गाय के बहाने देश को भड़काने की कोशिश

गाय के बहाने देश को भड़काने की कोशिश

”केरल के कन्नूर मंे हिन्दुआंेे ने सरेआम बछड़ा काटकर उसका गोश्त तकसीम किया, मद्रास आई आई टी के हिन्दू तलबा ने बीफ पार्टी दी नए कानून की मुखालिफत में खड़े सभी सियासतदां हिन्दू हैं हद यह कि कानून पर स्टे देने वाले मद्रास हाई कोर्ट के दोनों जज साहबान ही हिन्दू हैं। इसके बावजूद बीजेपी और मोदी की गुलामी में लगा मीडिया इस मसले को फिरकावाराना रंग देने में लगा रहा ऐसा माहौल बनाया गया जैसे यह सिर्फ मुसलमानों का ही मसला हो।“

 

”गांवों में काश्तकार बछड़े केा मजबूत बैल बनाकर बेचते हैं, दुधारू गायों की भी बड़े पैमाने पर तिजारत होती है काश्तकारों को मवेशी फरोख्त करके मुल्क मंे हजारों करोड़ की आमदनी होती है। हजारों करोड़ की लेदर इण्डस्ट्री मुल्क में हें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। मोदी सरकार के नए कानून से काश्तकारों से लेदर इण्डस्ट्री के मजदूरों तक को हजारों करोड़ का नुक्सान होगा।“

 

”केरल के चीफ मिनिस्टर पिनराई विजयन ने मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर सख्त शराएत आयद करने वाले कानून को गैर मुहज्जब (असभ्य) कानून बताया, ममता बनर्जी ने कहा कि कोई इस कानून को नहीं मानेगा। मेघालय और सातों नार्थ ईस्टर्न प्रदेशों के लोग गाय खाना छोड़ने को तैयार नहीं। चारों तरफ से सख्त मुखालिफत से मोदी सरकार बैकफुट पर दिखी।“

 

नई दिल्ली! सियासी मकासिद और हिन्दुओं को पोलराइज करके उनके वोट एक मुश्त लेने के लालच मंें नरेन्द्र मोदी सरकार ने जिबह करने के मकसद से मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगा कर मुल्क में एक नया हंगामा खड़ा कर दिया है। अब सरकार ने इस कानून से भैंसों को अलग करने का इशारा किया है। मोदी ने जिस सियासी मकसद के लिए यह कानून नोटिफाई किया था वह बहुत हद तक पूरा हो गया दिखने लगा है। नरेन्द्र मोदी सरकार के नए मवेशी कानून के खिलाफ एहतेजाज करते हुए केरल के कई हिन्दुओं ने सड़क पर बछड़ा जिबह किया तो भारतीय जनता पार्टी ने उसे फौरन ही कांग्रेस के सर मढ कर सियासत शुरू कर दी। अगले ही दिन मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बंेच के दो जजों जस्टिस एनवी मुरली द्दरन और जस्टिस सीवी कार्तिकेयन की बेंच ने सरकार के इस फैसले पर चार हफ्ते के लिए रोक लगाते हुए भारत सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि केरल हाई कोर्ट ने इसी सिलसिले मंे यूथ कांगे्रस लीडर  ए जी सुनील की जानिब से दायर पीआईएल को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि नए कानून में गौकुशी पाबंदी की बात नहीं कही गई है। बंगाल की वजीर-ए-आला ममता बनर्जी ने इस कानून को न मानने का एलान कर दिया, केरल के चीफ मिनिस्टर पिनराई विजयन ने इसे एक गैर मुहज्जब (असभ्य) कानून करार दिया। उन्होेेंने कहा कि इस मसले पर वह कई प्रदेशों के चीफ मिनिस्टर्स की मीटिंग बुलाएंगे। केरल के हिन्दुओं ने सरेआम बछड़े को जिबह करके अपना एहतेजाज दर्ज कराया तो आईआईटी मद्रास के तलबा ने बीफ पार्टी ही दे दी। कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया ने कहा कि भारत सरकार के जरिए महज नोटिफिकेशन के जरिए नाफिज किए गए इस कानून पर एक्सपर्ट से मशविरा करने के बाद ही उसको मानने या न मानने का फैसला किया जाएगा। नार्थ ईस्टर्न प्रदेशों में भी इस कानून की जबरदस्त तरीके से मुखालिफत हो रही है। मेघालय के लोक सभा मेम्बर विसेट एच पाला ने कहा कि मेघालय में ही सबसे ज्यादा बीफ खाया जाता है उनके प्रदेश की पूरी की पूरी आदिवासी आबादी की असल खुराक गाय का गोश्त है। नार्थ ईस्ट की सभी सातो ंरियासतों के लोग खुसूसन ख्वातीन ने बाकायदा एलान किया है कि वह लोग इस तुगलकी कानून को किसी भी कीमत पर तस्लीम नही करेगे। चेन्नई और बंगाल की पूरी लेदर इण्डस्ट्री इस कानून के खिलाफ खडी है तो गोश्त व्यापारियों खुसूसन गोश्त एक्सपोर्ट करने वाली  कम्पनियां कह रही हैं कि जब खुद की कामर्स मिनिस्ट्री कह रही है कि अप्रैल 2016 से जनवरी 2017 तक देश से गोश्त का जितना एक्सपोर्ट हुआ है उसका 97 फीसद हिस्सा भैंस के गोश्त का है तो फिर नए कानून मंे गाय उसके परिवार यानी बैल बछड़ा बछिया वगैरह की खरीद फरोख्त पर सख्त कानून लाते वक्त उसमें भैंस को भी क्यों शामिल कर दिया गया।

