मजहब और जात-पात पर हिन्दुत्ववादियों का पोलराइजेशन भी बीजेपी को अक्सरियत दिलाने में नाकाम – मायावती बनीं मोदी की राह में रूकावट

मजहब और जात-पात पर हिन्दुत्ववादियों का पोलराइजेशन भी बीजेपी को अक्सरियत दिलाने में नाकाम – मायावती बनीं मोदी की राह में रूकावट

”पहले, दूसरे और तीसरे राउण्ड की पोलिंग में काफी पीछे रह चुकी बीजेपी को आगे लाने के लिए वजीर-ए-आजम मोदी ने कब्रस्तान-श्मशान, हिन्दू-मुस्लिम बिजली, सरहद पार की साजिशों से होेने वाले टेªन हादसों को अलामती तौर पर हिन्दुत्ववादियों को पोलराइज करने के लिए इस्तेमाल कर डाला। अमित शाह ने प्रदेश में गाय, भैंस और बैलों के खून की नदियां बहने की बातें शुरू कर दीं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी की मायावती, बीजेपी और मोदी के लिए सबसे बड़ी रूकावट बनकर सामने आ गईं।“

 

”उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन के नतीजों का इस बार अंदाजा लगानाा बहुत मुश्किल हो गया है। हंग असम्बली के इमकान के साथ ऐसा दिखने लगा है कि होली के बाद प्रदेश में एक नया सियासी एलाइन्स बनेगा, जिसमें कांगे्रस और लोक दल को शामिल करके बीएसपी सुप्रीमो मायावती सरकार बना सकती हैं। अगर बीजेपी को अपनी अक्सरियत नहीं मिली तो उसे अपोजीशन में ही बैठना पड़ेगा।“

 

”2012 में पूर्वी उत्तर प्रदेश में जबरदस्त कामयाबी मिलने की वजह से ही समाजवादी पार्टी ने मुकम्मल अक्सरियत हासिल करके सरकार बनाई थी। इस बार वालिद मुलायम सिंह यादव और चचा शिवपाल यादव को अलग-थलग करने के साथ-साथ अखिलेश ने बड़ी मेहनत करके  पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपना खेल खराब किया है। पच्छिम में भी पिछली बार से कम सीटें जीत पाएंगे। कांगे्रस से इंतखाबी गठजोड़ के बावजूद अखिलेश  की समाजवादी पार्टी तीसरे नम्बर पर ही दिखती है।“

 

 

लखनऊ! उत्तर प्रदेश असम्बली का एलक्शन तकरीबन मुकम्मल हो चुका है अब आखिरी राउण्ड में सिर्फ चालीस सीटों की पोलिंग होनी बाकी है पूर्वी उत्तर प्रदेश के सात जिलों में आठ मार्च को इन चालीस सीटों में वोट पड़ेगे, ग्यारह मार्च को तय होगा कि बारह मार्च को होली की आग में किस-किस के अरमान जलकर राख होंगे और तेरह मार्च को कौन खुशियों के रंग खेलेगा। वैसे तो भारतीय जनता पार्टी, अखिलेश यादव के कब्जे में आई समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी तीनों के लिए यह एलक्शन जीने मरने की वजह बन चुका है। लेकिन बीजेपी के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने इसे ठीक दिल्ली और पंजाब की तरह अपनी इज्जत का सवाल बना लिया है। पहले, दूसरे और तीसरे राउण्ड की पोलिंग से पहले भारतीय जनता पार्टी के छुटभैय्या लीडरान ने हिन्दुत्व के सहारे एलक्शन को हिन्दू बनाम मुस्लिम बनाने की कोशिश तो की थी लेकिन वह कामयाब नहीं हुए थे। चैथे राउण्ड से खुद नरेन्द्र मोदी ने एलक्शन में फिरकापरस्ती का जहर घोलने का काम खुद अपने हाथों में ले लिया। उन्होने कब्रस्तान बनाम श्मशान, रमजान में मुस्लिम बिजली, दीवाली पर हिन्दू बिजली, कानपुर रेलवे हादसे मेे सरहद पार (पाकिस्तान) की साजिश और आखिर में मऊ में रैली के वक्त खुद अपने आप पर सरहद पार के दहशतगर्द गरोहों के जरिए राकेट लांचर तक के मुतवक्का (संभावित) हमले का प्रोपगण्डा करा दिया। प्रदेश में रेप, कत्ल और दीगर संगीन जरायम का रिकार्ड पेश करते हुए मोदी ने झूट का सहारा लिया। मोदी के रास्ते पर उनके कठपुतली सदर अमित शाह ने भी खूब जहर उगला। उन्होनेे यहां तक कह दिया कि उत्तर प्रदेश में गाय, बैल और भैंस के खून की नदियां बह रही हैं। उन्होेने चीखते हुए कहना शुरू किया कि आठ मार्च के नतीजों के बाद बीजेपी की सरकार बनेगी। सरकार बनते ही रात के बारह बजे से पहले प्रदेश के तमाम स्लाटर हाउसों को बंद करा दिया जाएगा। यह हथकण्डा अख्तियार करके मोदी ने अपनी पार्टी की पोजीशन को काफी हद तक मजबूत कर लिया। पांचवें, छठे और सातवें राउण्ड की पोलिंग के लिए उन्होने पोलराइजेशन करा लिया। इसके बावजूद बहुजन समाज पार्टी लीडर मायावती अपनी जारेहाना (आक्रामक) इंतेखाबी मुहिम के जरिए मोदी के ख्वाबों पर पानी फेरती नजर आ रही हैं। छठे राउण्ड की पोलिंग खत्म होने के बाद यह बात तकरीबन तय हो चुकी है कि मायावती ने फिरकापरस्ती की ताकत से दौड़ते मोदी के रथ में बे्रक लगा दिया है। कांगे्रस के साथ इंतखाबी गठजोड़ करने और धुवांधार इंतेखाबी मुहिम चलाने के बावजूद अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी खिसक कर तीसरे नम्बर पर पहुच चुकी दिखती है। अब इस बात के इमकानात काफी बढ गए हैं कि किसी भी पार्टी को मुकम्मल अक्सरियत नहीं मिलने वाली है। ऐसी सूरत में एलक्शन के बाद एक नए एलाइन्स के इमकानात नजर आने लगे हैं उस एलाइन्स में मायावती कांगे्रस और राष्ट्रीय लोकदल को साथ लेकर अगली सरकार बना सकती है।

