कश्मीर मंे बाई एलक्शन मंे दर्ज हुआ सबसे कम पोलिंग का रिकार्ड – श्रीनगर में सिर्फ सात फीसद वोटिंग

कश्मीर मंे बाई एलक्शन मंे दर्ज हुआ सबसे कम पोलिंग का रिकार्ड – श्रीनगर में सिर्फ सात फीसद वोटिंग

श्रीनगर! 9 अप्रैल को श्रीनगर लोक सभा हलके के बाई एलक्शन के दौरान जबरदस्त तशद्दुद (हिंसा) मंे दस लोगों के मारे जाने और दो सौ के करीब शहरियों और एक सौ के करीब सिक्योरिटी जवानों के जख्मी होने के बावजूद सिर्फ सात फीसद पोलिंग से खौफजदा एलक्शन कमीशन ने अनन्तनाग लोक सभा हलके में 12 अप्रैल को होने वाले बाई एलक्शन की पोलिंग 25 मई तक टाल दी। इसका एलान करते हुए दस अप्रैल को एलक्शन कमीशन ने कहा कि सिक्योरिटी का माकूल बंदोबस्त करने केे बाद अब अनन्तनाग हलके की पोलिंग 25 मई को कराई जाएगी।

श्रीनगर हलके में 9 अप्रैल को सिर्फ 7.14 फीसद पोलिंग का सबसे निचले दर्जे का रिकार्ड कायम हुआ है इससे पहले 1991 में तकरीबन 12 फीसद पोलिंग हुई थी। इस हलके मंे सबसे ज्यादा पांेलिंग का रिकार्ड 1984 मंे कायम हुआ। उस वक्त 74 फीसद पोलिंग हुई थी। इस हलके से इस बार नेशनल कांफ्रेंस के चेयरमैन डाक्टर फारूक अब्दुल्लाह भी मैदान में हैं जबकि महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा से खाली हुई अनन्तनाग लोक सभा सीट पर महबूबा के भाई मुफ्ती तसद्दुक अहमद अपने सियासी कैरियर का पहला एलक्शन लड़ रहे हैं। श्रीनगर लोक सभा हलके में पोलिंग के दौरान तशद्दुद के वाक्यात पेश आने के बाद जिन बूथों पर वोटिंग के अमल में  रूकावट पड़ी थी उनमेसे 38 पोलिंग स्टेशनों पर दोबार पोलिंग कराने का एलक्शन कमीशन ने फैसला किया था। तेरह अप्रैल को पड़े वोटों का फीसद नौ अप्रैल के पोलिंग फीसद से नीचे चला गया।

श्रीनगर के बाई एलक्शन के वोटिंग फीसद ने यह जाहिर कर दिया है कि जो कश्मीरी अवाम अलगावपसंदों और शिद्दतपसंदों को ठेंगा दिखाते हुए चुनावी अमल में बढ-चढ कर हिस्सा लेने को तरजीह देने लगे थे महज ढाई-तीन साल में वादी के हालात इतने ज्यादा खराब हो गए कि लोगों ने वोट देने के बजाए घरों में ही रहना बेहतर समझा। जम्मू-कश्मीर के ताल्लुक से अवाम का यह रूझान तशवीश में डालने वाला है। क्योंकि 2014 में भी कश्मीर के हालात बहुत बेहतर नहीं थे, अलगाव पसंद हुर्रियत लीडरों ने उस वक्त भी एलक्शन के बायकाट का नारा दिया था मगर कश्मीरी अवाम ने बायकाट की अपील को मुस्तरद करते हुए पिछले तीन लोक सभा एलक्शन के मुकाबले वोटिंग में गर्मजोशी का मुजाहिरा किया था और छब्बीस फीसद पोलिंग दर्ज की गई थी। वोटिंग का यह फीसद 1999 के बारह फीसद, 2004 के उन्नीस फीसद और 2009 के साढे पच्चीस फीसद से भी ज्यादा हुआ था और अलगाव पसंदों को यह पैगाम गया था कि कश्मीरी अवाम मेनस्ट्रीम की सियासत में सरगर्म तौरपर शरीक होेने का जेहन बना चुके हैं। पिछले साल जुलाई से वादी के हालात बिगड़ने की शुरूआत हुई। नौजवान पत्थरबाजी करते हुए सड़कों पर उतरने लगे और यह सिलसिला कई महीनों तक जारी रहा। सलामती दस्तो ने पत्थराव करने वाले कश्मीरी नौजवानों को मुंतशिर करने के लिए पीलेट गन का बेतहाशा इस्तेमाल किया जिसमें सैकड़ों की तादाद में कश्मीरियों को अपनी बीनाई से हाथ तक धोना पड़ गया। मरकज की नरेन्द्र मोदी और जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार हालात पर काबू पाने में नाकाम रही। अलगाव पसंद जो धीरे-धीरे वादी में हाशिए पर पहुच चुके थे नए जोश से मैदान मेें कूद पड़े और नौजवानों को अपनी तरफ रागिब करने में कामयाब  भी हो गए। एलक्शन के बायकाट की अपीलें पहले भी होती थीं बाई एलक्शन के लिए भी की गई थीं मगर जितना असर इस बार बायकाट की अपील का हुआ इससे पहले कभी भी नहीं देखा गया और जिस बड़े पैमाने पर पोलिंग के दिन तशद्दुद के वाक्यात हुए वह साफ इशारा कर रहे हैं कि एलक्शन में हिस्सा लेने वाली सियासी पार्टियों ने भी कश्मीरी अवाम में अपना भरोसा खो दिया है।