यह कानून दरअस्ल मोदी सरकार दो वजहों से लाई। एक यह कि तीन साल के दौरान सरकार हर शोबे (क्षेत्र) मंे नाकाम रही है। आम लोग इन नाकामियों पर गौर न करने पाएं इसीलिए मोदी ने एक साथ तीन तलाक और मुस्लिम ख्वातीन की परेशानियों का राग छेड़ कर पूरे मुल्क को तीन महीनो से भी ज्यादा वक्त तक उलझाए रखा। अब सुप्रीम कोर्ट मे तीन तलाक का मसला आखिरी मंजिल तक पहुच गया तो मोदी ने फौरन मवेशियों की खरीदफरोख्त पर सख्त पाबंदियां  लगाकर नया शोशा छेड़ दिया। गुलाम मीडिया खुसूसन टीवी चैनलानें ने तीन तलाक की तरह मवेशियों की तिजारत पर लगी पाबंदी को भी उछालना शुरू कर दिया। मीडिया और बीजेपी ने मवेशी कानून को हिन्दू मुसलमानों के दरम्यान फिरकावाराना रंग दे दिया।  इसके बावजूद कि सडक प बछडा काटने वाले, बीफ पार्टी देने वाले, सडकों पर निकल कर एहतेजाज करने वाले इस कानून (बाकी पेज दो पर) को न मानने का एलान करने वाले, चीफ मिनिस्टर्स और कानून पर स्टे देने वाले मद्रास हाई कोर्ट के दोनों जज साहबान सबके सब हिन्दू ही है। इनमें कोई मुसलमान शामिल नहीं है। फिर पूरी बीजेपी और मीडिया का एक बड़ा तबका इस मामले को फिरकावाराना रंग देने पर तुला दिखा। बहरहाल अब इस मामले में कम से कम तीन महीनो तक मुल्क के अवाम को उलझाए रखने का जरिया मोदी सरकार ने तलाश लिया है।

केरल के कन्नूर मेे हिन्दुओं ने ही एक बछड़े को सडक पर लाकर काटा और पूरे इलाके मे उसका गोश्त तकसीम किया तो बीजेपी और मीडिया ने फौरन कांग्रेस पर हल्ला बोल दिया क्योेकि बछडा काटने वालों में यूथ कांगे्रस का मकामी लीडर रिजिल मकुट्टी आगे-आगे था। बछड़ा काटने वालों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की कांग्रेस ने रिजिल को छः साल के लिए पार्टी से मुअत्तल कर दिया। चन्द रोज कब्ल ही मल्लपुरम लोक सभा हलके के बाई एलक्शन मंे बीजेपी उम्मीदवार एन श्रीप्रकाश ने बाकायदा लिखकर वोटर से वादा किया था कि अगर वह उन्हे वोट देकर जिता दें तो वह रोजाना साफ सुथरा हलाल गाय का गोश्त अपने वोटरों को सप्लाई कराने का बंदोबस्त करंेगे। उनके इस वादे पर किसी ने नहीं कहा था कि बीजेपी तो गाय का गोश्त सप्लाई कराने का वादा कर रही है। मोदी सरकार ने नया कानून नोटिफाई करते वक्त यह नहीं कहा कि गौरक्षा के नाम पर अब भगवा गुण्डे सडकों पर दहशत नहीं फैलाएंगे और किसी को पीट-पीटकर मार नहीं डालेंगे। इस कानून में यह भी नहीं कहा गया कि अगर गाय को दुह कर कोई शख्स उसे कूडा कचरा और प्लास्टिक खानेके लिए लावारिस छोडेगा तो ऐसे गाय मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार के पास इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं है कि आखिर पूरे मुल्क मे गौकुशी पर पाबंदी लगाने में उसे क्या परेशानी है। अब तो राजस्थान हाई कोर्ट ने भी कह दिया है कि गाय को कौमी जानवर (राष्ट्रीय पशु) करार दिया जाए और इसे मारने वाले को उम्रकैद का कानून बनाया जाए।

