एबीवीपी की फिरकापरस्ती की भेंट चढ गई एक अच्छी कोशिश

एबीवीपी की फिरकापरस्ती की भेंट चढ गई एक अच्छी कोशिश

”गवर्नर एनएन वोरा ने कश्मीर वादी और जम्मू रीजन के नौजवान तलबा के दरम्यान मेल जोल बढाने की गरज से कश्मीर वादी और जम्मू रीजन के दरम्यान इण्टर युनिवर्सिटी खेल मुकाबले शुरू कराने का मश्विरा दिया था जो नहीं होने दिए गए।“

 

जम्मू! कश्मीर वादी और जम्मू रीजन के नौजवानांे व तलबा (विद्यार्थियों) के मिलने जुलने, एक दूसरे को समझने और दोनों इलाकों की नौजवान नस्ल में प्यार मोहब्बत व भाईचारा बढाने के मकसद से गवर्नर एनएन वोरा ने कश्मीर वादी और जम्मू रीजन के दरम्यान इण्टर युनिवर्सिटी खेल मुकाबलों का जो सिलसिला शुरू कराया था वह भी बीजेपी की तलबा शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नफरत का शिकार हो गया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सैकड़ों लोग सात अप्रैल को अचानक स्टेडियम में दाखिल हो गए और यह इल्जाम लगाते हुए इण्टर युनिवर्सिटी खेलों को रूकवा दिया कि कश्मीर वादी से आए हुए  कुछ लड़कों ने कौमी तराना (राष्ट्रगान) नहीं गाया। जब कौमी तराना हो रहा था तो दो लड़के आपस में बाते कर रहे थे। इस तरह वादी वालों ने कौमी तराने की तौहीन की है। हम ऐसे लोगों के साथ जम्मू में कोई खेल नहीं होने देगे।

जम्मू युनिवर्सिटी के डायरेक्टर आफ स्पोर्ट्स अवतार सिंह जसरोटिया ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तलबा को समझाते हुए कहा कि वह कौमी तराने के नाम पर सियासत करके इंटर युनिवर्सिटी खेल मुकाबलों में रूकावट पैदा न करें। वादी की युनिवर्सिटी के खेल से मुताल्लिक अफसरान और तलबा दोनों ने कहा कि कौमी तराने की तौहीन करने का कोई सवाल नहीं है। उनमे से किसी ने भी यह गलती नहीं की है। अवतार सिंह जसरोटिया ने हंगामा कर रहे विद्यार्थी परिषद के लोगों से पूछा कि जब उनमें से कोई भी खेल शुरू होने के वक्त अंदर मौके पर मौजूद ही नहीं था तो उन्हें कैसे पता चल गया कि कौमी तराना गाए जाने के वक्त वादी के दो लड़के आपस में बातें कर रहे थे। हंगामा करने वालों का कहना था कि वह मौके पर हों या न हों उन्हें अंदर बाहर की तमाम खबरें रहती हैं। दो लड़कों के आपस में बातें करते हुए फोटो उनके पास है। प्रोफेसर जसरोटिया ने विद्यार्थी परिषद के रजाकारों से यहां तक कहा कि वादी के यह नौजवान तलबा कौमी तराने का पूरा एहतराम करते हैं अगर आप लोग इन्हें खेलने नहीं देंगे तो फिर वादी के बाकी नौजवानों से आप क्या तवक्को रखेंगे?

वादी से जम्मू आए युनिवर्सिटी के तलबा ने सात अप्रैल को फुटबाल मैच के दरम्यान खेल रोक कर कौमी तराना गाया क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यही चाहती थी। इसके बावजूद विद्यार्थी परिषद के नाम पर गुण्डई करने वालों ने खेल मुकाबले होने नहीं दिए और इन मुकाबलों को दरम्यान में रोक कर वादी कश्मीर युनिवर्सिटी के तलबा को वापस जाना पड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की इस हरकत पर जम्मू एडमिनिस्टेªशन ने कोई कार्रवाई नहीं की। वजह यह है कि जम्मू रीजन में महबूबा मुफ्ती के बजाए बीजेपी लीडर और प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डाक्टर निर्मल के इशारों पर सरकार चलती है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भीड़ में खड़े वादी के दो लड़कों को आपस में बात करते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल करके दावा किया कि तीन अप्रैल को जम्मू रीजन और कश्मीर वादी की इंटर युनिवर्सिटी खेल मुकाबलों के इफ्तेताह के वक्त जब कौमी तराना गाया जा रहा था तो उसी वक्त यह लोग आपस में बातें करके कौमी तराने की तौहीन कर रहे थे। सवाल यह कि अगर तीन अप्रैल को खेल मुकाबले शुरू होते वक्त दो तलबा आपस में बात करके कौमी तराने की तौहीन कर रहे थे तो उसके खिलाफ हंगामा चार दिन बाद सात अप्रैल को क्यों किया गया। यह खेल मुकाबले तीन से नौ अप्रैल तक होने थे लेकिन विद्यार्थी परिषद के हंगामे की वजह से इन्हें दो दिन पहले सात अप्रैल को ही खत्म करना पड़ा।

स्टेडियम में जब हंगामा किया गया उस वक्त एनआईआईटी श्रीनगर और श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड युनिवर्सिटी जम्मू के दरम्यान वालीबाल मुकाबला चल रहा था। जम्मू युनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लीडर अभिनव ने युनिवर्सिटी अथारिटीज से साफ कह दिया कि कौमी तराने की तौहीन करने के लिए जब तक कश्मीर वादी से आए तलबा माफी नहीं मांगते उस वक्त तक कोई भी मैच होने नहीं दिया जाएगा। वादी के तलबा का कहना था कि जो गलती उन्होने की ही नहीं उसके लिए मांफी क्यों मांगे? उन्होेने कहा कि बगैर गलती के अगर उन्होने माफी मांगी तो अवाम में यही मैसेज जाएगा कि उन्होने कौमी तराने की तौहीन की है जो उन्होने नहीं की इसलिए वह किसी के दबाव मंे माफी नहीं मांगेगे। इस तरह एक अच्छी कोशिश और वादी व जम्मू रीजन के तलबा के दरम्यान मेल जोल बढाने की एक अच्छी कोशिश विद्यार्थी परिषद की फिरकापरस्ती की भेंट चढ गई।

 

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