दुनिया की सतह पर आईएसआईएस और दीगर दहशतगर्द तंजीमांे (संगठनों) की मुखालिफत का ढोेंग करने वाले अमरीका और सऊदी अरब की भी सारी पोल पट्टी इस हमले से खुल गई। ब्रिटेन के मुख्तलिफ मकामात पर पिछले एक महीने कें अंदर तीन जगहों  पर दहशतगर्दों के हमले हुए जिसमें तकरीबन 50 लोगों की जाने चली गई। ब्रिटिश मीडिया की कुछ रिपोर्टों मंे वाजेह तौर पर इल्जाम लगाया गया है कि आईएसआईएस को सऊदी अरब से पैसा मिल रहा है और अमरीका से असलहा।

ईरानी पार्लियामंेट पर हमले के दौरान पहली बार ऐसा हुआ है कि आईएसआईएस ने हमले के दौरान ही उसकी जिम्मेदारी ली है। दरअस्ल ईरान शिया अक्सरियत मुल्क है। जो आईएसआईएस के दहशतगर्दाें के खिलाफ इराक और सीरिया की मदद करता रहता है। इसीलिए वह इस्लामिक स्टेट और सुन्नी दहशतगर्द गरोहों के निशाने पर है। मार्च के महीने में इस्लामिक स्टेट ने फारसी जबान में एक वीडियो जारी करके वार्निग दी थी कि वह ईरान को फतेह करके पहले की तरह इसे सुन्नी मुल्क बनाएगा। अपने इसी नापाक मकसद के मद्देनजर उसके दहशतगर्दो ने ईरानी पार्लियामंेट और ईरान के इंकलाबी रहनुमा आयतउल्लाह खुमैनी के मकबरे पर हमला किया। यह दोनों हमले तकरीबन एक ही वक्त में हुए। ईरानी पार्लियामंेट के कैम्पस मंे चार दहशतगर्द औरतों के लिबास में टूरिस्ट गेट से दाखिल हुए और राइफल व बंदूकों से हमला बोल दिया। उसी वक्त शहर के दक्खिनी इलाके मेें बने इमाम खुमैनी के मकबरे पर तीन-चार दहशतगर्दों ने हमला किया जिसमंेे एक औरत भी शामिल थी जो खुदकुश बमबार थी।

ईरानी पार्लियामंेट के कैम्पस में घुसे चारों दहशतगर्दों को पांच घंटे बाद मार गिराया गया। इस दौरान एक सिक्योरिटी गार्ड व दो लोगों की हमले में मौत हो गई। चैथी मंजिल पर पहुच चुके एक खुदकुश बमबार ने खुद को उड़ा लिया जबकि इमाम खुमैनी के मकबरे पर हमला करने वाले दहशतगर्द एक माली को कत्ल करके आगे बढे मगर उनमंे से एक को पुलिस ने गोली से उडा दिया और बाकी को पकड लिया जिन्हें बाद में  फांसी दे दी गई। यह देखकर हमलावरों मेें शामिल खातून खुदकुश बमबार ने खुद को उड़ा दिया। ईरान से मिली खबरों के मुताबिक इन दोनांे हमलों में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई। जबकि 39 जख्मी हुए हैं। लेकिन इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्द अपने मकसद मंे कामयाब नहीं हो सके न तो वह किसी मेम्बर पार्लियामंेट को कुछ नुक्सान पहुचा सके और न ही उन्हें खौफजदा कर सके।

