कुछ अनमोल बातें

कुछ अनमोल बातें

मौलाना आयज अल कर्नी

हजरत मआज (रजि0) से रिवायत है कि वह फरमाते हैं कि नबी करीम (सल0) ने उनका हाथ पकड़ कर कहा-‘ऐ मआज! बेशक मैं तुम से मोहब्बत करता हूं (सुनो) मैं तुम्हंे वसीयत करता हूं ऐ मआज! हर फर्ज नमाज के बाद यह दुआ मांगना न भूलना-ऐ अल्लाह! मेरी मदद फरमा कि मैं तेरा जिक्र करूं, तेरा शुक्र अदा करूं और तेरी इबादत करूं। इस दुआ मंे नबी करीम (सल0) ने तीन बातों की तालीम दी है जिक्रे इलाही, शुक्रे इलाही और हुस्ने इबादत।

दुनिया मंे खाली बैठनेवाले वह होते हैंजो अफवाहबाज हों क्योंकि उनके जेहन व दिमाग बंटे होते है। ‘वह राजी हो गए कि पीछे रह जाने वालों में हूं।’ (अल तौबा-87)  आदमी का बेकार बैठना निहायत खतरनाक है। उसका जेहन शैतान का ठिकाना बन जाएगा। जब आप काम से खाली बैठें तो गम व फिक्र और उलझनें आकर रहेंगी। माजी हाल और मुस्तकबिल की फाइलें खुल जाएंगी और आप मुश्किल में पड़ जाएंगे। मेेरी आप सबको यह नसीहत हेै कि बेकारी के बजाए कुछ अच्छे काम शुरू कर दे। बेकार रहना अपने को जिंदा दफन करना है। सुकून का कैप्सूल खाकर खुद कुशी करना है। बेकारी की मिसाल तो उस सलोटार्चर की है जो चीन के कैदखानों में होता था कि कैदी को उस नाली के नीचे कर देते थे जिससे हर मिनटपर एक कतरा गिरता है। उन कतरों के इंतजार में कैदी पागल हो जाता था।

आराम तलबी गफलत का नाम है फुर्सत एक पेशावर चोर है। इस हालत में आपकी अक्ल जंगों की शिकार हो जाएगी लिहाजा जब खाली हों तो नमाज पढने खड़े हो जाएं, तिलावत करें मुताला करें लिखें या तैराकी करें या आफिस को दुरूस्त करेें घर की सफाई करें और दूसरों का कोई काम कर दें। काम के चाकू से फुर्सत को काट दें दुनिया के तबीब और डाक्टर इस के बदले पचास फीसद खुशी की गारंटी देते हैं। किसानों, मजदूरों और कामगारों को देखें कि वह किस तरह चिड़ियों की तरह मस्ती से गाते और खुश रहते हैं जबकि आप बिस्तर पर पड़े आंसू पोंछते रहते हैं क्योंकि बेकारी ने आप को डस लिया है। दूसरों की नकल न कीजिए अपनी शख्सियत को कम न कीजिए बहुत से लोग मुस्तकिल अजाब का शिकार रहते हैं क्योंकि वह चाहते हैं कि अपने कामों, आवाज और कलाम  हर चीज में दूसरों की ऐसी नकल करें कि उन्हीं जैसे होकर रह जाएं। उनकी अपनी पहचान खत्म हो जाए। तकल्लुफ, तकब्बुर, जलन वगैरह उनके रोग हो जाते हैं। हजरत आदम (अलै0) से लेकर आज तक इस बात मे कोई इख्तिलाफ नहीं कि शक्ल व सूरत में दो आदमी बराबर नहीं होते तब वह अपने अखलाक और सलाहियतों में कैसे यकसां हो सकते हैं। आप अपनी जगह बिल्कुल अलग हैं तारीख में आप का कोई मिस्ल नहीं, न दुनिया में आपका कोई हम शक्ल आप जैद, उमर वगैरह से बिल्कुल अलग हैं लिहाजा दूसरों की तकलीद व नकल की कोशिश क्यों करें। अपनी पहचान व किरदार के मुताबिक चलिए। हर एक का अपना किब्ला है जिसकी तरफ वह रूख करता है। तब जैसे आप हैं वैसे ही रहेंगे। आप को अपनी आवाज, लेहजा और चाल ढाल में तब्दीली की जरूरत नहीं है। वहि की रौशनी में चलें लेकिन अपने वजूद की नफी न करें। आप का अपना मजा और अपना रंग है। हम आप को उसी रंग ढंग में देखना चाहते हैं क्योंकि यह आप के लिए फितरी है उसी पर हम आप को जानते हैं लिहाजा आप नकल करने वाला न बनंे।

इंसानों की तबीयत नबातात जैसी है। खट्टी भी है और मीठी भी है। लम्बी और पस्त कद भी। ऐसे ही उन्हें रहना भी चाहिए तू जो केला है नाशपाती क्यांे बने उसका जमाल और कीमत तो अकेलेपन में है। हमारी जबानों, रंगों, सलाहियतों और ताकतों का इख्तिलाफ अल्लाह तआला की निशानियों में से है हमें उसकी निशानियों का इंकार न करना चाहिए।

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