भीम आर्मी से डरे योगी और माया

भीम आर्मी से डरे योगी और माया

”भीम आर्मी के बानी (संस्थापक) चन्द्रशेखर आजाद रावण ने एलान किया कि जब तक वह देश से ‘भगवा दहशतगर्दी’ खत्म नहीं कर लेगे उस वक्त तक न तो नीली पगड़ी पहनेंगे और न ही चैन से बैठेंगे। दलितो ंकी बेपनाह भीड़ को खिताब करते हुए उन्होने कहा कि हम न डरने वाले हैं और न भागने वाले, आज हमने अपनी आवाज सत्ता में बैठे लोगों तक पहुचा दी अब खुद को कानून के हवाले करूंगा।“

 

”इक्कीस मई को जंतर-मंतर पर चन्द्रशेखर आजाद के आने की इत्तेला के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की पुलिस ने काफी घेराबंदी कर रखी थी खबर है कि चैबीस रिपोर्टों में नामजद भीम आर्मी के इस लीडर को पकड़ने के लिए सिविल डेªस में पुलिस वाले मौजूद भी थे लेकिन चारों तरफ से उमड़ी दलितो ंकी भीड़ देखकर सरकार और पुलिस सहम सी गई और चन्द्रशेखर के साथ कोई  छेड़छाड़ न करने का फैसला हो गया।“

 

 

”भीम आर्मी की इतनी बड़ी ताकत देखकर योगी सरकार ही नहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती को अपनी सियासी जमीन खिसकती महसूस हुई तो सालों बाद उन्होने एयरकंडीशन्ड कमरे में बैठकर दलितों के लिए बयानबाजी करने के बजाए सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव का दौरा करने का प्रोग्राम बना दिया। भीम आर्मी ने किसी से इजाजत लिए बगैर जंतर मंतर पर इतना बड़ा मजाहिरा कर दिया लेकिन दिल्ली पुलिस उनसेे बोलने तक की हिम्मत नहीं कर सकी।“

 

नई दिल्ली! भीम आर्मी के बानी (संस्थापक) और उभरते दलित लीडर चन्द्रशेखर आजाद रावण एडवोकेट ने इक्कीस मई को तारीख रच दी। दिल्ली के जंतर-मंतर से उन्होने दलितों और मुसलमानों पर हो रहे मजालिम के खिलाफ मजबूत आवाज उठाते हुए नरेन्द्र मोदी की मरकजी और योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश सरकारों को ललकारा तो योगी हुकूमत डरी सहमी और बैकफुट पर जाती दिखी। चन्द्रशेखर की आवाज पर जितनी बड़ी तादाद में दलित जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए उनकी ताकत का असर सिर्फ बीजेपी सरकारों पर ही नहीं पड़ा बीसों साल से अपने घर के एयरकण्डीशन्ड कमरों में बैठकर दलितों के लिए बयान जारी करने वाली बीएसपी सुप्रीमो मायावती को भी अपना सियासी मुस्तकबिल खराब होता दिखा तो वह भी तेइस मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों पर हुए मजालिम का जायजा लेने पहुच गई। नौ मई को चन्द्रशेखर आजाद ने सहारनपुर के गांधी पार्क में दलित पंचायत बुलाई थी जिसके दौरान एडमिनिस्टेªशन के साथ हुए उनके टकराव के बाद उनके खिलाफ दो दर्जन मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस उन्हें तलाश नही कर पाई तो कहा गया कि वह तो कहीं छुप गए हैं जल्द ही उन्हें गिरफ्तार करके कानून के सामने पेश किया जाएगा। चन्द्रशेखर ने सोशल मीडिया के जरिए एलान किया कि वह फरार नहीं हुए हैं वह 21 मई को जंतर-मंतर पर दलितों के मजाहिरे के इंतजाम में लगे हैं। इक्कीस को सुबह वह जंतर-मंतर पर आएंगे। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिल्ली यूपी की तमाम सड़कों पर निगरानी का जबरदस्त जाल बिछवा दिया। खबर तो यहां तक है कि जंतर मंतर पर सादा कपड़ों में उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान इस हिदायत के साथ तैनात किए गए थे कि चन्द्रशेखर के वहां पहंुचते ही उन्हंे उठा लिया जाए। पुलिस जराए के मुताबिक चन्द्रशेखर के मौके पर नमूदार (प्रकट) होेने से पहले चारों तरफ  से दलितों की जबरदस्त भीड़ आते देख कर मौके पर सिविल डेªस में तैनात पुलिस वालों के पसीने छूटने लगे। उन्होने अपने आला अफसरान से राब्ता कायम करके मौके के हालात बताए तो योगी सरकार ने अपना इरादा तब्दील कर दिया। चन्द्रशेखर ने जंतर मंतर पर पहुच कर मतालबा किया कि शब्बीरपुर गांव से सहारनपुर शहर तक हुए वाक्यात की जुडीशियल तहकीकात की जाए जिन दलितों के मकान जलाए गए हैं उन्हें मुनासिब मुआवजा दिया जाए और जिन दलितों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं वह मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होने कहा कि वह कानून से भाग नहीं रहे हैं वह कानूनी कार्रवाई मुकम्मल कराने के लिए अदालत में सरेण्डर करेंगे। नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकारों को ललकारते हुए उन्होने कहा कि उन्हंे कानून और संविधान न बताया जाए क्योंकि मुल्क का संविधान उनके बाप (डाक्टर भीम राव अम्बेडकर) का दिया हुआ है। वह खुद भी कानून पढकर अपनी कौम के हुकूक की लड़ाई लड़ने निकले हैं। उन्होने कहा कि उन्होने दलितों पर हुए मजालिम के खिलाफ आवाज बुलंद की तो उन्हें नक्सली करार दे दिया गया यही कानून है। उन्होने चैलंेज किया कि कोई सरकार या पुलिस उन्हेे हाथ लगाकर दिखा दे। उन्होने अपने नाम की तफसील बयान करते हुए कहा कि अपने नाम के साथ रावण का नाम इसलिए शामिल किया है क्योंकि रावण एक मजबूत और आला दर्जे के किरदार का मालिक था। इतने दिनों तक अपनी वाटिका में रखने के बावजूद उसने सीताजी को उंगली तक नहीं लगाई। अगर लक्ष्मण  उसकी बहन के साथ जालिमाना बर्ताव न करते तो वह सीताजी को अगवा न करता। उसने तो अपनी बहन का इंतकाम लेने के लिए सीता को अगवा किया लेकिन उनके साथ बहन और मां जैसा बर्ताव किया। उसके किरदार का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।