ईरानी पार्लियामंेट के स्पीकर अली लरजानी ने इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्दों के हमलों को बुजदिलाना बताया और हमले के बावजूद ईरानी पार्लियामंेट का सेशन जारी रहा। उन्होने कहा कि यह हमला इस बात का इशारा है कि दहशतगर्द ईरान के अंदर मुश्किलें पैदा करने की कोशिशंे कर रहे है। उन्होने सऊदी अरब पर दहशतगर्दो को पैसा देने का सीधा इल्जाम लगाया। उन्होने कहा कि इस्लाम में खुदकुशी करना हराम है। यह लोग बम बांधकर हराम मौत मरते है। उनका कहना था कि दहशतगर्दों से निपटने में ईरान बेहद सरगर्म और अहल (सक्षम) है यही वजह है कि दहशतगर्दो के तीसरे हमले को पहले ही नाकाम बना दिया गया। ईरान के दाखिली वजीर रहमान फाजली ने तेहरान के सिक्योरिटी बंदोबस्त की निगरानी और दहशतगर्दाना हमलों की जांच के लिए एक सिक्योरिटी सेशन बुलाकर बात की थी।

पहले कतर के साथ सऊदी अरब के इशारे पर सात मुल्कों ने रिश्ते खत्म करने का एलान किया फिर ईरानी पार्लियामंेट और इमाम खुमैनी के मकबरे पर इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्दों का हमला, यह दोनों बातें अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प के सऊदी अरब दौरे के बाद हुई है। इसीलिए इन दोनों वाक्यात के पीछे अमरीका की साजिश ही कही जा रही है। अमरीका साउथ ईस्ट इलाके में शिया और सुन्नी मुमालिक  के बीच टकराव की सूरतेहाल पैदा करना चाह रहा है। ताकि दोनों को टकरा कर कमजोर बनाया जा सके। अमरीका की इस साजिश को अपने पैसों के जरिए अमली जामा पहनाने का इल्जाम सऊदी अरब पर लग रहा है। ईरानी स्पीकर और ब्रिटिश मीडिया ने सीधे-सीधे सऊदी अरब पर इल्जाम लगाया है कि वह दहशतगर्दो को फण्डिंग कर रहा है। अमरीकी सदर ट्रम्प के दौरे के दौरान जिस तरह सऊदी हुक्मरां उनके साथ नाच रहे थे उससे दुनिया में यही मैसेज गया कि यह सऊदी हुक्मरां अमरीका के इशारे पर नाच रहे है।

हिन्दुस्तान के सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ में मजलिस उलेमा ए हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना कल्बे जवाद ने ईरानी पार्लियामंेट और इमाम खुमैनी के मकबरे पर हुए दहशतगर्दाना हमलों की मजम्मत करते हुए कहा कि यह हमले अमरीकी साजिश का नतीजा है। उन्होेने कहा कि खुद को खादिमे हरमैन शरीफैन कहने वाले सऊदी  हुक्मरां जब अमरीकी सदर के साथ नाचते है तो पूरी दुनिया में इस्लाम की तस्वीर खराब होती है। उन्होने साफ इल्जाम लगाया कि कतर के साथ रिश्तों को तोडना और ईरान में दहशतगर्दों का हमला अमरीका की साजिश का नतीजा है। जिसमें सऊदी अरब भी कहीं न कहीं शरीक है। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि अभी अमरीका अपने मफाद मंे सऊदी अरब का इस्तेमाल करके खित्ते मंे शिया-सुन्नी टकराव पैदा करना चाहता है। उसका मकसद है कि यह मुल्क आपस में टकराते रहें और उसकी नाजायज औलाद इस्राईल की तरफ से बेखबर रहे और इस्राईल जैसे चाहे मजलूम फिलिस्तीनियों पर जुल्म ढाता रहे। उन्होनेे कहा कि फिलिस्तीनियों पर होने वाले मजालिम पर बोलने और इस्राईल की आंखों मंे आंखे डालकर बात करने की वजह से ईरान अमरीका को खटक रहा है। यही वजह है कि अब वहां भी इस्लामिर्क  स्टेट के दहशतगर्दो की पैठ बनाई जा रही है। मगर ईरान की खुफिया एजेंसियां ऐसे दहशतगर्दों से निपटने के लिए पूरी तरह अहल (सक्षम) है।