सबसे बड़ी डकैती ने लगाया – पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान

सबसे बड़ी डकैती ने लगाया – पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान

‘राजधानी लखनऊ में मुकुंद ज्वैलर्स की दुकान पर धावा बोलकर बदमाशों ने लूटा चालीस किलो सोना व डेढ करोड़ नकद, दो बदमाशों को पकड़ कर पुलिस ने बरामद किए सवा किलो सोने के जेवरात, बाकी की तलाश जारी’

 

लखनऊ! पांच मार्च की रात में मुकुंद ज्वैलर्स की दुकान में पड़ी डकैती ने पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान लगा दिया है। राजधानी की तारीख में पड़ी इस बससे बड़ी  डकैती ने बताया कि बदमाशों की नजर में पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है जिसकी वजह से उन्हंे पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है। चैक कोतवाली से महज डेढ सौ मीटर दूरी पर चैक की तंग गलियों में 13.50 करोड़ की डकैती डालकर फरार हो जाना उनकी बखौफी को ही जाहिर करता है। पुलिस की साख पर सवाल उठे तो अपना इकबाल बचाने के मकसद से पुलिस ने हाथ-पैर हिलाए अपने मुखबिरों को भी लगाया जिसका नतीजा यह हुआ कि पुलिस को रायबरेली में बदमाशों का सुराग लगा। इसके बाद चैक पुलिस, क्राइम ब्रांच और रायबरेली के लालगंज थाने की टीम ने रेवगांव के मजरा पूरे महाराजिन के राज बहादुर लोध और एहार गंाव के मजरा पूरे तिवारी से शेटा पासी को पकड़ा उनकी निशानदेही पर हरविलास को पकड़ा। राजबहादुर व हरविलास की निशानदेही पर सवा किलो सोना बरामद किया जो उन्हांेने जमीन के नीचे गाड़ दिया था।  इन दोनों ने अभय सिंह, रोहित दीक्षित व अशुं समेत अपने पंाच साथियों के नाम पुलिस को बताए हैं। इनमें अभय सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया उसके पास से चार किलो 200 ग्राम सोना बरामद हुआ। बाकी के बारे में पुलिस ने कहा कि उन्हें भी जल्द पकड़ लिया जाएगा। इन बदमाशों के पास  से बरामद जेवर प्रवीण रस्तोगी को दिखाकर पहचान कराई जाएगी। पुलिस अपने इकबाल को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है और राजधानी की  सबसे बड़ी डकैती का पर्दाफाश करने केे लिए पुरअज्म है। जिस तरह से गिरफ्तारियां हो रही हैं उससे पता नहीं लगता है कि सारा माल बरामद हो पाएगा। क्योंकि चार बदमाशों के पास से महज सात किलो ही सोना बरामद हुआ है। बदमाशों का कहना है कि रास्ते में भागते वक्त जेवरात का बोरा रास्ते में गिर गया था। हालांकि पुलिस को या किसी को भी कोई बोरा नहीं मिला था।

