हम बेवकूफ हिन्दुस्तानी

हम बेवकूफ हिन्दुस्तानी

नरेन्द्र मोदी के वजीर-ए-आजम बन जाने के तीन साल बाद जब अपना यानी अवाम का और मोदी सरकार का तजजिया किया तो एक बार फिर यह साबित हुआ है कि हम हिन्दुस्तानी दुनिया की सबसे बड़ी बेवकूफ कौम हैं या यूं कहंे कि इतने ज्यादा सीधे हैं कि हमंे कोई भी बेवकूफ बनाकर हमारे वोट ठग लेता है। सत्ता पर कब्जा करता है जब तक सत्ता में रहता है हमारी कोई फिक्र नहीं करता और सत्ता से हटने के बाद पांच साल बाद फिर हमंे बेवकूफ बनाकर सत्ता हासिल करने की साजिशों में मसरूफ हो जाता है। मुसलसल बेवकूफ बनते रहने के हम इतने आदी हो चुके हैं कि अब हमें बेवकूफ बनने में भी मजा आने लगा है। तीन साल पहले नरेन्द्र मोदी ने जितने भी वादे किए थे एक भी पूरा नहीं हुआ बस एक काम हुआ है कि इस सरकार ने मुल्क के बड़ी तादाद में हिन्दुओं को बेवकूफ बनाकर उनके अंदर नफरत का जहर भर दिया है। हिन्दू मुसलमानों के दरम्यान नफरत की खाई को और भी ज्यादा चैड़ा और गहरा कर दिया है। फेसबुक, ट्वीटर और हवाट्स एप समेत पूरे सोशल मीडिया पर मोदी के नशे मे चूर उनके हामी जिस तरह की जुबान इस्तेमाल कर रहे हैं, लड़कियों और औरतों के लिए जो गालियां लिख देते हैं उन्हंे पढकर लगता है कि जैसे हमारे समाज में बगैर पढे-लिखों की तादाद में बेशुमार इजाफा तो हुआ ही है लोगों ने खुद ही बताना शुरू कर दिया है कि वह किन घरों से आते हैं उनकी परवरिश किस तरह की हुई है और उन्हें कौन से ‘संस्कार’ मिले हैं। समाज के एक बड़े हिस्से को पूरी तरह गैरमुहज्जब  (असभ्य) और गालियां बकने वाला बनाने के साथ-साथ मोदी के नशे ने मुल्क के मीडिया को भी इंतेहाई गैर जिम्मेदार,गैर मोहज्जब जानवरों की तरह भौंकने वाला बना दिया है। अब कई टीवी चैनलों पर ऐंकरिंग करने और खबरें पढने वाले लोग चीख-चीखकर गला फाड़ कर बात करते दिखते हैं। उनकी आंखों का ऐसा मरज हो गया है जो मोदी की खूबियां की देख पाती हैं।

गुजिश्ता साल आठ नवम्बर को मुल्क के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने रात आठ बजे अचानक एलान कर दिया कि मुल्क में एक हजार और पांच सौ रूपए के जो नोट चल रहे हैं वह उन्हंे देखने मंे अच्छे नहीं लगते हैं इसलिए यह सारे नोट अभी रात आठ बजे से बंद किए जा रहे है। उन्होने जिस अंदाज में ताली बजाकर कहा था कि आज से एक हजार और पांच सौ के नोट रद्दी के टुकडे़ हो गए जैसे  वह वजीर-ए-आजम न होकर किसी मुल्क के राजा हों। नोट बंदी के जो भी फायदे उन्होेने बताए थे उनमें सब गलत साबित हुए है। नवम्बर मे नोटबदी का एलान हुआ तो साबिक वजीर-ए-आजम डाक्टर मनमोहन सिंह, पी चिदम्बरम,अमत्र्य सेन जैसे मशहूर माहिरे मआशियात (आर्थिक मामलात के विषेशज्ञयांे) और कई मुल्कों की मआशी मैग्जीन्स ने कहा कि नोटबंदी से हिन्दुस्तान की जीडीपी गिरेगी मुल्क खसारे मंे जाएगा। उस वक्त मोदी ने इन सभी का मजाक उड़ाया और अपने मैनेजमेंट से पूरी दुनिया के माहिरीने मआशियात (आर्थिक विषेशज्ञयों) की बातों को गलत साबित कर देने के बडे-बड़े हवाई दावे भी किए। उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता था भले उन्होने इण्टरमीडिएट तक की तालीम हासिल नहीं की है उनसे ज्यादा काबिल हुक्मरां दुनिया भरमें दूसरा कोई है ही नहीं। नवम्बर में नोटबदी हुई थी लोगों ने पुराने नोट चलाने के लिए अपने तमाम पेंडिंग बिलों का भुगतान कर दिया जरूरत से तीन-चार गुने तक खरीदारी कर डाली। इस लिए नवम्बर से जनवरी के क्वार्टर में ऐसा लगा कि जैसे मुल्क की जीडीपी पर नोटबंदी का कोई असर ही नहीं पड़ा। जीडीपी रिपोर्ट आते ही मोदी ऐसा कूदने लगे जैसे नोटबंदी से देश को बहुत बड़ा फायदा हो गया है। अब माली साल 2016-17 के आखिरी क्वार्टर यानी जनवरी से मार्च 2017 की रिपोर्ट आई तो पता चला कि जीडीपी की शरह पौने आठ फीसद से गिर कर पांच फीसद के नजदीक पहुच गई है। अब मोदी तो खामोश लेकिन फाइनेस मिनिस्टर अरूण जेटली ने इंतेहाई गैर जिम्मेदाराना वजह बताते हुए कह दिया कि हमारे मुल्क की जीडीपी पर कोई असर नहीं पड़ा हैं हमारी जीडीपी मे तो इजाफा हुआ है दरअस्ल दुनिया के बेश्तर मुल्कों का मआशी मामला गड़बड़ाया है इसी का असर हमारे देश की तरक्की पर भी पड़ा है। अरूण जेटली ने इतनी गैर जिम्मेदाराना बात क्यों कही क्योंकि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि वह जिन लोगों पर मोदी के भरोसे हुकूमत कर रहे हैं वह सब बेवकूफ हैं। वह मोदी के नशे में डूबे हुए हैं इसलिए देश भले ही तरक्की के मामले में तबाही तक पहुच जाए बेवकूफों की भीड़ फिलहाल कुछ दिनांे तक मोदी के ही नशे में डूबी रहेगी और जब तक यह बेवकूफ लोग डूबे हुए हैं उन्हें और भी ज्यादा गहरे तक डुबो दिया जाना चाहिए।