उत्तर प्रदेश असम्बली का एलक्शन जीतने के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी उनकी पार्टी के सदर अमित शाह और आदित्यनाथ व उन्नाव से लोक सभा मेम्बर सच्चिदानन्द हरि साक्षी वगैरह ने फिरकापरस्ती, हिन्दुत्ववाद और झूट का जम कर इस्तेमाल किया। इन सभी ने श्मशान, कब्रस्तान, हिन्दू मुस्लिम बिजली, तीन तलाक, कानूनी तरीके से चले रहे स्लाटर हाउसों, मुसलमानों में तीन तलाक के रिवाज जैसे मामलात को उत्तर प्रदेश के मुद्दों मे तब्दील करने की भरपूर कोशिश की, काफी हद तक यह लोग अपने मंसूबों में कामयाब भी रहे। झूट और अय्यारी का आलम यह कि गोण्डा की अपनी मीटिंग मंे पूर्वी उत्तर प्रदेश  के सबसे बड़े एजूकेशन माफिया और कैसरगंज से बीजेपी के लोक सभा मेम्बर बृजभूषण शरण सिंह को डायस पर बिठा कर नरेन्द्र मोदी एजूकेशन माफिया को काबू करने की बात कर रहे थे। उस वक्त उन्होने एक बार भी मुड़ कर बृजभूषण शरण सिंह की तरफ देखने की जहमत नहीं की। गोण्डा सदर से बृजभूषण शरण सिंह का बेटा प्रतीक भूषण बीजेपी का उम्मीदवार है जिसकी बीएसपी के जलील के हाथों शिकस्त यकीनी समझी जाती है।

इस एलक्शन को जीतने के लिए नरेन्द्र मोदी ने कदम-कदम पर झूट बोला। इतना झूट कि वजीर-ए-आजम जैसे संवैधानिक ओहदे तक का वकार (सम्मान) उन्होने तार-तार कर दिया। अखिलेश यादव के कामों के सिलसिले में तो वह मुसलसल गलतबयानी कर ही रहे थे। पहली मार्च को जो झूट उन्होने राहुल गांधी के सिलसिले में बोला उससे तो उन्होंने शराफत की तमाम हदें तोड़ते हुए एक बार फिर जाहिर कर दिया कि वह बहुत ही छोटी जेहनियत के इंसान हैं और यह मुल्क की बदकिस्मती है कि इतनी छोटी जेहनियत  का मामूली और गैर पढालिखा शख्स मुल्क का वजीर-ए-आजम बन गया। 28 फरवरी को राहुल गांधी मणिपुर में एलक्शन मुहिम में गए थे। वहां उन्होेने अपनी तकरीरों में कहा कि मणिपुर के काश्तकार पैनएपल (अनन्नास) पैदा करते हैं, नारंगी संतरा पैदा करते हैं नींबू पैदा करते हैं अगर अनन्नास और संतरे का  जूस प्रासेस होकर लंदन और अमरीका तक को एक्सपोर्ट किया जाए तो इससे काश्तकारों और मुल्क दोनांे को जबरदस्त फायदा होगा। पहली मार्च को नरेन्द्र मोदी पूर्वी उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में एक रैली मंे बोल रहे थे। उन्होंने सफेद झूट बोलते हुए कह दिया कि मणिपुर में राहुल गांधी नारियल का जूस निकाल कर विदेशों को एक्सपोर्ट करने की  बात कर रहे थे। उन्हें यही नहीं पता है कि नारियल का जूस नहीं बनता। जूस तो संतरे और मौसमी वगैरह का होता है। नारियल का पानी होता है और नारियल मणिपुर में नहीं केरल में पैदा होता है। यह सतह है हमारे मुल्क के वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर बैठे शख्स की। उनके झूट की कोई इंतेहा नहीं है।