चैक में सोने और चांदी के थोक सर्राफा व्यापारी प्रवीण रस्तोगी की दुकान मुकंुद ज्वैलर्स में पांच मार्च की रात नौ बजे सात बदमाशों ने डकैती डाली और प्रवीण रस्तोगी व उनके बेटे जिताशू को जख्मी करके महज तीन से चार मिनट के अंदर चालीस किलो सोने के जेवरात और एक करोड़ पचास लाख रूपए एक बोरे व काले बैग में भरकर चैक की तंग गलियों में फरार हो गए। बदमाशों की बेखौफी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रवीण रस्तोगी की दुकान मुकुंद ज्वैलर्स चैक कोतवाली से महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर है और कोतवाली का एक दरवाजा भी उसी गली में खुलता है। जिस तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया उसे देखकर पुलिस को पूरा यकीन है कि यह वारदात पेशेवर बदमाशों के जरिए अंजाम दी गई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए तीन बदमाशों की तस्वीरें जारी कर दी हैं और  डीजी पुलिस जावीद अहमद ने डकैतों का पता बताने वाले को 50 हजार रूपए का इनाम देने के साथ इत्तेला देने वाले की पहचान खुफिया रखने का एलान किया है। पुलिस के रडार पर वारदात के वक्त दुकान में मौजूद बाराबंकी का एक सर्राफा ताजिर के अलावा दुकान के नौकर भी हैं। डकैती की खबर फैलते ही सर्राफा ताजिरों ने हंगामा कर दिया और दुकानें बंद रखी जिससे एक ही दिन में 750 करोड़ का कारोबार मुतास्सिर हुआ। व्यापारी लीडरान के अलावा बीजेपी लीडर लालजी टंडन भी मौके पर पहुंचे और उन्होने कहा कि सत्तर साल में पहली बार लखनऊ मंे इतनी बड़ी डकैती पड़ी है। व्यापार मंडल के अमर नाथ ने प्रवीण रस्तोगी को 14 करोड़ रूपए का मुआवजा देने का भी मतालबा किया। प्रवीण रस्तोगी ने आठ नामालूम बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट तो लिखवा दी है मगर उस तहरीर में लूटी गई रकम और जेवरात का जिक्र नहीं है। उनकी दुकान के कैशियर सीताराम ने पुलिस को बताया है कि 40 किलो सोना और 1.50 करोड़ बदमाश ले गए हैं लेकिन दुकान मालिक प्रवीण रस्तोगी शायद सेल्स टैक्स वगैरह से बचने के लिए सही नुक्सान नहीं बता रहे हैं। लेकिन जिस तरह से एक किलोमीटर तक जेवरात बोरे से गिरते रहे उससे तो कैशियर की बात बिल्कुल सही लग रही है। राजधानी में पड़ने वाली इस सबसे बड़ी डकैती को एक हफ्ता गुजर जाने के बावजूद पुलिस के हाथ सिर्फ तीन बदमाश लगे हैं जिने पास से तीन किलो सोने के जेवरात भी बरामद किए हैं बाकी बदमाशों की तलाश मेे लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टींमें भी चैक पुलिस के साथ लगी हुई हैं।

कोतवाली से महज डेढ सौ मीटर पर वाके (स्थित) मुकुंद ज्वैलर्स चैक की तंग गलियों में है। पुलिस का मानना है कि इतनी तंग गली मंे बेखौफी के साथ वारदात करना मामूली या नए बदमाशों का काम नहीं है। इसके अलावा पुलिस को यकीन है कि बगैर मुखबिरी के इतनी बड़ी वारदात अंजाम नहीं दी जा सकती। पुलिस ने जो सीसीटीवी फुटेज देखे हैं उसमें एक नौजवान दुकान के बाहर फोन पर बात करता दिखा है। उसके फोन रखते ही बदमाश दुकान में घुसे थे। उसको भी पुलिस तलाश कर रही है। लेकिन एक बात यह किसी की समझ में नहीं आ रही है कि बाराबंकी के जिस सर्राफा ताजिर के हाथ के इशारे से रोकने पर बदमाश ने प्रवीण रस्तोगी को गोली नहीं मारी उस ताजिर को अभी तक पुलिस ने पूछगछ के लिए क्यांे नहीं बुलाया है। प्रवीण रस्तोगी की दुकान के सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात दर्ज है। वारदात के वक्त दुकान में 10-12 व्यापारी और पंाच मुलाजिमीन थे। बदमाशों ने भागते वक्त जिताशु के पैर में उस वक्त गोली मार दी जब उसने उनसे बोरा छीनने की कोशिश की थी। उस फुटेज की बुनियाद पर पुलिस ने अभी तक शक के दायरे में आए लोगों से पूछगछ क्यों नहीं की है यह बात भी किसी की समझ में नहीं आ रही है।