गोवा, मगरिबी बंगाल, तमिलनाडु और नार्थ-ईस्ट के सभी सातों प्रदेशों में वोट पाने के लालच में नरेन्द्र मोदी सरकार ने गौकुशी पर पूरे मुल्क में मुकम्मल पाबंदी आयद करने के बजाए बाजारों में गाय और उसके पूरे कुन्बे यानी बैल, बछड़ों सभी की खरीद-फरोख्त पर इनडायरेक्ट तरीके से पाबंदी लगाकर काश्तकारों और मवेशी व्यापारियों की सैकड़ों करोड़ की तिजारत पर पानी फेर दिया है। याद रहे कि मुल्क भर में काश्तकार गायें रखते हैं उसके दूद्द का इस्तेमाल करते हैं ज्यादा दूद्द हो तो उसे गांव में ही फरोख्त करके अपनी आमदनी में इजाफा करते हैं। उनके बछड़ों को मजबूत बैलों में तब्दील करके अपनी काश्तकारी में इस्तेमाल करते हैं और बैलों को बाजारों में फरोख्त करके मोटी कमाई करते हैं। अब ऐसा नहीं हो सकेगा क्योंकि मोदी सरकार ने 26 मई को एक नया नोटिफिकेशन जारी करके इस व्यापार पर तकरीबन पाबंदी ही लगा दी है। नए सरकारी फरमान के मुताबिक अब बाजारों में गाय, बछड़ा और भैंस की खरीद-फरोख्त करने वाली दोनों पार्टियों को हलफनामे के जरिए यह बताना पड़ेगा कि बाजार में खरीदे और बेचे जाने वाले मवेशी स्लाटर हाउसों में जिबह करने के लिए बेचे और खरीदे नहीं जा रहे हैं। मतलब यह कि अब मवेशी बेचने और खरीदने वाले दोनों लोगों को ही बाजारों में बैठने वाले सरकारी अमले, वकीलों, पुलिस और खुद को गौरक्षक कहने वालांे पर एक बड़ी रकम खर्च करनी पडेगी। इसके बावजूद इस बात की कोई गारण्टी नहीं होगी कि बाजार से खरीद कर गायों बैलों बछडों और भैंसों को ले जाने वालों पर आगे चलकर सड़कों पर गौरक्षक के नाम पर दहशतगर्दी नहीं करेगे। इतनी लिखा-पढी के बाद तो गौरक्षकांे की दहशतगर्दी में इजाफा ही होगा।

मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुखालिफत शुरू हो गई है। बंगाल, कश्मीर, गोवा, केरल, तमिलनाडु और नार्थ ईस्टर्न प्रदेशों के सियासतदानों और पूरे मुल्क के मवेशी व्यापारियों ने इस फैसले के खिलाफ आवाजें बुलंद की है। काश्तकारों में भी नाराजगी की फजा दिखी है। केरल के चीफ मिनिस्टर पिनराई विजयन ने अपनी फेसबुक वाल के जरिए इंतेहाई गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि आइंदा यह लोग मछली और मुर्गे खाने पर ही पाबंदी लगा दंेगे। उन्होने अवाम से अपील की कि वह मोदी सरकार के इस गैर मुहज्जब (असभ्य)  फैसले के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करे। उन्होने कहा कि इस किस्म के फैसले मुल्क के जम्हूरी और सेक्युलर ताने बाने को खत्म करने जैसे हैं। मोदी सरकार का कहना है कि उसने यह नोटिफिकेशन सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के मुताबिक ही जारी किया है। इसपर तमिलनाडु और केरल के कई सियासतदानों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तो जलीकट्टी पर भी पाबंदी लगा दी थी। उस आर्डर को मानने के लिए कौन तैयार हुआ। अजीब बात यह है कि केरल के दोनांे सियासी फ्रण्ट यानी लेफ्ट फ्रण्ट और कांगे्रस कयादत वाले डिमाक्रेटिक फ्रण्ट दोनों ने इसकी मुखालिफत की है।

