वोट के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने ही शुरू की सतह से गिरी हुई बयानबाजी, उन्हें मिला मुंह तोड़ जवाब – पार्लियामंेेट से पब्लिक तक बदजुबानी

वोट के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने ही शुरू की सतह से गिरी हुई बयानबाजी, उन्हें मिला मुंह तोड़ जवाब – पार्लियामंेेट से पब्लिक तक बदजुबानी

”अगर कोई हम पर सख्त अल्फाज मे हमला करेगा तो हम भी उससे ज्यादा तेज रफ्तारी से ज्यादा सख्ती से और ज्यादा असरदार तरीके से उसका जवाब देने की ताकत रखते है। पार्लियामेट मे यह बयान देकर नरेन्द्र मोदी ने जाहिर कर दिया कि वह वजीर-ए-आजम की कुर्सी की सतह कहां तक ले जाना चाहते हैं। उन्हें शायद ख्याल नहीं रहा कि इस किस्म की जुबान का इस्तेमाल मुल्क का वजीर-ए-आजम नहीं गली के छुटभैया गुण्डे करते रहते हैं।“

 

”राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मायावती को स्कैम कह कर अपनी इंतखाबी मुहिम की शुरूआत करके नरेन्द्र मोदी ने बता दिया कि इस एलक्शन मे वह उत्तर प्रदेश और प्रदेश के अवाम के अस्ल मुद्दो से फरार हासिल करने की कोशिश में इस किस्म के जोकरों जैसे डायलाग बोल रहे हैं। यही काम अमित शाह ने किया उन्होने कह दिया कि एक से उसका बाप परेशान है दूसरे से उसकी मां। इन दो गैर जिम्मेदाराना बयानात ने एलक्शन मुहिम की सतह ही गिरा दी ताकि लोगों को अस्ल मसायल से भटकाया जा सके।“

 

 

”2014  में लोक सभा एलक्शन की मुहिम के दौरान मोदी ने जो भी वादे किए थे एक भी पूरा नहीं हुआ। अब उनके वादों पर कोई भरोसा करने के लिए तैयार नहीं है। हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा था ढाई साल में सिर्फ दो लाख पैसठ हजार को रोजगार दिलाया तो नोटबदी के जरिए करोड़ो को रोजगार से महरूम कर दिया। गन्ना काश्तकारों के लिए कुछ नहीं किया। इस बजट में काश्तकारो को उनकी पैदावार की मुनाफा बख्श कीमत तक का एलान नहीं किया। इसीलिए जाती हमलों पर उतरे हैं।“

 

 

 

 

