आरएसएस कुन्बे की जालसाजी

आरएसएस कुन्बे की जालसाजी

दुनिया भर के मुल्कों में अक्सर ऐसा होता है कि किसी बहुत ही मामूली गरीब कुन्बे का कोई शख्स अपने मुल्क में किसी बड़े ओहदे पर पहुच जाता है जिस तरह मौजूदा वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी अक्सर कहते रहते हैं कि वह तो चाय बेचते थे उनके वालिद चाय बेचते थे और उनकी वालिदा पड़ोसियों के घरों में बर्तन साफ करने का काम किया करती थीं, हालांकि यह तीनों बातें गलत हैं। मोदी और उनके वालिद ने न तो कभी चाय बेचने का काम किया न उनकी वालिदा ने कभी पड़ोसियों के घरों में बर्तन वगैरह साफ करने का काम किया। यह तो मोदी की एलक्शन स्टेªटिजी थी जिसका इस्तेमाल उन्होने 2014 के लोक सभा एलक्शन की मुहिम के दौरान किया। अगर इन तीनों बातों में से एक भी सच होती तो तकरीबन बारह सालों तक गुजरात के वह वजीर-ए-आला रहे असम्बली के तीन एलक्शन लड़े तब तो उन्होने कभी इन बातों का जिक्र नहीं किया। नरेन्द्र मोदी मुल्क के अकेले ऐसे वजीर-ए-आजम भी नहीं हैं जो किसी गरीब घर से आए हों। लाल बहादुर शास्त्री, चैधरी चरण सिंह, चन्द्रशेखर और एचडी देवगौड़ा भी गरीब घरों से ही आए थे। उनमें से कभी किसी ने भी वजीर-ए-आजम बनने के बाद अपनी गरीबी बयान नहीं की थी। उन्हें शायद अपनी गरीबी बयान करने की जरूरत इसलिए भी नहीं थी कि वह लोग झूट नहीं बोलते, अपने सियासी मकासिद हासिल करने के लिए उन्हेें अफवाहें फैलाने की कोई जरूरत नहीं थी। वह जो कुछ थे देश जानता था।

जैसा हमने शुरू में लिखा कि पूरी दुनिया में बेशुमार ऐसे लोग बड़े-बड़े ओहदों पर पहुंचे हैं या अपने-अपने मुल्क के हुक्मरां बने हैं सभी ने अपने आप को उस ओहदे के लायक बनाने की कोशिश की जिस  ओहदे तक पहुचे थे बेश्तर लोगों ने खुद को अपने हासिल किए हुए ओहदे और उसके वकार (सम्मान) के स्टैण्डर्ड में ढाल लिया। नरेन्द्र मोदी शायद अकेले ऐसे हुक्मरां बने हैं जो मुल्क का वजीर-ए-आजम बनने के बाद वजीर-ए-आजम के ओहदे के स्टैण्डर्ड और वकार को गिरा कर अपने स्टैण्डर्ड पर ले आए। वह बचपन में चाय बेचते थे या नहीं इसपर तो तनाजा (विवाद) हो सकता है लेकिन सवा सौ करोड़ के अजीम मुल्क के वजीर-ए-आजम के ओहदे को गिराकर उन्होने एक चाय वाले की सतह तक पहुचा दिया। इसमें किसी किस्म के शक व शुब्हे की गुंजाइश नहीं है। वह आरएसएस की प्रोपगण्डा मशीनरी की देन हैं। आरएसएस कुन्बा अपना मकसद हासिल करने के लिए जमकर झूट भी बोलता है, प्रोपगण्डा करता है और जालसाजी तक करता है। इसमें भी कोई दो राय नहीं है। नरेन्द्र मोदी से पहले आरएसएस के एक और इंतेहाई सीनियर स्वयं सेवक पंडित अटल बिहारी वाजपेयी भी मुल्क के वजीर-ए-आजम बने थे। चूंकि वह पढे-लिखे थे इसलिए उन्होने वजीर-ए-आजम के ओहदे का स्टैण्डर्ड और वकार गिराने का काम करने के बजाए खुद को वजीर-ए-आजम के ओहदे के लायक बना लिया था। वह आरएसएस के स्वयं सेवक रहे थे उनके नजरियात (विचारधारा) से हमने कभी इत्तेफाक नहीं किया यह अलग बात है लेकिन मुल्क की सत्ता संभालने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने एक टिपिकल संवैधानिक वजीर-ए-आजम की तरह काम किया था।  उनके दौर में आरएसएस का एक स्वयं सेवक मुल्क के वजीर-ए-आजम पर हावी नहीं हो पाया था। उन्होेने हमेशा यही कोशिश की आरएसएस स्वयं सेवक की उनकी शख्सियत कभी भी मुल्क के वजीर-ए-आजम की शख्सियत पर हावी नहीं हो पाए। नरेन्द्र मोदी के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। चूंकि इनका अपना कोई स्टैण्डर्ड आज तक दिखा नहीं और मुल्क का वजीर-ए-आजम बनने के बाद मोदी ने यह सीखने की भी कोशिश नहीं की कि बड़े ओहदे पर पहुंच कर किसी भी शख्स को कैसा बर्ताव करना चाहिए और खुद को किस तरह ओहदे के वकार के मुताबिक तब्दील करना चाहिए। इसीलिए तो आरएसएस गरोह की जालसाजियों और प्रोपगण्डों में वह खुद शरीक होते रहते हैं।