श्रीनगर लोक सभा हलके में हुए बाई एलक्शन की पोलिंग के दौरान बड़े पैमाने पर तशद्दुद के वाक्यात पेश आने के नतीजे मंे दस लोग हलाक हो गए। यह हलाकतें तशद्दुद पर आमादा भीड़ को मुंतशिर करने के लिए पुलिस फायरिंग के सबब हुईं। श्रीनगर, गांदरबल और बडगाम जिलों पर मुश्तमिल इस लोक सभा सीट पर सबसे ज्यादा तशद्दुद के वाक्यात बडगाम जिले में पेश आए। बडगाम जिले में पोलिंग के आगाज के साथ ही एहतेजाजी मुजाहिरीन ने कम से कम एक दर्जन मकामात पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। सिक्योरिटी फोर्सेज के जरिए ताकत का इस्तेमाल करने के बाद झड़पों का सिलसिला मजीद इलाकों में फैल गया और आम शहरियों के हलाक या जख्मी होने की तादाद हर गुजरते घंटे के साथ बढती गई। बडगाम जिले में दो नौजवानों के हलाक होनेे का पहला वाक्या दिलवान पुरा चरार शरीफ में उस वक्त पेश आया जब सिक्योरिटी फोर्सेज ने पोलिंग स्टेशन की सिक्योरिटी के लिए तैनात सलामती दस्तों पर हमला कर दिया तो सिक्योरिटी फोर्सेज की जानिब से रद्देअमल मंे पहले आंसू गैस के गोले दागे फिर मुबैयना तौर पर सीधे फायरिंग की। इस फायरिंग में 15 साल के फैजान अहमद और बीस साल के मोहम्मद अब्बास हलाक हो गए। हलाकत का दूसरा वाक्या रठसन बेरवा मंे पेश आया जहां सिक्योरिटी फोर्सेज की कार्रवाई में निसार अहमद नाम का एक नौजवान मारा गया। हलाकत का तीसरा वाक्या जिले के दौलत पुरा चाडोरा में  पेश आया जहां सिक्योरिटी फोर्सेज की गोली का निशाना बना चैबीस साल का नौजवान शब्बीर अहमद। जिले के कादोसानारबल में आदिल फारूक नाम के नौजवान सिक्योरिटी फोर्सेज की कार्रवाई में पीलेट लगने से हलाक हो गया। बडगाम जिले में हलाकत का पांचवां वाक्या जरमजरू खानसाहब में पेश आया जहां आकिब अहमद उर्फ अकील अहमद नाम के नौजवान की सिक्योरिटी फोर्सेेज की गोली ने जान ले ली। बडगाम जिले के दीगर कई इलाकों मंे तशद्दुद, झड़पों के वाक्यात पेश आए। कहा जाता है कि बडगाम जिले में रिवायती तौर पर ज्यादा पोलिंग दर्ज की जाती थी मगर इस बार तशद्दुद के सबसे ज्यादा वाक्यात पेश आए। यह सूरतेहाल न सिर्फ पुलिस और जिला इंतजामिया के लिए परेशानी का बाइस बनी बल्कि सियासी पार्टियों के लिए तशवीश पैदा करने वाली साबित हुई है। क्योंकि पिछले असम्बली एलक्शन के दौरान जिले में पोलिंग का फीसद 59.11 रहा था। गांदरबल में एहतेजाजी मुजाहिरीन ने एक पोलिंग बूथ पर पेट्रोल बम फंेक कर आग लगा दी। श्रीनगर लोक सभा हलके मंे बाई एलक्शन पीडीपी लोक सभा मेम्बर तारिक हमीद बर्रा के पार्टी छोड़ने और लोक सभा की रूक्नियत से इस्तीफा देने के सबब खाली हुई थी। बाई एलक्शन में नेशनल कांफ्रेंस के चेयरमैन फारूक अब्दुल्लाह एनसी और कांगे्रस के मुश्तरका उम्मीदवार के तौरपर मैदान में उतरे थे उनको पिछले लोक सभा एलक्शन में पीडीपी के तारिक हमीद बर्रा  ने बयालीस हजार वोटों से शिकस्त दी थी। श्रीनगर को आम तौर पर नेशनल कांफ्रेंस के गढ के तौर पर तसव्वुर किया जाता है मगर पिछले लोक सभा और असम्बली एलक्शन में पीडीपी नेशनल कांफ्रेंस पर भारी पड़ी थी। शायद इसी वजह से फारूक अब्दुल्लाह अकेले अपनी पार्टी के दम पर एलक्शन मैदान  मंे उतरने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे जब कांगे्रस ने अपना उम्मीदवार न उतारने और फारूक अब्दुल्लाह की हिमायत करने का फैसला किया तभी वह बाई एलक्शन में मुकाबला करने को तैयार हुए।

