चन्द्रशेखर गिरफ्तार दलित नाराज, ठाकुर खुश

चन्द्रशेखर गिरफ्तार दलित नाराज, ठाकुर खुश

सहारनपुर में बीस अप्रैल, 5 मई, 23 मई और उसके अलावा हुए तमाम हंगामों को भीम आर्मी और उसके बानी (संस्थापक) चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण के सर मढ दिया गया

 

 

सहारनपुर! उत्तर प्रदेश पुलिस ने आखिर भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण को आठ जून को सुबह-सुबह हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार करने का एलान कर दिया। नौ मई कोे सहारनपुर के गांधी पार्क में हुई भीम आर्मी की पंचायत के बाद से ही पुलिस को उनकी तलाश थी। बीस अप्रैल, पांच मई, नौ मई और 23 मई को मायावती के शब्बीर पुर दौरे के बाद दलितोे पर ठाकुरों का जो हमला हुआ था उन सभी मामलात में पुलिस ने चन्द्रशेखर को ही जिम्मेदार ठहरा रखा है। चन्द्रशेखर के खिलाफ दो दर्जन से ज्यादा रिपोर्टे दर्ज की गई एडमिनिस्टेªशन ने मीडिया में यह खबरें छपवाई कि चन्द्रशेखर का नक्सलियों और दहशतगर्दों से ताल्लुक हैं फिर कहा उनके अकाउंट में 50-60 लाख रूपए अचानक कहां से आ गए बाद में कह दिया कि इन इल्जामात के कोई सबूत नहीं है। तरह-तरह के मुकदमे कायम होने के बाद चन्द्रशेखर ने 21 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर दलितों का एक बड़ा मुजाहिरा किया और एलान किया कि जब तक वह मुल्क से ‘भगवा दहशतगर्दी’ खत्म नहीं कर लेते उस वक्त तक नीले रंग की पगड़ी नहीं पहनेगे। उनका यह बयान ही उनके लिए जहर बन गया और वह प्रदेश व देश की हुकूमतों के निशाने पर आ गए।

आठ मई को सुबह उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की एक टीम ने कहा कि चन्द्रशेखर को हमने सुबह सवेरे हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में सुभाष चैक से गिरफ्तार कर लिया। यह जगह चंबा जिले में आती है। उत्तर प्रदेश के एडीशनल  डीजी लाॅ एण्ड आर्डर आदित्य मिश्रा ने चन्द्रशेखर की गिरफ्तारी की तस्दीक करते हुए कहा कि उसके खिलाफ दो मामलात मंे नामजद रिपोर्ट दर्ज है। हालांकि सहारनपुर पुलिस कह रही है कि छुटमल पुर की हरिजन कालोनी में रहने वाले भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण के खिलाफ सहारनप ुर कोतवाली देहात में चार मुकदमे दर्ज है। इससे पहले होम सेेक्रेटरी मणिप्रसाद मिश्रा, चन्द्रशेखर के खिलाफ 27 मुकदमे दर्ज होने की बात कह चुके है। पुलिस ने चन्द्रशेखर और उनके साथियों पर बारह-बारह हजार रूपए के इनाम का एलान भी कर रखा था।

चन्द्रशेखर की गिरफ्तारी से दो दिन पहले पुलिस ने उनके दो साथियांे को गिरफ्तार किया था, उनके अलावा शब्बीरपुर गांव के दलित प्रधान शिवकुमार को भी गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस और एसआईटी ने यह कहा है कि पांच मई को शब्बीरपुर गांव में दलितों और ठाकुरों के बीच जो टकराव  हुआ था गांव का प्रधान शिवकुमार ही उसका मास्टर माइंड है। इन गिरफ्तारियों के अलावा 23 मई को शब्बीरपुर गांव में मायावती के दौरे के बाद मोटर साइकिल से अपने घर वापस जा रहे दलित आशीष को गोली मारकर कत्ल करने वाले तीन ठाकुरों की भी गिरफ्तारी की बात कही थी। लेकिन उन तीनों के नाम नहीं बताए। भीम आर्मी के कौमी सदर विनय रतन और दीगर कई लोगों पर डीआईजी ने 5-5 हजार के इनाम का एलान कर रखा है। इससे पहले पुलिस ने बताया कि बीस अप्रैल को सड़क दूधली गांव में जो हंगामा हुआ था उसमें नामजद घसौती गांव के विपिन को भी गिरफ्तार किया गया है। विपिन खनपाल शर्मा का करीबी बताया जाता है।