मोदी और आरएसएस कुन्बे की जालसाजियां और झूट अक्सर सामने आते रहते हैं लेकिन यह लोग इतने शातिर हैं कि पकड़े जाने पर इनपर कोई फर्क भी नहीं पड़ता। गुजिश्ता चन्द दिनों में ही आरएसएस और मोदी की दो बड़ी जालसाजियां पकड़ी गईं इनकी खूब भद पिटी फिर भी यह लोग अपनी गलती तस्लीम करने या अफसोस जाहिर करने के लिए तैयार नहीं हुए। इस गरोह की पहली जालसाजी मुल्क के लिए शहीद होने वाले कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी दिल्ली युनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कालेज की तालिबा गुरमेहर कौर को बदनाम करने के सिलसिले की है तो दूसरी यह है कि खुद नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस नायब सदर राहुल गांधी के मणिपुर की तकरीर को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। राहुल गांधी ने मणिपुर में कहा था कि आप लोग पैन एपल (अनन्नास), संतरा, चकोतरा वगैरह पैदा करते हैं हम चाहते हैं कि आपके पैन एपल का जूस लंदन और अमरीका तक में फरोख्त हो। राहुल की तकरीर के ठीक अगले दिन नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन की मुहिम में तकरीर शुरू कर दी कि राहुल ने मणिपुर में नारियल का जूस बनाने की बात की है जबकि नारियल में जूस नहीं पानी होता है और नारियल मणिपुर के बजाए केरल में पैदा होता है। मोदी अपने झूट और तकरीर करने की झूटी अदाओं के जरिए उत्तर प्रदेश के लोगों से यह कहना चाहते थे कि राहुल गांधी तो मुकम्मल तौर पर एक कम अक्ल इंसान हैं। वह नारियल और पैनएपल में फर्क नहीं समझते है। इस मामले में मोदी पकड़ गए कि वह झूट बोल रहे हैं। कई टीवी चैनल और सोशल मीडिया ने  दोनों के बयानात एक साथ चलाकर साबित कर दिया कि मोदी किस हद तक झूट बोलते हैं। यह पोल खुलने के बावजूद उन्हें कोई शर्म नहीं आई।

इससे भी बड़ी जालसाजी आरएसएस गरोह ने गुरमेहर कौर के सिलसिले में की थी। रामजस कालेज में एक खुली बहस होनी थी जिसमें जेएनयू के खालिद उमर और शहला राशिद को भी बोलना था। आरएसएस की तंजीम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस खुली बहस की मुखालिफत कर रही थी। मुखालिफत करने में विद्यार्थी परिषद के लोगों ने लेफ्ट पार्टियों के तलबा पर हमला कर दिया और प्रोफेसर्स तक को बुरी तरह पीटा। यह देखकर गुरमेहर कौर ने एक पोस्टर दिखाते हुए अपनी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। पोस्टर पर लिखा था ‘मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से नहीं डरती पूरे देश के तलबा (विद्यार्थी) मेरे साथ हैं।’ यह वीडियो वायरल होते ही बीजेपी के आईटी सेल ने गुरमेहर के उन छत्तीस पोस्टर्स में से तेरहवां पोस्टर निकाल कर नए वीडियो के साथ लगा दिया। 28 अप्रैल 2016 को गुरमेहर कौर ने छत्तीस पोस्टर्स दिखाते हुए अपनी कहानी देश के सामने सोशल मीडिया के जरिए पेश की थी जिसमें तेरहवे नम्बर के पोस्टर पर लिखा था कि उसके वालिद कैप्टन मंदीप सिंह को पाकिस्तान ने नहीं बल्कि जंग ने मारा है। उस वक्त चूंकि मोेदी पाकिस्तान के साथ पेंगे बढा रहे थे इसलिए कौर के इस पोस्टर की खूब तारीफें की गई थीं। उसे अम्न का मसीहा (शांतिदूत) तक कहा गया था अब उसी पोस्टर के साथ जालसाजी करके पूरा आरएसएस गरोह गुरमेहर के पीछे पड़ गया। उसे पाकिस्तानी एजेण्ट तक कहकर उसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक राहुल नाम के गुण्डे ने देश के लिए रेप तक करने की धमकी दे डाली। इस मामले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि एक शहीद की बेटी को इतनी घिनौनी धमकी पर नरेन्द्र मोदी खामोश रहे। उनके  वजीरों अरूण जेटली, किरण रिजिजू और हरियाणा के वजीर अनिल विज ने भी एक सोची समझी साजिश के तहतउसी बच्ची के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। कहा जाने लगा कि उसने देशद्रोही जैसा काम किया है और बोलने की आजादी के नाम पर किसी को देश के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इन संघी ढोगियों के मुताबिक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के खिलाफ बोलना देशद्रोह है। अब मोदी मुल्क के वजीर-ए-आजम बन चुके हैं। अब उन्हें इस किस्म की जालसाजियों से बचना चाहिए था लेकिन वह भी क्या करें जेहन छोटा जो है।

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