लखनऊ मंे इनकाउण्टर में मारा गया सैफुल्लाह – आईएसआईएस एजेण्ट नहीं क्रिमिनल था

लखनऊ मंे इनकाउण्टर में मारा गया सैफुल्लाह – आईएसआईएस एजेण्ट नहीं क्रिमिनल था

लखनऊ! सात मार्च की रात में पुलिस के हाथों मारा गया मुबय्यना (कथित) आईएसआईएस दहशतगर्द सैफुल्लाह एक क्रिमिनल था। जिंदगी में कुछ कर न पाने की वजह से शायद मायूसी का शिकार होकर वह जरायम की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था। उसके बहाने देश को यह तास्सुर (आभास) देना कि वह दुनिया की खतरनाक दहशतगर्द गरोह आईएसआईएस से जुड़ा था या उसके जरिए आईएसआईएस मुल्क में अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रहा है, न सिर्फ गलत है बल्कि मुल्क में आईएसआईएस की दहशत कायम करने जैसा है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने हर तरह से उसकी तहकीकात कर ली लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला कि आईएसआईएस से उसका सीधा कोई ताल्लुक हो। मध्य प्रदेश के वजीर-ए-आला शिवराज सिंह चैहान ने भोपाल-उज्जैन पैसेंजर टेªन में शाजापुर में कालापीपल में जबड़ी स्टेशन के पास धमाका होने के फौरन बाद से ही कहना शुरू कर दिया कि उनके पास इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि टेªन में धमाका करने वाले आईएसआईएस गरोह के ही है। शिवराज सिंह के पास यह पता लगाने का क्या जरिया है यह उन्होने नहीं बताया। मध्य प्रदेश का कोई सीनियर पुलिस अफसर भी शिवराज के बयान की तस्दीक करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इधर लखनऊ  में लाॅ एड आर्डर देख रहे एडीशनल डीजी दलजीत चैधरी से साफ कहा कि सैफुल्लाह के आईएसआईएस से रिश्तों का कोई सुबूत नहीं है।

सैफुल्लाह के वालिद सरताज कानपुर में रहते हैं उन्हें बेटे के इनकाउण्टर की इत्तेला मिली तो उन्होंने यह कहकर उसकी लाश लेने से इंकार कर दिया कि सैफुल्लाह अगर देश का नहीं था और देश के खिलाफ वह दहशतगर्दी जैसी हरकत में शामिल हो सकता था तो वह मेरा बेटा नहीं हो सकता। इसलिए वह न तो उसकी लाश लेंगे न इनकाउंटर में मारे गए बेटे का मंुह देखना पसंद करेंगे और न ही उसकी तदफीन करेंगे। सरताज के इंकार करने के बाद पुलिस के कहने पर लखनऊ के ऐशबाग कब्रस्तान की कमेटी ने ऐशबाग कब्रस्तान में ही उसकी तदफीन करा  दी। मुल्क के होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने इस पूरे मामले की तहकीकात नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के हवाले किए जाने का एलान करते हुए कहा कि सैफुल्लाह के वालिद सरताज जैसे सच्चे हिन्दुस्तानी पर उन्हें नाज है। सरताज जैसे लोग हैं जिनकी वजह से मुल्क मुखालिफ ताकतों को काबू करने में मदद मिलती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि वह शुरू से ही कहते रहे हैं कि हिन्दुस्तान के मुसलमान आईएसआईएस जैसे दहशतगर्द गरोह को हिन्दुस्तान में जड़े जमाने से रोकने में अहल (सक्षम) हैं। वह किसी भी कीमत पर आईएसआईएस को मुल्क मंे पैर नहीं जमाने देगे।

मध्य प्रदेश, तेलंगाना और दिल्ली में मौजूद पुलिस खुफिया एजेसियों से यूपी पुलिस को सैफुल्लाह के सिलसिले में इत्तेला मिली थी। पुलिस ने फौरन की लखनऊ-मलिहाबाद रोड पर बनी हाजी कालोनी में सैफुल्लाह के मौजूद होने का पता लगा लिया जहां वह किराए का मकान लेकर रह रहा था। आई जी असीम अरूण की कयादत में एटीएस और लखनऊ पुलिस ने सैफुल्लाह का घेराव किया और 12 घंटे तक कोशिश की कि वह सरेंडर कर दे या उसे जिंदा पकड़ लिया जाए लेकिन वह शायद मरने पर ही तुला था और मारा गया। उसके मरने के बाद पुलिस को उसके ठिकाने से मुंगेर की बनी आठ पिस्टलें, 32 बोर के 630 कारतूस, चार बड़े चाकू,  दो बोतल गन पाउडर के अलावा 45 ग्राम सोना, आतिफ, दानिश और सैफुल्लाह के पासपोर्ट डेढ लाख की हिन्दुस्तानी करेंसी, कुछ रियाल, तीन मोबाइल, चार सिम कार्ड वगैरह मिला है। कोई बड़ा असलहा वहंा पुलिस को नहीं मिला है। यह सामान इस बात का सुबूत है कि उसका आईएसआईएस  से तो ताल्लुक नहीं था क्यांेकि आईएसआईएस के लोग इतने छोटे और मामूली किस्म के असलहे इस्तेमाल नहीं करते।