दोपहर मंे तकरीबन सवा बारह बजें चन्द्रशेखर जंतर-मंतर पर पहुचे तो डायस पर आते ही मुंतजमीन ने उन्हें नीली पगड़ी पहनाने की पेशकश की लेेकिन उन्होने नीली पगड़ी यह कह कर पहनने से इंकार कर दिया कि यह सभी दलितों का मंच है। यह नीली पगड़ी मैं उस वक्त तक नहीं पहनूंगा जब तक प्रदेश और देश से ‘भगवा दहशतगर्दी’ को खत्म नहीं कर लेता। भगवा दहशतगर्दी खत्म होते ही मैं नीली पगड़ी पहनूंगा। उन्होने कहा कि यह देश हमारा है और हम इसे किसी कोे लूटने नहीं देंगे। जो माइक्रोफोन पकड़ कर चन्द्रशेखर तकरीर कर रहे थे उसमें एक बार ऐसा लगा जैसे करेण्ट लीक कर गया हो क्योंकि उन्हंे एक झटका लगा था। उन्होनेें फौरन ही माइक्रोफोन अपने सीने पर लगाकर कहा कि इस करेण्ट से उनको कुछ नहीं होने वाला है क्योकि अस्ल करेण्ट तो यहंा यानी उनके सीने में है। जय भीम के नारों के दरम्यान उन्होने फिर कहा कि ‘सुन लो करेण्ट यहां यानी उनके सीने में है।’

जंतर-मंतर पर दलितों की बेपनाह भीड़ देखकर चन्द्रशेखर का सीना फख्र से चैडा हो गया। इसलिए भी उनकी एक आवाज पर इतनी बड़ी तादाद में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के दलित दिल्ली  पहुचे थे वह अपने-अपने जाती खर्च पर सियासी पार्टियों की तरह उन्हे लाने के लिए न तो बसें लगाई गई थी न टेªनें बुक की गई थी और न ही जंतर मंतर पर उनके लिए मुफ्त में खाने और पानी का बंदोबस्त किसी ने किया था। इस मौके पर चन्द्रशेखर की एखलाकी (नैतिक) हिमायत में जेएनयू के साबिक सदर कन्हैया कुमार और गुजरात के नौजवान दलित लीडर जिगनेश मेवाती भी पहुचे हुए थे। दलितों की भारी भीड़ को खिताब करते हुए चन्द्रशेखर ने कहा कि मुझे तो लगता था कि ‘मेरी कौम सोई हुई है लेकिन आज की यह भीड़ देखकर लग गया कि मेरी कौम जाग गई है।’ उन्होने कहा कि मैं बुजदिल (कायर)  नहीं हूं मुझे आपकी आवाज नाइंसाफी पर उतरी सरकारों तक पहुचानी थी। इसीलिए अभी तक खामोश था अब मैं खुद ही अदालत में सरेण्डर करूगां। चन्द्रशेखर आजाद औेर दीगर लोगों की तकरीरों के दौरान ‘जय भीम’ के नारों से आसमान गूजता रहा। यकीनन इन नारों की आवाजें नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के कानों तक भी जरूर पहुची होगी।