हिसाम सिद्दीकी

लखनऊ! उत्तर प्रदेश असम्बली के मौजूदा एलक्शन में एक नया रिकार्ड बना है वह रिकार्ड है सतह से गिरी हुई बयानबाजियों का और सियासतदानों की बदजुबानी का यह रिकार्ड बनाने का सेहरा भी वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के सर है। वह एलक्शन मीटिंगों मे तो अपने ओहदे का एहतराम न कर सके और ऐसी जुबान में अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमले किए जो एक वजीर-ए-आजम के ओहदे पर फायज किसी शख्स के लिए किसी भी कीमत पर मुनासिब नहीं कहा जा सकता है। एलक्शन मीटिंगों में सतही जुबान का इस्तेमाल करते करते उन्होनेे पार्लियामेंट में भी उसी किस्म की जुबान का इस्तेमाल अपोजीशन पार्टियों के मेम्बरान खुसूसन साबिक वजीर-ए-आजम डाक्टर मनमोहन सिंह के लिए भी कर डाला। मोदी ने चार फरवरी को मेरठ से अपनी इंतखाबी मुहिम शुरू की तो पहली ही मीटिंग में समाजवादी पार्टी, कांगे्रस, अखिलेश यादव और मायावती का नाम लेते हुए उन सभी के लिए स्कैम लफ्ज का इस्तेमाल किया। उनकी नजर में शायद मेरठ और उत्तर प्रदेश के लोगों का सबसे बड़ा मुद्दा अपने मुखालिफीन का मजाक उड़ाना ही हो। उन्होने शुरूआत की तो जाहिर है  जवाब भी आना ही था। समाजवादी पार्टी लीडर वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने ‘स्कैम’ की नई तशरीह (परिभाषा) करते हुए कहा इसका मतलब है ‘सेव कंट्री फ्राम अमित शाह एण्ड मोदी’ यानी अमित शाह और मोदी से देश बचाओ। राहुल गांधी ने कहा मोदी ने उन्हेें स्कैम कहा है मोदी शायद भूल गए कि इसका मतलब होता है सर्विस करेज, एबिलिटी और मोडस्टी यानी खिदमत, हिम्मत, अहलियत और नर्म बरताव। मोदी ने वजीर-ए-आजम होकर बदजुबानी शुरू की तो उनके कठपुतली सदर अमित शाह क्यों पीछे रहते। उन्होने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि एक से उसका बाप परेशान है तो दूसरे से उसकी मां। अब अमित शाह से कौन पूछे कि क्या एक के बाप और दूसरे की वालिदा ने उनसे अपने बेटों की कोई शिकायत की है दूसरे यह कि अगर दोनों से बाप और मां परेशान हेैं तो यह उत्तर प्रदेश के लोगों का मुद्दा कैसे हो सकता है। अमित शाह यह भी बताएं कि जिस शख्स से उसकी बीवी पूरी जिंदगी परेशान रही है उसके बारे में उनका क्या कहना है? पब्लिक मीटिंगों में उलूल जुलूल और सतही जुबान बोलने के आदी हो चुके नरेन्द्र मोदी पार्लियामेंट पहुचे तो वहां भी उसी तरह की जुबान बोलने लगे। उन्होने मनमोहन सिंह को ‘रेनकोट’ पहनकर गुस्ल करने वाला करार दे दिया। लोक सभा मे भी उन्होने कुत्तों तक का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हम पर अपोजीशन से हमले होगे तो हम भी उसी रफ्तार और अंदाज मंे जवाब देने की ताकत रखते है। मोदी  देश के अब तक के पहले वजीर-ए-आजम हैं जो अपोजीशन लीडरान के हमलों का जवाब सतही और बाजारू जुबान में देने को अपनी हिम्मत और ताकत बता रहे है। अब तक तो यही होता आया है कि अपोजीशन लीडरान चाहे कितने सख्त हमले क्यांे न करें वजीर-ए-आजम हमेशा अपने ओहदे का ख्याल करते हुए इंतेहाई संजीदगी और नर्मी के साथ उनका जवाब देते रहे हैं। मोदी यह सिलसिला जारी रखने के लिए तैयार नहीं हैं। वह जिस किस्म की बातें कर रहे हैं उन्हे सुनकर तो यह खौफ मुल्क को सताने लगा है कि अगर मोदी के सड़क पर गुजरते वक्त कोई कुत्ता भोकेगा तो कार रूकवाकर शायद वह भी भों-भों करके उसका जवाब देना मुनासिब समझेगे।

नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन की मुहिम में जो जुमलेबाजी और सतही जुबान का इस्तेमाल किया है वह महज इत्तेफाक नहीं है। वह उन्होने जानबूझ कर किया है। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि 2014 के लोक सभा एलक्शन में उन्होने जो बड़े-बड़े वादे मुल्क और अवाम से किए थे उनमेंसे एक भी वादा पूरा नहीं कर सके। सबसे बड़ा वादा बेरोजगार नौजवानों से उन्होने यह किया था कि वह हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराएंगें। ढाई सालों में पांच करोड़ नौजवानों को रोजगार मिल जाना चाहिए था। पहले तो वह कुछ भी नहींे कर सके फिर 2015 में सिर्फ एक लाख तीस हजार तो 2016 मे एक लाख पैतीस हजार नौजवानों को ही रोजगार फराहम करा सके हैं यानी कुल मिलाकर दो लाख पैसठ रोजगार। रोजगार के अलावा दूसरे वादे भी पूरे नहीं करा पाए। उल्टे नोटबंदी करके आम लोगों को एक नई परेशानी में जरूर डाल दिया। अब वह सतही और बाजारू जुबान बोलकर आम लोगों को हंसाने और अपने चक्कर में एक बार फिर फंसाने की कोशिशें कर रहे हैं। अगर इस किस्म की बातें करके वह आम लोगों को महज हंसा कर आगे नहीं बढेंगे तो लोग शायद उनसे 2014 के वादों के सिलसिले में सवाल जरूर होंगें। इन्ही सवालोें से वह खौफजदा दिखते है।