हम बेवकूफ हिन्दुस्तानियों को अपने जाल में फंसाए रखने के लिए नरेन्द्र मोदी ने इस वक्त पूरे मुल्क में ‘गाय’ को एक बेहतरीन हथियार बना रखा है। मुल्क के मुसलमान, मुस्लिम तंजीमें और विश्व हिन्दू परिषद दोनांे ही बार-बार मतालबा कर रहे हैं कि मुल्क में गौकुशी पर मुकम्मल पाबदी लगाई जाए। जाहिर है जब मुल्क में गौकुशी पर पाबंदी लगाने का कानून बन जाएगा तो उनके बाद गाय को जिबह करने वाले या मारने वाले के लिए उसी कानून मंे सख्त सजा का भी प्रावीजन हो जाएगा। मोदी और उनकी सरकार गौकुशी पर पाबंदी लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हंे पता है कि अगर गौकुशी पर पांबदी का कानून बन गया तो फिर वह और उनकी सरकार मुल्क के बेवकूफों को अपने जाल में फंसाए रखने का काम कैसे करेगे? इसीलिए वहहम बेवकूफों को गाय के नाम पर किस्तों में नशे की खुराक दे रहे हैं। हम उस नशे में मरने मारने को उतावले हो जाते हैं क्योंकि गाय का दर्जा बहरहाल मुल्क में मां के दर्जे के बराबर बल्कि आजकल मां के दर्जे से कुछ ज्यादा ही हो चुका है। गौकुशी पर पाबंदी लगाने के लिए तैयार नहीं होने वाली मोदी सरकार कभी तो बाजारों में गाय, बछड़ा और बैल समेत कई जानवरों की खरीद-फरोख्त पर सख्त जवाबित (नियमांे) को लादकर हमें बेवकूफ बनाती है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, बंगाल और पूरे नार्थ ईस्ट में इन जवाबित की मुखालिफत होती है तो मोदी के कुछ वजीर पार्टी लीडरान और मोदी का गुलाम मीडिया इस मुखालिफत को मुल्क के मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हथियार बनाने की भोंडी कोशिश मे लग जाता है। हम बेककूफ भी वही समझते हैं जो मीडिया खुसूसन भांडो की जगह ले चुके कुछ टीवी चैनल हमारे सामने परोसते हैं। इसी शोरशराबे के दरम्यान गांधीनगर से खबर आती है कि गुजरात सरकार ने अपने गौकुशी मुखालिफ कानून को मजीद सख्त बनाते हुए गाय को जिबह करनेवाले या मारने वाले के लिए उम्र कैद की सजा तय कर दी है। सवाल यह है कि गुजरात सरकार ने कानून बनाते वक्त ही उसमें यह सख्त सजा क्यों शामिल नहीं की थी। अब इसलिए किया गया है कि साल के आखिर में गुजरात असम्बली के एलक्शन होने हैं और मोदी की पार्टी को गुजरातियों को बेवकूफ बनाकर उनके वोट ठगने हैं।