उत्तर प्रदेश में वह शुरू से ही झूटबोलने का काम कर रहे हैं। शायद इसीलिए अखिलेश यादव ने अपनी पब्लिक मीटिंग में कह भी दिया कि इतना झूट बोलने वालर प्रधान मंत्री उन्होने कभी नहीं देखा। उन्होने गरीबों को गैस कनेक्शन देने का झूट बोला। इंतेहाई शर्मनाक झूट तो वह यह बोले कि दवाआंे की कीमतें उन्होने दस फीसद करा दी। हकीकत यह है कि मोदी के आने के बाद से दवाओं की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। मोदी सरकार के दौर में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्योरो के आदाद व शुमार (आंकड़े) कहते हैं कि मुल्क मंे रेप के  सबसे ज्यादा वाक्यात बीजेपी के शिवराज चैहान के राज वाले मध्य प्रदेश और दूसरे नम्बर पर वसुंधरा राजे के राजस्थान में होते हैं। हां कत्ल के मामलात में उत्तर प्रदेश  और लूट के मामलात में महाराष्ट्र सबसे ऊपर हैं। इस सरकारी रिकार्ड के बावजूद मोदी बार-बार यही कहते फिरे कि सबसे ज्यादा रेप उत्तर प्रदेश में होते है।

मोदी ने झूट बोला तो अमित शाह कैसे पीछे रहते उन्होने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आम हिन्दुओं को भड़का  कर उनके वोट ठगने के मकसद से कहना शुरू कर दिया कि उत्तर प्रदेश में गाय, बैल और भैंस के खून की नदियां बह रही हैं। हमारी सरकार बनते ही पहले ही दिन रात बारह बजे से पहले प्रदेश के तमाम स्लाटर हाउस बंद करा दिए जाएंगे। इससे बड़ा झूट और क्या हो सकता  है कि उत्तर प्रदेश में गाय, बैल और भैंस के खून की नदियां बह रही हैं। अगर अमित शाह झूटे न होते तो उत्तरप्रदेश आकर इस किस्म की बेसिर पैर की बातें करने से पहले महाराष्ट्र समेत बीजेपी सरकारों वाले प्रदेशों के स्लाटर हाउस बंद कराते। गोवा में उनकी सरकार है वहंा गौकुशी तक पर पाबंदी लगाने की हिम्मत  तो अमित शाह और मोदी कर नहीं सके उत्तर प्रदेश के स्लाटर हाउस क्या बंद कराएंगे।

महज हिन्दू वोट पोलराइज करने की गरज से नरेन्द्र मोदी यहंा तक झूट बोले कि कानपुर के टेªन हादसे में सरहद पार के दहशतगर्दों का हाथ है। खुद उनके इशारों पर नाचने वाली नेशनल इनवेस्टीगेशन एजंेसी (एनआईए) तक तहकीकात कर चुकी है। रेलवे और एनआईए दोनांे की तहकीकात में यही कहा गया है कि इस टेªन हादसे की वजह पुरानी और कमजोर पटरी के अलावा एक खराब कोच का लगाया जाना था। मोदी को चूंकि हिन्दुओं और मुसलमानों के दरम्यान खलीज पैदा करनी होती है इसीलिए उन्होेने सरहद पार की साजिश का जिक्र किया। उनके बिजली वजीर पियूष गोयल ने उनके झूट पर पर्दा डालने के लिए कह दिया कि वजीर-ए-आजम के बयान के बाद उनके मोहकमे ने तहकीकात कराई तो यही पता चला कि रमजान में सप्लाई होने वाली बिजली दूसरे मजहब के लोगोें को नहीं मिलती। गोयल शायद यह कहना चाहते थे कि गैस सिलेण्डरों की तरह बिजली भी डिब्बों में बंद करके रमजान में मुसलमानों को दी जाती है।

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