मुसलमानों में वंदेमात्रम का खौफ

मुसलमानों में वंदेमात्रम का खौफ

”1905 मंे अंगे्रजों ने साजिश करके बंगाल को ईस्ट और वेस्ट दो हिस्सों में तोड़ा तो पूरा बंगाल अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया था। लोगों का जोश बढाने के लिए वहां के हिन्दू-मुस्लिम सब बकिंम चन्द्र चटर्जी की किताब ‘आनन्द मठ’ से लिया गया नगमा वंदेमात्रम गाते थे। आरएसएस वजूद मंे नहीं था हिन्दू महासभा के लोगों ने वंदेमात्रम की मुखालिफत की थी। अब उन्हीं की नस्लें इसे मुसलमानों पर थोप रहीं हैं।“

 

”मुस्लिम मजहबी रहनुमा वंदेमात्रम को भारत माता की पूजा और वंदना करना बताते हैं हकीकत ऐसी नहीं है। ए आर रहमान ने वंदेमात्रम का तर्जुमा ‘मां तुझे सलाम’ कम्पोज करके मसला हल करने की कोशिश की, कट्टर हिन्दुत्ववादी ताकतें जब यह नारा लगाती हैं कि ‘हिन्दुस्तान में रहना है तो वंदेमात्रम कहना है’ तो इस नारे से चिढ कर मुसलमान भी इसकी मुखालिफत करने लगते हैं।“

 

”वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी ने वंदेमात्रम न गाने वालों को तंगजेहनी का शिकार करार देकर उन लोगों को ताकत दे दी जो वंदेमात्रम के बहाने मुस्लिम मुखालिफ नारेबाजी करते फिरते हैं। मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर, बनारस और इलाहाबाद के बीजेपी मेयर पौने पांच साल खामोश रहे योगी सरकार बनते ही कहने लगे कि जो कारपोरेटर वंदेमात्रम गाने में शामिल नहीं होगे उन्हें एवान (सदन) की कार्रवाई में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।“

 

 

 

लखनऊ! ‘अगर भारत में रहना है तो वंदेमात्रम कहना है’ पूर्वी उत्तर प्रदेश में सालों से यह नारा लगाने वाली हिन्दू युवा वाहिनी के सर्वे सर्वा आदित्यनाथ योगी प्रदेश के वजीर-ए-आला बन गए तो कई शहरों में उस नारे के जरिए मुसलमानों को बाकायदा खौफजदा किया जाने लगा है। मेरठ नगर निगम मंे सबसे पहले यह मसला उठा तो मेरठ के बाद इलाहाबाद, मुरादाबाद, बनारस और गोरखपुर समेत कई शहरों मंे म्यूनिस्पिल कारपोरेशन के मेयरों ने रिज्योलूशन पास करा दिया कि एवान (सदन) की कार्रवाई शुरू होने के वक्त वंदेमात्रम गाया जाएगा और हर मेम्बर के लिए यह गाना लाजिमी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कह रखा है कि वंदेेमात्रम गाना जरूरी नहीं है जिसका दिल चाहे उसे गाए और जिसका दिल न चाहे वह न गाए। सुप्रीम कोर्ट के इस आर्डर के बावजूद उत्तर प्रदेश के गवर्नर राम नाईक ने नौ अप्रैल को महमूदाबाद में कहा कि वंदेमात्रम गाना कौमी फरीजा (राष्ट्रधर्म) है जिस पर अमल करना मुल्क के हर शहरी के लिए जरूरी है। इससे एक दिन पहले राजभवन में एक किताब का इजरा (विमाचन) करते हुए वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी ने साफ कह दिया था कि वंदेमात्रम न गाना तंगनजरी (संकीर्णता) की अलामत है। उन्होंने कहा कि हम इक्कीसवीं सदी की जानिब बढ रहे हैं लेकिन अभी तक इसी झगडे़ (विवाद) मेें उलझे हैं कि वंदेमात्रम गाएंगे कि नहीं। उन्होेने कहा कि अगर हमें तरक्की के रास्ते पर आगे बढना है तो इस तंगनजरी और तंगजेहनी से उबरना होगा। गवर्नर की तरह वजीर-ए-आला का  भी इनडायरेक्ट तरीके से फरमान यही है कि ‘अगर उत्तर प्रदेश में रहना है तो वंदेमात्रम कहना है।’