पच्छिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी कहे जाने वाले मेरठ से ही उन्होने अखिलेश व राहुल गांधी के गठजोड़ को ‘स्कैम’कह कर लोगों को सिर्फ हंसाने और खुद मजाक बनने की हरकत शायद इसलिए की कि पिछली बार उन्होने गन्ना काश्तकारों के लिए जो वादे किए थे एक भी पूरा नहीं हुआ काश्तकारों को उनकी फसल की मुनासिब कीमत (सपोर्ट प्राइस) भी वह नहीं दिला पाए। एक साल कब्ल उन्होेने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे का संगे बुनियाद रखते हुए वादा किया था कि एक साल के अंदर एक्सप्रेस वे बनकर मेरठ से दिल्ली का फासला महज पौन से एक घंटे का कर देंगे आज तक इस एक्सप्रेस वे का सर्वे भी मुकम्मल नहीं हुआ है वह इन सवालात से बचना चाहते थे। इसीलिए मेरठ और अलीगढ समेत पच्छिमी उत्तर प्रदेश की अपनी तमाम अवामी मीटिंगों में वह लोगों को तफरीह ही कराते रहे। उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में ऐसे मसायल हैं जिनका ताल्लुक भारत सरकार से है। उन मसायल का हल भी मरकजी सरकार को ही निकालना है। इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी ने किसी एक भी मसले या मुद्दे को हल करने की कोशिश नहीं की। उन्हें शायद हर वक्त यही खौफ सताता रहता है कि कहीं आम लोगों के आमने सामने जवाब न देना पड़ जाए।

चूंकि वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने असम्बली एलक्शन के दौरान असल मुद्दों से आम लोगों और देश का ध्यान भटकाने की गरज से गैर जिम्मेदाराना और अपने ओहदे के एतबार से ओहदे की सतह से गिरकर बयानबाजी शुरू कर दी तो बाकी पार्टियों के लीडरान ने भी उन्हें मुंह तोड़ जवाब देने के बहाने वही रास्ता अख्तियार कर लिया। अब प्रदेश के अवाम के अस्ल मसायल और अस्ल मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा है। करता भी है तो बस इशारों में बाकी सभी एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के काम मंे ही मसरूफ दिखते हैं। नतीजा यह कि प्रदेश के अस्ल मसायल पीछे ही छूटते जा रहे है। अब तक किसी भी पार्टी ने प्रदेश में प्राइमरी सतह से डिग्री तक की तालीम को मेयारी (स्तरीय) बनाने का वादा नहीं किया है। सेहत के लिए हेल्थ सेक्टर में क्या-क्या काम करंेगे और गावों के गरीबों तक इलाज की सहूलतें पहुचाने की बात या यकीन कोई नहीं दिला रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश मंे गोरखपुर के इर्दगिर्द दर्जनों जिलों मे हर साल सैकड़ों बच्चे  इनसेफ्लाइटिस या जापानी बुखार का शिकार होकर मौत के मुंह मंे चले जाते हैंै। उन बच्चों को कैसे बचाया जाएगा इसपर आज तक किसी ने एक लफ्ज भी अपनी जुबान से नहीं निकाला है। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश मे भी कई लीडरान ने तरह-तरह की जुमलेबाजी की तो कौमी एकता दल और मुख्तार अंसारी के कुन्बे को ही असल मुद्दा बनाने की कोशिश की लेकिन अवाम के अस्ल मुद्दो की जानिब किसी की भी नजर नहीं गई। अब मुकाबला इस बात का हो रहा है कि दोनों तीनों या चारों पार्टियों में जिन हिश्ट्रीशीटर्स और क्रिमिनल्स को अपना उम्मीदवार बनाया है उन क्रिमिनल्स में अच्छा और खराब क्रिमिनल कौन हैं। देश की सियासत को इस सतह तक गिराने की शुरूआत सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी ने ही की है। मुल्क का वजीर-ए-आजम बनने से पहले 2014 के लोक सभा एलक्शन की मुहिम के दौरान उन्होेने जिस किस्म की जुबान का इस्तेमाल किया था आज तक कर रहे हैं।