दलितों की जो भीड़ जंतर-मंतर पर इकट्ठा थी उसमें शामिल भीम आर्मी के बेश्तर (अधिकांश) लोगों ने नेहरू टोपी पहन रखी थी बड़ी तादाद में लोगों ने अपनी टोपियों पर भीम आर्मी और ‘फख्रिया चमार’तक लिखवा रखा था। हाथों में नीले झण्डों के दरम्यान तिरंगे भी थामे हुए थे। इस भीड़ में कई गरीब सवर्ण हिन्दू और बड़ी तादाद में मुसलमान भी शामिल थे।

सहारनपुर पुलिस इस मजाहिरे से एक दिन पहले तक कह रही थी कि चैबीस रिपोर्टों में चन्द्रशेखर नामजद है और गिरफ्तारी के खौफ से नौ मई से ही फरार है। दस मई के बाद तो वह कहीं भी नजर नहीं आए हैं। हां उनका एक आडियो सोशल मीडिया पर जरूर वायरल हुआ है जिसमें वह 21 मई को जंतर मंतर पर दलितों से इकट्ठा होने की अपील करते हुए सुने गए हैं। पुलिस के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि 21 मई को उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जंतर मंतर का घेराव क्यों नहीं किया गया। नई दिल्ली पुलिस भी दलितों की इस भीड़ से सहमी दिखी। नई दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिशनर वी के सिंह का कहना था भीम सेना ने जंतर मंतर पर मजाहिरा करने की इजाजत नहीं ली थी। हम उन्हें मजाहिरा और तकरीरे करने से रोक सकते थे। लेकिन इस ख्याल से कोई कार्रवाई नहीं की कि दूर-दूर से चलकर तकरीबन दस हजार लोग आए हैं उन्हें परेशान न किया जाए। वी के सिंह जब इस किस्म की बात कर रहे थे उस वक्त लाखों की भीड़ का खौफ उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। हालांकि वह दावा यही कर रहे थे कि इतनी भीड़ से निपटने के लिए उनके पास माकूल तादाद में फोर्स मौजूद है। उन्हें अपनी पुलिस फोर्स इस्तेमाल करने की जरूरत इसलिए नहीं पड़ी कि इतनी बड़ी भीड़ के वावजूद किसी भी दलित ने भगवा ब्रिगेड जैसी हरकतें नहीं की वह पुरअम्न (शांतिपूर्वक) तरीके से आए मजाहिरा किया खामोशी से वापस चले गए। टेªनों, बसों में भी इन लोगों ने कोई हंगामा नहीं किया। डीसीपी  वीके सिंह अच्छी तरह जानते थे वह जो कुछ कह रहे हैं वह सिर्फ बनावटी बाते  हैं। अगर उनका बस चलता तो वह चैबीस रिपोर्टों में नामजद चन्द्रशेखर को जंतर मंतर पर बगैर इजाजत के जलसा तो किसी कीमत पर न करने देते। बाद में शाम को भीम आर्मी के एक ओहदेदार ने बताया कि मजाहिरा खत्म होने के बाद चन्द्रशेखर सरेण्डर करने के लिए दिल्ली की एक अदालत मंे गए थे लेकिन अदालत ने कहा कि वह सहारनपुर की अदालत में ही सरेण्डर करें।

इस मौके पर दलितों की भीड़ को खिताब करते हुए गुजरात के दलित लीडर जिगनेश मेवाणी ने कहा कि देश में कई सियासतदां खुद को अम्बेडकर भक्त बताते फिरते हैं लेकिन पूरे मुल्क में दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों पर मुसलसल हमले किए जा रहे हैं और वह लोग खामोश तमाशाई बने हुए हैं। क्या यही ‘सबका साथ सबका विकास’ है? इस एहतेजाजी जलसे का इंतेजाम करने वाले दलित तंजीमों (संगठनों) के नेशनल कनवीनर विनय रत्न सिंह ने कहा कि इस मजाहिरे का किसी भी सियासी पार्टी से कुछ लेना देना नहीं है। उन्होने कहा कि हम दलितों की तालीम और दीगर तमाम मसायल हल करने के लिए निकले  हैं। इस मकसद के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेगे और सड़क से पार्लियामंेट तक हर जगह अपनी आवाज बुलंद करेगे। इस भीड़ में ख्वातीन (महिलाआंें) की तादाद कम देखकर सहारनपुर से आई सरोज और उषा कुसुम ने कहा कि आइंदा के प्रोग्रामों में यह कमी भी नहीं रहने दी जाएगी।

 

 

 

HIndi Latest