उत्तर प्रदेश के देखकर उत्तराखण्ड की बीजेपी सरकार के वजीर तालीम धनसिंह रावत ने साफ कह दिया कि जिसे उत्तराखण्ड में रहना है उसे वंदेमात्रम कहना होगा जो वंदेमात्रम न कहे वह उत्तराखण्ड छोड़कर जा सकता है। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड हुकूमत जल्द ही कालेजो, युनिवर्सिटियों और स्कूलों के लिए वक्त मुकर्रर  करेगी कि वहां किस वक्त वंदेमात्रम गाया जाना है। यह सरकारी फैसला सरकारी , प्राइवेट, मिशनरीज और एनजीओज सभी के जरिए चलाए जाने वाले तालीमी इदारों के लिए लाजिमी होगा।

उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे मुल्क के मुसलमानों को वंदेमात्रम गाने पर एतराज रहा है। मुसलमानों का कहना है कि वंदेमात्रम का मतलब भारत माता की ‘वंदना’ यानि पूजा करने का है। जबकि इस्लाम के मानने वाले अल्लाह के अलावा किसी और की न तो इबादत कर सकते हैं न ही किसी के सामने सर झुका सकते हैं। इसलिए हम वंदेमात्रम नहीं कह सकते। हालांकि कई मुसलमानों का यह भी कहना है कि वंदेमात्रम का मतलब भारत माता की वंदना, पूजा या इबादत करना नहीं है इसका मतलब है ‘मां तुझे सलाम’। मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर अल्लाह रखा रहमान ने हाथ मंे तिरंगा लेकर ‘मां तुझे सलाम’ नाम से गाना कम्पोज करके इस मसले को हल करने की एक बड़ी कोशिश कई साल पहले की थी लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। क्योंकि मुस्लिम मजहबी रहनुमाआंें (धर्मगुरूओं) का कहना है कि वंदेमात्रम सिर्फ और सिर्फ भारत माता की वंदना, पूजा और इबादत करने के लिए लिखा गया है। दूसरे हिन्दुस्तान की तारीख (इतिहास) में मुसलमानों और इस्लाम के खिलाफ बताई जाने वाली सबसे ज्यादा सतही किताब ‘आनन्द मठ’ से लिया गया है इसलिए हम इसे गाने के लिए तैयार नहीं हैं।

मुस्लिम रहनुमाआंे का यह भी कहना है कि 1882 में फकीर सन्यासी आंदोलन के वक्त उसकी हिमायत मंे बकिंमचन्द्र चटर्जी ने ‘आनन्द मठ’ नाम की किताब लिखी थी उस वक्त यह कहा गया था कि यह किताब अंग्रेज मुखालिफ आंदोलन की हिमायत में लिखी गई थी। उसी में वंदेमात्रम नाम का नगमा था। 1905 में अंग्र्रेजों ने साजिश करके बंगाल को दो हिस्सों (ईस्ट और वेस्ट) में तकसीम किया तो पूरा बंगाल इस तकसीम के खिलाफ खड़ा हो गया। हर कोई वंदेमात्रम गाकर ही अंग्रेजों की मुखालिफत करता था। मुखालिफत करने वालों में हिन्दू, मुस्लिम सभी शामिल रहते थे। उस वक्त तक आरएसएस पैदा नहीं हुआ था हिन्दू महासभा थी, हिन्दू महासभा ने न सिर्फ वंदेमात्रम की जबरदस्त मुखालिफत की थी बल्कि उसकी चिढ में अंगे्रजों का साथ दिया था। अब उसी हिन्दू महासभा और इस आंदोलन के तकरीबन बीस साल बाद वजूद में आए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मौजूदा नस्लें वंदेमात्रम जबरदस्ती गवाने के लिए मुसलमानों पर दबाव डाल रही हैं। दबाव भी इस हद तक कि मुसलमान खौफजदा हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के नगर निगमांें का एलक्शन जून-जुलाई 2012 में हुआ था बेश्तर (अधिकांश) नगर निगमों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है उसीके मेयर हैं। नगर निगमों के एलक्शन मंे बमुश्किल तीन महीने का वक्त बचा है। अब चूंकि प्रदेश में आदित्यनाथ योगी की सरकार आ गई, इसलिए अचानक वंदेमात्रम का झगड़ा मेरठ नगर निगम से शुरू कर दिया गया। पौने पंाच साल तक प्रदेश के तमाम नगर निगमों मंे वंदेमात्रम गाया जाता था तो वंदेमात्रम शुरू होने से पहले मुसलमान कारपोरेटर एवान से बाहर चले जाते थे और खत्म होने के बाद वापस आते थे। कभी किसी को इसपर एतराज नहीं होता था। अब एलक्शन नजदीक देखकर 29 मार्च को मेरठ के मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने फरमान जारी कर दिया कि वंदेमात्रम के वक्त जो कारपोरेटर एवान से बाहर जाएंगे उन्हें वापस नहीं आने दिया जाएगा और एवान में वंदेमात्रम गाना लाजिमी होगा। मेरठ के मुस्लिम कारपोरेटरों ने मेयर के हुक्म पर टकराव से बचने का बेहतरीन तरीका निकाल लिया। कारपोरेटर शाहिद अब्बासी, आदिल अहमद और आरिफ अंसारी कार्रवाई शुरू होने के वक्त आए ही नहीं जब वंदेमात्रम खत्म हो गया उसके बाद हाल में दाखिल हुए।