पार्लियामंेट केे  अंदर मोदी गए सदर जम्हूरिया के खुतबे (राष्ट्रपति के अभिभाषण) पर दोनो एवानों में हुई बहस का जवाब देने के लिए। उन्होेने वहां भी उसी किस्म की जुबान बोलना जारी रखा। अंदर वह  भूल गए कि लोक सभा और राज्य सभा दोनो ही एवानों के मेम्बरान हमेशा से ही वजीर-ए-आजम पर सख्त कमेट करते रहे हैं। किसी भी वजीर-ए-आजम ने कभी भी अपने ओहदे के एहतराम (सम्मान) को गिरा कर सख्त जुबान में अपोजीशन लीडरान को जवाब नहीं दिया। नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा और राज्य सभा में गली के किसी छुटभैया लीडर जैसी भाषा का इस्तेमाल किया फिर यह भी कह दिया कि अगर कोई उनपर हमला करेगा तो वह भी उसकी रफ्तार से भी ज्यादा और सख्त जवाब देने की ताकत रखते है। मतलब यह कि मोदी ने पार्लियामंेेट को भी बाजार या अखाड़ा तस्लीम कर लिया है। आपसे ज्यादा सख्त बात कर सकता हूं और ज्यादा ताकत से जवाब देने की हिम्मत रखता हूं इस किस्म की जुबान तो बाजार में खड़े होकर गली के गुण्डे करते रहते है। वजीर-ए-आजम इस किस्म की जुबान कैसे बोल सकता है? इस किस्म की जुबान का इस्तेमाल अखाड़े में भी अक्सर होता रहता है  जहां कई पहलवान दुनिया के हर पहलवान को उठाकर पटख देने और मिनटों में चित कर देने के दावे करते नजर आते हैं। पार्लियामंेट में तो ऐसा कभी नहीं होता। इसी पार्लियामेट मे कई मेम्बरान ने पंडित जवाहर लाल नेहरू पर सख्त हमले करने का काम किया। एक मेम्बर ने तो यहां तक कह दिया था कि आप (नेहरू) के सर पर बाल नहीं उगते  तो अपना सर कटा डालिए। नेहरू नंे हंसकर टाल दिया था । इंदिरा गांधी को लोगांेे ने गूूगी गुड़िया और चलो अब एैवान (सदन) मंे सुबह एक अच्छी शक्ल देखने को मिलेगी जैसे जुमलांे पर इंदिरा गाधी ने कभी आपा नहीं खोया। पीवी नरसिम्हा राव को आम तौर पर मेम्बरान ‘मौनी बाबा’ कहा करते थे वह खामोशी से सुनते रहते थे। एचडी देवेगौड़ा को कई मेम्बर अक्सर कह देते थे कि आप तो पार्लियामेंट मेे सोने के लिए आते है।  चन्द्रशेखर और पंडित अटल बिहारी वाजपेयी पर भी कई मेम्बरान अक्सर सख्त  कमेट कर दिया करते थे। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी तो बड़े मजे से अपनी किसी कविता की एक दो लाइने सुनाकर अपोजीशन मेम्बरान का गुस्सा ठंडा कर दिया करते थे। उन्होने तो कभी पार्लियामंेट के अंदर या बाहर कहीं भी गुस्से में या अपनी सतह से गिर कर जवाब नहीं दिया। कई बार तो कुछ मुस्लिम मेम्बरान उन्हें बहुत ही सख्त  बात भी कह देते थे। इसके बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी सतह से गिरी जबान का इस्तेमाल नहीं किया।

अब चूंकि मुल्क का वजीर-ए-आजम ही सतह से गिरी जुबान का इस्तेमाल करने लगा इसलिए उनकी पार्टी के आदित्यनाथ और पार्टी के प्रदेश सदर केशव प्रसाद मौर्या जैसे लोग भी अपनी अपनी जहरीली बयान बाजियों के साथ मैदान में कूद पडे। आदित्यनाथ जो सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि तकरीबन पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में दहशत की अलामत समझे जाते है। उन्होने प्रदेश के हिन्दुआंे को भड़काने के लिए कह दिया कि आज मुसलमानों की वजह से पच्छिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले कश्मीर बन चुके है। जिस तरह कश्मीर वादी से पंडितों को अपना घर बार छोड़कर भागने के लिए मजबूर किया गया था आज ठीक वैसे ही हालात शामली (कैराना) और दीगर कई जिलों के हेै। केशव मौर्या खुद ही डेढ दर्जन क्रिमिनल मुकदमात में फसे है उन्होने कह दिया कि पच्छिमी उत्तर प्रदेश के हजारों हिन्दू अपना घर बार छोड़कर भाग चुके है। क्योंकि उन्हें तंग करने वालों को सरकारी तहफ्फुज (संरक्षण) हासिल है।

नरेन्द्र मोदी ने पार्लियामेट खुसूसन राज्य सभा मे जिस किस्म की जुबान का इस्तेमाल दस सालों तक मुल्क के वजीर-ए-आजम रहने वाले दुनिया केे जाने माने माहिरे मआशियात (अर्थशास्त्री) मनमोहन सिंह के लिए किया उसपर कांगे्रस मेम्बरान अब उनसे माफी मांगने का मतालबा करते हुए कह रहे हैं कि अगर उन्होने माफी नहीं मांगी तो उन्हंे आइंदा कभी भी राज्य सभा में बोलने नहीं दिया जाएगा। अब गेद नरेन्द्र मोदी के पाले मे है।

 

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