गाय और उसकी नस्ल से आने वाले बैल और बछड़ों के साथ ही भैंस यहां तक कि ऊंट की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी के खिलाफ रद्देअमल शुरू में केरल और तमिलनाडु में दिखाई दिया मगर अब  कर्नाटक, मगरिबी बंगाल, पंडुचेरी और दूसरे नार्थ ईस्ट इलाकों में भी लोगों में गुस्से की वजह बन रहा है। केरल में तो हुक्मरा एलडीएफ और अपोजीशन यूडीएफ और उसकी यूथ विंग्स ने न सिर्फ पूरी रियासत मंे एहतेजाजन जलसे मुजाहिरे किए बल्कि ‘बीफ फेस्ट’ भी मनाया। राजद्दानी तिरूअनन्तपुरम सेक्रेटेरिएट के बाहर लोगों ने मुजाहिरा किया और गाय का गोश्त पकाया और उसे लोगों में बांटा। मुजाहिरे की कयादत कर रहे डीवाईएफआई के कौमी सदर मोहम्मद रियाज ने कहा कि मरकजी सरकार के तयीं अपना एहतेजाज दर्ज कराने के लिए हम गाय का गोश्त खाएंगे। तो दूसरी तरफ कोल्लम जिले में कांग्रेस की जिला यूनिट के सदर बिन्दू कृष्णन ने कहा कि वह बीफ से बने पकवान पैक कर पोस्ट आफिस के जरिए वजीर-ए-आजम मोदी को भेजेंगे। तमिलनाडु में भी सरकार जानवरों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने वाले कानून के खिलाफ आईआईटी मद्रास मंे तलबा ने ‘बीफ फेस्टिवेल’ का एहतमाम किया। यह फेस्टिवेल आईआईटी अहाते में किया गया। लान में तलबा एक साथ बैठकर बीफ खा रहे हैं। बाद में बीफ पार्टी देने वाले संजय नाम के तालिब इल्म को फिरकापरस्त गुण्डों ने बुरी तरह मारा-पीटा भी।

जानवरों खुसूसन गाय की नस्ल  से ताल्लुक रखने वालों को जिबह करने पर एक तरह से पाबंदी लगाने के  इस कानून की वजह से जुनूब में सियासत खूब गर्मा गई हैं यहां केरल में हुक्मरा एलडीएफ ने इस सिलसिले में आल पार्टी मीटिंग बुलाने का फैसला किया है। जंगलात और मवेशी परवरी के वजीर पी राजू ने कहा कि नया कानून केरल मंे नाफिज नहीं हो सकता। वहीं केरल कांगेे्रस सदर एमएम हसन ने कहा कि रियासती सरकार को मरकज के कानून को रद्द करने के लिए खुसूसी इजलास बुलाना चाहिए। जबकि बीजेपी के रियासती सेक्रेटरी के सुरेन्द्र ने कहा कि नए कानून को दीगर पार्टियों ने गलत तरीके से लिया है। इस कानून के खिलाफ सीपीआई के लीडर डी राजा का इंतेहाई सख्त बयान आया। उन्होने कहा कि सरकार ने इस फैसले को रद्द नहीं किया तो मुल्क मंें खाना जंगी (गृहयुद्ध) जैसे हालात हो सकते हैं। सरकार को लोगों के खाने की पसंद तय करने का कोई हक नहीं है।

जानवरों की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने के मरकजी सरकार के फैसले पर पहले ही दिन से मुखालिफत शुरू होगई थी और इसमें शिद्दत ही आती जा रही है। मगरिबी बंगाल की वजीर-ए-आला ममत बनर्जी ने एलान किया कि उनकी सरकार इसे तस्लीम नहीं करेगी। मरकजी सरकार की पाबंदी पर उन्होेेेंने कहा कि यह गैर जम्हूरी गैरआईनी है और इसे कानूनी तौर पर चैलंेज किया जाएगा। ममता बनर्जी ने पूछा कि आखिर यह फैसला रमजान के महीने में क्यों लिया गया। उन्होने कहा कि रियासत के अख्तियारात की जानबूझ कर गसब करने की कोशिश की गई है। उन्होने कहा कि यह फेडरलिज्म को खत्म करने की साजिश है।

तमिलनाडु में हुक्मरां एआईडीएमके की जानिब से पाबंदी के खिलाफ कोई वाजेह मौकुफ सामने नहीं आया तो डीएमके ने पलानी स्वामी सरकार पर हमला बोला। डीएमके के कारगुजार सदर एम के स्टालिन ने कहा कि मरकज ने खाने के मुतबादिल के बुनियादी हक को छीन लिया। तमिलनाडु की अपोजीशन पार्टियों ने अन्ना द्रमुक से अपील की कि पाबंदी के खिलाफ कानून बनाए।