श्रीनगर लोक सभा हलके के बाई एलक्शन में अब तक की सबसे कम पोलिंग के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि महज सात फीसद पोलिंग से हलके के अवाम की नुमाइंदगी नहीं हो रही है तो ऐसे मंे एलक्शन  को रद्द कर दिया जाना चाहिए। यह मामला एलक्शन कमीशन के जेरे गौर है लेकिन खबर लिखे जाने तक इस ताल्लुक से कोई फैसला नहीं आया था। इंतेहाई कम पोलिंग की एक वजह यह बताई जा रही है कि सिक्योरिटी फोर्सेज का इस्तेमाल जिस  तादाद में किया जाना चाहिए था वह नहीं किया गया और अलगाव पसंद और एलक्शन मुखालिफ ताकतों ने फायदा उठाया। पोलिंग के दिन आम तौर पर पोलिंग बूथों पर वोटरों की कतारें नजर आई थीं लेकिन 9 अप्रैल को हुई पोलिंग का मंजर ही कुछ दूसरा था। पोलिंग बूथांे पर आम तौर पर सन्नाटा छाया रहा। बीमना सरकारी हाई सेकण्ड्री स्कूल के पोलिंग बूथ पर जहां एक हजार पांच सौ इक्तालीस वोटरों को अपना वोट का इस्तेमाल करना था वहां पहले तीन घंटों में महज पांच लोगों ने अपने वोट डाले। बडगाम, गांदरबल और श्रीनगर में एक सौ से ज्यादा पोलिंग स्टेशनों  पर हमले किए गए। एक वोटर ने कहा कि पत्थरबाजी करने वालों में ज्यादातर नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के हामी थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस जराए के हवाले से कहा गया कि एलक्शन के अमल में रूकावट डालने के लिए पिछले एक साल से कोशिशें जारी हैं। यह कोशिशंे हैं भीड़ के हमले और तशद्दुद का बार-बार पेश आना। जराए के मुताबिक पिछले एक साल में सिक्योरिटी फोर्सेज ने महज उनतीस लोगों को हिरासत में लिया। एक पुलिस जराए ने यह भी कहा कि पिछले साल जिन सैकड़ों पत्थरबाजों को पकड़ा गया था उन्हें मंुंहभराई की सियासत के तहत रिहा कर दिया गया। इस रिहाई में नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी दोनो की मुकाबला आराई ने अहम रोल अदा किया।

श्रीनगर लोक सभा हलके के बाई एलक्शन में हुए तशद्दुद और कम पोलिंग पर अपना रद्देअमल जाहिर करते हुए साबिक मरकजी वजीर और रियासत के साबिक वजीर-ए-आला और मौजूद वक्त में राज्य सभा में लीडर आफ अपोजीशन गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी की कयादत वाली मरकजी सरकार की गलत पालीसियोें के नतीजे में मुल्क तबाह व बर्बाद तो हुआ कश्मीर भी अब खत्म हो गया। उन्होने  कहा कि पोलिंग के अमल के दौरान इंसानी जानों का नुक्सान अफसोसनाक है इस तरह के वाक्यात से दिलों को जबरदस्त चोट पहुची है लिहाजा सिक्योरिटी फोर्सेज को एहतेजाजियों से निपटने के दौैरान सब्र व तहम्मुल का मुजाहिरा करना चाहिए। दूसरी तरफ तशद्दुद के वाक्यात में लोगों की जानंे जाने के बाद अलगाव पसंदो ने दो दिन की हड़ताल का एलान कर दिया। हुर्रियत कांफ्रेंस के सैयद अली शाह गीलानी, मीर वाइज मोहम्मद फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक ने मुश्तरका बयान में वाजेह कहा कि कश्मीरी कौम और कयादत जम्हूरी अमल या जम्हूरियत के खिलाफ नहीं है लेकिन जिस अमल से दुनिया को भारत गुमराह करता रहा हैै। उसी आजमाए हुए तखरीबी अमल को नाकाम बनाने और एक बार फिर बेनकाब करने के लिए नाम निहाद एलक्शन का बायकाट किया गया है। बयान में यह भी कहा गया कि जम्हूरी हुकूक में लोगों को यह हक भी हासिल है कि वह एलक्शन का बायकाट करके अपना एहतेजाज पुरअम्न तौर पर और जम्हूरी अंदाज में दर्ज कराएं।

तीन जिलों और पन्द्रह असम्बली हलकों पर मुहीत श्रीनगर लोक सभा सीट में बारह लाख से ज्यादा वोटर हैं जिनमें से महज सात फीसद ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। रियासती चीफ एलेक्ट्रोरल आफीसर शांत मनू नेे श्रीनगर लोक सभा हलके में बहुत कम पोलिंग का एतराफ किया और कहा कि सारे दिन पुरतशद्दुद वाक्यात के पेश आने के नतीजे मंे पोलिंग का अमल मुतास्सिर हुआ।

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