मध्य प्रदेश और तेलंगाना पुलिस और सेट्रल खुफिया एजेंसियों से यूपी पुलिस को इनपुट मिला था कि सैफुल्लाह और उसका गरोह तारीखी आसिफी (बड़े) इमाम बाड़े और पड़ोसी जिले बाराबंकी के देवा में मशहूर सूफी हाजी वारिस अली शाह के मकबरे को बम से उड़ाने की साजिश कर रहे हैं। यूपी पुलिस ने दोनों ही जगहों को घेर कर इर्दगिर्द के इलाकों में तलाशियां ली लेकिन ऐसा कोई इशारा नहीं मिला जिससे मिलने वाले इनपुट की तस्दीक हो पाती। नौ मार्च को एडीशनल डीजी दलजीत चैधरी ने सैफुल्लाह के दो साथियों गौस मोहम्मद और अजहर की गिरफ्तारी की इत्तेला देते हुए कहा कि उसके गरोह का कोई भी क्रिमिनल नहीं बचा है।

मध्य प्रदेश के शाजापुर में भोपाल-उज्जैन पैसंेजर टेªन में सात मार्च को हुए धमाके के बाद से पुलिस ने धरपकड़ शुरू की तो एनआईए के हाथों कानपुर के जाजमऊ के रहने वाले आतिफ उर्फ आतिश, कानपुर की केडीए कालोनी के रहने वाले दानिश अख्तर उर्फ जफर और अलीगढ के इद्रनगर के रहने वाले सैयद मीर हुसैन उर्फ हमजा को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक उन्हीं लोगों के बयानात के बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। पुलिस ने कानपुर, उन्नाव, इटावा,  बिधूना, औरेया वगैरह में छापेमारी करके कई लोगों को उठाया। इसमें इटावा के माहेश्वरी मोहाल से फखरे और फैज नाम के दो भाइयों को उठाया गया । हलांकि फखरे और फैज की मां आमना बेगम और वालिद बाबू खां मंसूरी अपने बेटों को बेकुसूर बता रहे हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे पढाई करते और दुकान देखते थे मुबय्यना दहशतगर्दाें से उनका कोई ताल्लुक नहीं है। जबकि कानपुर से स्कूल के एक रिटायर्ड टीचर के बेटों इमरान और फैसल को पुलिस ने पकड़ा था। यह दोनों सैफुल्लाह के चचाजाद भाई हैं। इसके अलावा इन लोगों को असलहा देने वाले राकी रानावत और शैलेन्द्र कुमार यादव को भी पुलिस ने विधूना और इटावा से गिरफ्तार किया है।

सैफुल्लाह के घर वालों का कहना है कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि उनका बेटा मुल्क मुखालिफ हरकतों में शामिल था। उनका कहना है कि सैफुल्लाह को उसके दोस्त आतिफ ने बरगलाया है। पुलिस भी आतिफ को ही इस गरोह का सरगना बता रही है। सैफुल्लाह को जिस मकान में मारा गया वहां से असलहों  व दीगर सामानों के साथ मध्य प्रदेश में एनआईए के हाथों पकड़े गए आतिफ और दानिश का पासपोर्ट भी मिला था। पुलिस ने नौ मार्च को आतिफ का दायां हाथ कहा जाने वाले गौस मोहम्मद खान उर्फ जीएम खान जो एयरमैन (एयरफोर्स की एक मामूली पोस्ट) से रिटायर्ड है और सैफुल्लाह को मोबाइल बेचने वाले दुकानदार अजहर को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ इस गरोह के खत्म होने का दावा भी पुलिस ने किया है। पुलिस ने भोपाल-उज्जैन पैंसेजर टेªन में बम धमाके के बाद से अब तक कुल जिन दस लोगों को पकड़ा उनमें एक सैफुल्लाह मारा गया जबकि सात का ताल्लुक कानपुर से है।