उत्तर प्रदेश के होम सेक्रेटरी मणिप्रसाद मिश्रा कई सीनियर पुलिस अफसरान के साथ कई दिनों तक सहारनपुर में डेरा डाले रहे थे। सहारनपुर में उनकी मुसलसल मौजूदगी का नतीजा यह निकला कि सहारनपुर में हिंसा के जितने भी वाक्यात पेश आए उन सबकी जिम्मेदारी दलितों के सर मढ दी गई। हिंसा की शुरूआत कराने वाले बीजेपी के लोक सभा मेम्बर राघव लखनपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई जबकि राघव लखनपाल ने न सिर्फ बीस अप्रैल को सड़क दूधली गांव में डाक्टर अम्बेडकर की शोभा यात्रा के बहाने मुसलमानों और दलितों में बाकायदा दंगा कराने की साजिश की थी बल्कि उन्होेने उस वक्त के सीनियर पुलिस कप्तान लव कुमार के सरकारी बंगले पर हमला कराने जैसा संगीन जुर्म भी किया था। सडक दूधली गांव के पूरे मामले को तकरीबन दबा ही दिया गया उस मामले मंे सिर्फ एक गिरफ्तारी करके पुलिस ने अपना फर्ज पूरा कर लिया।

भीम आर्मी और उसके लीडर चन्द्रशेखर आजाद का रोल पहली बार नौ मई को नजर आया जब दलितों की भीड के साथ उन्होेने गांधी पार्क में पंचायत करके मतालबा किया कि पांच मई को शब्बीरपुर और दीगर दो-तीन गांवों मे दलितांेे के जो घर लूटे और जलाए गए और दलितों पर हमले हुए उन तमाम मामलात में पुलिस मुल्जिमान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेे और दलितों के हुए नुक्सन की भरपाई की जाए। यहीं से पुलिस और एडमिनिस्टेªशन में बैठे सवर्ण अफसरान को मौका मिल गया। उन्होने जिले में हुए तमाम हंगामों को भीम आर्मी के सर मढ दिया। इस अंदाज में खबरे प्लाट की गई कि जैसे भीम आर्मी दलितों की कोई तंजीम (संगठन) न होकर  दुश्मन मुल्क पाकिस्तान की फौज हो।

पुलिस ने अचानक एक दिन चन्द्रशेखर की मां कमलेश और छोटे भाई कमल किशोर को हिरासत में ले लिया कहा यह गया कि इन दोनों से चन्द्रशेखर के ठिकानों का पता किया जाएगा। दोनों के खिलाफ कोई शिकायत या रिपोर्ट नही थी। थोडे ही देर में पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ तो दोनों को छोड़ दिया गया। हिमाचल प्रदेश में चन्द्रशेखर की गिरफ्तारी के बाद उन्हंे सहारनपुुर लाने की बात कही गई थी  लेकिन खबर लिखे जाने तक पुलिस उन्हें लेकर सहारनपुर नहीं पहुची थी। उनकी गिरफ्तारी की खबर के बाद से ही पूरे जिले में जबरदस्त कशीदगी का माहौल पैदा हो गया था। दलितों को गुस्से में देखा गया उनका कहना था कि चन्द्रशेखर ने सताए और परेशान किए गए दलितों के लिए आवाज उठाई थी इसलिए उन्हें मुल्जिम और विलेन सब कुछ बना दिया गया तो क्या अब देश में दलितों की आवाज उठाना भी जुर्म हो गया है। उनकी गिरफ्तारी से ठाकुर इलाकों में खुशी का माहौल भी देखा गया।

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