बाखबर जराए से मिली इत्तेलाआत के मुताबिक प्रवीण रस्तोगी चूंकि थोक के ताजिर थे उनका व्यापार दूर तक फैला था आसपास के जिलों के फुटकर सर्राफा दुकानदार उनसे माल ले जाते थे। वारदात के वक्त भी दुकान पर कई व्यापारी मौजूद थे जो ले गए माल का पेमेेंट करने और माल लेने के लिए आए थे। पुलिस का शक है कि ज्यादातर कारोबार दो नम्बर का हो सकता है यही वजह है कि डकैती का शिकार हुए प्रवीण रस्तोगी वारदात से पहले की फुटेज दिखाने से बच रहे हैं। सर्राफा कारोेबार की जानकारी रखने वालों का कहना है कि टैक्स बचाने के लिए व्यापारी एक नम्बर में लेनदेन नहीं करते हैं और पक्का बिल बनाने के बजाए पर्चियों पर खरीद-फरोख्त होती है। शहर का सबसे बड़ा बाजार होने की वजह से हर महीने करोड़ांे का टर्न ओवर होता है। इसके अलावा नोटबंदी के जमाने में देर रात तक दुकानें खोलकर जमकर पुराने नोटों पर माल बेचा गया था शायद यही वजह है कि वह पुलिस को तफसील बताने से परहेज कर रहे हैं। कुछ लोगों का ख्याल है कि मुमकिन है प्रवीण रस्तोगी सोच रहे हों कि जो लूट में गई  उस रकम का नुक्सान तो हुआ ही टैक्स चोरी के फंस गए तो मजीद मश्किल का सामना करना पड़ेगा। यही वजह थी कि खबर लिखे जाने तक प्रवीण रस्तोगी ने लूटी गई रकम और जेवरात का ब्योरा पुलिस को नहीं दिया था।

पुलिस बदमाशों की तलाश मंे लगी है इस दौरान वहंा ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की भी तैयारी हो गई है। क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीमों का कहना है कि सुल्तानपुर के माफिया सरगनाओं और क्रिमिनल से वारदात के तार जुड़ रहे हैं। इसके अलावा 12 जून 2016 को गाजीपुर के मुलायम नगर मंे कायम न्यू नीलम ज्वैलर्स की दुकान पर सात बदमाशों ने डकैती डाली थी। उनकी डकैती करने का तरीका और बदमाशों का हुलिया चैक मंे मुकंुद ज्वैलर्स के यहां हुई डकैती खासा मेल खा रहा है। हालांकि उस डकैती में शामिल बदमाश भी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। वारदात का तरीका बताता है कि बदमाश पेशेवर थे उन्होनेे किसी तरह की हड़बड़ी और घबराहट नहीं दिखाई सबसे बड़ी बात उन्होने वारदात के वक्त सिर्फ धमकाने और डराने से काम चलाया गोली चलाने से परहेज किया जबकि नए और अनाड़ी बदमाश थोड़ी मजाहिमत पर गोली चला देते हैं। पुलिस का कहना है कि वह लोग मुंगेर की बनी पिस्टलंे लिए थे। नीली जींस, क्रीम कलर की शर्ट काली जैकेट पहने हेलमेट लगाए और भगवा अंगौछा बांधे हुए थे। इसके बाद वह चैक की तंग गलियों में भागे मगर कई जगह रास्ता भटके इससे लगता है कि वह इलाके से वाकिफ नहीं थे। लालजी टंडन के घर के सामने से होते हुए वह हरदोई रोड की तरफ भाग गए।

यह राजधानी की सबसे बड़ी डकैती बताई जा रही है। इससे पहले 2013 में मुथुट फाइनेंस कम्पनी आलमबाग में छः करोड़ रूपए की डकैती पड़ी थी जिसके बदमाश बाद में पकड़ भी लिए गए थे। डकैती के बाद सर्राफा ताजिरों ने जमकर हंगामा किया दो दिन दुकानें बंद रखी जिससे 1500 करोड़ रूपए का कारोबार मुतास्सिर हुआ। सर्राफा ताजिर पुलिस से बहुत नाराज थे उन्होने कहा कि उन लोगों की हिफाजत का कोई बंदोबस्त नहीं है। एलक्शन की वजह से असलहे भी जमा करा लिए गए। व्यापार मंडल के सीनियर जनरल सेक्रेटरी अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि प्रवीण रस्तोगी को 14 करोड़ रूपए का मुआवजा दिया जाए और जब बदमाश पकड़ जाएं और माल बरामद हो जाए तो उनसे वह पैसे वापस लिए जा सकते हैं। लेकिन उनके मतालबे पर जिला इंतजामिया ने कोई ध्यान नहीं दिया। आम लोगों में चर्चा है कि लूटा गया माल ज्यादातर दो नम्बर का होगा तभी वह लोग पुलिस को सही ब्योरा देने से बच रहे हैं। लेकिन चैक की तंग गलियों में हुई इतनी बड़ी डकैती पुलिस के इकबाल पर जरूर सवालिया निशान लगाती है। इससे साबित होता है कि बदमाशों को पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है।