सैफुल्लाह हाजी कालोनी के जिस मकान मंे रहता था वह मकान सऊदी अरब में नौकरी कर रहे बादशाह खान नाम के शख्स का था। सैफुल्लाह को यह मकान प्रापर्टी का काम करने वाले फजलू के कहने पर मदरसे में मोलवी और बादशाह खान के पड़ोसी अब्दुल कय्यूम ने तीन हजार रूपए महीने पर तकरीबन तीन महीने पहले किराए पर दिलवाया था। कय्यूम का कहना है कि उसने उन लड़कों की आईडी वगैरह लेकर बादशाह खान की बीवी आयशा को  दे दी थी वही किराया भी वसूलती थी। पुलिस ने फजलू को भी गिरफ्तार कर लिया है। अब्दुल कय्यूम वगैरह को भले ही उन लड़कों पर कोई शक न हुआ हो मगर मोहल्ले के कुछ लोगों को उन लड़कों की हरकते और आने जाने वाले लोग मशकूक (संदिग्ध) लगे तो उन्होनेे दुबग्गा चैकी व काकोरी थाना पर इस बात की इत्तेला देते हुए लड़कों का वैरीफिकेशन करने के लिए कहा था लेकिन वहां से कोई भी तहकीकात के लिए नहीं आया था।

सैफुल्लाह का पता मालूम होने के बाद एटीएस के आईजी असीम अरूण ने उस मकान को अपने बीस कमांडो के साथ घेर लिया था। उनका कहना था कि वह चाहते थे कि उसे जिंदा पकड़ा जाए इसीलिए वह उसे मौका दे रहे थे। उसके भाई से भी उसकी बात कराई गई मगर पुलिस के मुताबिक सैफुल्लाह हथियार डालने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद रात में छत काटकर उसमें मिर्ची बम फेंके गए। उस दौरान कमांडो ने दरवाजे के पास उसकी आहट महसूस करते फायरिंग कर दी। लोेहे का दरवाजा एके-47 का हमला झेल नहीं पाया और एक बार में बीस गोलियां दरवाजे के पार हो गई जिसमें छः सैफुल्लाह के जिस्म में लगी थीं। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोेर्ट के मुताबिक उसके जिस्म से चार गोलियां निकलीं जबकि दो गोलियां उसके जिस्म को पार कर गई थीं। इसके अलावा पुलिस के मुताबिक उसे रात एक से दो बजे के बीच मार गिराया गया जबकि खबर है कि सैफुल्लाह को चार-पांच बजे ही मार गिराया गया था क्योंकि सुबह तक उसकी लाश अकड़ी हुई बताई गई थीं। एक खबर यह भी है कि जिस वक्त एटीएस और पुलिस के लोग उस मकान को घेरे हुए थे दो लोगों को भागते हुए कुछ बच्चों ने देखा जो मकान के पीछे कुछ दूर पर क्रिकेट खेल रहे थे। पुलिस ने उनकी तलाश तो की मगर उनके भागने का जिक्र कहीं  नहीं किया।

बाखबर जराए से पता चला है कि जिस सैफुल्लाह को मुबय्यना (कथित) तौर पर दहशतगर्द बताया जा रहा है। वह दरअस्ल एक क्रिमिनल था और अपने साथियांे के साथ मिलकर नाजायज असलहों को बेचने का काम करता था। उसके पास से मिले मुंगेर की पिस्तौल भी यही तास्सुर (आभास) देती है। मकामी लोगों का कहना है कि एक तरफ टीवी पर तो बताया जा रहा था कि बड़ा खतरनाक दहशतगर्द मकान में छुपा है जिसे पकड़ने के लिए एटीएस के कमाडों और पुलिस में गोलाबारी हो रही है जबकि सामने पुलिस वाले बगैर बुलेट प्रूफ जैकेट पहने और कोई हिफाजती बंदोबस्त के बगैर हंसी मजाक करते नजर आ रहे थे। कुछ तो अपना असलहा और बुलेट प्रूफ जैकेट भी साथ नहीं लाए थे जबकि कुछ बुलेट प्रूफ जैकेट ठीक से पहन नहीं पा रहे थे। इन बातों से इस शक को तकवियत मिलती है कि मकान को घेरने वाले पुलिस वालों को अच्छी तरह पता था कि सैफुल्लाह के पास कोई खतरनाक असलहा नहीं है। मुंगेर की बनी पिस्तौल से वह लाहे के गेट को फाड़कर किसी को भी जख्मी नहीं कर सकता है। इसीलिए वहां पर पुलिस वाले मुत्मइन नजर आ रहे थे और देर रात उन्होने सैफुल्लाह को मार कर अपना आप्रेशन पूरा कर लिया।

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