हम बेवकूफ हिन्दुस्तानी इस हकीकत पर किसी भी तरह गौर करने के लिए तैयार नहीं हैं कि तीन सालों में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी औरउनकी सरकार न तो अपना एक भी वादा पूरा कर पाई है और न ही कोई ऐसा काम ही किया है जो मुल्क की तरक्की का काम कहा जाए। अब मोदी को ही शायद ख्याल हुआ होगा कि लोग इन बातों पर गौर करना शुरू कर सकते हैं तो उन्होंनेे लोगों का ध्यान भटकाए रखने की तरकीबें निकाल लीं। आठ नवम्बर को नोटबंदी का एलान करके उन्होने पूरे मुल्क को उसी में उलझा दिया। मुल्क का हर शख्स सिर्फ नोटबदी की ही बातें करता दिखता रहा कुछ नोटबंदी को मुल्क के लिए नुक्सानदेह तो कुछ फायदेमंद बताते रहे। इस तरह हर शख्स इस मामले मे पूरी तरह उलझा रहा। मार्च के बाद  नोटबंदी का जिक्र कम होने लगा तो मोदी ने तीन तलाक और उससे मुस्लिम ख्वातीन पर पड़ने वाले बुरे असरात का मसला छेड़ दिया। दुनिया जानती है कि वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी को मुल्क के मुसलमानों और मुस्लिम ख्वातीन से कोई हमदर्दी नहीं है। इसके बावजूद मुल्क का पूरे का पूरा मुस्लिम मआशरा (समाज) और हिन्दुआंें की अक्सरियत इसी मसले में उलझ गई तकरीबन तीन महीनों तक ऐसा लगता रहा कि जैसे मुल्क का सबसे बड़ा मसला तीन तलाक ही है और तीन तलाक बंद होते ही मुल्क तरक्की की तमाम बुलंदियां छू लेगा। हद यह कि वजीर-ए-आला बनने से पहले जो आदित्यनाथ योगी यह धमकियां देते थे कि अब अगर एक हिन्दू लड़की से कोई मुस्लिम लड़का शादी करके ले जाएगा तो हम मुसलमानों की सौ लड़कियां ले आएंगे। योगी की हिन्दू युवा वाहिनी का सदर एक जलसे में यहंा तक तकरीर कर रहा था कि मुस्लिम लड़कियों को कब्रों से निकालकर उनको रेप कराऊंगा। वह योगी आदित्यनाथ भी अपने वजीर-ए-आजम की बात को आगे बढाते हुए तीन तलाक परबोलने लगे थे। तीन तलाक का मसला सुप्रीम  कोर्ट की फाइलों में फैसले के लिए बंद हुआ तो मोदी ने हम बेवकूफों को गाय मंे लाकर फंसा दिया। दो-तीन महीने गाय पर बहस में निकल जाएंगे फिर एक नया मसला छेड़ दिया जाएगा और बेवकूफ लोग मोदी के नशे मंे मोदी जिंदाबाद ही करते रहेगे। गाय का मसला ठंडा पडते-पड़ते कश्मीर के हुर्रियत कांफ्रेंस लीडरान के खिलाफ दिखाने के लिए सख्त कार्रवाई का शोशा छोड़ा जाएगा यह हमें अभी से दिखने लगा है। पूरा मीडिया खुसूसन टीवी चैनल मोदी की गुलामी में लगे हैं। एक एनडीटीवी है जो मोदी की गोद में बैठने को तैयार नहीं हुआ और सहाफती उसूलों से समझौता करने के लिए तैयार नहीं हुआ तो मोदी सरकार का तोता यानी सीबीआई की एक टीम ने पांच जून को सुबह सवेरे एनडीटीवी के चीफ डाक्टर प्रणव राय के घर पर छापा मार दिया। छापा भी क्यों मारा पूरी दुनिया को मालूम है। प्रणव राय दूसरी तरह के शख्स हैं वह तो सरकारी जुल्म के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं हुए लेकिन उन टीवी चैनलों के जिम्मेदारान खौफजदा दिखने लगे जो पहले से ही मोदी के भाड बने हुए हैं।

हम हिन्दुस्तानी कोई नए बेवकूफ नहीं हैं हम सदियों से इसी किस्म की बेवकूफियां करते आए है। हम ही मे से कुछ लोगों ने बाकायदा खत लिखकर बाबर को बुलाया था और फिर कई सालों तक मुगलों की हुकूमत में रहे। हमारी बेवकूफियां ही थीं कि महमूद गजनवी नाम का एक लुटेरा अपने डाकू गरोह के साथ हजारो मील का सफर तय करके मंदिर की दौलत लूटने के लिए सोमनाथ तक आता रहा और हम बेवकूफों ने उसे कभी रास्ते में रोकने की कोई कोशिश नहीं की आखिर सत्रहवें हमले में वह मंदिर की मूर्ति तोड़कर दौलत लूटने मे कामयाब हो ही गया। यह हमारी बेवकूफियां ही थीं कि अंगेे्रज हमपर हर तरह का जुल्म करके हमपर हुकूमत करता रहा और हम उस वक्त के पचास करोड़ बेवकूफ सत्तर-अस्सी हजार अंगे्रजों का कुछ बिगाड़ नही सके। अगर हमारी बेवकूफियां न होती तो सदियों तक गुलामी में न रहते। अब हम नरेन्द्र मोदी के गुलाम बन चुके है। गुलामी मे ही हमें मजा आता है।