मेरठ के मुस्लिम कारपोरेटरों के इस फैसले से बीजेपी के कट्टरपंथियांे ने झगड़ा बढाने के लिए इलाहाबाद से एक नया काम शुरू करने की ठानी, अभी तक प्रदेश असम्बली और नगर निगमों की कार्रवाई की शुरूआत वंदेमात्रम से और एख्तेताम कौमी तराना यानि ‘जनगण मन’ से होने का रिवाज है। मेरठ  के मुस्लिम कारपोरेटर नगर निगम की कार्रवाई शुरू होते वक्त वंदेमात्रम खत्म होने के बाद एवान में आए तो इलाहाबाद के नगर निगम  के बीजेपी कारपोरेटर गिरीशंकर प्रभाकर ‘बाबा’ ने सिर्फ नया झगड़ा पैदा करने के लिए एवान में एक तजवीज पेश कर दी कि अब एवान की कार्रवाई की शुरूआत कौमी तराने (राष्ट्र गान) और एख्तेताम (समापन) वंदेमात्रम से होगा। उनकी मंशा यह थी कि जब वंदेमात्रम बाद में होगा तो दिन भर वंदेमात्रम की मुखालिफत करने वाले एवान में आने नहीं पाएंगे। उनकी इस तजवीज पर समाजवादी पार्टी समेत सभी अपोजीशन पार्टियों के मेम्बरान ने सख्त एतराज किया दोनों के दरम्यान जम कर नोक झोंक हुई तो मौके की नजाकत देखकर मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने पूरे मामले मेें दखल देते हुए कहा कि एवान में कोई  नया रिवाज कायम नहीं होेने दिया जाएगा। एवान की कार्रवाई पहले की तरह ही वंदेमात्रम से शुरू होकर कौमी तराने पर खत्म होगी।

मेरठ, इलाहाबाद के बाद मुरादाबाद, बनारस और वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी के अपने शहर गोरखपुर के बीजेपी मेयरों ने भी वंदेमात्रम पर सख्ती शुरू कर दी। बनारस में भी बीजेपी के कारपोरेटर अजय गुप्ता और मेयर राम गोयल मोहले ने कहा कि वंदेमात्रम न गाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो लोग वंदेमात्रम गाए जाने के वक्त एवान में नहीं होंगे उन्हें दिन भर की कार्रवाई में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। गोरखपुर के मेयर सत्या पाण्डेय ने भी एलान कर दिया कि अब एवान की कार्रवाई का एख्तेताम (समापन) वंदेमात्रम से होगा। जाहिर है यह सारे फैसले महज झगड़ा पैदा करके हिन्दू वोटरों को पोलराइज करने की नीयत से किए गए हैं ताकि जुलाई में होने वाले नगर निगम एलक्शन में 2014 के लोक सभा और इस साल के असम्बली इंतखाबात की तरह हिन्दू वोटरों को पोलराइज करके नगर निगम एलक्शन जीते जा सकें।

वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी के वंदेमात्रम पर आए बयान के बाद हिन्दुत्ववादी ताकतों के हौसले काफी बुलंद हैं कई जगह यह नारे सुने जा सकते हैं कि अगर ‘हिन्दुस्तान में रहना है तो वंदेमात्रम कहना है।’ नारेबाजी सिर्फ की ही नहीं जा रही है उसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा मुसलमानों को खौफजदा किया जा सके।

फोटो आदित्यनाथ योगी- मुसलमानों से वंदेमात्रम कहलाने की बेचैनी और वंदेमात्रम के नारे लगाती भीड़

 

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